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जयपुर टाइम्स
चुरू

राजगढ़ उपकारागृह में भीषण गर्मी के बीच न्यायिक निरीक्षण, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के निर्देश

जिला एवं सेशन न्यायाधीश सोनिका पुरोहित ने राजगढ़ उपकारागृह का दौरा कर बंदियों की समस्याएं सुनीं और जेल प्रशासन को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
राजगढ़ उपकारागृह में भीषण गर्मी के बीच न्यायिक निरीक्षण, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के निर्देश

राजगढ़। भीषण गर्मी के प्रकोप को देखते हुए राजगढ़ उपकारागृह में बंदियों की स्थिति का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय न्यायिक दल ने औचक निरीक्षण किया। जिला एवं सेशन न्यायाधीश (चूरू) सोनिका पुरोहित, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव कृष्णा राकेश कांवत और अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश श्री मुनेश चंद यादव ने जेल पहुंचकर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान जेल में कुल 152 बंदी मौजूद थे, जिनसे अधिकारियों ने सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझा।

निरीक्षण के दौरान बंदियों ने बैरकों में पेयजल की कमी और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव को लेकर अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। जिला एवं सेशन न्यायाधीश ने इन शिकायतों को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए जेल प्रशासन को तत्काल प्रभाव से सुधार करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भीषण गर्मी के मौसम में शुद्ध पेयजल और त्वरित चिकित्सा सहायता प्रत्येक बंदी का बुनियादी अधिकार है, जिसके साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता।

जेल के प्रभारी उपकारपाल किशन लाल और विजिटिंग लॉयर प्रीतम शर्मा ने न्यायिक अधिकारियों को जेल प्रबंधन से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि वे बंदियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी सभी कमियों को अविलंब दूर करें ताकि उन्हें राहत मिल सके। जेल प्रशासन ने इन निर्देशों की तत्काल पालना सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है।

इस दौरे का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती कृष्णा राकेश कांवत ने बताया कि प्राधिकरण ऐसे सभी जरूरतमंद बंदियों को निःशुल्क कानूनी सहायता और अधिवक्ता उपलब्ध करवाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक तंगी या कानूनी जानकारी के अभाव में न्याय से वंचित नहीं रहना चाहिए। यह निरीक्षण जेल की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और मानवाधिकारों की रक्षा के प्रति न्यायपालिका की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

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