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चूरू: उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य विभाग का सघन स्क्रीनिंग अभियान

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत चूरू में 6200 से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। उच्च जोखिम वाली महिलाओं की निगरानी के लिए नए निर्देश जारी किए गए हैं।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
चूरू: उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य विभाग का सघन स्क्रीनिंग अभियान

चूरू। चिकित्सा विभाग द्वारा चूरू जिले में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक व्यापक स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। शनिवार, 18 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस के अवसर पर जिले भर के चिकित्सा संस्थानों में 6,208 गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई और उन्हें आवश्यक टीके लगाए गए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि 15 जुलाई से शुरू हुए इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।

मुख्य सचिव के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद विभाग ने निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने का निर्णय लिया है। अब एएनएम और आशा सहयोगिनी को निर्देश दिए गए हैं कि वे उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं से सप्ताह में कम से कम दो बार संपर्क करें। इसके अतिरिक्त, जुलाई और अगस्त में प्रसव की संभावना वाली महिलाओं के लिए चिकित्सा अधिकारियों द्वारा नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाएगा। शनिवार को जिले में 620 निरीक्षण किए गए और 560 महिलाओं के घर जाकर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली गई।

डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि हाई रिस्क वाली महिलाओं को स्वास्थ्य संस्थानों तक लाकर विशेषज्ञ परामर्श दिया जा सके। विभाग का प्रयास है कि किसी भी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में कोई कमी न रहे। इसके लिए फील्ड स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को पूरी सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है।

आरसीएचओ डॉ. शशांक चौधरी ने मातृ मृत्यु दर को कम करने को विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। उन्होंने कहा कि सेक्टर स्तर पर निर्देशों की सख्ती से पालना की जा रही है। फील्ड कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, जुड़वां गर्भ और अन्य गंभीर लक्षणों वाली महिलाओं की समय पर पहचान करें। प्रत्येक गर्भवती महिला की कम से कम चार एएनसी जांच सुनिश्चित करना अनिवार्य है, जिसमें हीमोग्लोबिन, बीपी, वजन, यूरिन और ब्लड शुगर की जांच शामिल है।

विभाग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गर्भवती महिला प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर सेवाओं से वंचित न रहे। इन प्रयासों के माध्यम से जिले में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और जटिलताओं को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

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