जयपुर। घुमंतू जाति उत्थान न्यास द्वारा संचालित बाबा रामदेव छात्रावास के तीसरे वार्षिकोत्सव के दौरान घुमंतू समाज के बच्चों के लिए एक नई उम्मीद की किरण जगी है। जयपुर के सी-स्कीम स्थित महावीर स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में घुमंतू प्रतिभा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना का शुभारंभ किया गया। इस योजना के लिए 51 लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई है, जो आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित रहने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए संजीवनी का काम करेगी।
यह सराहनीय पहल राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA), न्यूयॉर्क के अध्यक्ष प्रेम भंडारी के प्रयासों और चंद्रा एवं के.के. मेहता फैमिली फाउंडेशन के सहयोग से संभव हुई है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक अभाव किसी भी बच्चे की शिक्षा में बाधा नहीं बनना चाहिए। यह छात्रवृत्ति न केवल विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी प्रदान करेगी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक दुर्गादास ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर शुरू की गई यह योजना घुमंतू समाज के शैक्षणिक भविष्य को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने दानदाताओं की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
न्यास के सहप्रांत संयोजक राकेश कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रदेश भर में 17 बाबा रामदेव छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं। इन छात्रावासों का मुख्य उद्देश्य घुमंतू समाज के बच्चों को बेहतर शिक्षा और संस्कार प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि समाज के सहयोग से इन प्रयासों को और अधिक व्यापक बनाया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक बच्चे लाभान्वित हो सकें।
वार्षिकोत्सव में जयपुर सांसद मंजू शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस अवसर पर महापौर सुनील कोठारी और राजेंद्र कूलवाल सहित कई गणमान्य नागरिक और शिक्षाविद उपस्थित रहे। कार्यक्रम में छात्रावास के बच्चों ने नृत्य और लघु नाटकों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिसने उपस्थित अतिथियों का मन मोह लिया।
यह छात्रवृत्ति योजना केवल एक आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि उन सपनों को पंख देने का माध्यम है जो संसाधनों के अभाव में दम तोड़ देते थे। इस पहल से घुमंतू समाज के विद्यार्थियों के भविष्य को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है, जिससे शिक्षा के प्रति समाज का विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।


