पावटा में 1975 के संघर्ष पर संगोष्ठी, हनुमान सिंह राठौड़ बोले- आपातकाल लोकतंत्र पर बड़ा हमला था

पावटा। श्रुतम् संस्थान एवं स्वतंत्र विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को कस्बे के होटल ग्रीन पार्क में “सलाखों के पीछे से राष्ट्र साधना” विषय पर 1975 के संघर्ष को लेकर विशेष विचार संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान के नवनियुक्त अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ रहे। उन्होंने 1975 में देश में लगाए गए आपातकाल पर विचार व्यक्त करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र और संविधान पर सबसे बड़ा हमला बताया। राठौड़ ने कहा कि 25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने देश में आपातकाल लागू किया था। यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
मौलिक अधिकारों पर लगाया गया था अंकुश
राठौड़ ने कहा कि आपातकाल के दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया था। संघ के दायित्ववान कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को जेलों में डाला गया, वहीं प्रेस की स्वतंत्रता पर भी प्रतिबंध लगाए गए। उन्होंने कहा कि उस समय लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास किया गया। उन्होंने आपातकाल के दौरान संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को याद करते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि भरतदास जी धाम टोरडा के संत श्री मंगलदास जी महाराज ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों का संविधान और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ राष्ट्र को परम वैभव की दिशा में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्व हिंदू परिषद के कोटपूतली जिला अध्यक्ष एवं बीडीएम अस्पताल कोटपूतली के पूर्व पीएमओ अश्वनी गोयल ने कुटुंब प्रबोधन पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए परिवारों को सशक्त करना जरूरी है। आज संयुक्त परिवार प्रथा कमजोर होती जा रही है, जिसके कारण परिवारों में नैतिक मूल्यों और संस्कारों में भी कमी आ रही है।
इस अवसर पर आयोजकों द्वारा मंचस्थ अतिथियों का माला, शॉल और पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम संयोजक मदन लाल सैनी ने अतिथियों का परिचय करवाया, जबकि स्वतंत्र विचार मंच के अध्यक्ष नीरज सैन ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन कवि महावीर शर्मा ने किया।
कार्यक्रम में श्रुतम् संस्थान जयपुर के सचिव सचिन शर्मा, केदार मल टांक, डॉ. जयराम यादव, संदीप सैन, इतिहास संकलन समिति प्रांत कार्यकारिणी सदस्य डॉ. राजेन्द्र शर्मा, मनीष सैन, मिन्टू शर्मा, पूरण कसाणा, डॉ. सुरेन्द्र यादव, बद्रीप्रसाद सैनी, रामनिवास सैनी, रतिपाल सिंह, भानू गुप्ता, भानू सैन, गोवर्धन प्रजापत, राकेश सारण, जीतू राठी, बजरंग लाल बंसल, निलेश चौधरी, लोकेश टांक, रणजीत यादव, रोहिताश यादव, टींकू प्रजापत, अरुण सैनी, शिवकुमार गोयल सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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