सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों की रिहाई के लिए बनेगी समान नीति
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों की मानवीय आधार पर रिहाई के लिए तीन महीने में नीति बनाने का आदेश दिया है। पूरी प्रक्रिया ई-प्रिजन्स पोर्टल के माध्यम से डिजिटल होगी।

जेलों में मानवाधिकारों की सुरक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया है कि सजा मिलने के बाद भी कैदियों के संवैधानिक अधिकार समाप्त नहीं होते। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे वृद्धावस्था या गंभीर बीमारी से जूझ रहे पात्र कैदियों की रिहाई के लिए तीन महीने के भीतर एक व्यापक नीति तैयार करें।
यह निर्देश राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की याचिका पर आया है, जिसमें जेलों में बंद बुजुर्गों और असाध्य रोगों से पीड़ित बंदियों की दयनीय स्थिति का उल्लेख किया गया था। अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 14 और 21 के तहत समानता और मानवीय गरिमा का अधिकार जेल की चारदीवारी के भीतर भी लागू रहता है।
डिजिटल प्रक्रिया और पारदर्शिता
अदालत ने रिहाई की पूरी प्रक्रिया को ई-प्रिजन्स पोर्टल पर स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। आवेदन से लेकर मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और अंतिम निर्णय तक की हर कार्रवाई पोर्टल पर दर्ज होगी। इसका उद्देश्य मामलों के निस्तारण में होने वाली देरी को रोकना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र को राज्यों को तकनीकी सहायता, सॉफ्टवेयर और प्रशिक्षण प्रदान करने का जिम्मा सौंपा गया है। पोर्टल में ऐसी व्यवस्था होगी जो अधिकारियों को समय-सीमा समाप्त होने से पहले अलर्ट भेजेगी, ताकि किसी भी आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।
न्याय और मानवीय दृष्टिकोण
अदालत ने स्पष्ट किया कि नीति का अर्थ स्वतः रिहाई नहीं है। प्रत्येक मामले का निर्णय कैदी की उम्र, स्वास्थ्य, अपराध की प्रकृति और जेल में आचरण के आधार पर सक्षम अधिकारी द्वारा किया जाएगा। हालांकि, अदालत ने जोर दिया कि केवल प्रक्रियागत देरी के कारण किसी बीमार व्यक्ति को अमानवीय परिस्थितियों में नहीं रखा जा सकता।
राज्यों को छह महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी 2027 को होगी, जिसमें अदालत द्वारा बनाई गई नीतियों और पोर्टल के कार्यान्वयन की समीक्षा की जाएगी।
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