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फिर बढ़े पेट्रोल और डीजल के दाम ,जानिए आज के भाव

नई दिल्ली। दो दिनों की स्थिरता के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम में गुरुवार को फिर वृद्धि हुई। तेल विपणन कंपनियों ने देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल के दाम में 38 पैसे और डीजल के दाम में 29 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। 

इसके साथ दिल्ली में पेट्रोल 68.88 रुपये लीटर हो गया है और डीजल का भी दाम बढक़र 62.53 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

कोलकाता में पेट्रोल के दाम में 37 पैसे और डीजल में 29 पैसे की वृद्धि की गई है। मुंबई में पेट्रोल 37 पैसे और चेन्नई में 40 पैसे लीटर महंगा हो गया है। डीजल के दाम में मुंबई और चेन्नई में 31 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि हुई है।

इस सप्ताह दूसरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी हुई। इससे पहले तेल विपणन कंपनियों ने सोमवार को कीमतें बढ़ाई थीं।
 

तेल-गैस, बिजली को जीएसटी में लाने की पहल करें मंत्रालय: पीएमओ

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने संबंधित मंत्रालयों को तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और कोयले को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत लाने की कोशिश तेज करने को कहा है। इससे पहले नीति आयोग ने ऊर्जा क्षेत्र पर एक ब्लूप्रिंट पीएमओ को दिया था, जिसमें इस क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और पूरे देश में इनकी एक कीमत का सुझाव दिया गया था। पीएमओ के इस निर्देश की जानकारी एक बड़े सरकारी अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर दी। पीएमओ का यह निर्देश 10 जनवरी को होने वाली जीएसटी काउंसिल की मीटिंग से पहले आई है। पावर सेक्टर को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग ग्राहकों के साथ-साथ दूसरे स्टेकहोल्डर्स भी कर रहे हैं। अगर बिजली क्षेत्र को जीएसटी में लाया जाता है तो बिजली बिल में 10 पर्सेंट की कमी आ सकती है। अधिकारी ने बताया, संबंधित मंत्रालयों ने पीएमओ के निर्देश पर अमल करते हुए सभी स्टेकहोल्डर्स और राज्यों से इस पर बातचीत शुरू कर दी है। राज्य नहीं चाहते कि इन प्रॉडक्ट्स को जीएसटी के तहत लाया जाए क्योंकि इससे वे इन पर टैक्स नहीं लगा पाएंगे, जिसका उनकी आमदनी पर बुरा असर हो सकता है। अभी राज्यों को इन प्रॉडक्ट्स से काफी टैक्स मिलता है। हालांकि, नीति आयोग का मानना है कि कई तरह की सब्सिडी और टैक्स से इन-एफिशिएंट फ्यूल्स को बढ़ावा मिल रहा है। उसका कहना है कि इस वजह से देश से निर्यात पर बुरा असर पड़ रहा है और घरेलू उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। उसकी वजह यह है कि इन प्रॉडक्ट्स पर इनपुट क्रेडिट नहीं दिया जा रहा है। नीति आयोग ने कहा है कि एनर्जी सेक्टर को जीएसटी के तहत लाने पर सबको बराबरी का मौका मिलेगा। इससे यह क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी भी होगा। अभी जीएसटी पॉलिसी में रिन्यूएबल्स यानी अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को काफी रियायत मिल रही है। अक्षय ऊर्जा के लिए कच्चे माल पर 5 पर्सेंट का जीएसटी लगता है, जबकि थर्मल पावर जेनरेशन के लिए यह 18 पर्सेंट है। नीति आयोग ने सुझाव दिया है, रिन्यूएबल और थर्मल एनर्जी के बीच इस तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। दोनों तरह की बिजली पैदा करने के लिए जो भी कच्चा माल लगता है, उस पर एक बराबर टैक्स होना चाहिए। उसका कहना है कि इससे जीएसटी पूरे पावर सेक्टर के लिए न्यूट्रल हो जाएगा और अच्छी टैक्स पॉलिसी को ऐसा ही होना चाहिए। केंद्र सरकार अभी ऑयल से 2.5 लाख करोड़ और राज्य 2 लाख करोड़ का टैक्स वसूलते हैं। 
छोटे उद्यमों को बड़ी राहत देने का प्रस्ताव, 40 लाख रुपये तक टर्नओवर वाले उद्यमों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट का सुझाव
नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रसाद शुक्ल की अध्यक्षता वाले एक मंत्री समूह ने छोटे उद्योगों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रजिस्ट्रेशन से छूट की सीमा मौजूदा 20 लाख रुपये से बढ़ाने का सुझाव दिया है। हालांकि, इस मंत्री समूह ने यह सीमा तय करने का फैसला केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल पर छोड़ दिया है। दरअसल, लॉ कमिटी ने भी जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट का लाभ 40 लाख रुपये तक के टर्नओवर वाली कंपनियों को देने का सुझाव दिया था, जिसका दिल्ली सरकार ने भी समर्थन किया था। वहीं, बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने 50 से 75 लाख रुपये के सालाना टर्नओवर वाले उद्योगों के लिए फ्लैट पेमेंट की सुविधा का प्रस्ताव रखा जो वैल्यु ऐडेड टैक्स (वैट) के तहत प्राप्त थी। जीएसटी छूट की सीमा बढ़ाने से कई छोटे-छोटे उद्यमों को कानूनी पचड़ों से मुक्ति तो मिल जाएगी, लेकिन इससे टैक्स चोरी की घटनाएं भी बढऩे की आशंका पैदा होगी क्योंकि तब कई उद्योग टैक्स डिपार्टमेंट की नजर में ही नहीं आएंगे। मंत्रिमंडलीय समिति ने 50 लाख रुपये तक सालाना टर्नओवर वाली सेवा प्रदाता कंपनियों के लिए कंपोजिशन स्कीम को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा जिसके तहत 5त्न लेवी और और आसान रिटर्न का सुझाव दिया गया। हालांकि, पहले इस प्रस्ताव को इस दलील के साथ खारिज किया जा चुका है कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। गौरतलब है कि अभी कंपोजिशन स्कीम की सुविधा छोटे उत्पादकों और व्यापारियों को उपलब्ध है जिसके लिए कंपोजिशन स्कीम की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही कहा गया है कि इन उद्यमों को तिमाही की जगह सालाना रिटर्न भरने की अनुमति दी जाए। हालांकि, इन्हें चालान के साथ तिमाही आधार पर ही टैक्स पेमेंट करने दिया जाए। उधर, सुशील मोदी की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह ने केरल जैसे आपदा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जीएसटी रेट बढ़ाने की जगह संबंधित राज्य/राज्यों को सेस लगाने की छूट देने की वकालत की। हालांकि, उसने सेस लागू करने से पहले जीएसटी काउंसिल से अनुमति लेने की शर्त रखी। 

लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए इस तरह करे अप्लाई

नई दिल्ली: पिछले दिनों कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि अब ड्राइविंग लाइसेंस को भी आधार से जोड़ना होगा. लेकिन, अभी तक अगर आपने अपना ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनाया है तो इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आप आसानी से इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आपको RTO ऑफिस के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. लर्निंग के लिए फीस 200 रुपये है. अगर आपने अभी तक एकबार भी लाइसेंस नहीं बनवाया है तो पहले लर्निंग बनवाना होगा. लर्निंग के बाद ही परमानेंट लाइसेंस बनता है. उम्र सीमा कम से कम 18 साल है.

लर्नर कैसे करें अप्लाई?
1. राजमार्ग मंत्रालय की वेबसाइट https://parivahan.gov.in/sarathiservice10/stateSelection.do पर जाएं. यहां अपना स्टेट चुनना है. वहां लर्नर के लिए ऑप्शन होता है. वहां क्लिक करने पर पूरा फॉर्म खुलता है. फॉर्म भरने के बाद एक नंबर जेनरेट होगा जिसे सेव कर लें. यहां आपको उम्र प्रमाण पत्र, एड्रैस प्रूफ, आईडी प्रूफ अटैच करना होता है.

2.इस प्रक्रिया के बाद अपना फोटो और डिजिटल सिग्नेचर अपलोड करना होगा. फिर टेस्ट के लिए स्लॉट बुक कराना होगा. स्लॉट का चुनाव करने के दौरान फीस भरना होगा. इसके बाद रजिस्टर्ड नंबर पर एक मैसेज आएगा, जिसे सेव करना है.

3. फीस पेमेंट के बाद स्लॉट के हिसाब से RTO ऑफिस जाकर टेस्ट देना होगा. टेस्ट में पास हो जाने पर 48 घंटे के भीतर ऑनलाइन लर्निंग लाइसेंस ऑनलाइन मिल जाएगी. इसकी वैलिडिटी 6 महीने की होती है. 6 महीने के दौरान आपको परमानेंट लाइसेंस के लिए अप्लाई करना होगा. लर्निंग लाइसेंस मिलने के 1 महीने के बाद से लेकर 6 महीने के बीच आपको दोबारा ऑनलाइन अप्लाई करके टेस्ट देना होता है. दूसरी बार टेस्ट पास करने पर परमानेंट लाइसेंस मिल जाता है.

बीमा कंपनियों का नया प्रपोजल, जाने क्या है वो

नई दिल्ली : आपके पास इंश्योरेंस प्लान है और कंपनी के पास आपने अपना मोबाइल नंबर दर्ज करा रखा है तो इंश्योरेंस कंपनी आपके पॉलिसी डॉक्यूमेंट से लेकर हर प्रकार की जानकारी आपको कॉल से या व्हाट्सएप के जरिये दे सकती हैं. मौजूदा समय में हजारों पॉलिसी धारक इसका फायदा भी उठा रहे हैं. बीमा कंपनियों ने बीमा विनियामक विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) से मांग की है कि सभी कंपनियों के लिए मोबाइल नंबर को शामिल करने को अनिवार्य किया जाए.

पॉलिसी होल्डर को होगा फायदा
रिलायंस जनरल के सीईओ राकेश जैन के मुताबिक, जनरल इंश्योरेंस में पॉलिसी होल्डर का मोबाइल नंबर जरूरी किया जाता है तो बीमा कंपनी के साथ पॉलिसी होल्डर को काफी फायदा होगा. उन्होंने ज़ी बिजनेस से बातचीत में कहा कि मोबाइल नंबर के जरिये पॉलिसी होल्डर कंपनी से सीधा जुड़ पाएगा. और फिर पॉलिसी दस्तावेज से लेकर क्लेम तक की सभी प्रकिया की जानकारी पॉलिसी धारक को मोबाइल नंबर पर दी जाएगी. व्हाट्सएप पर इंश्योरेंस कंपनी सभी डॉक्यूमेंट भेज सकती है.

सेटलमेंट प्रकिया में आसानी होगी
राकेश जैन ने बताया कि मोबाइल नंबर से पॉलिसी होल्डर की पुष्टि करना आसान हो जाता है. सही मोबाइल नंबर से क्लेम सेटलमेंट प्रकिया आसान होती है. और जिन ग्राहकों का नंबर कंपनी के पास है, उन तक कंपनियां आसानी से पहुंच बना पाती हैं. इसके अलावा म्युचुअल फंड और बैंक अकाउंट में मोबाइल नंबर जरूरी होता है. कई कंपनियां पॉलिसी डॉक्यूमेंट और क्लेम प्रकिया मोबाइल ऐप के जरिए ही करती हैं.

ऐसे में यह भी उम्मीद की जा रही है कि ग्राहक का मोबाइल नंबर ही उसका इंश्योरेंस नंबर हो जाएगा. इसका दूसरा फायदा यह होगा कि ग्राहक के सही मोबाइल नंबर से क्लेम सेटलमेंट प्रकिया आसान हो जाती है. दरअसल जिन ग्राहकों का नंबर कंपनी के पास होता है उन तक कंपनी की पहुंच आसानी से हो जाती है. जिन ग्राहकों का मोबाइल नंबर पॉलिसी में दर्ज नहीं होता, उनके क्लेम में कई बार परेशानी आती है. म्युचुअल फंड और बैंक अकाउंट में मोबाइल नंबर को पहले ही जरूरी किया जा चुका है.

जीडीपी दर इतनी फीसदी रहने का अनुमान

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2018-19 में देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की रफ्तार बढक़र 7.2 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में इसकी रफ्तार 6.7 फीसदी थी। आधिकारिक आंकड़ों से सोमवार को यह जानकारी मिली।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने ‘2018-19 के राष्ट्रीय आय के पहले अग्रिम अनुमानों’ में बताया, ‘‘वित्त वर्ष 2018-19 में वास्तविक जीडीपी या लगातार कीमतों (2011-12) पर जीडीपी 139.52 लाख करोड़ रुपये के स्तर को प्राप्त करने की संभावना है, जबकि ‘वित्त वर्ष 2017-18 के लिए जीडीपी का अनंतिम अनुमान 130.11 लाख करोड़ रुपये है’, जो 31 मई 2018 को जारी किया गया था।’’

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘वित्त वर्ष 2018-19 के लिए जीडीपी अनुमान 7.2 फीसदी लगाया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 में इसकी वृद्धि दर 6.7 फीसदी थी।’’

सस्ते स्मार्टफोन के लिए रहिए तैयार, मिलेगा बंपर डिस्काउंट

नई दिल्ली: जनवरी महीने में आपको सस्ते स्मार्टफोन खरीदने का मौका मिल सकता है. अमेजन और फ्लिपकार्ट को भरोसा था कि फेस्टिव सीजन में बहुत ज्यादा बिक्री होगी, इसलिए स्टॉक बहुत ज्यादा मंगा लिया गया था. लेकिन, उम्मीद के मुताबिक बिक्री नहीं होने के कारण बहुत स्टॉक पड़ा हुआ है. इधर ई-कॉमर्स कंपनियों को डर है कि नई FDI नीति लागू कर दी जाएगी. ऐसे में इनकी कोशिश है कि नई नीति से पहले ऑफर देकर स्टॉक खाली कर लिया जाए.

जनवरी महीने में सस्ते स्मार्टफोन बिकने की तीन बड़ी वजहें हैं. पहली ये की ई-कॉमर्स के लिए नई FDI पॉलिसी 1 फरवरी से लागू होने जा रही है. इसलिए, इन कंपनियों को 31 जनवरी तक अपना स्टॉक खाली करना होगा. नई पॉलिसी लागू हो जाने के बाद आसुस, लेनोवे, ऑनर जैसे ऑनलाइन एक्सक्लूसिव हैंडसेट ब्रांड्स को अपने स्मार्टफोन का स्टॉक खाली करना होगा. ऑनर, आसुस, रियलमी और लेनेवो की मार्केट पर अच्छी पकड़ बन रही है, जिसकी वजह से इनका स्टॉक भी बड़ा है.

सूत्रों की मानें तो अमेजन और फ्लिपकार्ट के पास अभी तक दिवाली का स्टॉक पड़ा हुआ है. ऑनलाइन एक्सक्लूसिव होने की वजह से स्टॉक धीरे-धीरे खाली होता है. यही वजह है कि रियलमी और हुआवे ऑफलाइन मार्केट की तरफ भी बढ़ रही है. नए नियम के मुताबिक, ई-कॉमर्स कंपनियों के एक्सक्लूसिव डील पर रोक लगाई गई है.

दूसरी सबसे बड़ी वजह है कि सरकार ने साफ-साफ कहा है कि एक वेंडर एक ई-कॉमर्स कंपनी पर अधिकतम 25 फीसदी इनवेंटरी बेच सकता है. इस नियम के चलते ब्रांड्स को अलग-अलग ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ करार करना होगा. साथ ही ऑफलाइन रूट भी अपनाना होगा.

ऑफलाइन चैनल का विस्तार करना जरूरी
मार्केट से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि नई पॉलिसी के बाद इन कंपनियों के पास दो ही ऑप्शन बचे हैं. पहला कि डिस्काउंट ऑफर देकर स्टॉक खाली करें और दूसरा ऑफलाइन चैनल का विस्तार करें. साथ ही ये ब्रांड्स अधिक से अधिक ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ करार कर सकते हैं. रियलमी और ऑनर का कहना है कि आने वाले दिनों में वह ऑफलाइन चैनल का विस्तार तो करेगा ही, साथ ही ऑनलाइन मौजूदगी को और मजबूत करेगा.

बाबा राम देव ने पतंजलि परिधान शोरूम खोलने का दिया ऑफर

नई दिल्ली: योग गुरु बाबा रामदेव गारमेंट सेक्टर में पतंजलि परिधान शोरूम की चेन तेजी से बढ़ा रहे हैं. 4 जनवरी को ही बाबा रामदेव ने पतंजलि योगपीठ हरिद्वार में अपना स्टोर खोला है. बाबा रामदेव का कहना है कि मार्च 2019 तक देश भर में 100 शोरूम खोले जाएंगे, जबकि मार्च 2020 तक शोरूम की संख्या बढ़ाकर 500 की जाएगी. ऐसे में आप या आपके परिवार का भी कोई सदस्य पतंजलि परिधान शोरूम खोलकर कमाई कर सकता है. अगर आप पतंजलि के साथ बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो ये सही मौका है. कंपनी की फ्रेंचाइजी लेने के कुछ तरीके हम आपको यहां बता रहे हैं.

क्या हैं फ्रेंचाइजी की शर्तें
बाबा रामदेव ने खुद ट्वीट कर पतंजलि की फ्रेंचाइजी की शर्तों का खुलासा किया था. रामदेव के मुताबिक शोरूम खोलने के लिए जरूरी है आपके पास अपनी प्रॉपर्टी हो. यह प्रॉपर्टी किसी मॉल, कमर्शियल कॉम्प्लैक्स या हाई स्ट्रीट पर होनी चाहिए. शोरूम के लिए स्पेस ग्राउंड फ्लोर पर कम से कम 2000 वर्ग फुट होना चाहिए, जिसका फ्रंट 20 फुट का होना चाहिए और हाइट कम से कम 10 फुट होनी चाहिए. गारमेंट या टैक्सटाइल्स का पूर्व अनुभव होना चाहिए.
कैसे कर सकते हैं अप्लाई
अगर आप इन शर्तों को पूरा करते हैं और फ्रेंचाइजी के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो आप enquiry@patanjaliparidhan.org पर मेल कर सकते हैं. बाबा ने अपने फेसबुक पोस्ट और ट्वीट पर कुछ फोन नंबर भी दिए हैं. उन पर कॉल करके आप पूरी प्रोसेस जान सकते हैं. नीचे दिए गए ट्वीट से आप नंबर देखकर कॉल भी कर सकते हैं.
 

8 और 9 जनवरी को बंद रहेंगे बैंक, जाने क्या है कारण

नई दिल्ली : अगर आपको भी अगले दो दिन यानी 8 और 9 जनवरी को बैंकों से जुड़ा कोई काम है तो उसे आज ही निपटा लें. पिछले दिनों बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण दिसंबर के आखिरी 10 दिन में से बैंक 5 दिन बंद रहे थे. ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज प्रभावित हुआ था. दिसंबर के बाद अब जनवरी में भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है. सार्वजनिक बैंकों के कुछ कर्मचारी 8 और 9 जनवरी को देशव्याही हड़ताल में हिस्सा लेंगे.

बंबई शेयर बाजार को सूचित किया
बैंक कर्मचारियों ने सरकार की कथित कर्मचारी विरोधी नीतियों के विरोध में 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर प्रस्तावित हड़ताल के समर्थन में यह निर्णय लिया है. आईडीबीआई बैंक ने बंबई शेयर बाजार को बताया है कि ऑल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन (AIBEA) और बैंक एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) ने 8 और 9 जनवरी के राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बारे में इंडियन बैंक एसोसिएशन को सूचित किया है.

कामकाज प्रभावित होने की उम्मीद
बैंक ऑफ बड़ौदा ने बंबई शेयर बाजार को अलग से सूचित किया है कि 8 और 9 जनवरी को एआईबीईए और बीईएफआई के हड़ताल के कारण कुछ क्षेत्रों में बैंकों की शाखाओं एवं कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हो सकता है. 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों इंटक, ऐटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, एआईसीसीटीयू, यूटीयूसी, टीयूसीसी, एलपीएफ और सेवा ने भी 8 और 9 जनवरी को आम राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है.

बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां ने सरकार का दरवाजा खटखटा

नई दिल्लीः ई-कॉमर्स नीतियों में किये गए बदलावों को लेकर बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां सरकार का दरवाजा खटखटा सकती है. ये कंपनियां नए FDI नियमों को लागू करने की समयसीमा को 1 फरवरी से आगे बढ़ाने की मांग कर सकती हैं. कंपनियों का मानना है कि ई-कॉमर्स क्षेत्र से जुड़ी नीतियों में जो बदलाव किए गए हैं उनका पालन करने और उन्हें लागू करने के लिए कम से कम 4 से 5 महीने चाहिए. एक बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी के अधिकारी ने बताया कि किसी भी सूरत में कंपनियों को 4 से पांच महीने इसे लागू करने में लगेंगे ही.

क्या हैं नए नियम?
विदेशी निवेश वाले ऑनलाइन मार्केटप्लेस के नए नियमों से कई कंपनियों को नुकसान होगा तो कई कंपनी फायदे में रहेंगी. नया नियम किसी ई-कॉमर्स कंपनी को उन सामानों की बिक्री अपने प्लेटफॉर्म से बेचने से रोकता है, जिनका उत्पादन वह खुद या उनकी कोई सहयोगी कंपनी करती हो. इतना ही नहीं, इसमें यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई वेंडर किसी पोर्टल पर ज्यादा-से-ज्यादा कितने सामान की बिक्री कर सकता है. नई नीति में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर किसी सप्लायर को विशेष सुविधा दिए जाने पर भी रोक है.
कैशबैक, एक्सक्लूसिव सेल पर असर
नई नीति के तहत कैशबैक, एक्सक्लूसिव सेल, ब्रांड लॉन्चिंग, अमेजॉन प्राइम या फ्लिपकार्ट प्लस जैसी विशेष सेवाएं रुक सकती हैं. सरकार इन ऑनलाइन शॉपिंग प्लैटफॉर्म्स को पूरी तरह निष्पक्ष बनाना चाहती है. 

सरकार के पास जा सकती हैं कंपनियां
ई-कॉमर्स कंपनी से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि 26 दिसंबर को नए नियमों का ऐलान किया गया था और कंपनियों को इन बदलावों को लागू करने के लिये सिर्फ एक महीने का समय दिया गया. बहुत से मामलों में मौजूदा पार्टनर्स के साथ अनुबंध करने होंगे. 

फ्लिपकार्ट और अमेजन पर सबसे ज्यादा मार
सरकार के ई-कॉमर्स नियमों को सख्त करने की सबसे ज्यादा मार फ्लिपकार्ट और अमेजॉन पर पड़ सकती है. नए नियमों के तहत विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियां उन कंपनियों के उत्पाद नहीं बेच सकती जिनमें वह खुद हिस्सेदार हैं. इसके अलावा विशेष ऑफर और भारी छूट पर भी रोक लगाई गई है.

ऑडी-सैमसंग में करार, इन कामो के लिए लगेगी चिप

नेस्‍ले इंडिया कंपनी Maggi को लेकर फिर से मुसीबत में

नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता वाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में सरकार के मामले में गुरुवार को आगे कार्यवाही की अनुमति प्रदान कर दी है. इस मामले में सरकार ने कथित अनुचित व्यापार तरीके अपनाने, झूठी लेबलिंग और भ्रामक विज्ञापनों को लेकर 640 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की है.

दिग्गज एफएमसीजी कंपनी नेस्ले ने मैगी नूडल मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया है. एनसीडीआरसी में दायर अपनी याचिका में मंत्रालय ने आरोप लगाया था कि नेस्ले ने यह दावा कर उपभोक्ताओं को भ्रमित किया है कि उसका मैगी नूडल गुणकारी ‘‘टेस्ट भी हेल्दी भी’’ है.

न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) मैसूरू की रिपोर्ट कार्यवाही का आधार होगी. इसी संस्थान में मैगी के नमूनों की जांच की गई थी
शीर्ष अदालत ने पूर्व में राष्ट्रीय उपभोक्ता वाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में चल रहे इस मामले में कार्यवाही पर 16 दिसंबर 2015 को तब रोक लगा दी थी जब नेस्ले ने इसे चुनौती दी थी. न्यायालय ने सी एफटीआरआई मैसूरू को निर्देश दिया था कि वह अपनी जांच रिपोर्ट उसके समक्ष रखे.

उसी वर्ष भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफ एस एस ए आई) ने नमूनों में सीसे का अत्यधिक स्तर पाए जाने के बाद मैगी नूडल्स पर रोक लगा दी थी और इसे मानव उपयोग के लिए ‘‘असुरक्षित और खतरनाक’’ बताया था. इस मामले की सुनवाई के दौरान नेस्ले इंडिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ को बताया कि मैसूरू प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आ गई है और पाया गया है कि मैगी नूडल्स में सीसे की मात्रा तय सीमा के दायरे में है.
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने सिंघवी से पूछा, ‘‘हमें सीसे वाली मैगी क्यों खानी चाहिए?’’ सिंघवी ने जवाब दिया कि नूडल्स में सीसे की मात्रा तय सीमा के दायरे में है और अन्य कई उत्पादों में भी थोड़ा बहुत सीसा होता है.

पीठ ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि सीएफटीआरआई की रिपोर्ट का एनसीडीआरसी द्वारा मूल्यांकन किया जाए जहां शिकायत दर्ज है. एनसीडीआरसी के अधिकारक्षेत्र का उल्लंघन करना इस अदालत के लिए उचित नहीं होगा...पक्षों के सभी अधिकार और तर्क उपलब्‍ध रहेंगे.’’ 

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने कहा कि मैसूरू प्रयोगशाला की रिपोर्ट के मद्देनजर मामला वापस एनसीडीआरसी के पास जाना चाहिए और कार्यवाही पर लगी रोक हटाई जानी चाहिए. सिंघवी ने कहा कि मामला अब निष्फल हो चुका है क्योंकि रिपोर्ट ‘‘मेरे पक्ष में है’’ और एमएसजी (मोनोसोडियम ग्लूटामेट) नहीं पाया गया है.

सिंघवी और वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दत्तार ने मामला फिर से एनसीडीआरसी के पास भेजे जाने का विरोध किया और कहा कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बाद ऐसा कुछ नहीं बचा है जिस पर फैसला किया जाए.
पीठ ने कहा, ‘‘हमें एनसीडीआरसी की शक्ति क्यों छीननी चाहिए ? हम प्रयोगशाला की रिपोर्ट आयोग को भेजेंगे और उससे उसके समक्ष दायर शिकायत का निपटारा करने के लिये कहेंगे.’’

इसने कहा कि बम्बई उच्च न्यायालय के 2015 के उस फैसले के खिलाफ अपील पर बाद में सुनवाई की जाएगी जिसमें नेस्ले के मैगी नूडल्स पर प्रतिबंध के एफएसएसएआई के आदेश को निरस्त कर दिया गया था. उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने 2015 में लगभग तीन दशक पुराने उपभोक्ता संरक्षण कानून के एक प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए नेस्ले इंडिया के खिलाफ एनसीडीआरसी में शिकायत दर्ज कराई थी.

इसने नेस्ले पर आरोप लगाया था कि अनुचित व्यापार तरीकों, झूठी लेबलिंग और मैगी नूडल्स से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों के जरिए उसने भारतीय उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाया. यह पहली बार था जब सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण कानून की धारा 12-1-डी के तहत कार्रवाई की जिसके तहत केंद्र और राज्यों दोनों को शिकायत दर्ज कराने की शक्तियां प्राप्त हैं.

नहीं चलाते है Facebook ,फिर भी आपका डेटा चोरी होरह

नई दिल्लीः डेटा चोरी, जो इस समय दुनिया का सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है उसमें फेसबुक सबसे बड़ा प्लेयर है. यहां तक कि ताजा रिसर्च बताती है कि अगर आप फेसबुक ऐप यूज ही नहीं कर रहे तो भी आपका डेटा फेसबुक के पास जा रहा है. डेटा प्राइवेसी के लिए काम करने वाली कंपनी प्राइवेसी इंटरनेशनल के रिसर्च में यह बात सामने आई है कि अगर आपने मोबाइल पर फेसबुक ऐप इंस्टॉल नहीं किया है या आपका फेसबुक अकाउंट नहीं है तब भी फेसबुक कंपनी दूसरे ऐप की मदद से आपके डेटा तक पहुंच बना सकती है. यही नहीं इस डेटा की बाकयदा सौदेबाजी होती है. 

कैसे चोरी होता है डेटा?
ऐसे सभी ऐप जिन्हें बनाते समय फेसबुक एसडीके नाम के ऐप डेवलपिंग टूल का इस्तेमाल किया गया, वे यूजर का डेटा फेसबुक को भेज सकते हैं. ड्यूलिंगो, ट्रिपएडवाइजर, इंडीड और स्काय स्कैनर जैसे नामी गिरामी एंड्रॉएड ऐप भी यूजर्स का डेटा फेसबुक को बेच रहे हैं. जर्मनी के शहर लाइपजिग में हुई 'कैओस कम्प्यूटर कांग्रेस' में इस रिसर्च को जारी किया गया
कैसे हुई रिसर्च?
रिसर्च में प्राइवेसी इंटरनेशनल ने 10 से लेकर 50 करोड़ तक के यूजर बेस वाले ऐसे 34 एंड्राएड ऐप का अध्ययन किया जो फेसबुक के साथ डेटा शेयर करते हैं. 2018 में अगस्त से लेकर दिसंबर तक इन चुने हुए ऐप पर नजर रखी गई और देखा गया कि ये किस तरह का डेटा फेसबुक को भेजते हैं. रिसर्च में ता चला कि ऐप डेवलपर ऐप डेवलपिंग टूल 'फेसबुक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट' के जरिए यूजर का डेटा फेसबुक तक पहुंचा रहे हैं. 34 में से 23 ऐप ऐसे निकले जिन्हें ओपन करते ही आपकी निजी जानकारी फेसबुक के साथ शेयर हो गई.

डेटा चोरी के नुकसान
दुनियाभर में डेटा इस समय किंगमेकर की भूमिका निभा रहा है. इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि प्रोडक्ट बनाकर बेचने वाले जिन कंपनियों के मालिक आज करोड़पति, अरबपति हैं उन्हें यहां तक पहुंचने में कई दशक लग गए. लेकिन हिंदुस्तान सहित दुनियाभर के कई ऐसे अरबपति हैं जो डेटा, इंटरनेट और ई-कॉमर्स को ताकत बनाकर कुछ सालों में ही यहां तक पहुंच गए. अब गूगल, फेसबुक कंपनियां आपको ट्रैक करती हैं. यहां तक कि आपके मोबाइल की हर हरकत उन्हें पता है. आपके हर फोटो, हर पासवर्ड, हर सीक्रेट नंबर, हर कॉन्टैक्ट तक उनकी पहुंच है. ऐसे में आपका पर्सनल डेटा लीक हो गया तो आपको बहुत नुकसान होगा. कंपनियां भले ही कहें कि आपका डेटा एनक्रिप्टेड यानी सुरक्षित है लेकिन हैकिंग के सामने कुछ भी नामुमकिन नहीं.