Women IPS Success Story: राजस्थान प्रदेश की बेटी प्रीति चंद्रा की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। प्रीति चंद्रा को उनके सख्त मिजाज को लेकर पूरे देश में एक अलग ही पहचान मिल चुकी है। क्राइम को जड़ से खत्म करने की सोच रखने वाली राजस्थान प्रदेश की बेटी और 2008 बेच की तेज-तर्रार आईपीएस प्रीति चंद्रा की कहानी संघर्षों से भरी हुई है। वर्तमान में भरतपुर जिले की कमान संभाल रही प्रीति चंद्र पिछले 18 वर्षों से लोगों को इंसाफ दिलाने और क्राइम को जड़ से खत्म करने की जंग लड़ रही हैं। प्रीति चंद्रा (Preeti Chandra) आईपीएस बनने से पहले शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम कर चुकी हैं। सख्त मिजाज शैली के लिए जानी जाने वाली आईपीएस प्रीती चंद्र ने अपने 18 साल के कार्यकाल में सामने आई हर चुनौती का मजबूती से सामना किया।
सीकर के छोटे से गांव से आईपीएस अधिकारी बनने तक का तय किया सफर
आईपीएस अधिकारी प्रीति चंद्रा (IPS Success Story) का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। सीकर जिले के छोटे से गांव कूदन में इनका परिवार खेती-बाड़ी का काम करता था। वहीं प्रीति चंद्रा के पिता रामचंद्र सुंडा भारतीय सेना से सेवानिवृत्ति ले चुके हैं। पिता सेना में होने के कारण देशभक्ति की भावना प्रीति चंद्र (Rajasthan women success story) में कूट-कूट कर भरी हुई है। इन्होंने दसवीं तक की प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से ही ली थी। इसके बाद 12वीं कक्षा की पढ़ाई सीकर जिले के मारू स्कूल से की। वहीं उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रीति ने जयपुर के महारानी कॉलेज में दाखिला लिया था। अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद इन्होंने कुछ समय जयपुर में शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम किया।
प्रीति चंद्रा बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में बन गई थी आईपीएस अधिकारी
आज के इस दौर में बच्चे यूपीएससी की परीक्षा पास करने के लिए लाखों रुपए कोचिंग पर खर्च करते हैं। लेकिन, प्रीति चंद्रा की कहानी अलग है। इन्होंने बिना किसी कोचिंग सेंटर से कोचिंग लिए अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा को क्रैक कर दिया था। सुविधाओं के अभाव के बावजूद प्रीति चंद्रा (IPS Preeti Chandra success story) की यह सफलता राजस्थान प्रदेश की लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई। प्रीति चंद्रा ने साल 2008 में बिना किसी कोचिंग के अपने मजबूत इरादों के दम पर UPSC परीक्षा में पहले ही प्रयास में 255वीं रैंक हासिल की। देशभर में प्रीति को 255वीं रैंक मिलने पर आईपीएस अधिकारी बनने का मौका मिला।
संघर्षों से भरा हुआ है प्रीति चंद्रा का 18 वर्षों का करियर
प्रीति चंद्रा को आईपीएस अधिकारी (IPS Preeti Chandra) बनने के बाद अनेक चुनौती पूर्ण संघर्षों का सामना करना पड़ा। सरकार द्वारा भरतपुर के पास मेवात में चल रहे ऑनलाइन नेटवर्क को खत्म करने के लिए प्रीति चंद्रा को ही तैनात किया गया था। वहीं बूंदी जिले में चल रहे देह व्यापार को खत्म करने के लिए भी प्रीति को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। प्रीति चंद्रा बीकानेर जिले की पहली महिला आईपीएस अधिकारी के रूप में भी काम कर चुकी हैं। इन्होंने कोटा जिले में एसीबी में ड्यूटी के दौरान भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए कई कड़े कदम उठाए। करौली जिले में क्राइम को जड़ से खत्म करने के लिए प्रीति चंद्रा चंबल के डाकुओं से भिड़ गई थी। आईपीएस अधिकारी प्रीती चंद्रा के कड़क मिजाज और बेदाग छवि को देखते हुए चंबल के डाकुओं ने डर के मारे इनके सामने सरेंडर कर दिया था।


