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राजस्थान: 346 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में फिर शुरू होगा हिंदी माध्यम, कम दाखिलों के बाद सरकार का बड़ा फैसला

राजस्थान सरकार ने कम दाखिलों की समस्या से जूझ रहे 346 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में फिर से हिंदी माध्यम शुरू करने का निर्णय लिया है, ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
राजस्थान: 346 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में फिर शुरू होगा हिंदी माध्यम, कम दाखिलों के बाद सरकार का बड़ा फैसला

जयपुर। राजस्थान सरकार ने राज्य के 346 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को लेकर एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। नामांकन के आंकड़ों की समीक्षा करने के बाद, शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों में फिर से हिंदी माध्यम की पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया है। यह फैसला उन स्कूलों में छात्रों की कम संख्या को देखते हुए लिया गया है, जिन्हें पहले पूरी तरह से अंग्रेजी माध्यम में बदल दिया गया था।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम उन छात्रों की सुविधा के लिए उठाया गया है जिन्हें अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई करने में कठिनाई हो रही थी। द्विभाषी माध्यम अपनाने से सरकार का लक्ष्य स्कूलों में छात्रों की संख्या को स्थिर करना और यह सुनिश्चित करना है कि सभी बच्चों को उनकी भाषा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। इस बदलाव से उन स्कूलों में फिर से रौनक लौटने की उम्मीद है, जहां अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तन के बाद से छात्रों की रुचि कम हो गई थी।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह नीतिगत बदलाव मौजूदा स्कूल बुनियादी ढांचे के बेहतर उपयोग के प्रयासों का हिस्सा है। शिक्षा के माध्यम को लचीला बनाकर, सरकार दाखिला दर बढ़ाने और भाषा की बाधाओं के कारण पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों की संख्या को कम करना चाहती है। स्थानीय स्कूल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हिंदी माध्यम की कक्षाओं को फिर से शुरू करने के लिए अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों और संसाधनों में आवश्यक बदलाव करें।

यह पहल आधुनिक शैक्षिक मानकों और छात्रों की व्यावहारिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हालांकि अंग्रेजी में दक्षता भविष्य के करियर के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन सरकार ने माना है कि शुरुआती शिक्षा उस भाषा में अधिक प्रभावी होती है जिसे छात्र आसानी से समझ सकें। यह प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी और स्कूल जिला शिक्षा कार्यालयों के साथ मिलकर नए पाठ्यक्रम ढांचे को लागू करेंगे।

अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे समावेशी शिक्षा की दिशा में एक व्यावहारिक कदम बताया है। सरकार आगामी शैक्षणिक सत्रों में इस द्विभाषी नीति के प्रभाव की निगरानी करेगी ताकि यह तय किया जा सके कि अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे बदलाव की आवश्यकता है या नहीं। हिंदी माध्यम के लिए शिक्षक प्रशिक्षण और पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द ही प्रभावित स्कूलों को भेज दिए जाएंगे।

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