जयपुर में झमाझम बारिश से सड़कें बनीं दरिया, कई इलाकों में घुटनों तक पानी और लंबा यातायात जाम
गर्मी और उमस से मिली राहत, लेकिन जलभराव ने खोली ड्रेनेज व्यवस्था की पोल; अंडरपास और निचली कॉलोनियों में बढ़ी परेशानी

जयपुर। राजधानी जयपुर में तेज बारिश ने जहां लोगों को गर्मी और उमस से राहत दी, वहीं शहर के कई इलाकों में जलभराव और यातायात जाम ने परेशानियां बढ़ा दीं। कुछ ही समय की तेज बारिश के बाद प्रमुख सड़कों, चौराहों, अंडरपास और निचली कॉलोनियों में पानी भर गया। कई स्थानों पर पानी का स्तर घुटनों तक पहुंचने से वाहन चालकों को रास्ता बदलना पड़ा और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य से अधिक समय लगा।
बारिश के कारण शहर का तापमान नीचे आया और मौसम सुहावना हो गया। सुबह से बने बादलों के बाद शुरू हुई तेज बौछारों ने शहर के अलग-अलग हिस्सों को भिगो दिया। बारिश के दौरान दृश्यता कम होने और सड़कों पर पानी जमा होने से वाहन धीमी गति से चलते नजर आए।
शहर की कई प्रमुख सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पानी भरने के कारण दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी हुई। कई वाहन बीच सड़क पर बंद हो गए, जिन्हें लोगों ने धक्का देकर पानी से बाहर निकाला। चारपहिया वाहन भी गहरे पानी वाले हिस्सों से निकलने में संघर्ष करते दिखाई दिए।
बारिश के बाद शहर के निचले इलाकों और पुरानी कॉलोनियों में घरों तथा दुकानों के बाहर पानी जमा हो गया। कुछ जगहों पर बारिश का पानी गलियों में तेजी से बहने लगा। स्थानीय लोगों ने नालियों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
अंडरपास में पानी भरना जयपुर में हर मानसून की बड़ी समस्या बनता जा रहा है। तेज बारिश के दौरान वाहन चालक पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा पाते, जिससे वाहन बंद होने या दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन ने लोगों को गहरे पानी वाले अंडरपास और जलमग्न सड़कों से बचने की सलाह दी है।
नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों की टीमें अलग-अलग स्थानों पर जल निकासी के प्रयास में जुटी रहीं। कई जगह पंप लगाकर पानी निकालने का काम किया गया, लेकिन लगातार बारिश और नालों में अधिक पानी आने के कारण स्थिति सामान्य होने में समय लगा।
बारिश से कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और बाजारों की ओर जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सार्वजनिक परिवहन भी धीमा रहा और कई स्थानों पर बसों तथा ऑटो के मार्ग प्रभावित हुए।
जयपुर में मानसून के दौरान हर वर्ष सामने आने वाली जलभराव की समस्या ने एक बार फिर शहर की ड्रेनेज व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेजी से बढ़ते निर्माण, नालों पर अतिक्रमण, प्लास्टिक कचरे और समय पर सफाई नहीं होने को समस्या के प्रमुख कारणों में माना जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून से पहले नालों की सफाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन तेज बारिश होते ही कई सड़कें पानी में डूब जाती हैं। इससे न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि दुकानों, मकानों और वाहनों को नुकसान होने का खतरा भी बना रहता है।
बारिश के कारण शहर के आसपास के जलाशयों, तालाबों और बांधों में पानी की आवक बढ़ने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश से खरीफ की फसलों को लाभ मिल सकता है, लेकिन कम समय में अधिक पानी गिरने पर खेतों में जलभराव भी हो सकता है।
मौसम विभाग ने जयपुर सहित राजस्थान के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में भी बारिश और मेघगर्जन की संभावना जताई है। कुछ स्थानों पर तेज बौछारों के साथ आकाशीय बिजली गिर सकती है। लोगों से खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े नहीं होने की अपील की गई है।
वाहन चालकों को बारिश के दौरान गति कम रखने, हेडलाइट का उपयोग करने और जलमग्न सड़क पर वाहन नहीं उतारने की सलाह दी गई है। बच्चों को उफनते नालों, तालाबों और गहरे पानी वाले क्षेत्रों से दूर रखने को भी कहा गया है।
बारिश ने जयपुर के मौसम को भले ही खुशनुमा बना दिया हो, लेकिन सड़कों पर जलभराव और यातायात जाम ने शहर के बुनियादी ढांचे की तैयारियों की वास्तविक तस्वीर भी सामने रख दी है।
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