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चीनी की जमाखोरी पर केंद्र की लगाम, राजस्थान के बाजारों में कीमतों में आई गिरावट

त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने स्टॉक सीमा के नए नियम लागू किए हैं, जिससे थोक और खुदरा भावों में कमी देखी जा रही है।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
चीनी की जमाखोरी पर केंद्र की लगाम, राजस्थान के बाजारों में कीमतों में आई गिरावट

श्री गंगानगर। चीनी की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने और बाजार में जमाखोरी को रोकने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 2026 के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो थोक व्यापारियों और बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा निर्धारित करते हैं। यह कदम विशेष रूप से त्योहारी सीजन के दौरान आम जनता को राहत देने और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने के लिए उठाया गया है, ताकि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करके दाम न बढ़ाए जा सकें।

नए आदेशों के दायरे में वे बड़े उपभोक्ता आते हैं जो मिठाई निर्माण, शीतल पेय उत्पादन या खाद्य प्रसंस्करण जैसे कार्यों में हर महीने दस मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करते हैं। ऐसे संस्थानों को अब अपनी पिछले एक साल की औसत खपत के आधार पर अधिकतम पंद्रह दिनों का स्टॉक रखने की अनुमति होगी। थोक विक्रेताओं के लिए भी नियम कड़े कर दिए गए हैं, जिनके लिए चार सौ टन यानी चार हजार क्विंटल की अधिकतम सीमा तय की गई है। साथ ही, मिल से खरीदी गई चीनी को सात दिनों के भीतर आगे बेचना अनिवार्य कर दिया गया है।

प्रशासन ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी डीलरों को अपने दैनिक स्टॉक का विवरण खाद्य विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। बिक्री का सत्यापन जीएसटी रिटर्न के माध्यम से किया जाएगा ताकि किसी भी स्तर पर हेरफेर न हो सके। ये नियम एक सितंबर से तीस नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराओं के तहत माल की जब्ती और लाइसेंस निरस्त करने जैसी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी फैसलों का असर स्थानीय बाजारों पर तुरंत दिखाई देने लगा है। श्री गंगानगर में थोक भाव अड़सठ रुपये से गिरकर त्रेसठ रुपये प्रति किलो पर आ गए हैं, जिससे खुदरा कीमतें भी सत्तर रुपये से घटकर पैंसठ रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। पिछले कुछ हफ्तों में मानसून की अनिश्चितता और एथेनॉल उत्पादन से जुड़ी अफवाहों के कारण चीनी के दाम काफी बढ़ गए थे। सरकार द्वारा दस लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति और स्टॉक सीमा लागू करने के बाद से बाजार में नरमी का रुख है, और आने वाले दिनों में कीमतों में और गिरावट की संभावना जताई जा रही है।

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