चूरू में गूंजी मंसूर चूरूवी की यादें, मुशायरे में शायरों ने बांधा समां
सारस साहित्य संस्थान द्वारा आयोजित 'जश्न-ए-मंसूर' में राजस्थान के नामचीन शायरों ने अपनी रचनाओं से मंसूर चूरूवी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

चूरू। रविवार को चूरू का पेंशनर्स भवन अदब और शायरी की खुशबू से महक उठा। मौका था सारस साहित्य संस्थान की ओर से आयोजित ऑल राजस्थान मुशायरा 'जश्न-ए-मंसूर' का, जिसमें शहर के मशहूर शायर मंसूर चूरूवी को याद किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीपक कामिल के स्वागत भाषण और सरस्वती वंदना के साथ हुई। अतिथियों और शायरों का सम्मान शॉल और प्रतीक चिह्न भेंट कर किया गया। मुशायरे की अध्यक्षता बनवारीलाल शर्मा 'खामोश' ने की।
इस महफिल में राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए कवियों ने अपनी बेहतरीन ग़ज़लों और नज़्मों से श्रोताओं का दिल जीत लिया। इस्माइल गाजी फतेहपुरी, जाकिर अदीब बीकानेरी, पवन शर्मा भादरा, बुनियाद जहीन बीकानेरी, मख्दूम बिसाऊवी, सुरेश कुमार मंडावा, अब्दुल मन्नान मजहर, इदरीस राज, दीपक कामिल, मुकेश मनमौजी और कुलदीप शर्मा फतेहपुरी सहित कई शायरों ने मंच साझा किया। किसी ने मोहब्बत के जज्बात को पिरोया तो किसी ने समाज की बदलती हकीकत को शब्दों में ढाला।
हर प्रस्तुति के बाद श्रोताओं की तालियों और वाह-वाह की गूंज ने यह साबित कर दिया कि चूरू की धरती आज भी साहित्य और शायरी की समृद्ध परंपरा को संजोए हुए है। आयोजन में साहित्यप्रेमियों और शहर के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। डॉ. श्यामसुंदर शर्मा, डॉ. सरोज हारित, मुबारक अली भाटी और फज्लेहक चौहान सहित अनेक प्रबुद्धजन इस साहित्यिक संध्या के साक्षी बने।
कार्यक्रम का सफल संचालन शायर इदरीस राज खत्री ने किया। उन्होंने अपनी कुशल शैली से मुशायरे को एक नई ऊंचाई दी। अंत में संस्था के संस्थापक बुद्धमल सैनी ने सभी शायरों, अतिथियों और साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मंसूर चूरूवी की याद में आयोजित यह मुशायरा शहर की अदबी विरासत को सलाम करने का एक छोटा सा प्रयास है।
यह आयोजन केवल एक मुशायरा नहीं था, बल्कि एक ऐसी साहित्यिक शाम थी जिसकी यादें लंबे समय तक श्रोताओं के दिलों में बसी रहेंगी। चूरू के साहित्यप्रेमियों के लिए यह एक यादगार अनुभव रहा, जिसने शहर की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक मजबूती प्रदान की।
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