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बेल्जियम में पली-बढ़ी बहनें जयपुर में भरतनाट्यम के जरिए पेश करेंगी भारतीय दर्शन का अनूठा संगम

15 वर्षीय मिहिका और 12 वर्षीय आराध्या 29 अगस्त को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 'श्री ऋषभायन' के माध्यम से भगवान ऋषभदेव के जीवन-दर्शन को नृत्य के जरिए प्रस्तुत करेंगी।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
बेल्जियम में पली-बढ़ी बहनें जयपुर में भरतनाट्यम के जरिए पेश करेंगी भारतीय दर्शन का अनूठा संगम

जयपुर। बेल्जियम में जन्मी और पली-बढ़ी दो बहनें भारतीय संस्कृति और दर्शन की गहराई को जयपुर के मंच पर जीवंत करने के लिए तैयार हैं। आगामी 29 अगस्त को 15 वर्षीय मिहिका और 12 वर्षीय आराध्या राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 'श्री ऋषभायन' नामक विशेष भरतनाट्यम प्रस्तुति देंगी। यह कार्यक्रम उनके अरंगेत्रम के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा और कला के अनूठे मेल को प्रदर्शित करेगा।

इस प्रस्तुति का मुख्य केंद्र भगवान श्री ऋषभदेव का जीवन और उनका दर्शन है। नृत्य, संगीत और अभिनय के माध्यम से यह मार्गम भोगभूमि से कर्मभूमि की यात्रा और भक्त के समर्पण जैसे गूढ़ विषयों को उजागर करेगा। इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को यह अनुभव कराना है कि भारतीय शास्त्रीय कलाएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जीवन-दृष्टि और संस्कारों को समझने का एक सशक्त माध्यम हैं।

इस विशेष कार्यक्रम की परिकल्पना और नृत्यबद्धता श्री विराग डांस अकादमी की संस्थापिका गुरु कुमारी नैनिका कासलीवाल द्वारा की गई है। प्रस्तुति को प्रामाणिक बनाने के लिए अहमदाबाद के श्री वत्सलभाई शाह ने संस्कृत, प्राकृत, हिंदी, व्रज और गुजराती भाषाओं में रचनाओं का संकलन किया है। यह विविधता भारत की श्रमण और वैदिक परंपराओं के परस्पर संवाद को कला के जरिए देखने का अवसर प्रदान करती है।

मिहिका और आराध्या की शिक्षा-यात्रा भी प्रेरणादायक है। बेल्जियम में स्कूली शिक्षा के साथ-साथ वे संस्कृत, वैदिक गणित, आयुर्वेद, ज्योतिष और पतंजलि योग दर्शन का गहन अध्ययन कर रही हैं। डिजिटल युग की चकाचौंध से दूर, दोनों बहनों का अधिकांश समय भारतीय ज्ञान परंपराओं को आत्मसात करने में व्यतीत होता है।

यह प्रस्तुति इस संदेश को पुष्ट करती है कि कला जब अपने मूल दर्शन से जुड़ती है, तो वह संस्कृति और ज्ञान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का सेतु बन जाती है। कार्यक्रम का आयोजन प्रातः 10:30 बजे किया जाएगा, जहां दर्शक भारतीय शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से एक समृद्ध दार्शनिक यात्रा का अनुभव कर सकेंगे।

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