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बहरोड़ में बीजेपी के भीतर टिकट को लेकर घमासान, मंच पर ही भिड़े नेता

कोटपूतली-बहरोड़ में नगर निकाय चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में टिकट वितरण को लेकर नेताओं के बीच खींचतान और मतभेद खुलकर सामने आए हैं।

बहरोड़ में बीजेपी के भीतर टिकट को लेकर घमासान, मंच पर ही भिड़े नेता
बहरोड़ में बीजेपी के भीतर टिकट को लेकर घमासान, मंच पर ही भिड़े नेता

बहरोड़। कोटपूतली-बहरोड़ में नगर निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर भारी खींचतान देखने को मिल रही है। हाल ही में आयोजित एक पार्टी बैठक के दौरान टिकट के दावेदारों और नेताओं के बीच मतभेद इतने बढ़ गए कि मंच पर ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। विधानसभा प्रभारी और पर्यवेक्षक की मौजूदगी में हुई इस बैठक में कार्यकर्ताओं ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।

बैठक के दौरान बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. शानू यादव ने टिकट वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने पार्टी के पुराने और मेहनती कार्यकर्ताओं की अनदेखी पर चिंता जताते हुए कहा कि जो लोग वर्षों से संगठन के लिए जमीन पर काम कर रहे हैं, उन्हें दरकिनार करना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की रीढ़ माने जाने वाले कार्यकर्ताओं को टिकट वितरण में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

वहीं, बीजेपी नेता डॉ. मोहित यादव ने भी अपनी बात मजबूती से रखी। उन्होंने कहा कि नगर निकाय चुनाव में केवल उसी उम्मीदवार को मौका मिलना चाहिए जिसमें जीत दर्ज करने की क्षमता हो और जो लंबे समय से संगठन के प्रति समर्पित रहा हो। उन्होंने यहां तक कहा कि योग्य उम्मीदवारों के हक के लिए वे मुख्यमंत्री स्तर तक भी पैरवी करने से पीछे नहीं हटेंगे।

नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाजी से बैठक का माहौल काफी गरमा गया था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अलवर के पूर्व विधायक और क्षेत्र के पर्यवेक्षक बनवारी लाल सिंघल ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि इस तरह की गुटबाजी से संगठन को नुकसान होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट का फैसला किसी व्यक्ति विशेष की पसंद पर नहीं, बल्कि सर्वे और जीत की संभावनाओं के आधार पर लिया जाएगा।

पर्यवेक्षक ने कार्यकर्ताओं को नसीहत दी कि वे किसी नेता विशेष के बजाय पार्टी के अनुशासन का पालन करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि नारेबाजी केवल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और संगठन के नाम पर होनी चाहिए। पर्यवेक्षक की सख्त चेतावनी के बाद बैठक में विवाद तो शांत हो गया, लेकिन टिकट वितरण को लेकर सामने आई यह खींचतान आने वाले दिनों में पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी किन चेहरों पर अपना भरोसा जताती है।

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