अलवर: बाल भारती स्कूल में 'समग्र अभियान' के तहत साइबर सुरक्षा और यातायात नियमों पर जागरूकता कार्यक्रम
अलवर पुलिस ने 'समग्र अभियान' के तहत बाल भारती स्कूल में 400 विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा, यातायात नियमों और नशा मुक्ति के प्रति जागरूक किया।

अलवर। अलवर पुलिस द्वारा सुरक्षित शहर की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से 'समग्र अभियान' का संचालन किया जा रहा है। इसी कड़ी में स्कीम नंबर-1 स्थित बाल भारती स्कूल में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें करीब 400 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी के मार्गदर्शन में आयोजित इस सत्र का मुख्य उद्देश्य युवाओं को साइबर अपराधों, यातायात नियमों की पालना और नशाखोरी के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करना था।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह जिला स्तरीय अभियान 17 जुलाई से 17 अगस्त 2026 तक जारी रहेगा। इसके अंतर्गत शहर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सेंटरों में जाकर विद्यार्थियों को सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं। इस पहल का लक्ष्य युवाओं को आधुनिक खतरों से बचाना और उन्हें कानून का पालन करने वाला जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
कार्यक्रम के दौरान साइबर थाना पुलिस और ए-4सी टीम के अधिकारियों ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी से बचने के उपाय समझाए। उन्होंने सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग पर जोर देते हुए बताया कि किसी भी संदिग्ध लिंक या अनजान व्यक्ति से सतर्क रहना आवश्यक है। साइबर अपराध की स्थिति में सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 और आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करने की सलाह दी गई।
यातायात पुलिस ने सड़क सुरक्षा के नियमों पर विस्तार से चर्चा की। विद्यार्थियों को हेलमेट और सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग के बारे में बताया गया और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने को लेकर सख्त हिदायत दी गई। अधिकारियों ने कहा कि सड़क पर सावधानी ही जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। इसके अलावा, नशा मुक्ति पर केंद्रित सत्र में युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का संकल्प दिलाया गया।
इस आयोजन में साइबर थाना उप अधीक्षक रामनिवास, पुलिस निरीक्षक सुनील टांक, यातायात शाखा के उपनिरीक्षक रिछपाल और कोतवाली थाना प्रभारी दिनेश कुमार सहित पुलिस बल के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। विद्यालय के शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना की और विद्यार्थियों को इन नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया। पुलिस प्रशासन का मानना है कि युवाओं की जागरूकता से ही 'सुरक्षित अलवर' का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
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