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7 फीचर्स ला रहा WhatsApp, पूरी तरह बदल जाएगा

नई दिल्ली: पूरी दुनिया में मशहूर वॉट्सऐप, जिसने मैसेजिंग का तरीका ही बदल दिया वो 2019 में 7 ऐसे धांसू फीचर लेकर आ रहा है जिससे यूजर्स को नया एक्सपीरिएंस मिलेगा. इनमें से कुछ फीचर्स डिजाइन और चैट्स को बेहतर बनाएंगे तो कुछ ऐप चलाने का नया एक्सपीरिएंस देंगे. जो फीचर्स हम आपको बता रहे हैं उनमें से कुछ की टेस्टिंग चल रही है, जबकि कुछ जल्द लॉन्च होने वाले हैं. 

1. मीडिया प्रीव्यू
वॉट्सऐप मीडिया प्रीव्यू फीचर की टेस्टिंग कर रहा है. इसके तहत यूजर्स नोटिफिकेशन के जरिए ही ये देख सकते हैं कि भेजे गए वीडियो, ऑडियो या इमेज कौन सी है. मतलब आपको वॉट्सऐप ओपन नहीं करना होता और नोटिफिकेशन से ही पता चल जाएगा कि भेजा गई चीज क्या है. 

2. QR कोड फीचर
मान लीजिए आपको किसी को कॉन्टैक्ट शेयर करना है, तो आपको वॉट्सऐप QR कोड का ऑप्शन मिलेगा. इसकी टेस्टिंग शुरू है और जल्द आपको वॉट्सऐप में ये ऑप्शन मिलेगा. 
3. डार्क मोड
इस फीचर की टेस्टिंग कंपनी काफी पहले से कर रही है. कम रौशनी या अंधेरे में वॉट्सऐप यूज करने के लिए ये फीचर शानदार होगा. स्मार्टफोन में भी डार्क मोड का ऑप्शन होता है जिसे आप एनेबल कर सकते हैं.

4. कॉन्टैक्ट रैंकिंग फीचर
इस साल वॉट्सऐप में आपको कॉन्टैक्ट रैंकिगं फीचर भी दिखेगा. इसके तहत एक लिस्ट आपको मिलेगी जिसमें पता चलेगा कि आप सबसे ज्यादा बात किससे करते हैं. इस फीचर से बार-बार आपको कॉन्टैक्ट सर्च नहीं करने होंगे. 

5. वॉयस मैसेज सुनना आसान
एक के बाद एक वॉयस मैसेज सुनने के लिए एक नया फीचर मिलेगा. अब तक एक वॉयस मैसेज के बाद आपको दूसरा मैनुअली प्ले करना होता है. यह फीचर भी टेस्टिंग में है और जल्द ही ये सभी के लिए दिया जा सकता है. यानी एक साथ आए कई वॉयस मैसेज एक एक करके खुद प्ले होंगे. 
6. लॉक फीचर
अब आप प्राइवेसी के लिए अपना वॉट्सऐप अलग से लॉक कर सकेंगे और इसकी सुविधा वॉट्सऐप खुद देगा. फिंगरप्रिंट स्कैनर और फेस लॉक के जरिए वॉट्सऐप लॉक करने का फीचर आईफोन यूजर्स के लिए पहले जारी किया जाएगा. 

7. प्राइवेट रिप्लाई  
यह फीचर खासतौर पर ग्रुप में बातचीत करने के लिए होगा. ग्रुप में आप किसी मैसेज को प्राइवेट रिप्लाई करके सीधे केवल उस व्यक्ति को भेज सकते हैं, जिसे आप चाहते हैं. बाकियों को ये मैसेज नहीं मिलेगा. 

2000 रुपये के नोट को लेकर , RBI ने लिया यह बड़ा फैसला

नई दिल्‍ली: दो साल पहले नोटबंदी के बाद जारी किया गया 2,000 रुपये का करेंसी नोट आजकल बाजार में कम ही देखने को मिल रहा है. इसे लेकर अब केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले के अनुसार 2000 रुपये करेंसी नोट की छपाई 'न्यूनतम स्तर पर' पहुंच गई है. वित्त मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी. 

2016 में हुआ था जारी
नवंबर, 2016 में केंद्र सरकार की ओर से लाई गई नोटबंदी के बाद सरकार ने 2,000 रुपये का नया नोट जारी किया था. सरकार ने आठ नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से हटा दिया था. उसके बाद रिजर्व बैंक ने 500 के नए नोट के साथ 2,000 रुपये का भी नोट जारी किया.
यह है वजह
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रिजर्व बैंक और सरकार समय समय पर करेंसी की छपाई की मात्रा पर फैसला करते हैं. इसका फैसला चलन में मुद्रा की मौजूदगी के हिसाब से किया जाता है. जिस समय 2,000 का नोट जारी किया गया था तभी यह फैसला किया गया था कि धीरे-धीरे इसकी छपाई को कम किया जाएगा. 2,000 के नोट को जारी करने का एकमात्र मकसद प्रणाली में तत्‍काल नकदी उपलब्ध कराना था. अधिकारी ने बताया कि 2,000 के नोटों की छपाई काफी कम कर दी गई है. 2000 के नोटों की छपाई को न्यूनतम स्तर पर लाने का फैसला किया गया है. 

क्या कहते हैं आंकड़ें?
रिजर्व बैंक के आंकड़ों में मार्च, 2017 के अंत तक 328.5 करोड़ इकाई 2000 के नोट चलन में थे. 31 मार्च, 2018 के अंत तक इन नोटों की संख्या मामूली बढ़कर 336.3 करोड़ इकाई पर पहुंच गई. मार्च 2018 के अंत तक कुल 18,037 अरब रुपये की करेंसी चलन में थी. इनमें 2000 के नोटों का हिस्सा घटकर 37.3 प्रतिशत रह गया.

मार्च, 2017 के अंत तक कुल करेंसी में 2000 के नोटों का हिस्सा 50.2 प्रतिशत पर था.  इससे पहले नवंबर 2016 में 500, 1000 रुपये के जिन नोटों को बंद किया गया उनका कुल मुद्रा चलन में 86 प्रतिशत तक हिस्सा था.

केवल इन कंपनी ने ही जोड़े नए ग्राहक

नई दिल्ली। दूरसंचार दिग्गज रिलायंस जियो नए ग्राहक जोडऩे में अक्टूबर में सबसे आगे रही और कंपनी ने करीब 1.05 करोड़ नए ग्राहक जोड़े। उसके बाद बीएसएनएल रही, जबकि बाकी दूरसंचार कंपनियों के ग्राहकों में कमी दर्ज की गई। 

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों से पता चलता है कि मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलांयस जियो के ग्राहकों की संख्या बढक़र 26.27 करोड़ हो गई, जबकि सितंबर में कंपनी के कुल 25.22 करोड़ ग्राहक थे। 

ट्राई ने बयान में कहा कि जीएसएम, सीडीएमए और एलटीई तीनों को मिलाकर वायरलेस ग्राहकों की संख्या में अक्टूबर में 0.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जोकि 117 करोड़ रही। जबकि सितंबर में कुल 116.92 करोड़ वायरलेस ग्राहक थे। 

बयान में कहा गया, ‘‘शहरी क्षेत्रों में वायरसेल ग्राहकों की संख्या अक्टूबर में 64.82 करोड़ हो गई, जबकि सितंबर में यह 64.77 करोड़ थी। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में वायरलेस ग्राहकों की संख्या अक्टूबर में बढक़र 52.17 हो गई, जबकि सितंबर में यह 52.15 करोड़ थी।’’

सरकारी भारत संचार निगम लि. (बीएसएनएल) जियो के बाद दूसरी कंपनी रही जिसके ग्राहकों में बढ़ोतरी हुई और कंपनी ने अक्टूबर में कुल 3.64 लाख नए ग्राहक जोड़े और उसके कुल ग्राहकों की संख्या बढक़र 11.34 करोड़ हो गई। 

देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया के ग्राहकों में समीक्षाधीन महीने में 73.61 लाख की कमी आई और कंपनी के कुल ग्राहकों की संख्या घटकर 42.76 करोड़ हो गई है। 

भारती एयरटेल के ग्राहकों की संख्या में अक्टूबर में 18.64 लाख की गिरावट आई है और इनकी संख्या घटकर 34.16 करोड़ हो गई है। 


 


 

बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ इन बैंको के विलय को मंजूरी

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सरकारी बैंकों -देना बैंक, विजया बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) के विलय को मंजूरी प्रदान कर दी। 

केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद के मुताबिक, इस विलय से बैंक ऑफ बड़ौदा देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक और ‘वैश्विक प्रतिस्पर्धी निकाय’ बन जाएगा।

मंत्री ने कहा कि इस विलय से कर्मचारियों की छंटनी नहीं होगी, क्योंकि देना और विजया बैंक के कर्मचारियों को बैंक ऑफ बड़ौदा में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

पिछले साल सितंबर में सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र में समेकन के उद्देश्य से सुधार उपाय लागू किए थे। इस सुधार उपाय के लागू होने से बीओबी देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा, जिसके पास 14.82 लाख करोड़ रुपये का संयुक्त कारोबार होगा।

बैंकों के विलय का यह फैसला ‘वैकल्पिक तंत्र’ द्वारा लिया गया है, जिसमें जेटली के अलावा रेल मंत्री पीयूष गोयल और रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण शामिल हैं।

गौरतलब है कि पिछले 21 महीनों में दूसरी बार सरकारी बैंकों का विलय किया जा रहा है। इससे पहले भारतीय स्टेट बैंक के पांच सहयोगी बैंकों और  भारतीय महिला बैंक का इसमें एक अप्रैल, 2017 को विलय किया गया था। इसके बाद एसबीआई देश का सबसे बड़ा बैंक बन गया और दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों में शामिल हो गया। 

 

अब मैग्नेटिक स्ट्रिप वाले कार्ड नहीं करेंगे काम, ऐसे बदलवाएं

नई दिल्ली: पहले कैश का चलन था. वक्त बदला और बदलते वक्त में कैश की जगह कार्ड का इस्तेमाल किया जाने लगा. अब पैसे निकालने के लिए बैंक जाने की जरूरत नहीं रह गई है. जगह-जगह ATM लगे हुए हैं. हर बड़े दुकान पर खरीददारी के लिए कार्ड का इस्तेमाल होने लगा है. ऐसे में कार्ड की सुरक्षा बेहद अहम है. इसलिए, बदलते वक्त के साथ डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के डेटा को ज्यादा सुरक्षित रखना अहम हो गया है. यही वजह है कि पुराना मैग्नेटिक स्ट्रिप वाला कार्ड आज से काम करने बंद कर दिया है. आज से केवल चिप वाला कार्ड ही काम करेगा.

रिर्जव बैंक ऑफ इंडिया मैग्‍नेटिक  स्ट्रिप कार्डों को ईएमवी (यूरोप, मास्टरकार्ड और वीजा) वाले चिप कार्ड से बदलने के लिए 31 दिसंबर, 2018 तक दिशा-निर्देश जारी किया था. RBI का मानना है कि नए ईएमवी कार्ड से फ्रॉड होने का खतरा बेहद कम होगा. इसको लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी ट्वीट किया है कि 31 दिसंबर से पहले आप अपने ऐसे कार्ड बदल लें.
कैसे बदलेगा कार्ड?
बैंक की ओर से ट्वीट कर दी गई जानकारी के मुताबिक, पुराने ATM कार्ड बदलकर उनकी जगह EVM चिप वाला डेबिट कार्ड जारी किया जा रहा है. इसके लिए ग्राहकों को अपनी पासबुक लेकर बैंक जाना होगा और एक फॉर्म भरना होगा. इसके बाद वे नया और सुरक्षित कार्ड ले सकते हैं. जो लोग इंटरनेट बैंकिंग इस्तेमाल करते हैं, वे ऑनलाइन भी नए कार्ड का आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा बैंक की ब्रांच में जाकर भी ऑनलाइन अप्लाई करने का विकल्प है.

क्या है दोनों कार्ड्स में अंतर?
अगर आपके डेबिट या क्रेडिट कार्ड में सामने की ओर बाईं तरफ मोबाइल के सिम कार्ड की तरह नजर आने वाला चिप नहीं लगा है, तो ये पुराना यानी मैग्‍नेटिक स्ट्रिप कार्ड है. इस कार्ड से ट्रांजैक्‍शन के लिए कार्डहोल्‍डर के सिग्‍नेचर या पिन की जरूरत होती है. इस पर आपके अकांउट की डिटेल्‍स मौजूद होती है. इसी स्ट्रिप की मदद से कार्ड स्‍वाइप के वक्‍त मशीन आपके बैंक इंटरफेस से जुड़ती है और प्रोसेस आगे बढ़ता है. वहीं, चिप वाले कार्ड में सारी इन्‍फॉरमेशन चिप में मौजूद होती है। इनमें भी ट्रांजैक्‍शन के लिए पिन और सिग्‍नेचर जरूरी होते हैं लेकिन, ईएमवी चिप कार्ड में ट्रांजैक्‍शन के वक्‍त यूजर को ऑथेंटिकेट करने के लिए एक यूनीक ट्रांजैक्‍शन कोड जनरेट होता है, जो वेरिफिकेशन को सपोर्ट करता है. ऐसा मैग्नेटिक स्ट्रिप कार्ड में नहीं होता.

नहीं लगेगी कोई फीस
अगर आप SBI के ग्राहक हैं तो आपके लिए जरूरी है कि जल्द ही अपना कार्ड बदल लें, क्योंकि, SBI मैग्‍नेटिक स्‍ट्राइप एटीएम को ब्लॉक कर रहा है. बैंक अपने ग्राहकों के लिए पुराने मैग्‍नेटिक स्‍ट्राइप कार्ड को चिप वाले कार्ड से रिप्‍लेस करने का नोटिफिकेशन भी जारी कर चुका है.

नए साल में LPG सिलेंडर के दामों में बड़ी कटौती

नई दिल्ली। आम उपभोक्ताओं के लिए एक एक बड़ी राहत की खबर है कि नए साल में रसोई गैस सिलेंडरों के दाम घट गए हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम में 120.50 रुपये और सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम में 5.91 रुपये की कटौती की है। 

आईओसी द्वारा सोमवार को जारी एक बयान के अनुसार, नई दरें एक जनवरी से लागू हो जाएंगी। नई दरों के अनुसार, सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर का दाम दिल्ली में 500.90 रुपये से घटकर 494.99 रुपये प्रति सिलेंडर हो जाएगा। 

वहीं, बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर का दाम 809.50 रुपये से घटकर 689 रुपये प्रति सिलेंडर हो जाएगा। आईओसी ने कहा, ‘‘दिल्ली में बिना सब्सिडी वाला एलपीजी सिलेंडर का दाम 120.50 रुपये घट गया है और नई दर एक जनवरी, 2019 से लागू हो जाएगी।’’

नये साल का तोहफा : जाने आज से क्या क्या सस्ता हुआ

नई दिल्ली। आम आदमी को नये साल का तोहफा देते हुये सरकार ने एक जनवरी से सिनेमा टिकट, 32 इंच तक के टेलीविजन और मानिटर स्क्रीन सहित 23 वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दर कम करने की अधिसूचना जारी कर दी है। माल एवं सेवाकर (जीएसटी) परिषद ने 22 दिसंबर को हुई बैठक में 23 वस्तुओं और सेवाओं पर कर दर कम करने का फैसला किया था। इनमें सिनेमा टिकट, टेलीविजन और मानिटर स्क्रीन, पावर बैंक आदि शामिल हैं। इसके अलावा शीतित एवं डिब्बा बंद खास तरह की प्रसंस्कृत सब्जियों को शुल्कमुक्त कर दिया गया।

उपभोक्ताओं को मंगलवार से इन वस्तुओं के लिये कम दाम देने होंगे। एक जनवरी से इन वस्तुओं पर जीएसटी दर कम हो जायेगी। जिसके परिणामस्वरूप इनके दाम घट सकते हैं। जीएसटी परिषद ने अपनी पिछली बैठक में इन वस्तुओं एवं सेवाओं पर 28 प्रतिशत की दर को कम कर दिया था। कुछ वस्तुओं पर इसे घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है जबकि कुछ सेवाओं पर 18 प्रतिशत की दर को कम कर 12 प्रतिशत किया गया है। 

जीएसटी की 28 प्रतिशत की सबसे ऊंची दर अब कुछ लक्जरी वस्तुओं, अहितकर सामानों, सीमेंट, बड़े टीवी स्क्रिन, एयरकंडीसनर्स और डिशवाशर्स पर ही रह गई है। परिषद ने दिव्यांग व्यक्तियों के काम आने वाले वाहक साधनों के कलपुर्जो पर जीएसटी दर को 28 से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया। माल परिवहन वाहनों के तीसरे पक्ष की बीमा प्रीमियम पर जीएसटी दर को 18 से घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया। 

आरबीआई की पहल, दृष्टिबाधित मोबाइल ऐप से पहचान सकेंगे नोट

नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक दृष्टिबाधितों को नोटों की पहचान करने में सहूलियत देने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए आरबीआई मोबाइल फोन आधारित समाधान खोज रहा है। वर्तमान में, नेत्रहीनों को नोट पहचानने के लिए 100 रुपये और उससे ऊपर के नोटों की छपाई इस रूप से उभरते रूप (इंटैग्लियो प्रिंटिंग) में होती है, जिससे वे स्पर्श कर उसे पहचान सके। देश में करीब 80 लाख दृष्टिबाधित लोग हैं, जिन्हें केंद्रीय बैंक की नई पहल से फायदा मिल सकता है। आरबीआई ने जून 2018 में घोषणा की थी कि वह नेत्रहीनों द्वारा मुद्रा की पहचान करने में मदद करने के लिये उचित उपकरण या तंत्र की व्यवहार्यता का पता लगायेगा। इसी तर्ज पर अब आरबीआई ने भारतीय मुद्रा के मूल्यवर्ग की पहचान के लिये तंत्र/उपकरण विकसित करने के लिये वेंडरों से रुचि पत्र मंगाए हैं। निविदा दस्तावेज में कहा गया है कि हाथ से चलने वाला यह उपकरण/तंत्र नोटों के मूल्यवर्ग की पहचान करने में सक्षम होना चाहिए। जब भी बैंक नोट को इसके सामने/पास/इसके अंदर या उससे होकर गुजारा जाए तो कुछ ही सेकंड (दो सेकंड या उससे भी कम समय में हिंदी/अंग्रेजी में मूल्यवर्ग की जानकारी मिलनी चाहिए अर्थात् यह पता चलना चाहिए कि नोट कितने का है। 

समाधान पूरी तरह से सॉफ्टवेयर आधारित हो सकता है, जो मोबाइल फोन या हार्डवेयर की मदद से या दोनों के संयोजन से चलने में सक्षम हो। यदि समाधान हार्डवेयर आधारित समाधान हो तो बैटरी से चलने वाला, रिचार्ज हो जाने वाला, छोटा और पकडऩे में आरामदायक हो। साथ ही उसे अतिरिक्त रोशनी की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

साल के आखिरी दिन सबसे सस्‍ता है पेट्रोल-डीजल

नई दिल्ली : पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने साल के आखिरी दिन भी आम आदमी को बड़ी राहत दी है. सोमवार को दिल्‍ली में पेट्रोल की कीमतों में 20 पैसे प्रति लीटर की कमी दर्ज की गई. इससे यहां पेट्रोल के दाम 68.84 रुपये प्रति लीटर हो गए. वहीं राजधानी में डीजल के दाम भी सोमवार को 23 पैसे प्रति लीटर की गिरावट दर्ज की गई है. इसके बाद यहां डीजल के दाम 62.86 प्रति लीटर हो गए. पेट्रोल और डीजल की ये कीमतें साल के सबसे न्‍यूनतम स्‍तर पर हैं.
वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में भी सोमवार को पेट्रोल के रेट में 20 पैसे प्रति लीटर की कटौती दर्ज की गई. इससे सोमवार को पेट्रोल की कीमतें 74.47 रुपये प्रति लीटर हो गए. वहीं मुंबई में डीजल भी 25 पैसे प्रति लीटर घटकर 65.76 रुपये प्रति लीटर हो गए.
बता दें कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रविवार को भी कटौती हुई थी और ये साल के सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई थीं. कच्चे तेल की लगातार गिरती कीमतों के चलते रविवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 23 पैसे की कटौती हुई थी. रविवार को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 69.04 रुपये और डीजल की कीमत 63.09 रुपये थी. पेट्रोल की कीमत 22 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत 23 पैसे प्रति लीटर कम हुई थी.
वहीं मुंबई में रविवार को पेट्रोल की कीमत 22 पैसे घटकर 74.67 रुपये और डीजल की कीमत 24 पैसे घटकर 66.01 रुपये प्रति लीटर हुई थी. वहीं रविवार को कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 22 पैसे घटकर 71.15 रुपये और डीजल की कीमत 23 पैसे घटकर 64.84 रुपये प्रति लीटर थी. चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 23 पैसे घटकर 71.62 रुपये और डीजल की कीमत 25 पैसे घटकर 66.59 रुपये थी.
गुरुवार को कच्चे तेल में 4.5 फीसदी की जोरदार गिरावट देखने को मिली थी. ब्रेंट क्रूड के दाम फिसलकर 52 डॉलर तक पहुंच गए थे. हालांकि शुक्रवार को तेल की कीमतों में हल्की रिकवरी हुई, लेकिन कच्चे तेल की लगातार गिरती कीमतों का फायदा ग्राहकों को मिल रहा है.
आने वाले दिनों में और कम होंगे दाम
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत डिमांड और सप्लाई के आधार पर तय होती है. जानकारों के मुताबिक कच्चे तेल की गिरती डिमांड और ज्यादा उत्पादन के चलते अभी कच्चे तेल की कीमतें कम हैं. आगे कुछ दिनों तक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है और उम्मीद है कि इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें दो से तीन रुपए और कम हो सकती हैं. 

इंस्टाग्राम का नया फीचर देख लोगों को आया गुस्सा

नई दिल्लीः सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम (Instagram) हाल ही में अपने यूजर्स के लिए एक नया फीचर लाया था, लेकिन लगता है यूजर्स को यह नया फीचर जरा भी रास नहीं आया. तभी तो जैसे ही यूजर्स ने इंस्टाग्राम पर यह नया फीचर देखा सोशल मीडिया के जरिए ही नाराजगी जाहिर करने लगे. दरअसल, इंस्टाग्राम यूजर्स को दूसरों की स्टोरीज पढ़ने के लिए मोबाइल की स्क्रीन को नीचे की तरफ स्क्रॉल करना होता था, लेकिन गुरुवार को यूजर्स को इंस्टाग्राम पर एक नया ही फीचर देखने को मिला. यूजर्स ने देखा कि अब उन्हें दूसरों की स्टोरीज देखने के लिए स्क्रीन को स्क्रॉल करने के बजाय स्वाइप करना है, जिसे देखते ही इंस्टाग्राम यूजर्स तुरंत सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर करने लगे.ऐसे में कंपनी ने जब यह देखा कि यूजर्स को इंस्टाग्राम का यह नया फीचर पसंद नहीं आ रहा है तो कंपनी ने तुरंत माफी मांगते हुए नए फीचर को हटा लिया. जिसके बाद कंपनी ने बताया कि यह एक टेस्टिंग का हिस्सा था. दरअसल, कंपनी इंस्टाग्राम स्टोरी की ही तरह फीड को भी स्वाइप करने के फीचर को टेस्ट कर रही थी, लेकिन एक बग के चलते इंस्टाग्राम में यह फीचर खुद-ब-खुद ही अपडेट हो गया, जिसके चलते यूजर्स को गुरुवार सुबह यह नया फीचर देखने को मिला.वहीं जब यूजर्स ने नए फीचर को लेकर नाराजगी जाहिर की तो इंस्टाग्राम ने तुरंत यह फीचर हटा लिया और दोबारा पुराने फीचर को अपडेट किया गया. यूजर्स से माफी मांगते हुए इंस्टाग्राम ने कहा कि 'एक बग की वजह से कुछ यूजर्स को फीड में यह नया बदलाव देखने को मिल रहा है, जैसे ही हमें इसके बारे में पता चला हमने इसे तुरंत ठीक कर दिया है. हम इसके लिए सभी यूजर्स से माफी मांगते हैं.'

यात्री बढ़े, फिर भी एयरलाइनों के मुनाफे में गिरावट जाने क्या है वजह

नई दिल्ली। जेट फ्यूल की बढ़ी कीमतें, मुनाफे में कमी और वित्तीय परेशानी जैसे विपरीत परिस्थितियों के बावजूद देश के नागरिक विमानन क्षेत्र में साल 2018 में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, उच्च ईंधन कीमतों और उच्च प्रतिस्पर्धा के चलते किराया कम रखने के कारण, एयरलाइनों के मुनाफे में गिरावट, डॉलर के खिलाफ रुपये के गिरने और उच्च ब्याज दरों के कारण और अधिक बढ़ गई। 

एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) में जनवरी-दिसंबर 2018 में साल-दर-साल आधार पर 27 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि इसी अवधि में रुपया डॉलर के खिलाफ औसतन 5 फीसदी गिर गया। 

उद्योग पर्यवेक्षकों के मुताबिक, ईधन कीमतों में वृद्धि से भारतीय विमानन कंपनियां खासतौर से प्रभावित होते हैं, क्योंकि इस मद में उनके परिचालन खर्च का 34 फीसदी तक खर्च होता है, जबकि वैश्विक औसत 24 फीसदी है। 

रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने इस उद्योग को नकारात्मक रेटिंग दी है। एजेंसी के उपाध्यक्ष (कार्पोरेट सेक्टर रेटिंग्स) किंजल शाह ने आईएएनएस को बताया, ‘‘चालू वित्त वर्ष में भारतीय विमानन उद्योग एटीएफ की बढ़ती कीमतें और डॉलर के खिलाफ रुपये के गिरने के कारण कठिन समय से जूझ रहा है। साथ ही प्रतिस्पर्धा के कारण किराया बढ़ाने में असमर्थता के कारण उद्योग का नुकसान बढ़ा है।’’

इक्सिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सह-संस्थापक आलोक बाजपेयी ने आईएएनएस को बताया, ‘‘प्रौद्योगिकी के प्रयोग से यात्रियों के लिए यात्रा की बुकिंग करना, योजना बनाना और विमान सफर करना आसान हो गया है। इसके साथ प्रयोज्य आय में बढ़ोतरी और आकर्षक हवाई किराए के कारण छोटे और मझोले शहरों के लोग भी ट्रेन की बजाय विमान को तरजीह दे रहे हैं।’’

 

ऑनलाइन शॉपिंग पर सरकार ने बदले नियम

अगर आपको ऑनलाइन शॉपिंग और एक्सक्लूसिव सेल के इंतजार की आदत है तो आने वाले दिनों में आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. दरअसल, मोदी सरकार ने ई-कॉमर्स नियमों को सख्‍त बना दिया है. नए नियम के तहत अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ऑनलाइन रिटेल कंपनियां उन फर्म के उत्पाद नहीं बेच सकेंगी, जिसमें उनकी हिस्सेदारी होगी. इसका मतलब ये हुआ कि ऑनलाइन कंपनियां सिर्फ वही प्रोडक्ट बेच सकेंगी, जिसमें उनकी किसी भी तरह की हिस्‍सेदारी या भूमिका न हो. इसके साथ ही नए नियम के मुताबिक ऑनलाइन कंपनियां किसी भी प्रोडक्ट को एक्सक्लूसिव तरीके से नहीं बेच पाएंगी. कहने का मतलब ये है कि फ्लिपकार्ट या अमेजन जैसी ऑनलाइन कंपनियां, जो मोबाइल या दूसरे प्रोडक्ट की एक्सक्लूसिव सेल करती हैं, अब उसका फायदा आपको नहीं मिलेगा. ये नियम 1 फरवरी, 2019 से लागू होंगे. कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्रालय की ओर से कहा गया कि ऑनलाइन रिटेल कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रोडक्‍ट और सर्विसेज की कीमतों को प्रभावित नहीं कर सकती हैं और उन्हें अपने प्लेटफार्म पर लेबल प्लेइंग फील्ड (हर किसी को उचित मौका देना) बरकरार रखना होगा. इन सर्विसेज में फुलफिलमेंट, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, विज्ञापन , डिस्‍ट्रीब्यूशन और पेमेंट शामिल है. इसके साथ ही कंपनियों द्वारा खरीदारों को दिए जाने वाले कैशबैक उचित और बिना भेदभाव के होने चाहिए. इसके अलावा ऑनलाइन रिटेलर्स को हर साल 30 सितंबर तक रिजर्व बैंक के पास ऑडिटर का सर्टिफिकेट जमा कर बताना होगा कि कंपनी ने सभी नियमों का पालन किया है. यह फैसला ऑफलाइन खुदरा विक्रेताओं द्वारा की गई कई शिकायतों के बाद लिया गया है. बता दें कि खुदरा विक्रेताओं ने आरोप लगाया गया है कि ऑनलाइन रिटेलर भारी छूट दे रहे हैं, जिससे उनके कारोबार को नुकसान पहुंच रहा है.