अयोध्या राम मंदिर में 5 करोड़ की स्वर्ण-मंडित रामचरितमानस को लेकर विवाद, पूर्व गृह सचिव ने मांगा हिसाब

अयोध्या। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान की गई स्वर्ण-मंडित रामचरितमानस को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और रिटायर्ड IAS अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायणन ने दावा किया है कि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ अप्रैल 2024 में करीब ₹4.5 से ₹5 करोड़ मूल्य की रामचरितमानस श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेंट की थी, लेकिन अब वह श्रद्धालुओं के दर्शन स्थल से हटा दी गई है और उन्हें इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, यह रामचरितमानस सोना, चांदी और तांबे से बनी है। इसका वजन करीब 147 किलो बताया गया है और इसमें 24 कैरेट गोल्ड-प्लेटेड पन्नों पर गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस के श्लोक अंकित हैं। वर्ष 2024 में इसे रामलला को समर्पित किया गया था।
लक्ष्मीनारायणन का आरोप है कि शुरुआत में यह ग्रंथ श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया था और नियमित पूजा भी हो रही थी, लेकिन कुछ महीनों बाद इसे वहां से हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि कई बार मंदिर प्रशासन से जानकारी मांगने के बावजूद उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने इस दान की आधिकारिक रसीद, रिकॉर्डिंग और ऑडिट में सही प्रविष्टि की मांग की है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में SIT जांच कर रही है और जांच की समयसीमा भी बढ़ाई गई है।
इसी विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरें भी सामने आई थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दान से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच के बाद दोनों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा। हालांकि, जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल पूर्व अधिकारी की मुख्य मांग है कि दान की गई रामचरितमानस कहां रखी गई है, इसका स्पष्ट जवाब दिया जाए और पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए।
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