टोड़ेश्वर महादेव से खवारानी जी तक निकली 12वीं कावड़ यात्रा, गूंजे शिव के जयकारे
जमवारामगढ़ के टोड़ेश्वर महादेव मंदिर से खवारानी जी स्थित शिव मंदिर तक 12वीं कावड़ यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

जमवारामगढ़। सावन के पावन महीने में जमवारामगढ़ क्षेत्र में भक्ति की बयार बह रही है। टोड़ेश्वर महादेव मंदिर से खवारानी जी स्थित शिव मंदिर तक आयोजित होने वाली 12वीं कावड़ यात्रा पूरे उत्साह के साथ शुरू हुई। सुबह के समय मंदिर परिसर में ध्वज पूजन की रस्म पूरी की गई, जिसके बाद कावड़ यात्रियों का जत्था पवित्र जल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुआ। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि यात्रा बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।
यात्रा मार्ग पर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से वातावरण शिवमय हो गया। जैसे ही कावड़ यात्रियों का दल खवारानी जी गांव की सीमा में दाखिल हुआ, ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया। रास्ते भर श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की गई, जिससे भक्तों का उत्साह और अधिक बढ़ गया। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र के लोगों को एकजुट करने का एक बड़ा माध्यम भी बनी हुई है।
इस धार्मिक आयोजन में रामदयाल, बाबूलाल, गिर्राज, कमलेश, दीपक बड़ाकुआ, अंकित, कालूराम फौजी, जितेंद्र, कृष्ण, राजेश, नितेश, विष्णु और के.के. पंचोली सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इन सभी ने यात्रा की व्यवस्थाओं में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। आयोजकों ने बताया कि यह यात्रा सोडालाई की तलाई स्थित शिव मंदिर तक जाएगी, जहां कल सुबह भगवान शिव का पवित्र जल से अभिषेक किया जाएगा।
कावड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली, जिसमें युवा और बुजुर्ग सभी शामिल थे। सावन के महीने में इस तरह के आयोजन से पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस यात्रा से समाज में भाईचारे और शांति का संदेश जाता है। मंदिर समिति ने अभिषेक की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और कल सुबह होने वाले मुख्य अनुष्ठान के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
पिछले बारह वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही यह कावड़ यात्रा अब क्षेत्र की एक प्रमुख परंपरा बन चुकी है। टोड़ेश्वर महादेव से शुरू होकर खवारानी जी तक का यह सफर भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यात्रा के समापन पर होने वाले जलाभिषेक के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। यह आयोजन राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रतिक्रियाएं
टिप्पणियां
अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं है।
