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गुजरात चुनाव में सड़कों पर अगर युवा नजर आने लगे हैं। तो उसके पीछे महज पाटीदार, दलित या ओबीसी आंदोलन नही है। और ना ही हार्दिक पटेल,अल्पेश या जिग्नेश के चेहरे भर है । दरअसल गुजरात का युवा जिस संकट से गुजर रहा है उसका सच महंगी शिक्षा और बेरोजगारी है। और छात्र-युवा के बीच के संकट को समझने के लिये पहले कालेजो की उस फेहरिस्त को समझें,जिसने गुजरात की समूची शिक्षा को ही निजी हाथों में सौंप दिया है। जिले दर जिले कालेज हो या यूनिवर्सिटी। टेक्निकल इस्टीट्यूट हो या फिर मेडिकल कालेज। कालेजों की समूची फेहरिस्त ही शिक्षा को इतना महंगा बना चुकी है कि गुजरात में हर परिवार के सामने दोहरा संकट है कि महंगी शिक्षा के साथ बच्चे पढ़ें। और पढ़ने के बाद नौकरी ही नहीं मिले। और गुजरात का सच ये है कि 91 डिप्लोमा कॉलेज प्राइवेट हैं। 21 में से 15 मेडिकल कालेज प्राइवेट है। दो दर्जन से ज्यादा यूनिवर्सिटी प्राइवेट है। और प्राइवेट कॉलेजो में शिक्षा महंगी कितनी ज्यादा है ये इससे भी समझा जा सकता है कि सरकारी कालेज में एक हजार रुपये सेमेस्टर तो निजी डिप्लोमा कालेज में 41 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर फीस है। इसी तरह निजी मेडिकल कालेजों में पढ़ा कर अगर कोई गुजराती अपने बच्चे को डाक्टर बनाना चाहता है तो उसे करोड़पति तो होना ही होगा। क्योंकि अंतर खासा है । मसलन सरकारी मेडिकल कालेज में 6 हजार रुपये सेमेस्टर फीस है । तो निजी मेडिकल कालेज में 3 से 6 लाख 38 हजार रुपये सेमेस्टर फीस है । और गुजरात के सरकारी मेडिकल कालेजो में 1080 छात्र तो निजी मेडिकल कालेज में 2300 छात्र पढाई कर रहे है । यानी मुस्किल सिर्फ इतनी नहीं है कि पढाई मंहगी हो चली है । फिर भी मां बाप बच्चो को पढा रहे है । मुश्किल तो ये भी है मंहगी पढाई के बाद रोजगार ही नहीं है । हालात कितने बदतर है ये इससे भी समझा जा सकता है कि प्राईवेट इंजीनियरिंग कालेजों में 25 से 30 हजार सीट खाली हैं । खाली इसलिये हैं क्योंकि डिग्री के बाद भी रोजगार नहीं है । सरकार का ही आंकडा कहता है कि 2014-15 में 20 लाख युवा रजिस्टर्ड बेरोजगार हैं ।

तो गुजरात की चुनावी राजनीति में ऊपर से हार्दिक पटेल , जिगनेश या अल्पेश के जरीये जातियों में बंटी राजनीति नजर आ सकती है लेकिन गुजरात के राजनीतिक इतिहास में ये भी पहली बार है कि जातियों में राजनीति बंट नहीं रही है बल्कि जातियों में बंटा समाज विकास के नाम पर ही एकजुट हो रहा है । यानी विकास का जो सवाल गुजरात जाकर मोदी उठा रहे हैं । विकास के इसी सवाल को गुजराती भी उठा रहा है । यानी सवाल कांग्रेस की राजनीति का नहीं बल्कि गुजरात के विकास मॉडल का है, जहां हर परिवार के सामने संकट बीतते वक्त के साथ गहरा रहा है । तो विकास के नाम पर गुजरात के चुनाव में विकास का बुलबुला इसलीलिये फूट रहा है क्योंकि एक तरफ गुजरात के रजिस्ट्रड बेरोजगारो की तादाद बीते 15 बरस में 20 लाख बढ़ गई । और दूसरी तरफ मनरेगा के तहत जाब कार्ड ना मिल पाने वालों की तादाद 31 लाख 65 हजार की है । और यही वह सवाल है जो विकास को लेकर मंच से जमीन तक पर गूंज रहा है । यानी राहुल गांधी कहते हैं कि विकास पगल हो गया है तो मोदी जवाब देते है कि मैं ही विकास हूं। यकीनन लड़ाई विकास को लेकर ही है । क्योंकि विकास के दायरे में अगर रोजगार नहीं है तो फिर छात्र-युवा और मनरेगा के बेरोजगारो के सामने संकट तो है । दरअसल 2016-17 का ही गुजरात का मनरेगा का आंकडा कहता है 3,47,000 लोगों ने मनरेगा जाब कार्ड के लिये अप्लाई किया और उसमें से सिर्फ 1,35, 000 लोगों को जाब कार्ड मिला । और जिन 39 फीसदी लोगों को मनरेगा के तहत काम भी मिला तो वह भी सिर्फ 19 दिनों का ही मिला ।

यानी काम 100 दिनों का देने की स्थिति में भी सरकार नहीं है । और मनरेगा के तहत ही बीते दस बरस में 38,45,000 में से 6,80,000 लोगों को ही काम मिला ।यानी रोजगार का संकट सिर्फ शहरों तक सीमित है ऐसा भी नहीं । मुश्किल ग्रामीण इलाको में कही ज्यादा है। और अगर विकास का कोई मंत्र रोजगार ही दिला पाने में सत्रम हो नहीं पाया है तो समझना गुजरात के उस समाज को भी होगा जहा कमोवेश हर तबका पढाई करता है । दलितों में भी 70 फिसदी साक्षरता है । पर शिक्षा कैसे महंगी होती चली गई और कैसे काम किसी के पास बच नहीं रहा है ये इससे भी समझा जा सकता है 60 फिसदी से ज्यादा बच्चे 12 वी से पहले ही पढाई छोड देते है । मसलन , 2006 में 15,83,000 बच्चो ने पहली में दाखिला लिया । 2017 में 11,80,000 छात्र दसवी की परिक्षा में बैठे । यानी करीब 4 लाख बच्चे दसवीं की पढाई तक पढ नहीं सके । और –मार्च 2017 में 12वी की परिक्षा 5,30,000 बच्चों ने दी । यानी हायर एजडूकेशन तक भी साढे छह लाख बच्चों ने पढाई छोड़ दी । तो गुजरात चुनाव का ये रास्ता ऐसे मोड़ पर जा खडा हुआ है जहां पहली बार जातियों में टकराव नहीं है । विकास की मोदी परिभाषा के सामानांतर हर गुजराती विकास की परिभाषा को अपनी मुश्किलो को खत्म करने से जोडना चाह रहा है । और ये हालात गुजरात में अगर राजनीतिक तौर पर कोई नया परिमाम देते है तो मान कर चलिये 2019 का रास्ता भी उस इकनामी से टकरायेगा जहां जाति – धर्म में बांटने वाली राजनीति नहीं चलेगी और जन समस्या एकजुट होकर नया रास्ता निकालेगी ।

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धर्म दीर्घकालीन राजनीति है और राजनीति अल्पकालीन धर्म । यूं तो ये कथन लोहिया का है । पर मौजूदा सियासत जिस राजधर्म पर चल पड़ी है, उसमें कह सकते है कि बीते 25 बरस की राजनीति में राम मंदिर का निर्माण ना होना धर्म की दीर्घकालीन राजनीति है । या फिर मंदिर मंदिर सीएम पीएम ही नहीं अब तो राहुल गांधी भी मस्तक पर लाल टिका लगाकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं तो राजनीति अल्पकालीन धर्म है । या फिर पहली बार भारतीय राजनीति हिन्दुत्व के चोगे तले सत्ता पाने या बनाये रखने के ऐसे दौर में पहुंच चुकी है, जहां सिर्फ मंदिर है । यानी धर्म को बांटने की नहीं धर्म को सहेजकर साथ खड़ा होकर खुद को धार्मिक बताने की जरुरत ही हिन्दुत्व है । क्योंकि पहली बार राजधर्म गिरजाधर हो या गुरुद्वारा या फिर मस्जिद पर नहीं टिका है । यानी हिन्दु मुस्लिम के बीच लकीर खिंचने की जरुरत अब नहीं है । बल्कि हिन्दू संस्कृति से कौन कितने करीब से जुड़ा है राजनीति का अल्पकालीन धर्म इसे ही परिभाषित करने पर जा टिका है । इसलिये जिस गुजरात में अटल बिहारी वाजपेयी मोदी की सत्ता को राजधर्म का पाठ पढ़ा रहे थे । उसी गुजरात में राहुल गांधी को अब मंदिर मंदिर जाना पड़ रहा है । तो क्या हिन्दुत्व की गुजरात प्रयोगशाला राजनीतिक मिजाज इतना बदल चुका है कि मंदिर ही धर्म है । मंदिर ही सियासत ।

यानी नई राजनीतिक चुनावी लड़ाई हिन्दू वोट बैंक में साफ्ट-हार्ड हिन्दुत्व के आसरे सेंध लगाने की है । या फिर जाति-संप्रदाय की राजनीति पर लगाम लगती धर्म की राजनीति को नये सिरे से परिभाषित करने की कोशिश । क्योकि यूपी ने 1992 में राममंदिर के नाम पर जिस उबाल को देखा । और हिन्दु-मुस्लिम बंट गये । और 25 बरस बाद अयोध्या में ही जब बिना राम मंदिर निर्माण दीपावली मनी तो खटास कहीं थी । बल्कि समूचे पूर्वाचल में हर्षोउल्लास था । तो क्या हिन्दुत्व की राजनीतिक प्रयोगशाला में सियासत का ये नया घोल है जहा हिन्दु मुस्लिम के बीच लकीर खिंचने से आगे हिन्दुत्व की बडी लकीर खिंच कर सियासत को मंदिर की उस चौखट पर ले आया गया है जहा सुप्रीम कोर्ट का हिन्दुत्व को लेकर 1995 की थ्योरी फिट बैठती है पर 2017 की थ्योरी फिट नहीं बैठती। क्योंकि याद कीजिये सुप्रीम कोर्ट में जब हिन्दु धर्म और राजनीति में धर्म के प्रयोग को लेकर मामला पहुंचा तो दिसबर 1995 में जस्टिस वर्मा ने कहा , ‘ हिंदुत्व शब्द भारत यों की जीवन शैली की ओर इंगित करता है। इसे सिर्फ धर्म तक सीमित नहीं किया जा सकता। ” और याद किजिये 22 बरस बाद जब एक बार पिर सुप्रीम कोर्ट में चुनाव प्रचार में धर्म के प्रयोग को लेकर मामला पहुंचा तो सात सदस्यीय संविधान पीठ ने 1995 की परिभाषा से इतर कहा , “धर्म इंसान और भगवान के बीच का निजी रिश्ता है और न सिर्फ सरकार को बल्कि सरकार बनाने की समूची प्रक्रिया को भी इससे अलग रखा जाना चाहिए। ” तो सुप्रीम कोर्ट ने राजसत्ता के मद्देनजर धर्म की जो व्याख्या 1995 में की कमोवेश उससे इतर 22 बरस बाद 2017 में परिभाषित किया । पर 1995 के फैसले का असर अयोध्या में बीजेपी दिखा नहीं सकी । और जनवरी 2017 के पैसले के खिलाफ पहले यूपी में तो अब गुजरात के चुनावी प्रचार में हर नजारा उभर रहा है ।

और संयोग ऐसा है कि गुरात हो या अयोध्या । दोनो जगहो पर राजधर्म का मिजाज बीते डेढ से ढाई दशक के
दौर में बदल गया । ये सवाल वाकई बडा है कि 2002 के गुजरात दंगों के बाद सोनिया गांधी ने द्वारका या सोमनाथ में उसी तरह पूजा अर्चना क्यों नहीं की जैसी अब राहुल गांधी कर रहे है । 2002 के बाद पहली बार है कि काग्रेस नेता मंदिर मंदिर जा रहे हैं। और 1992 के बाद से अयोध्या में बीजेपी के किसी नेता ने दीपावली मनाने की क्यो नहीं सोची जैसे अब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने दीपावली मनायी जबकि बीजेपी के कल्याण सिंह , रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह सीएम रहे । और कल्याण सिंह ने तो 1992 में बतौर सीएम धर्म की राजनीति की नींव रखी । तो तब कल्याण सिंह के मिजाज और अब योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक मिजाज । अंतर खासा आ गया है । लेकिन मुश्किल ये नहीं कि राजनीति बदल रही है । मुश्किल ये है कि -कल्याण सिंह हार्ड हिन्दुत्व के प्रतीक रहे । योगी आदित्यनाथ हिन्दुत्व का टोकनइज्म यानी प्रतिकात्मक हिन्दुत्व कर रहे है । और समझना ये भी होगा कि पीएम बनने के साढे तीन बरस बाद भी पीएम मोदी अयोध्या नहीं गये । पर सीएम बनने के छह महीने पुरे होते होते योगी अयोध्या में दीपावली मना आये । यानी एक तरफ राहुल गांधी भी मंदिर मंदिर घूम कर साफ्ट हिन्दुत्व को दिखा रहे हैं। और दूसरी तरफ केदारनाथ जाकर पीएम मोदी तो अयोध्या में योगी हिन्दुत्व का टोकनइज्म कर रहे है । तो कौन सी राजनीति किसके लिये फायदेमंद या घाटे का सौदा समझना ये भी जरुरी है । क्योकि जनता सत्ता से परिणाम चाहती है। और गुजरात से लेकर 2019 तक के आम चुनाव के दौर में अगर कांग्रेस या कहे राहुल गांधी भी टोकनइज्म के हिन्दुत्व को पकड चुके है । तो मुश्किल बीजेपी के सामने कितनी गहरी होगी ये इससे भी समझा जा सकता है कि योगी का हिन्दुत्व और मोदी का विकास ही आपस में टकरायेगा । क्योंकि संयोग से दोनों का रास्ता टोकनइज्म का है । और गुजरात में बीजेपी के सामने उलझन यही है कि गुजरात माडल का टोकनइज्म टूट रहा है । औोर हिन्दुत्व के टोकनइज्म की सत्ता अभी बरकरार है ।

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केरल में बीजेपी की जनरक्षा यात्रा का नजारा राजनीति जमीन बनाने के लिये है । या फिर राज्य में राजनीतिक हिंसा को रोकने के लिये । ये सवाल अनसुलझा सा है । क्योंकि वामपंथी कैडर और संघ के स्वयंसेवकों का टकराव कितनी हत्या एक दूसरे की कर चुका है, इसे ना तो वामपंथियों के सत्ता पाने के बाद की हिंसा से समझा जा सकता है ना ही सत्ता ना मिल पाने की जद्दोजहद में संघ परिवार के सामाजिक विस्तार से जाना जा सकता है । मसलन एक तरफ बीजेपी और संघ के स्वयंसेवकों के नाम हैं तो दूसरी तरफ सीपीएम के कैडर के लोगो के नाम। सबसे खूनी जिले कुन्नुर में एक तरफ सीपीएम कैडर के तीस लोग हैं, दूसरी तरफ संघ के स्वयंसेवकों के 31 नाम है । सभी मारे जा चुके हैं। राजनीतिक हिंसा तले मारे गये। ये सब बीते 16 बरस की राजनीतिक हिंसा कासच है। और कुन्नूर की इस हिंसा के परे समूचे केरल का सच यही है । 2001 से 2016 तक कुल 172 राजनीतिक हत्यायें हो चुकी है । जिसमें बीजेपी-संघ के स्वयसेवको की संख्या 65 है तो सीपीएम के कैडर के 85 लोग मारे गये हैं। इसके अलावे कांग्रेस के 11 और आईयूएमएल के भी 11 कार्यकत्ता मारे गये है । तो राजनीतिक हिंसा किस राज्य में कितनी है इसके आंकडों के लिये सरकारी एंजेसी एनसीआरबी के आंकडो को भी देखा जा सकता है। जहां देश में पहले नंबर पर यूपी है तो केरल टाप 10 में भी नहीं आता।

लेकिन लड़ाई राजनीतिक है तो राजनीति के अक्स में ही केरल का सच समझना भी जरुरी है । क्योंकि आाजादी के बाद पहली बार लोकतंत्र की घज्जियां उड़ाते हये किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया तो वह केरल ही था और तब दिल्ली में नेहरु थे। और केरल में नंबूदरीपाद यानी 60 बरस के पहले कांग्रेस ने राजनीति दांव केरल को लेकर चला था । 60 बरस बाद केरल में वामपंथी विजयन की सत्ता है तो दिल्ली में मोदी है । तो दिल्ली की सत्ता तो काग्रेस से खिसक कर बीजेपी के पास आ गई । पर 60 बरस के दौर में बीजेपी केरल की जमीन पर राजनीतिक पैर जमा नहीं पायी । बावजूद इसके की संघ परिवार की सबसे ज्यादा शाखा आजकी तारिख में केरल में ही है । 5000 से ज्यादा शाखा। तो बीजेपी अब वाम सत्ता को लेकर आंतक-जेहाद और हिंसक सोच से जोड़ रही है । तो अब चाहे खूनी राजनीति को लेकर सियासत हो । लेकिन 60 बरस पहले चर्च के अधिन चलने वाले स्कूल कालेजो पर नकेल कसने का सवाल था । तब नंबूदरीपाद चाहते थे निजी स्कूलो में वेतन बेहतर हो । काम काज का वातावरण अच्छा हो ।

और इसी पर 1957 में शिक्षा विधेयक लाया गया । कैथोलिक चर्च ने विरोध कर दिया । क्योकि उसके स्कूल-कालेजो की तादाद खासी ज्यादा थी । नायर समुदाय के चैरिटेबल स्कूल-कालेज थे । तो उसने भी विरोध कर दिया । तो उस वक्त काग्रेस नायर समुदाय के लीडर मनन्त पद्ननाभा पिल्लई के पीछे खडी हो गई । और आंदोलन को उसने राजनीतिक हवा दी । हडताल, प्रदर्शन, दंगे से होते हुये आंदोलन इतना हिसंक हो गया कि पुलिस ने 248 जगहो पहर लाठीचार्ज किया और तीन जगहो पर गोली चला दी ।डेढ लाख प्रदर्शन कारियो को जेल में ढूसा गया । और जुलाई 1959 में जब एक गर्भवती मधुआरिन पुलिस की गोली से मारी गई तो उसने आंदोलन की आग में धी का काम किया । और नंबूदरीपाद के मुरीद नेहरु भी तब काग्रेसी सियासत के दवाब में आ गये । वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के विरोध और राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद के अनिच्छा भरी सहमति के वाबजूद आजाद भारत में पहली बार चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने का एलान 31 जुलाई 1959 को कर दिया गया । उसके बाद काग्रेस अपने बूते तो नहीं लेकिन यूडीएफ गठबंधन के आसरे सत्ता में जरुर आई । पर सीपीएम को पूरी तरह डिगा नहीं पायी । पर संघ अपने विस्तार को अब राजनीतिक जुबान देना चाहता है तो पहली बार जनरक्षा यात्रा के दौरान मोदी सरकार के हर मंत्री को केरल की सडक पर कदमताल करना है । जिससे मैसेज यही जाये कि सवाल सिर्फ केरल का नहीं बल्कि देश का है । तो केरल की वामपंथी सरकार अपना किला कैसे बचायेगी या फिर किला नहीं ढहा तो जो प्रयोग नेहरु ने राष्ट्रपति शासन लगाकर किया था क्या उसी रास्ते मोदी चल निकलेगें । ये सवाल तो है ।

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तो गौरी लंकेश की हत्या हुई। लेकिन हत्या किसी ने नहीं की। यह ऐसा सिलसिला है, जिसमें या तो जिनकी हत्या हो गई उनसे सवाल पूछा जायेगा, उन्होंने जोखिम की जिन्दगी को ही चुना। या फिर हमें कत्ल की आदत होती जा रही है क्योंकि दाभोलकर, पंसारे, कलबुर्गी के कत्ल का जब हत्यारा कोई नहीं है तो फिर गौरी लंकेश की हत्या के महज 48 घंटो के भीतर क्या हम ये एलान कर सकते हैं कि अगली हत्या के इंतजार में शहर दर शहर विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं। पत्रकार, समाजसेवी या फिर बुद्दिजीवियों के इस जमावड़े के पास लोकतंत्र का राग तो है लेकिन कानून का राज देश में कैसे चलता है ये हत्याओ के सिलसिले तले उस घने अंधेरे में झांकने की कोशिश तले समझा जा सकता है। चार साल बाद भी नरेन्द्र दामोलकर के हत्यारे फरार हैं। दो बरस पहले गोविंद पंसारे की हत्या के आरोपी समीर गायकवाड को जमानत मिल चुकी है । कलबुर्गी की हत्या के दो बरस हो चुके है लेकिन हत्यारो तक पुलिस पहुंची नहीं है। कानून अपना काम कैसे कर रही है कोई नहीं जानता। तो फिर गौरी लंकेश की हत्या जिस सीसीटीवी कैमरे ने कैद भी की वह कैसे हत्यारों को पहचान पायेगी। क्योकि सीसीटीवी को देखने समझने वाली आंखें-दिमाग तो राजनीतिक सत्ता तले ही रेंगती हैं। और सत्ता को विचारधारा से आंका जाये या कानून व्यवस्था के कठघरे में परखा जाये। क्योंकि दाभोलकर और पंसारे की हत्या को अंजाम देने के मामले में सारंग अकोलकर और विनय पवार आजतक फरार क्यों हैं। और दोनों ही अगर हत्यारे है तो फिर 2013 में दाभोलकर की हत्या के बाद 2015 में पंसारे की हत्या भी यही दोनों करते हैं तो फिर कानून व्यवस्था का मतलब होता क्या है। महाराष्ट्र के पुणे शहर में दाभोलकर की हत्या कांग्रेस की सत्ता तले हुआ। महाराष्ट्र के ही कोल्हापुर में पंसारे की हत्या बीजेपी की सत्ता तले हुई। हत्यारों को कानून व्यवस्था के दायरे में खड़ा किया जाये। तो कांग्रेस-बीजेपी दोनों फेल है। और अगर विचारधारा के दायरे में खड़ा किया जाये तो दोनो की ही राजनीतिक जमीन एक दूसरे के विरोध पर खडी है।

यानी लकीर इतनी मोटी हो चली है कि गौरी लंकेश की हत्या पर राहुल गांधी से लेकर मोदी सरकार तक दुखी हैं। संघ परिवार से लेकर वामपंथी तक भी शोक जता रहे हैं। और कर्नाटक के सीएम भी ट्वीट कर कह रहे हैं, ये लोकतंत्र की हत्या है। यानी लोकतंत्र की हत्या कलबुर्गी की हत्या से लेकर गौरी शंकर तक की हत्या में हुई। दो बरस के इस दौर में दो दो बार लोकतंत्र की हत्या हुई। तो फिर हत्यारों के लोकतंत्र का ये देश हो चुका है। क्योंकि सीएम ही जब लोकतंत्र की हत्या का जिक्र करें तो फिर जिम्मेदारी है किसकी। या फिर हत्याओ का ये सिलसिला चुनावी सियासत के लिये आक्सीजन का काम करने लगा है। और हर कोई इसका अभयस्त इसलिये होते चला जा रहा है क्योंकि विसंगतियों से भरा चुनावी लोकतंत्र हर किसी को घाव दे रहा है। तो जो बचा हुआ है वह उसी लोकंतत्र का राग अलाप रहा हैं, जिसकी जरुरत हत्या है। या फिर हत्यारो को कानूनी मान्यता चाहे अनचाहे राजनीतिक सत्ता ने दे दी है। क्योंकि हत्याओं की तारीखों को समझे। अगस्त 2013 , नरेन्द्र दाभोलकर की हत्या। फरवरी 2015 गोविन्द पंसारे की हत्या। अगस्त 2015 एमएम कलबुर्गी की हत्या। 5 सितंबर 2017 गौरी लंकेश की हत्या। गौरतलब है कि तीनों हत्याओं में मौका ए वारदात से मिले कारतूस के खोलों के फोरेंसिक जांच से कलबुर्गी-पानसारे और दाभोलकर-की हत्‍या में इस्‍तेमाल हथियारों में समानता होने की बात सामने आई थी। बावजूद इसके हत्यारे पकड़े नहीं जा सके हैं। तो सवाल सीधा है कि गौरी लंकेश के हत्यारे पकड़े जाएंगे-इसकी गारंटी कौन लेगा? क्योंकि गौरी लंकेश की हत्या की जांच तो एसआईटी कर रही है, जबकि दाभोलकर की हत्या की जांच को सीबीआई कर चुकी है, जिससे गौरी लंकेश की हत्या के मामले में जांच की मांग की जा रही है। तो क्या गौरी लंकेश की हत्या का सबक यही है कि हत्यारे बेखौफ रहे क्योकि राजनीतिक सत्ता ही लोकतंत्र है जो देश को बांट रहा है ।

या फिर अब ये कहे कि कत्ल की आदत हमें पड़ चुकी है क्योंकि चुनावी जीत के लिये हत्या भी आक्सीजन है। और सियासत के इसी आक्सीजन की खोज में जब पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट निकलते है तो उनकी हत्या हो जाती है। क्योंकि जाति, धर्म या क्षेत्रियता के दायरे से निकलकर जरा इन नामों की फेरहिस्त देखे। मोहम्मद ताहिरुद्दीन,ललित मेहता,सतीश शेट्टी,अरुण सावंत ,विश्राम लक्ष्मण डोडिया ,शशिधर मिश्रा, सोला रंगा राव,विट्ठल गीते,दत्तात्रेय पाटिल, अमित जेठवा, सोनू, रामदास घाड़ेगांवकर, विजय प्रताप, नियामत अंसारी, अमित कपासिया,प्रेमनाथ झा, वी बालासुब्रमण्यम,वासुदेव अडीगा ,रमेश अग्रवाल ,संजय त्यागी ।

तो ये वो चंद नाम हैं-जिन्होंने सूचना के अधिकार के तहत घपले-घोटाले या गडबड़झालों का पर्दाफाश करने का बीड़ा उठाया तो विरोधियों ने मौत की नींद सुला दिया। जी-ये लिस्ट आरटीआई एक्टविस्ट की है। वैसे आंकड़ों में समझें तो सूचना का अधिकार कानून लागू होने के बाद 66 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है ।159 आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हमले हो चुके हैं और 173 ने धमकाने और अत्याचार की शिकायत दर्ज कराई है । यानी इस देश में सच की खोज आसान नहीं है। या कहें कि जिस सच से सत्ता की चूलें हिल जाएं या उस नैक्सस की पोल खुल जाए-जिसमें अपराधी और सत्ता सब भागीदार हों-उस सच को सत्ता के दिए सूचना के अधिकार से हासिल करना भी आसान नहीं है। दरअसल, सच सुनना आसान नहीं है। और सच को उघाड़ने वाले आरटीआई एक्टविस्ट हों या जर्नलिस्ट-सब जान हथेली पर लेकर ही घूमते हैं। क्योंकि पत्रकारों की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट की रिपोर्ट कहती है कि भारत में पत्रकारों को काम के दौरान पूरी सुरक्षा नहीं मिल पाती। भ्रष्टाचार और राजनीति तो खतरनाक बीट हैं । 1992 के बाद 27 ऐसे मामले दर्ज हुए,जिनमें पत्रकारों को उनके काम के सिलसिले में कत्ल किया गया लेकिन किसी एक भी मामले में आरोपियों को सजा नहीं हो सकी । तो गौरी लंकेश के हत्यारों को सजा होगी-इसकी बहुत उम्मीद नहीं की जा सकती। लेकिन-एक तरफ सवाल वैचारिक लड़ाई का है तो दूसरी तरफ सवाल कानून व्यवस्था का है। क्योंकि सच यही है कि बेंगलुरु जैसे शहर में अगर एक पत्रकार की घर में घुसकर हत्या हो सकती है तो देश के किसी भी शहर में पत्रकार-आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या हो सकती है-और उन्हें कोई बचा नहीं सकता। यानी अब गेंद सिद्धरमैया के पाले में है कि वो दोषियों को सलाखों के पीछे तक पहुंचवाएं। क्योंकि मुद्दा सिर्फ एक हत्या का नहीं-मीडिया की आजादी का भी है। और सच ये भी है कि मीडिया की आजादी के मामले में भारत की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स की 2107 की वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम रैकिंग कहती है कि भारत का 192 देशों में नंबर 136वां है । और इस रैंकिंग का आधार यह है कि किस देश में पत्रकारों को अपनी बात कहने की कितनी आजादी है। और जब आजादी कटघरे में है तो हत्यारे कटघरे में कैसे आयेंगे।

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यह चिट्ठी 13 मई 2002 को तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को लिखी गई थी। इस खत में एक लड़की ने सिरसा डेरा सच्चा सौदा में गुरु राम रहीम के हाथों अपने यौन शोषण का वाकया बताया था।

सेवा में,

माननीय प्रधानमंत्री महोदय जी

श्री अटल बिहारी वाजपेयी, भारत सरकार

विषय : डेरे के महाराज द्वारा सैकड़ों लड़कियों से बलात्कार की जांच करें।
श्रीमान जी,

यह है कि मैं पंजाब की रहने वाली हूं और अब पांच साल से डेरा सच्चा सौदा सिरसा, हरियाणा (धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा) में साधु लड़की के रूप में सेवा कर रही हूं। मेरे साथ यहां सैकड़ों लड़कियां भी डेरे में 18-18 घंटे सेवा करती हैं। हमारा यहां शारीरिक शोषण किया जा रहा है। साथ में डेरे के महाराज गुरमीत सिंह द्वारा योनिक शोषण (बलात्कार) किया जा रहा है। मैं बीए पास लड़की हूं। मेरे परिवार के सदस्य महाराज के अंध श्रद्धालु हैं जिनकी प्रेरणा से मैं डेरे में साधु बनी थी। साधु बनने के दो साल बाद एक दिन महाराज गुरमीत की परम शिष्या साधु गुरुजोत ने रात के 10 बजे मुझे बताया कि आपको पिता जी ने गुफा (महाराज के रहने का स्थान) में बुलाया है। मैं क्योंकि पहली बार वहां जा रही थी, मैं बहुत खुश थी। यह जानकर कि आज खुद परमात्मा ने मुझे बुलाया है। गुफा में ऊपर जाकर जब मैंने देखा महाराज बेड पर बैठे हैं। हाथ में रिमोट है, सामने टीवी पर ब्लू फिल्म चल रही है। बेड पर सिरहाने की ओर रिवॉल्वर रखा हुआ है। मैं यह सब देखकर हैरान रह गई। मुझे चक्कर आने लगे। मेरे पांव के नीचे की जमीन खिसक गई। यह क्या हो रहा है। महाराज ऐसे होंगे? ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। महाराज ने टीवी को बंद किया व मुझे साथ बिठाकर पानी पिलाया और कहा कि मैंने तुम्हें अपनी खास प्यारी समझकर बुलाया है। मेरा यह पहला दिन था। महाराज ने मेरे को बांहों में लेते हुए कहा कि हम तुझे दिल से चाहते हैं। तुम्हारे साथ प्यार करना चाहते हैं क्योंकि तुमने हमारे साथ साधु बनते वक्त तन-मन-धन सब सतगुरु के अर्पण करने को कहा था। तो अब ये तन-मन हमारा है। मेरे विरोध करने पर उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं हम ही खुदा हैं। जब मैंने पूछा कि क्या यह खुदा का काम है तो उन्होंने कहा –

1 – श्री कृष्ण भगवान थे, उनके यहां 360 गोपियां थीं जिनसे वह हर रोज प्रेम लीला करते थे। फिर भी लोग उन्हें परमात्मा मानते हैं, यह कोई नई बात नहीं है।

2 – यह है कि हम चाहें तो इस रिवॉल्वर से तुम्हारे प्राण पखेरू उड़ाकर दाह संस्कार कर सकते हैं। तुम्हारे घरवाले इस प्रकार से हमारे पर विश्वास करते हैं व हमारे गुलाम हैं। वह हमारे से बाहर जा नहीं सकते। यह तुमको अच्छे से पता है।

3 – यह कि हमारी सरकार में बहुत चलती है। हरियाणा व पंजाब के मुख्यमंत्री, पंजाब के केंद्रीय मंत्री हमारे चरण छूते हैं। राजनीतिज्ञ हमसे समर्थन लेते हैं, पैसा लेते हैं और हमारे खिलाफ कभी नहीं जाएंगे। हम तुम्हारे परिवार के नौकरी लगे सदस्यों को बर्खास्त करवा देंगे। सभी सदस्यों को अपने सेवादारों (गुडों) से मरवा देंगे। सबूत भी नहीं छोड़ेंगे। यह तुम्हें अच्छी तरह पता है कि हमने गुंडों से पहले भी डेरे के प्रबंधक फकीर चंद को खत्म करवा दिया था जिनका अता-पता तक नहीं है। ना ही कोई सबूत बकाया है। जो कि पैसे के बल पर हम राजनीतिक व पुलिस और न्याय को खरीद लेंगे

इस तरह मेरे साथ मुंह काला किया और पिछले तीन मास में 20-30 दिन बाद किया जा रहा है। आज मुझको पता चला कि मेरे से पहले जो लड़कियां रहती थीं, उन सबके साथ मुंह काला किया गया है। डेरे में मौजूद 35-40 साधु लड़की 35-40 वर्ष की उम्र से अधिक हैं जो शादी की उम्र से निकल चुकी हैं। जिन्होंने परिस्थितियों से समझौता कर लिया है। इनमें ज्यादातर लड़कियां बीए, एमए, बीएड, एमफिल पास हैं मगर घरवालों के अंधविश्वासी होने के कारण नरक का जीवन जी रही हैं।

हमें सफेद कपड़े पहनना, सिर पर चुन्नी रखना, किसी आदमी की तरफ आंख न उठाकर देखना, आदमी से 5-10 फुट की दूरी पर रहना महाराज का आदेश है लेकिन दिखाने में देवी हैं मगर हमारी हालत वेश्याओं जैसी है। मैंने एक बार अपने परिवारवालों को बताया कि डेरे में सबकुछ ठीक नहीं है तो मेरे घर वाले गुस्से में होते हुए कहने लगे कि अगर भगवान के पास रहते हुए ठीक नहीं है तो ठीक कहां है। तेरे मन में बुरे विचार आने लग गए हैं। सतगुरु का सिमरण किया कर। मैं मजबूर हूं। यहां सतगुरु का आदेश मानना पड़ता है। यहां कोई भी दो लड़कियां आपस में बात नहीं कर सकतीं। घरवालों को टेलिफोन मिलाकर बात नहीं कर सकतीं। घरवालों का हमारे नाम फोन आए तो हमें बात करने का महाराज के आदेशानुसार हुक्म नहीं है। यदि कोई लड़की डेरे की इस सच्चाई के बारे में बात करती है तो महाराज का हुक्म है कि उसका मुंह बंद कर दो। पिछले दिनों बठिण्डा की लड़की साधु ने जब महाराज की काली करतूतों का सभी लड़कियों के सामने खुलासा किया तो कई साधु लड़कियों ने मिलकर उसे पीटा। जो आज भी घर पर इस मार के कारण बिस्तर पर पड़ी है। जिसका पिता ने सेवादारों से नाम कटवाकर चुपचाप घर बैठा दिया है। जो चाहते हुए भी बदनामी और महाराज के डर से किसी को कुछ नहीं बता रही।

एक कुरुक्षेत्र जिले की एक साधु लड़की जो घर आ गई है, उसने अपने घर वालों को सब कुछ सच बता दिया है। उसका भाई बड़ा सेवादार था, जो कि सेवा छोड़कर डेरे से नाता तोड़ चुका है। संगरूर जिले की एक लड़की जिसने घर आकर पड़ोसियों को डेरे की काली करतूतों के बारे में बताया तो डेरे के सेवादार / गुंडे बंदूकों से लैस लड़की के घर आ गए। घर के अंदर से कुंडी लगाकर जान से मारने की धमकी दी व भविष्य में किसी से कुछ भी नहीं बताने को कहा। इसी प्रकार कई लड़कियां जैसे कि जिला मानसा (पंजाब), फिरोजपुर, पटियाला, लुधियाना की हैं। जो घर जाकर भी चुप हैं क्योंकि उन्हें जान का खतरा है। इसी प्रकार जिला सिरसा, हिसार, फतेहबाद, हनुमान गढ़, मेरठ की कई लड़कियां जो कि डेरे की गुंडागर्दी के आगे कुछ नहीं बोल रहीं।

अत: आपसे अनुरोध है कि इन सब लड़कियों के साथ-साथ मुझे भी मेरे परिवार के साथ जान से मार दिया जाएगा अगर मैं इसमें अपना नाम-पता लिखूंगी। क्योंकि मैं चुप नहीं रह सकती और ना ही मरना चाहती हूं। जनता के सामने सच्चाई लाना चाहती हूं। अगर आप प्रेस के माध्यम से किसी भी एजेंसी से जांच करवाएं तो डेरे में मौजूद 40-45 लड़कियां जो कि भय और डर में हैं। पूरा विश्वास दिलाने के बाद सच्चाई बताने को तैयार हैं। हमारा डॉक्टरी मुआयना किया जाए ताकि हमारे अभिभावकों व आपको पता चल जाएगा कि हम कुमारी देवी साधु हैं या नहीं। अगर नहीं तो किसी के द्वारा बर्बाद हुई हैं। ये बता देंगे कि महाराज गुरमीत राम रहीम सिंह जी, संत डेरा सच्चा सौदा के द्वारा तबाह की गई हैं।

– प्रार्थी

एक निर्दोष जलालत का जीवन जीने को मजबूर (डेरा सच्चा सौदा सिरसा)

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अहमद पटेल की जीत ही लाज़िमी थी। जिस सीट को जीतने के लिये 47 विधायकों की ज़रूरत थी, कांग्रेस के पास 57 विधायक थे। फिर भी, मोदी-शाह बदनाम जोड़ी ने अपनी अनैतिकताओं की पूरी ताकत झोंक कर इसे लाज़िमी-ग़ैर-लाज़िमी के बीच की सीधी टक्कर का रूप दे दिया। पूरी नंगई से विधायकों की खरीद-फ़रोख़्त में उतर गये। जनता के बीच पूरी ताकत के साथ एक ही बात फैलायी गई कि इसे ही ‘संसदीय जनतंत्र’ कहते हैं।

कांग्रेस ने कैसे अहमद पटेल की इस जीत को सुनिश्चित किया, एनसीपी और जेडीयू के एक-एक विधायक ने उसे कैसे बल दिया, इस पूरी कहानी को सब जानते हैं। मोदी-शाह के गुंडों, पुलिस और वाघेला की तरह के घुटे हुए सत्ता के दलालों की मार से बचने के लिये उनके विधायकों को गुजरात को छोड़ कर बंगलुरू तक जाना पड़ा।

जनतंत्र में अब जनता की भूमिका नहीं

इस सीट को लेकर गुजरात में अमित शाह ने जो किया और इधर सभी राज्यों में दूसरे दलों के जन-प्रतिनिधियों को दबाव में लाकर तोड़ने का जो काम मोदी-शाह गिरोह कर रहा है, उसकी गहराई में जाने पर यही कहा जा सकता है कि वे सचेत रूप से जनता में यह संदेश देना चाहते हैं कि संसदीय जनतंत्र में अब जनता की कोई भूमिका नहीं बची है। जनता किसी भी दल के प्रतिनिधि को क्यों न चुने, सबको अंबानी-अडानी की धन शक्ति और मोदी-शाह की राज-शक्ति का गुलाम बन कर ही रहना होगा!

इस प्रकार वास्तविक अर्थों में वे राज्य में अपनी सर्वशक्तिमत्ता को स्थापित करके, जन-प्रतिनिधियों को ग़ुलामों में बदल कर पूरी संसदीय जनतांत्रिक प्रणाली को जनता की नज़रों में बिल्कुल लुंज-पुंज और निरर्थक बना दे रहे हैं। ढेर सारे जन-प्रतिनिधियों को सीबीआई, आयकर विभाग इत्यादि के दुरुपयोग से नाना मुक़दमों में फंसा कर उनकी संसदीय निरापदता को मज़ाक़ का विषय बना कर छोड़ दे रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार से लड़ाई का मतलब यही है कि विपक्ष के जन-प्रतिनिधियों की कोई हैसियत नहीं रहनी चाहिए। जन-प्रतिनिधियों की साख को इस प्रकार सुचिंतित ढंग से गिराना पूरी संसदीय प्रणाली की साख को ही गिराने का एक ऐसा सुनियोजित काम है, जिसकी पृष्ठभूमि में मोदी-शाह-संघ की तिकड़ी अपनी हर प्रकार की असंवैधानिक, ग़ैर-कानूनी या माफ़िया वाली हरकतों को बिना किसी रोक-टोक के धड़ल्ले से चला सके।

मोदी को अपराजेय बनाने की कोशिश

अभी जिस प्रकार मोदी जी के रुतबे को बढ़ाने का अभियान चल रहा है, उसी अनुपात में जनता के सभी व्यक्तिगत प्रतिनिधियों के सम्मान को घटाने की भी समानान्तर प्रक्रिया चल रही है। जिस हद तक जन प्रतिनिधि बौने होते जायेंगे, संसद की अवहेलना करने के लिये कुख्यात एक कोरे लफ़्फ़ाज़ प्रधानमंत्री का व्यक्तित्व अधिक से अधिक विराट दिखाई देने लगेगा। हिटलर के आगमन की प्रतीक्षा में सालों से लाठियाँ भांज रहे आरएसएस के लोग अब उसी हद तक ढोल-मृदंग बजाते उसकी आरती की तैयारियों के लिये उन्मादित दिखाई देने लगे हैं। इनकी मदद के लिये ‘सब चोर हैं, सब चोर हैं’ का शोर मचाने वाले ‘क्रांति वीरों’ की एक गाल बजाऊ फ़ौज भी पहले से लगी हुई है ।

वे 2019 की तैयारी में ऐसे तमाम लोगों को अभी से डराने-धमकाने में लग गये हैं जिनमें स्वाधीनता का लेश मात्र भी बचा हुआ हो ताकि 2019 के तूफ़ान के साथ भारत में संसदीय जनतंत्र के पूरे तंबू को ही उखाड़ कर हवा में उड़ा दिया जाए।

गैरमामूली है गुजरात की जीत

2019 के चुनाव में हर स्तर पर तमाम प्रकार की धांधलियों के जरिये चुनाव को पूरी तरह से लूट लेने का मोदी-शाह कंपनी ने जो सपना देखना शुरू किया है, उत्तर प्रदेश की जीत के बाद बिहार में अपनी सरकार बनाने और भाजपा से बचे हुए बाकी सभी राज्यों में जनतंत्र के अपने यमदूतों को दौड़ाने का जो सिलसिला शुरू किया गया है, उसमें गुजरात की राज्य सभा की इस एक सीट को जीतने की कोशिश काफी तात्पर्यपूर्ण थी। वे कांग्रेस के उम्मीदवार की सौ फ़ीसदी निश्चित जीत को हार में बदल कर आम लोगों के बीच मोदी-शाह की अपराजेयता का एक ऐसा हौवा खड़ा करना चाहते थे ताकि आगे की उनकी और भी बड़ी-बड़ी जनतंत्र-विरोधी साज़िशों के विरुद्ध किसी प्रकार की कोई आवाज उठाने की कल्पना भी न कर सके और जनता भी इन षड़यंत्रकारियों को ही अपनी अंतिम नियति मान कर पूरी तरह से निस्तेज हो जाए ।

गुजरात में कांग्रेस दल की सक्रियता और अंतिम समय तक चुनाव आयोग के सामने भी उनकी दृढ़ता ने अमित शाह के इन मंसूबों पर काफी हद तक पानी फेरने का काम किया है। इसमें एनसीपी के एक सदस्य और जेडीयू के एक सदस्य ने भी उनका साथ दिया है। यह प्रतिरोध के एक नये संघर्ष के प्रारंभ का बिंदु साबित हो सकता है। जेडीयू के शरद यादव ने मोदी के दिये गये लालच को ठुकरा कर बिहार की सरज़मीन पर ही कौड़ियों के मोल बिकने वाले नीतीश कुमार को चुनौती देने का बीड़ा उठाया है।

विधानसभा चुनावों में दिखेगा इसका असर

इधर दूसरे ग़ैर-भाजपाई प्रमुख दलों ने भी भाजपा के खिलाफ संयुक्त अभियान में कांग्रेस के नेतृत्व में एक नये अभियान के साथ अपने को जोड़ने की प्रतिबद्धता का ऐलान किया है। गुजरात की इस पराजय का चंद महीनों बाद ही इस राज्य में होने वाले विधान सभा के चुनावों पर निश्चित तौर पर गहरा असर पड़ेगा। वहाँ वैसे ही जनता के बीच से भाजपा की ज़मीन खिसकने के सारे संकेत मिल रहे हैं । वे इसी जनता की चेतना को कमज़ोर करके और मोदी के चमत्कार को बढ़ा-चढ़ा कर बता कर जीतने के फेर में हैं । कांग्रेस के 43 विधायकों ने अपनी दृढ़ता का परिचय देकर इनके जहाज़ में इतना बड़ा सुराख़ पैदा कर दिया है कि आने वाले गुजरात चुनाव को पार करना भी इनके लिये कठिन होगा ।

कहना न होगा, यहीं से भाजपा के जहाज़ के डूबने का जो सिलसिला शुरू होगा, 2019 का आम चुनाव निश्चित तौर पर मोदी-शाह का वाटरलू साबित होगा। आज के टेलिग्राफ़ में अहमद पटेल की जीत की खबर की बहुत सही सुर्खी लगाई है – ‘अमित शाह आया, देखा और फुस्स हो गया’ (Amit Shah came, saw & flopped)।

(अरुण माहेश्वरी वरिष्ठ साहित्यकार, स्तंभकार और लेखक हैं। आजकल कोलकाता में रहते हैं।)

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आतंकवाद खत्म करना अवश्य सरल है लेकिन वह जो उसके आविष्कारक हैं वे इसे खत्म नहीं करना चाहते क्योंकि इसी में उनका लाभ है-दुनिया हैरान है कि यह कैसे मुसलमान हैं जो अपने आप को एक दूसरे के भाई कहते हैं, लेकिन आपस में इतना लड़ते झगड़ते हैं कि एक दूसरे की जान व माल का लिहाज़ नहीं करते और नरसंहार में व्यस्त रहते हैं।कुछ मुसलमान हज़रात जो विद्वान और अहले दानिश (बुद्धिजीवी) हैं वे भी इस बात से परेशान और दुखी हैं कि यह कैसा समय आ गया जहां विशेषतः इराक, सीरिया, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में एक मुस्लिम दुसरे मुस्लिमों की खून का प्यासा बन गया है। यह मुसलमान हजारों नहीं बल्की लाखों अपने ही भाईयों का नरसंहार कर रहा है। सब नमाज़ी, सब रोज़ेदार और सब हुलिया से दीनदार लेकिन एक बहुत बड़ा तबका इसी की आड़ में और इस्लाम के नाम पर एक दूसरे के खून का प्यासा है।आईएसआईएस के युवाओं को और तालिबान को देखें तो सब का हुलिया दीनदार, सभी की ज़ुबानों पर कलमा और तकबीर लेकिन सब खूनी भेड़िये। हर कोई समझ रहा है कि यह समय बहुत ही खराब और पुर फितन है।लेकिन जिन लोगों ने इस्लामी इतिहास का अध्ययन किया है वे जानते हैं कि यह ऐसा पहली बार और अंतिम बार नहीं हो रहा है।इस श्रृंखला की शुरुआत हमारे पैगंबर की मृत्यु के तीन साल बाद हुई,उसमान रादिअल्लाहु अन्हु के समय से शुरू हुई। खुद सहाबा ए किराम एक दुसरे के खिलाफ लामबंद हो गए और हजारों शहीद कर दिए गए।

हक़ पर कौन था और कौन हक़ पर नहीं यह अलग मामला है मरे और उजड़ें तो सही। सिफ्फीन की जंग क्या थी? सब कुरआन के हाफिज़ सब कुरआन के हर आदेशों को जानते थे,लेकिन बहुमत क्या करती थी? इखलास और लिल्लाहियत का क्या हुवा?हज़रत अली, जिन्होंने इस्लाम के संरक्षण के लिए हर बलिदान दिया उन के साथ हजरत मुआविया रादिअल्लाहु अन्हु ने क्या सुलूक किया केवल पुत्र मोह में उसे अपना उत्तराधिकारी बनाया और बैतूल माल का रुपया अयोग्य लोगों को अपना हमनवा बनाने के लिए इस्तेमाल किया।लोगों से अपने लिए और अपने बेटे यज़ीद के लिए शक्ति के बल पर बैत ली। इनकार करने वालों को सज़ाएँ दीं और हत्या तक करने की अनुमति दे दी। यह सब लोग कौन थे, मुत्तक़ी और परहेज़गार थे और ईमान वाले थे। मारने वाले भी कुरआन और हदीस में विशेषज्ञ और मरने वाले भी। बहुत से सहाबी जो युद्धक्षेत्र में रुस्तम और असफंद यार के कारनामों को तुच्छ साबित कर रहे थे। वे सब अपनी तलवार और तीर धनुष को तोड़ कर घरों में आ बैठे और सिपह सालारी के काम से अलग होकर अध्यापन के काम में व्यस्त हो गए। हज़रत साद बिन अबी वक़ास जो ईरान के विजेता थे और कुदसिया के युद्ध का मैदान जीत चुके थे वे आंतरिक मतभेद के समय गोशा नशीनी और गुमनामी का जीवन अपने लिए पसंद करके ऊंटों और बकरियों की देखभाल में व्यस्त हो गए थे।चालाकियों,रेशा दानियों और फरेब कारियों के कामों से कोई जमाना खाली नहीं है।

हज़रत अमीर मुआविया को उत्तराधिकारी बनाने का विचार खुद अपने लाभ के लिये मुगिरा बिन शोअबा ने दिया था और इस तरह मुसलमानों में एक ऐसी रस्म जारी करवा दी जिससे लोकतंत्र जाती रही और पिता के बाद बेटा राजा होने लगा। यह रस्म इस्लामी आदेश के खिलाफ थी लेकिन आज भी जारी है और आज भी विरोध करने वालों को कैद या मार दिया जाता है। हज़रत इमाम हुसैन की शहादत के बाद बीस साल तक मक्का, मदीना, इराक और सीरिया के मुसलमानों में जो युद्ध हुईं वह आज के आइएसआइएस और तालिबान की लड़ाई से कम नहीं थीं। जब उस समय के हालात का अध्ययन करते हैं तो कलेजा मुंह को आ जाता है और दिल निकल कर हथेलियों में आ जाता है। इराक और कूफ़ा वालों की रेशा दानियाँ उनकी गद्दारी,उबैदुल्लाह बिन ज़्याद की ज़्यादती और बेरहमी यह सब आज के आईएसआइएस और तालिबान से कम नहीं हैं। अब्दुल्ला बिन जुबैर ने अपने भाषण में कहा था कि “लोगो!दुनिया में इराक के लोगों से बुरे कहीं आदमी नहीं हैं और ईराकियों में सबसे बदतर कुफी लोग हैं”। मुस्लिम बन उक़बा ने यज़ीद के आदेश से 27 ज़िल्हिज्जा 63 हिजरी में मदीना पर हमला किया और प्रवेश कर तीन दिन तक नरसंहार और लूटपाट का सिलसिला जारी रखा। जिसने यजीद के नाम पर बैत की वह बच गया और जिसने इंकार कर दिया वह मारा गया।

29 मुहर्रम को हुसैन बिन नुमैर ने कोह अबू कुबैस पर गुलेल स्थापित करके काबा पर पत्थरबाज़ी शुरू की और पत्थरबाज़ी तीन महीने तक चली। इससे काबा के गिलाफ जल गए और दीवारों काली हो गई जिसमें हजारों मुसलमान मारे गए, मुख्तार बिन अबू उबैदा का लड़ाई का सिलसिला चला, युद्ध ख्वारिज चली, मुख्तार का नुबुवत का दावा और कुर्सी अली कि घटना घटी,अब्दुल्ला बिन जुबैर के भाई मुसाब बिन ज़ुबैर की अधिकार और न्याय के लिए युद्ध और कुफे वालों का उनके साथ धोखा देकर हत्या करवाना, अब्दुल मलिक बिन मरवान का धोखे के साथ अम्र बिन सईद की हत्या करवाना यह सब आज के तालिबान और आईएसआईएस के अत्याचार से कम नहीं था।

(कुछ मुस्लिम विद्वानों का यह दावा है कि हुजुर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफात के केवल तीन साल बाद आपकी शिक्षाओं का असर सहाबा पर ख़त्म नहीं हो सकता और ऐसी नरसंहार हो नहीं सकती। इस्लामी इतिहास तो साठ सत्तर साल बाद लिखी गई और लिखने वाले शिया और खारजी थे जिन्होंने जानबूझ कर इतिहास को विकृत कर दिया और मुनाफिक यहूदी अब्दुल्ला बिन सबाह ने तक़वा और परहेज़गारी का लबादा ओढ़ कर इस्लाम के नाम पर बदले की कार्यवाही की (अल्लाह आलम)। क्या आज का मुसलमान कभी यह सोच सकता है कि वे काबा पर पत्थरबाज़ी करेगा या बमबारी करेगा?बिल्कुल नहीं। लेकिन 72हिजरी में हज्जाज बिन यूसुफ ने माहे रमज़ान में मक्के की घेराबंदी करके संगबारी की और कोहे सफा के निकट अब्दुल्लाह बिन जुबैर को शहीद करके सर तन से अलग कर दिया और लाश वहीं लटका दी। क्या आज कोई मुसलमान ऐसा करने की सोच सकता है?” कुफा वालों ने हमेशा शीआने अली शीआने हुसैन होने का दावा करने के बावजूद हज़रत अली का साथ छोड़ दिया,हज़रत इमाम हुसैन को,हज़रत मुसअब बिन ज़ुबैर को ज़ैद बिन अली बिन अल हुसैन को धोखा दिया और उन्हें क़त्ल करवा दिया। हाल में सद्दाम हुसैन ने क्या किया लाखों लोगों को जहरीली गैस से मरवा दिया। हाल के, बश्शार अल असद के पिता ने पचास हज़ार मुसलमानों को मौत के घाट उतार दिया। खुद बश्शार अल असद ने पांच लाख मुसलमानों को मार डाला और तीस लाख लोग घायल हो गए और लाखों लोगों को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान,सउदी ने लाखों तुर्क और दूसरों को बम और गोलियों के साथ उड़ा दिया।

यहां उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि मुसलमान को मुसलमान के ही मारने का सिलसिला तब भी था और अब भी है। तब भी नाम अल्लाह का और इस्लाम का लिया जाता था और आज भी वही हो रहा है। मुस्लिम खुद ही आपस में राजनीतिक सत्ता के लिए लड़ रहे थे,लेकिन अब पश्चिमी देश आग में पेट्रोल डाल रहे हैं। तालिबान और आईएसआईएस कैसे अस्तित्व में आए,किसने उनकी मदद की,किसने उन्हें धन और हथियार दिए,यह सभी को पता है सोचना यह है कि अमेरिका और यूरोप की इतनी बमबारी के बाद,इतने युद्ध और इतनी सावधानी के बाद,आतंकवाद समाप्त होने का नाम क्यों नहीं ले रही है?आइएसआइएस और तालिबान की दिन प्रति दिन बढ़ते ताकत का मतलब यह है कि कोई ऐसा व्यक्ति है जो उन्हें घातक हथियार प्रदान कर रहा है। जाहिर तौर पर इसके दो उद्देश्य नज़र आते है।एक यह कि मुस्लिम देश एक दूसरे से लड़ते रहे, हथियारों की आपूर्ति जारी रहे, और हथियार बनाने वाले कारखाने 24 घंटे चलती रहें और लाभ बढ़ता रहे।

दुसरे इस्राइल के आस पास रहने वाले देशों को इतना कमज़ोर कर दिया जाए कि वह इस्राइल कि ओर आँख उठा कर भी न देख सकें। एक और दृष्टिकोण है कि अमेरिका और इस्राइल चाहते हैं कि फिलस्तीनी जनता आत्मघाती हमलावर,पत्थरबजी,बमबारी और हड़ताल बंद करें और अरब देश इस्राइल को स्वीकार कर लें तब कहीं समस्या का हल बात चीत के माद्ध्यम से तय होगा । मगर न आत्मघाती हमला समाप्त होगा, न पत्थरबाज़ी, न बमबारी न ही हड़ताल और यह सिलसिला और पचास वर्ष भी चलता रहे गा जिससे दुनिया भर में दहशत और मौत बढ़ते रहेंगे। अच्छा यही है कि अमेरिका और इस्राइल ऐसे शर्त न रखते हुए बात चीत आरम्भ करें और शांति स्थापित करें। कौन जनता है आइएसआइएस में कितने गैर मुस्लिम मुसलमानों के हुलिए में मौजूद हैं और कितने मुसलमान अज्ञानता वश इस में शामिल हो गए हैं। हर हाल में आइएसआइएस और कट्टरपंथी तालिबान का खात्मा आवश्यक हो गया है वरना इन देशों के मुसलमान आराम और चैन से जी नहीं सकते। पश्चिमी देशों में ऐसे बहुत से लोग हैं जो इसका इलाज पेश कर रहे हैं मगर शासक इसे सुनने और मानने के लिए तैयार नहीं हैं। अब आतंकवाद एक ऐसे बीमारी में बदल चुकी है जो ला इलाज है। पश्चिमी देश खरबों डालर खर्च करने के लिए तैयार हैं मगर इसका विश्लेषण करने के लिए तैयार नहीं हैं। जो समस्याएँ बात चीत से और थोड़ा ले दे कर सुलझाए जा सकते हैं उनके लिए खरबों डालर और हजारों जानें गंवा रहे हैं।

12 सितंबर, 2017 स्रोत: रोजनाम मेरा वतन, नई दिल्ली

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थोथी बहादुरी का प्रदर्शन करने की अभ्यस्त फ़ौज की सेवा निवृत मूंछें अभी भी कह सकती हैं कि चीन जो कह रहा है, कोरी गीदड़ भभकी है। भारत की ताकत का उसे पूरा अनुमान है, इसीलिये वह ऐसा कोई कदम नहीं उठायेगा, जो दोनों देशों के बीच सीमित अथवा विस्तृत किसी भी प्रकार के युद्ध का कारण बन सकता है। और इसीलिये जब तक वैसा कोई अघटन नहीं घटता है, ये बैठे-ठाले फ़ौजी और शासक दल के मुखापेक्षी चैनल के ज़रख़रीद ऐंकर कहते रहेंगे – डोकलाम में हम अभी चालीस ही हैं तो क्या हुआ, चीन की समूची फ़ौज के लिये ये चालीस ही बहुत भारी हैं ; डटे रहो ! कोई तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर सकता।

किसी तरह की भूल बेहद खतरनाक

लेकिन हक़ीक़त में परिस्थिति इतनी आसान दिखाई नहीं देती है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के द्वारा संचालित अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ की बातों को यदि हमारी तमतमाती हुई सेवानिवृत फ़ौजी मूंछों की तरह गीदड़ भभकी मानने की भूल न करें तो कल ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने बहुत ही साफ शब्दों में डोकलाम में चीन की आगे की सैनिक रणनीति का पूरा नक़्शा बता दिया है। इसमें दो हफ़्ते के अंदर ही एक सीमित सैनिक कार्रवाई के जरिये भारतीय सैनिकों को डोकलाम के विवादित क्षेत्र से हटा देने की बात कही गई है।

पिछले चौबीस घंटों में चीन के छ: मंत्रालयों और संस्थाओं द्वारा जारी किये गये बयानों के आधार पर ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने अपना यह अनुमान पेश किया है। आज के ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित ‘ग्लोबल टाइम्स’ की टिप्पणी के बारे में रिपोर्ट में संघात एकेडमी आफ सोशल साइंसेस के अन्तरराष्ट्रीय संबंधों के शोधार्थी हू झियोंग के एक लेख को उद्धृत किया गया है जिसमें वे लिखते हैं कि ,” चौबीस घंटों के अंदर चीन की ओर से की गई एक के बाद एक टिप्पणियों के जरिये भारत को यह साफ संकेत दे दिया गया है कि चीन ज्यादा समय तक अपनी सीमा में भारतीय सैनिकों के अनुप्रवेश को सहन नहीं करेगा।”

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज संसद में।

कार्रवाई से पहले देगा सूचना

‘ग्लोबल टाइम्स’ को उन्होंने कहा कि अपनी कार्रवाई करने के पहले चीन भारत के विदेश मंत्रालय को सूचित कर देगा। हू के शब्दों में “भारत को इसके परिणाम भुगतने होंगे।”

भारत के विदेश मंत्रालय ने यद्यपि अब तक इस नये घटना-क्रम पर कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन भारत सरकार या उसके अधिकारियों के रुख़ में एक अजीब सी लापरवाही का नजरिया दिखाई देता है। वे संकट की इस घड़ी में जैसे ‘राम राम’ कहते हुए एक ही बात को बुदबुदा रहे हैं कि “युद्ध किसी चीज का इलाज नहीं है। परिस्थिति को तनाव मुक्त करने के लिये वे कूटनीतिक रास्तों का प्रयोग कर रहे हैं।”

हम नहीं जानते कि भारतीय पक्ष के इन ‘प्रयत्नों’ में  कितनी सचाई है और कितनी कोरी ख़ुशफ़हमी। लेकिन चीन की ओर से प्रतिदिन कड़े हो रहे बयानों से तो इन ‘कूटनीतिक प्रयत्नों’ की वास्तविकता की कोई झलक नहीं मिलती है। इधर के एक भी बयान में चीन ने भारत के साथ कूटनीतिक चैनल पर चल रही किसी भी वार्ता का कोई संकेत नहीं दिया है। यद्यपि इंडियन एक्सप्रेस की इसी रिपोर्ट में एक भारतीय सूत्र के हवाले से यह बताया गया है कि हू झियोंग हमेशा से एक भारत-विरोधी व्यक्ति रहे हैं और वे चीन के सैनिक संस्थान के प्रवक्ता नहीं हैं। वे वहां की केंद्रीय सरकार के ‘थिंक टैंक’ के सदस्य भी नहीं है, सिर्फ प्रांतीय स्तर के बुद्धिजीवी हैं।

नक्शे में डोकलाम।

तैयारियों का आ चुका है ब्योरा

वैसे ‘ग्लोबल टाइम्स’ के 5 अगस्त के संपादकीय में भारत के खिलाफ चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की युद्ध की भरपूर तैयारियों का एक ब्यौरा दिया गया है जिसमें कहा गया है कि यह युद्ध निश्चित परिणामों को हासिल करने के लिए लड़ा जायेगा। “यह युद्ध यदि फैलता है तो पीएलए के पास इतनी शक्ति है कि वह सीमाई क्षेत्र से भारत की फ़ौज का सफ़ाया कर दे।”

चीन की ओर से लगातार आ रहे इन भड़काऊ बयानों पर भारत की चुप्पी के कूटनीतिक महत्व को मानते हुए भी हम फिर यही दोहरायेंगे कि किसी भी स्थिति में ऐसे मामलों में भ्रम में नहीं रहना चाहिए। किसी भी राष्ट्र की बेखबरी कभी भी उसके लिये बहुत भारी साबित हो सकती है।

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अमेरिका में ट्रंप -मोदी का गले मिलना चीन से लेकर पाकिस्तान और ईरान तक के गले नहीं उतर रहा है । तो चीन सिक्किम और अरुणाचल में सक्रिय हो चला है। तो पाकिस्तान कश्मीर और अफगानिस्तान के लिये नई रणनीति बना रहा है और पहली बार अमेरिका के इस्लामिक टैररइज्म के जिक्र के बीच ईरान ने बहरीन, यमन के साथ साथ कश्मीर को लेकर इस्लामिक एकजुटता का जिक्र कहना शुरु कर दिया है। और इन नये हालातो के बीच चीन ने एक तरफ मानसरोवर यात्रा पर अपने दरवाजे से निकलता रास्ता बंद कर दिया है । तो दूसरी तरफ कल जम्मू से शुरु हो रही अमरनाथ यात्रा में अब तक सबसे कम रजिस्ट्रेशन हुआ है। जबकि परसों से भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकेंगे। तो क्या आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खडे हुये अमेरिका को लेकर साउथ-इस्ट एशिया नये तरीके से केन्द्र में आ गया है।

तो पहली बार अमेरिका ने आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ा और भारत ने इस्लामिक आंतकवाद का शब्द इस्तेमाल ना कर आतंकवाद को कट्टरता से जोड़ा है। बावजूद इसके तीन हालातो पर अब गौर करने की जरुरत है। पहला, ट्रंप ने नार्थ कोरिया का नाम लिया लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। दूसरा, ईरान को इस्लामिक टैररइज्म से ट्रंप जोड़ चुके हैं। लेकिन भारत ईरान पर खामोश है। तीसरा,ईरान कश्मीर के आतंक को इस्लाम से जोड़ इस्लामिक देशों के सहयोग की बात कर रही है। तो सवाल कई हैं मसलन आतंक को इस्लामिक टैररइज्म माना जाये। आतंक को दहशतगर्दों का आतंक माना जाये। आतंक को पाकिसातन की स्टेट पॉलेसी माना जाये। और अगर तीनों हालात एकसरीखे ही हैं सिर्फ शब्दो के हेर फेर का खेल है तो नया सवाल अमेरिका के अंतराष्ट्रीय आतंकवादियों की सूची सैयद सलाउद्दीन के डालने का है। क्योंकि अमेरिकी सूची में लश्कर का हाफिज सईद है। आईएसएस का बगदादी है। हक्कानी गुट का सिराजुद्दीन हक्कानी है । अलकायदा का जवाहरी है।

लेकिन इन तमाम आतंकवादियो की हिंसक आतंकी कार्रवाई लगातार जारी है । और अमेरिकी आंतकी सूची पर यूनाइटेड नेशन ने भी कोई पहल नही की । और खास बात ये है कि अमेरिका के ग्लोबल आतंकवादियों की सूची में 274 नाम है । इसी बरस 25 आतंकवादियों को इस सूची में डाला गया है । यानी नया नाम सैययद सलाउद्दीन का है तो नया सवाल कश्मीर का है। क्योंकि 1989 में सलाउद्दीन घाटी के इसी आतंकी माहौल के बीच सीमापार गया था और तभी से पाकिस्तान ने अभी तक सैय्यद सलाउ्द्दीन को अपने आतंक के लिये सलाउद्दीन को ढाल बनाया हुआ था। लेकिन सवाल है कि क्या वाकई अमेरिकी ग्लौबल टैरर लिस्ट में सैयद सलाउद्दीन का नाम आने से हिजबुल के आंतक पर नकेल कस जायेगी। तो जरा आतंक को लेकर अमेरिकी की समझ को भी पहले समझ लें । दरअसल 16 बरस पहले अमेरिकी वर्लड ट्रेड टावर पर अलकायदा के हमले ने अमेरिका को पहली बार आतंकवादियों की लिस्ट बनाने के लिये मजबूर किया ।

और बीते 16 बरस में अलकायदा के 34 आतंकवादियों को अमेरिका ने ग्लोबल टैरर लिस्ट में रख दिया । लेकिन आतंक का विस्तार जिस तेजी से दुनिया में होता चला गया उसका सच ये भी रहा कि बीते सोलह बरस में एक लाख से ज्यादा लोग आतंकी हिंसा में मारे गये । और अमेरिकी टेरर लिस्ट में अलकायदा के बाद इस्लामिक स्टेट यानी आईएस के 33 आतंकवादियों के नाम शामिल हुये। लेबनान में सक्रिय हिजबुल्ला के 13 आतंकवादी तो हमास के सात आंतकवादियो को ग्लोबल टैटरर लिस्ट में अमेरिका ने डाल दिया । अमेरिकी लिस्ट में लश्कर और हक्कानी गुट के चार चार आतंकवादियों को भी डाला गया । यानी कुल 274 आंतकवादी अमेरिकी लिस्ट में शामिल है । और अब कल ही सैयद सलाउद्दीन का नाम भी अमेरिकी ग्लोबल टैरर लिस्ट में आ गया । तो याद कर लीजिये जब पहली बार सलाउद्दीन ने बंदूक ठायी थी । 1987 के चुनाव में कश्मीर के अमिरकदल विधानसभा सीट से सैयद सलाउद्दीन जो तब मोहम्मद युसुफ शाह के नाम से जाना जाता था। मुस्लिम यूनाइटेड फ्रांट के टिकट पर चुनाव लड़ा। हार गया। या कहें हरा दिया गया। तब युसुफ शाह का पोलिंग एंजेट यासिन मलिक था। जो अभी जेकेएलएफ का मुखिया है। और पिछले दिनो पीडीपी सांसद मुज्जफर बेग ने कश्मीर के हालात का बखान करते करते जब 1987 का जिक्र ये कहकर किया कि सलाउद्दीन हो या यासिन मलिक उनके हाथ में बंदूक हमने थमायी। यानी उस चुनावी व्यवस्था ने दिल्ली के इशारे पर हमेशा लूट लिया गया। तो समझना होगा कि अभी कश्मीर में सत्ता पीडीपी की ही है। और पहली बार कश्मीर की सत्ता में पीडीपी की साथी बीजेपी है जिसे घाटी में एक सीट पर भी जीत नहीं मिली।

इसी दौर में पहली बार किसी कश्मीरी आतंकवादी का नाम अमेरिका के अपनी ग्लोबल टैरर लिस्ट में डाला है। यानी उपरी तौर पर कह सकते हैं कि पाकिस्तान को पहली बार इस मायने में सीधा झटका लगा है कि कश्मीर की हिंसा को वह अभी तक फ्रीडम स्ट्रगल कहता रहा। कभी मुशर्रफ ने कहा तो पिछले दिनो नवाज शरीफ ने यूनाइटेड नेशन में कहा। और इसकी वजह यही रही कि भारत ने कश्मीरियों की हिसा को आतंकवाद से सीधे नहीं जोडा लेकिन अब जब सैयद सलाउद्दीन का नाम ग्लौबल टैरर लिस्ट में डाला जा चुका है तो अब कशमीरियो की हिसा भी आंतकवाद के कानूनी दायरे में ही आयेगी । लेकिन भारत के लिये आंतक से निपटने का रास्ता अमेरिकी सूची पर नहीं टिका है । क्योंकि सच तो ये भी है कि अमेरिकी ग्लोबल लिस्ट में जिस भी संगठन या जिस भी आतंकवादी का नाम है उसकी आंतकवादी घटनाओ में कोई कमी आई नहीं है । यानी सिर्फ ग्लोबल टैरर लिस्ट का कोई असर पड़ता नहीं । और तो और यूएन की लिस्ट में लश्कर के हाफिज सईद का नाम है । लेकिन हाफिज की आतंकी कार्रवाई थमी नहीं है । कश्मीर में आये दिन लश्कर की आंतकी सक्रियता आंतक के नये नये चेहरो के जरीये जारी है । यानी अमेरिकी पहल जब तक पाकिसातन को आंतकी देश घोषित नहीं करती तब तक पाकिस्तान पर कोई आर्थिक प्रतिबंध लग नहीं सकता । और प्रतिबंध ना लगने का मतलब अरबो रुपयो की मदद का सिलसिला जारी रहेगा । यानी अमेरिका अपनी सुविधा के लिये भारत के साथ खडा होकर उत्तर कोरिया का नाम लेकर चीन पर निशाना साध सकता है । लेकिन पाकिसातनी आंतकी संगठन जैश ए मोहम्मद के मुखिया अजहर मसूद को यूएन में चीन के क्लीन चीट पर भारत के साथ भी खडा नहीं होता। पाकिस्तान को आंतकी राज्य नहीं मानता क्योंकि अफगानिस्तान में उसे पाकिसातन की जरुरत है । तो फिर गले लगकर आतंक से कैसे लड़ा जा सकता है जब गले लगना गले की फांस बनती हो ।

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कौन हैं ये भक्त और क्या वे रातोंरात कट्टर भक्ति लिये पैदा हो गए? अमेरिका के नस्ली गोरे और भारत के सवर्ण दावेदार! वे जो इतिहास को नकारना चाहते हैं और क्रमशः ट्रम्प और मोदी में अपने मुक्तिदाता को देखते हैं…

अमेरिका और भारत दुनिया में लोकतंत्र के मानक कहे जाते हैं। प्रधानमत्रंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प के पूर्ववर्तियों, मनमोहन सिंह और बराक ओबामा को सारी दुनिया सार्वजनिक जीवन में शिष्टता का प्रतीक मानती रही है। इस सन्दर्भ में मोदी का पिछले वर्ष का अमेरिकी दौरा याद कीजिये। सैन फ्रांसिस्को में फेसबुक मुख्यालय पर भारतीयों से मुलाकात के दौरान स्वयं होस्ट मार्क जुकरबर्ग को मोदी ने कैमरे की जद से धक्का मारकर किनारे कर दिया था।

ऐसी ही सड़कछाप उजड्डता ट्रम्प ने भी हालिया पहले विदेशी दौरे में सहयोगी नाटो राष्ट्राध्यक्षों के जमावड़े में दिखायी, जब वे मोंटेनीग्रो के प्रधानमंत्री को धकियाते हुए कैमरे के केंद्र में पहुँच गए। क्या दोनों भक्त समूहों के लिए यह विचलन की घड़ी हो सकती थी? नहीं, जरा भी नहीं। उनके लिए तो यह उनके नायकों की सहज चेष्टा ही रही।

उत्तर पश्चिमी अमेरिका के बारिश भरे प्रान्त ऑरेगोन की सबवे ट्रेन में नस्ली गुरूर में डूबे एक व्हाइट अमेरिकी ने हिजाब पहनी हुयी दो अमेरिकी मुस्लिम औरतों को अनाप-शनाप दुत्कारना शुरू कर दिया। टोकने पर उसने एक के बाद एक तीन व्हाइट सहयात्रियों को चाकू मार दिया, जिनमें दो की मृत्यु हो गयी।

उत्तर पश्चिमी भारत के पशु बहुल राजस्थान प्रान्त में मुस्लिम गाय व्यापारियों के एक समूह पर स्वयंभू गौ-रक्षक को सरेआम लाठियों से ताबड़तोड़ हमला कर हत्या करने में रत्ती भर भी संकोच नहीं हुआ। अमेरिका का राष्ट्रपति संभावित आतंकवाद रोकने के नाम पर अपने ही देश के मुस्लिम नागरिकों को देश में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा देता है। भारत का सेनाध्यक्ष पत्थर फेंकते कश्मीरी मुस्लिम युवकों को देश के ‘दुश्मन’ की संज्ञा से संबोधित करता है। ट्रम्प और मोदी समर्थकों के लिए यह सब राष्ट्रीय शर्म का नहीं, अपने नायकों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाने का अवसर सरीखा है।

कौन हैं ये भक्त और क्या वे रातोंरात कट्टर भक्ति लिये पैदा हो गए? अमेरिका के नस्ली गोरे और भारत के सवर्ण दावेदार! वे जो इतिहास को नकारना चाहते हैं और क्रमशः ट्रम्प और मोदी में अपने मुक्तिदाता को देखते हैं। इसे विसंगति मत समझिये कि अमेरिकी गृहयुद्ध के नायक और दास प्रथा को समाप्त करने वाले अब्राहम लिंकन नहीं, कॉर्पोरेट एनपीए में अमेरिका को डुबाने वाले रोनाल्ड रीगन हैं ट्रम्प के आदर्श।।

नस्ली गोरों का एजेंडा रहा है काले और लातीनी समुदाय को अमेरिका से खदेड़ना, जो उनके हिसाब से अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बोझ हैं। उन्हें भावी अप्रवासियों को भी अमेरिका में आने से रोकना है जो उनके ख्याल से उनका रोजगार खा रहे हैं। आखिर ट्रम्प की राजनीति भी इसी तरह अमेरिका को महान बनाने की ही तो है।

भक्तों के लिए उस मोदी में भी कोई विसंगति नहीं है जो गाँधी को तो राष्ट्रपिता कहता है पर गाँधी के घोषित उत्तराधिकारी और आधुनिक भारत के निर्माता नेहरू को कोसने और गाँधी के वैचारिक हत्यारे सावरकर को महिमामंडित करने में पूरी ऊर्जा लगा देता है। सोचिये, स्वतंत्र भारत में सवर्ण सपने क्या रहे हैं? मुसलमानों और ईसाइयों का दमन, पाकिस्तान की पिटाई, दलित शोषण, आरक्षण की समाप्ति, कम्युनिस्ट दमन, मर्द अधीन स्त्री, मनुवाद और परलोकवाद की स्थापना! उसके हिसाब से भारत की सनातनी श्रेष्ठता के लिए आवश्यक तत्व यही हैं। क्या मोदी शासन उसके सपनों को ही हवा नहीं देता!

समीकरण सीधा है, लोकतंत्र में हर विचारधारा को अपना राजनीतिक प्रतिनिधि चाहिए। नस्ली और सवर्ण श्रेष्ठता के पैरोकारों को भी। अन्यथा,अमेरिका में नस्ली-धार्मिक और भारत में सांप्रदायिक-जातीय घृणा के जब-तब फूटने वाले हालिया उभार में नया कुछ नहीं है, सिवाय इसके कि आज इन दोनों लोकतांत्रिक देशों के शासन पर जो काबिज हैं, ट्रम्प और मोदी, उन्होंने अपनी विजय यात्रा इसी घृणा की लहर पर सवार होकर तय की है।

यानी स्वाभाविक है, जनसंख्या के एक प्रबल हिस्से का घोषित एजेंडा और शासन में बने रहने का ट्रम्प-मोदी का अघोषित एजेंडा परस्पर गड्मड् होकर दोनों देशों की धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रीय धरोहर को बेशक आशंकित करते रहें, भक्तों को तो आश्वस्त ही रखेंगे। स्पष्टतः न मोदी भक्ति 2014 और न ट्रम्प भक्ति 2016 अचानक या जल्दबाजी में संपन्न हुयी परिघटना हैं|

मोदी और ट्रम्प भक्तों में अद्भुत समानता है। मोदी और ट्रम्प कितना भी फिसलें, उनके भक्तों की कट्टर निष्ठा अडिग रहेगी। बेशक ट्रम्प से चिपके तमाम लैंगिक और नस्ली कलंक उदाहरणों में अब राष्ट्रपति चुनाव अभियान में रूस से मिलीभगत के गंभीर आरोप भी शामिल हो गए हों। बेशक,मोदी के सांप्रदायिक और कॉर्पोरेट-यारी वाले चेहरे को इतिहास के सबसे बड़े फेकू होने का दर्जा मिल रहा हो।

ये सब बातें भक्तों के लिए बेमानी हैं। मजबूत तर्क और अकाट्य तथ्य उनकी भक्ति को हिला नहीं सकते। दरअसल, मोदी और ट्रम्प अपने इन कट्टर समर्थकों के क्रमशः सोलह आना खरे राजनीतिक प्रतिनिधि सिद्ध हुए हैं। इस हद तक और इतने इंतजार के बाद कि उनके लिए वे एकमात्र विकल्प जैसे हैं।

दोनों के भक्तों के अडिग आचरण को समझने के लिए यहाँ एक और पर्दाफाश जरूरी है। अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी अभियान में माना जाता था कि ट्रम्प ने बड़े आक्रामक अंदाज में रिपब्लिकन पार्टी का नामांकन हथियाया है। लेकिन अब पार्टी का केंद्र और उसका समर्थक मीडिया,ओबामा केयर समाप्त करने और अमीरों को टैक्स छूट देने में ही नहीं, चिर-दुश्मन रूससे मिलीभगत की छानबीन में भी जिस अंदाज में ट्रम्प के साथ खड़े नजर आते हैं, उनके एक दूसरे का पूरक होने में कोई शक नहीं।

मोदी ने संघ के आशीर्वाद से भाजपा का नेतृत्व हथियाया था। तब भी,उनके कैंप की ओर से,खरीदी मीडिया के माध्यम से, लगातार‘विकास’ के एजेंडे पर इस तरह जोर दिखाया जाता रहा है मानो संघ की हिंदुत्व ध्रुवीकरण की विभाजक पैंतरेबाजियों से मोदी का लेना-देना न हो। जाहिर है,संघ के दलित और मुस्लिम विरोधी एजेंडे पर ही नहीं, किसान और मजदूर की कीमत पर व्यापारियों और पूंजीशाहों के बेशर्म पोषण पर भी, संघ और मोदी की प्रशासनिक एकता इस छद्म प्रचार को अब और अधिक चलने नहीं दे पा रही।

इस आलोक में ट्रम्प और मोदी की चुनावी सफलतायें उतनी आकस्मिक नहीं रह जाती हैं, जितना उनके विरोधी विश्वास करना चाहेंगे। न ही उनके अंधसमर्थकों को ऐसे बरगलाये लोगों का समूह मानना सही होगा, जिन्हें राष्ट्रीय विरासत, लोकतांत्रिक परम्पराओं और संवैधानिक दबावों के रास्ते पर लाने की बात जब-तब बौद्धिक आकलनों में उठाई जाती है।

दरअसल,समर्थकों की तिरस्कृत पड़ी आकांक्षाओं को मोदी और ट्रम्प ने राष्ट्रीय राजनीति में जैसे प्रतिष्ठित किया है, वे चिर ऋणी क्यों न रहें? समझे, भला भक्त इतने कट्टर क्यों?

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70 या 80 के दशक तक पैदा हुए बच्चों पर अनजाने ही समाजवाद का असर रहता था. हर बहस में कुछ सवाल घूम-घूम कर आते. मसलन अगर हिंदुस्तान और पाकिस्तान में लडाई हो जाए तो कौन-कौन से देश हमारा साथ देंगे. सबसे पहले नाम आता था यूएसएसआर यानी सोवियत संघ का. यह संघ तो अब टूट चुका है. एक और सवाल भी बहस का सबब बनता था कि अगर दारा सिंह और मोहम्मद अली में लड़ाई हो जाए तो कौन जीतेगा? ‘भाई साहब दारा सिंह ने एक बार उसको पकड़ लिया न बस, खेल ख़त्म.’ जवाब मिल चुका होता था.

ऐसा ही एक सवाल होता था, ‘किंग कॉन्ग और गामा में लड़ाई हो जाए तो कौन जीतेगा?’ सभी का जवाब एक ही होता था – गामा पहलवान. तब बहुत कम बच्चों को यह मालूम था कि किंग कॉन्ग सिर्फ एक फंतासी है. उधर न फोटो देखी होती थी, न यह मालूम था कि गामा ने किस-किसको हराया है. बस सुनी-सुनाई बातें और कोरी कल्पना के सहारे गामा का नाम हमारे ज़हन पर हावी था. एक बात और, तब किसी को यह भी नहीं मालूम था कि गामा हिंदू हैं या मुसलमान. दरअसल, तब यह सवाल था ही नहीं.

आज के दिन सन 1878 में अमृतसर में पैदा हुए गामा पहलवान का असल नाम था- ग़ुलाम मोहम्मद. वालिद भी देसी कुश्ती के खिलाड़ी थे. चुनांचे शुरूआती तालीम घर पर ही हुई. 10 साल की उम्र में उन्होंने पहली कुश्ती लड़ी थी. पहली बार उन्हें चर्चा मिली उस दंगल से जो जोधपुर के राजा ने 1890 में करवाया था. छोटे उस्ताद गामा ने भी उस दंगल में हाज़िरी दे डाली थी. जोधपुर के राजा ने जब गामा की चपलता और कसरत देखी तो दंग रह गए. उन्हें कुछ एक पहलवानों से लड़ाया भी गया. गामा पहले 15 पहलवानों में आये. राजा ने गामा को विजेता घोषित किया.

कहते हैं यहां से गामा ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. 19 के होते-होते गामा ने हिंदुस्तान के एक से एक नामचीन पहलवान को हरा दिया था. पर एक नाम था जो देश में कुश्ती के मैदान में बड़ी इज्ज़त के साथ लिया जाता था- गुजरांवाला के करीम बक्श सुल्तानी. यह नाम अब भी गामा के लिए एक चुनौती था.

लाहौर में दोनों के बीच कुश्ती का दंगल रखा गया, और कहते हैं कि तमाम लाहौर उस दिन सिर्फ दंगल देखने उस मैदान में टूट पड़ा था. तकरीबन सात फुट ऊंचे करीम बक्श के सामने पांच फुट सात इंच के गामा बिलकुल बच्चे लग रहे थे. जैसा कि अमूमन होता है कि नए घोड़े पर दांव नहीं लगाया जाता. सबने यही सोचा था कि थोड़ी देर में सुल्तानी गामा को चित्त कर देंगे. तीन घंटे तक लोग चिल्लाते रहे, भाव बढ़ते- घटते रहे. अंत में नतीजा कुछ नहीं निकला. दोनों बराबरी पर छूटे. इस दंगल का असर यह हुआ कि गामा हिंदुस्तान भर में मशहूर हो गए.

विश्व विजेता पहलवान गामा से कुश्ती लड़ने आया ही नहीं

1910 में अपने भाई के साथ गामा लंदन के लिए रवाना हो गए थे. लंदन में उन दिनों ‘चैंपियंस ऑफ़ चैंपियंस’ नाम की कुश्ती प्रतियोगिता हो रही थी. इसके नियमों के हिसाब से गामा का कद कम था लिहाज़ा उन्हें दंगल में शरीक होने से रोक दिया गया. गामा इस बात पर गुस्सा हो गए और ऐलान कर दिया कि वे दुनिया के किसी भी पहलवान को हरा सकते हैं और अगर ऐसा नहीं हुआ वे जीतने वाले पहलवान को इनाम देकर हिंदुस्तान लौट जायेंगे.

उन दिनों विश्व कुश्ती में पोलैंड के स्तानिस्लौस ज्बयिशको, फ्रांस के फ्रैंक गाच और अमरीका के बेंजामिन रोलर काफी मशहूर थे. रोलर ने गामा की चुनौती स्वीकार कर ली. पहले राउंड में गामा ने उन्हें डेढ़ मिनट में चित कर दिया और दुसरे राउंड में 10 मिनट से भी कम समय में उन्हें फिर पटखनी दे डाली! फिर अगले दिन गामा ने दुनिया भर से आये 12 पहलवानों को मिनटों में हराकर तहलका मचा दिया. आयोजकों को हारकर गामा को दंगल में एंट्री देनी पड़ी.

फिर आया सितम्बर 10, 1910 का वह दिन जब जॉन बुल प्रतियोगिता में गामा के सामने विश्व विजेता पोलैंड के स्तानिस्लौस ज्बयिशको थे. एक मिनट में गामा ने उन्हें गिरा दिया और फिर अगले ढाई घंटे तक वे फ़र्श से चिपका रहे ताकि चित न हो जाएं. मैच बराबरी पर छूटा. चूंकि विजेता का फ़ैसला नहीं हो पाया था, इसलिए हफ़्ते भर बाद दोबारा कुश्ती रखी गयी. 17 सितम्बर, 1910 के दिन स्तानिस्लौस ज्बयिशको लड़ने ही नहीं आए. गामा को विजेता मान लिया गया. पत्रकारों ने जब ज्बयिशको से पुछा तो उनका कहना था, ‘ये आदमी मेरे बूते का नहीं है.’ जब गामा से पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मुझे लड़कर हारने में ज़्यादा ख़ुशी मिलती बजाय बिना लड़े जीतकर!’

हिंदू परिवारों का रखवाला

1947 में हालात ख़राब थे. गामा अमृतसर से लाहौर की मोहिनी गली में बस गए थे. बंटवारे ने हिंदू-मुसलमान के बीच बड़ी दीवार खड़ी कर दी थी. गली में रहने वाले हिंदुओं की जान सांसत में थी. ‘रुस्तम-ए-हिंद’ और ‘रुस्तम-ए-ज़मां’ तब आगे आए. किस्सा है कि उन्होंने कहा, ‘इस गली के हिंदू मेरे भाई हैं. देखें इनपर कौन सा मुसलमान आंख या हाथ उठाता है!’

आग हर तरफ फैली हुई थी. लिहाज़ा, कुछ फ़िरकापरस्त उस गली के मुहाने पर आ खड़े हुए जहां गामा अपने चेलों के साथ हिंदुओं की रखवाली कर रहे थे. जैसे ही एक फ़िरकापरस्त आगे बढ़ा गामा ने उसे वह चपत लगाई कि बाकियों की घिग्गी बंध गयी. उस गली के एक भी हिंदू को खरोंच तक नहीं आई. जब हालात बहुत बिगड़ गए तो गामा ने अपने पैसों से गली के हिंदुओं को पाकिस्तान से रवाना किया.

बुढ़ापे और गर्दिश के दिन

गामा ता-जिंदगी हारे नहीं. उन्हें दुनिया में कुश्ती का सबसे महान खिलाड़ी कहा जाता है. पर बात वही है न. बुढ़ापा ऐसे महान खिलाड़ियों का भी ग़रीबी में ही कटता है, सो उनका भी कटा. हिंदुस्तान के घनश्याम दास बिड़ला कुश्ती प्रेमी थे. उन्होंने दो हज़ार की एक मुश्त राशि और 300 रूपये मासिक पेंशन गामा के लिए बांध दी थी. बड़ौदा के राजा भी उनकी मदद के लिए आगे आये थे. पाकिस्तान में जब इस बात पर हो-हल्ला हुआ तब सरकार ने गामा के इलाज़ के लिए पैसे दिए. इससे याद आया कि बड़ौदा के संग्रहालय में 1200 किलो का एक पत्थर रखा हुआ है जिसे 23 दिसम्बर, 1902 के दिन गामा उठाकर कुछ दूर तक चले थे!

चलते-चलते

हाल ही में पहलवानी और कुश्ती से जुडी दो फिल्में- ‘सुलतान’ और ‘दंगल’ काफी हिट रही हैं. अभिनेताओं और निर्माताओं ने करोड़ों कमाये हैं. कमाना भी चाहिए. पर क्या सलमान खान और आमिर खान में से कोई राष्ट्रीय खेल संस्थान, पटियाला जाकर इस खेल को आगे बढ़ाने के लिए कुछ धनराशि देकर आया होगा? आपको जानकर ख़ुशी होगी कि इस खेल संस्थान में गामा द्वारा कसरत के लिए इस्तेमाल में लाये गए उपकरण मौजूद हैं. एक बात और, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की बेग़म कुलसूम नवाज़ हमारे उस्ताद गामा पहलवान की पोती हैं!

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भारत ने पहली बार पाकिस्तानी पोस्ट को फायर एसाल्ट से उडाने की विडियो जारी कर खुद को अमेरिका और इजरायल की कतार में खड़ा कर दिया । क्योंकि सामान्य तौर पर भारत या पाकिस्तान ही नहीं बल्कि चीन और रुस भी अपनी सेना का कार्रवाई का वीडियो जारी तो नहीं ही करते हैं। तो इसका मतलब है क्या । क्या अब पाकिसातन अपने देश में राष्ट्रवाद जगाने के लिए कोई वीडियो जारी कर देगा । या फिर समूची दुनिया ही जिस टकराव के दौर में जा फंसी है, उसी में भारत भी एक बडा खिलाड़ी खुद को मान रहा है । क्योंकि दुनिया के सच को समझे तो गृह युद्द सरीखे अशांत क्षेत्र के फेहरिस्त में सीरिया ,यमन , अफगानिस्तान ,सोमालिया , लिबिया , इराक , सूडान और दक्षिण सूडान हैं । तो आतंक की गिरप्त में आये देशों की फेरहिस्त में पाकिस्तान , बांग्लादेश , म्यानमार ,टर्की और नाइजेरिया है।

तो आंतकी हमले की आहट के खौफ तले भारत , फ्रास ,बेल्जियम ,जर्मनी ,ब्रिटेन और स्वीडन हैं । वहीं देशों के टकराव का आलम ये हो चला है कि अलग अलग मुद्दों पर उत्तर कोरिया , दक्षिण कोरिया ,चीन ,रुस ,फिलीपिंस , जापान, मलेशिया ,इंडोनेशिया ,कुर्द और रुस तक अपनी ताकत दिखाने से नहीं चूक रहे। तो क्या दुनिया का सच यही है दुनिया टकराव के दौर में है । या फिर टकराव के पीछे का सच कुछ ऐसा है कि हर कोई आंख मूंदे हुये है क्योकि दुनिया का असल सच तो ये है कि 11 खरब , 29 अरब 62 करोड रुपये का धंधा या हथियार बाजार । जी दुनिया में सबसे बडा धंधा अगर कुछ है तो वह है हथियारों का । और जब दुनिया का नक्शा ही अगर लाल रंग से रंगा है तो मान लीजिये अब बहुत कम जमीन बची है जहा आतंकवाद, गृह युद्द या दोनों देशों का टकराव ना हो रहा हो । और ये तस्वीर ही बताती है कि कमोवेश हर देश को ताकत बरकरार रखने के लिये हथियार चाहिये । तो एक तरफ हथियारों की सलाना खरीद फरोख्त का आंकडा पिछले बरस तक करीब 11 सौ 30 खरब रुपये हो चुका है।

तो दूसरी तरफ युद्द ना हो इसके लिये बने यूनाइटेड नेशन के पांच वीटो वाले देश अमेरिका, रुस , चीन , फ्रासं और ब्रिटेन ही सबसे ज्यादा हथियारो के बेचते है । आंकडो से समझे तो स्टाकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्त इस्टीटयूट के मुताबिक अमेरिका सबसे ज्यादा 47169 मिलियन डालर तो रुस 33169 मिलियन डालर , चीन 8768 मिलियन डालर , फ्रास 8561 मिलियन डालर और ब्रिट्रेन 6586 मिलियन डालर का हथियार बेचता है । यानी दुनिया में शांति स्तापित करने के लिये बने यूनाइटेड नेशन के पांचो वीटो देश के हथियारो के धंधे को अगर जोड दिया जाये तो एक लाख 4 हजार 270 मिलियन डालर होता है । यानी चौथे नंबर पर आने वाले जर्मनी को छोड़ दिया जाये तो हथियारों को बेचने के लिये पांचो वीटो देशो का दरवाजा ही सबसे बडा खुला हुआ है । आज की तारीख में अमेरिका-रुस और चीन जैसे देशों की नजर में हर वो देश है,जो हथियार खऱीद सकता है। क्योंकि हथियार निर्यात बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा इन्हीं तीन देशों के पास है । अमेरिका के पास 33 फीसदी बाजार है तो रुस के पास 23 फीसदी और चीन के पास करीब 7 फीसदी हिस्सा है ।यानी अमेरिकी राष्ट्रपति जो दो दिन पहले ही रियाद पहुंचे और दनिया में बहस होने लगी कि इस्लामिक देसो के साथ अमेरिकी रुख नरम क्यो है तो उसके पीछे का सच यही है कि अमेरिका ने साउदी अरब के साथ 110 बिलियन डालर का सौदा किया । यानी सवाल ये नहीं है कि अमेरिका इरान को बुराई देशों की फेहरिस्त में रख कर विरोध कर रहा है । सवाल है कि क्या आने वाले वक्त में ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेन्य कार्रवाई दिखायी देगी । और जिस तरह दुनिया मैनेचेस्टर पर हमला करने वाले आईएस पर भी बंटा हुआ है उसमें सिवाय हथियारो को बेच मुनापा बनाये रखने के और कौन सी थ्योरी हो सकती है ।

और विकसित देसो के हथियारो के धंधे का असर भारत जैसे विकासशील देसो पर कैसे पडता है ये भारत के हथियारों की खरीद से समझा जा सकता है । फिलहाल , भारत दुनिया का सबसे बडा या कहे पहले नंबर का देश का जो हथियार खरीदता है । आलम ये है कि 2012 से 2016 के बीच पूरी दुनिया में हुए भारी हथियारों के आयात का अकेले 13 फ़ीसदी भारत ने आयात किया. । स्कॉटहोम इंटरनेशनल पीस रीसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत ने 2007-2016 के दौरान भारत के हथियार आयात में 43 फ़ीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई । और जिस देश में जय जवान-जय किसान का नारा आज भी लोकप्रिय है-उसका सच यह है कि 2002-03 में हमारा रक्षा बजट 65,000 करोड़ रुपये का था जो 2016-17 तक बढ़कर 2.58 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. । जबकि 2005-06 में कृषि को बजट में 6,361 करोड़ रुपये मिले थे जो 2016-17 में ब्याज सब्सिडी घटाने के बाद 20,984 करोड़ रुपये बनते हैं । यानी रक्षा क्षेत्र में 100 फीसदी विदेशी निवेश की इजाजत के बावजूद भारत के लिए विदेशों से हथियार खरीदना मजबूरी है। जिसका असर खेती ही नहीं हर दूसरे क्षे6 पर पड रहा है । और जानकारों का कहना है कि भारत हथियार उद्योग में अगले 10 साल में 250 अरब डॉलर का निवेश करने वाला है । यानी ये सवाल छोटा है कि मैनचेस्टर में इस्लामिक स्टेट का आंतकी हमला हो गया । या भारत ने पाकिसातनी सेना की पोस्ट को आंतक को पनाह देने वाला बताया । या फिर सीरिया में आईएस को लेकर अमेरिका और रुस ही आमने सामने है । सवाल है कि टकराव के दौर में फंसी दुनिया के लिये आंतकवाद भी मुनाफे का बाजार है ।

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पहले यह सब सोशल मीडिया के चुटकुलों से शुरू हुआ. बाप तो आखिर बाप होता है. मामला क्रिकेट का था तभी मामला इतना नॉन सीरियस था. कोई दूसरा स्पोर्ट्स या गेम होता तो स्थिति यह नहीं होती. क्रिकेट को हमने गेम कब रहने दिया है, यह तो मुहल्ले के श्वानों का युद्ध हो गया है, श्वान लड़ते रहते हैं और लोग हुलाते रहते हैं. अगर थोड़ी बेहतर उपमा दें तो मुर्गा लड़ाई कह सकते हैं. अंगरेज सर पीट रहे होंगे कि उनके जेंटलमैन गेम की एशिया पहुंचते-पहुंचते कैसी दुर्गति हो गयी है. मुमकिन है, बहुत जल्द यह डब्लू डब्लू एफ में न बदल जाये.

जाने दीजिये, मसला क्रिकेट का नहीं है. मसला हमारी भारत माता का है. जननी जन्मभूमि स्वर्गादपि गरीयसी, वंदे मातरम, भारत माता ग्राम वासिनी जैसी साहित्यिक रचनाओं से होते हुए भारत माता की जय के मंचीय नारों तक यह मां ही है. मोदी जी के भाषणों की यह खासियत रही है कि वे आखिर में हर बार यह नारा जरूर लगाते हैं. मगर क्रिकेट के मैदान पर अब तक इंडिया-इंडिया के नारे ही लगते रहे हैं, भारत माता की जय के नारे कभी नहीं लगे.

इस बार नया नारा लगने वाला है, बाप-बाप करोगे… मतलब यह है कि वैसे तो हमारा मुल्क मां की भूमिका में ही रहता है. तभी यहां राष्ट्रपति होते हैं. मगर क्रिकेट के मैदान पर जब यह अपने एशियाई पड़ोसियों से भिड़ता है तो मां से बाप बन जाता है, दादा बन जाता है. लोग इसका लिंग परिवर्तन कर देते हैं. और यह कोई सोशल मीडिया का चुटकुला भर नहीं है. कमेंट्रेटर बोल रहे हैं, टीवी चैनलों पर इसी शीर्षक से प्रोग्राम चल रहे हैं. क्रिकेटप्रेमी राष्ट्रवादियों ने मान लिया है कि भारत मां नहीं बाप है. क्योंकि मां में कूटने का वह हुनर नहीं है, जो बाप में होता है. बाप अच्छी तरह धोती है, मां तो ममता दिखाती है.

हालांकि कई लोगों की राय इसके खिलाफ होगी कि मांएं ठीक से नहीं कूटतीं. कई माताएं पिताओं से बेहतर पिटाई करती हैं. मगर लैंगिक पूर्वाग्रह की वजह से वे दबी कुचली ही मानी जाती हैं. निरूपा राय टाइप. इसलिए क्रिकेट प्रेमी राष्ट्रवादियों ने भारत को बाप और दादा की पदवी दे रखी है. ठीक से कूटो बेटे और पोते को. सब सिखा दो. इस लिहाज से इसे कूटनीतिक छवि परिवर्तन माना जायेगा.

क्योंकि अगर भारत को यहां मां माना जाता तो पाकिस्तान को कहना पड़ता. मां-मां होती है, बेटा-बेटा होता है, या बेटी-बेटी होती है. पता नहीं पाकिस्तान वाले अपने मुल्क को पुल्लिंग मानते हैं या स्त्रीलिंग. लेकिन उस रूपक में वह दबंगई निखर कर नहीं आती जो इस बात में आती है कि बाप-बाप होता है और जब बाप से लड़ोगे तो बाप-बाप करोगे. मैंने सोशल मीडिया साइट्स पर पाकिस्तानियों के अपडेट्स नहीं देखे हैं कि वे इस फिकरे पर किस तरह रिएक्ट कर रहे हैं या बांग्लादेशियों ने भारत के खुद को उसका दादा घोषित करने पर किस तरह रिएक्ट किया.

मगर यह मैंने खूब सुना है कि बांग्लादेशी इस बात का बुरा मानते हैं कि भारत दक्षिण एशिया में बड़ा भाई बनने की कोशिश करता है. वह इस सच्चाई को स्वीकार नहीं करना चाहता कि उसके आसपास के मुल्क एक स्वतंत्र राजनीतिक इकाई हैं और उनके साथ समानता का व्यवहार करना चाहिये. कुछ दिनों से नेपाल भी इस बात से नाराज रहता है. खेल हो या विदेश नीति या फिर जंग ही, स्पर्धा अपनी जगह है, गरिमा अपनी जगह. कभी ऐसी परंपरा थी कि हम अपने प्रतिद्वंद्वियों का समुचित सम्मान करके मानवीय गरिमा का प्रदर्शन करते थे. आज भी खेलों में मुकाबला खत्म होने के बाद प्रतिद्वंद्वियों को एक दूसरे से हाथ मिलाने कहा जाता है.

मगर उस परंपरा में एक ठंडापन होता है. वह मैच रह जाता है, जंग में नहीं बदलता. क्रिकेट या ऐसे ही दूसरे खेलों से जुड़े व्यापारी जानते हैं कि अगर पैसे बनाना है तो दर्शकों को जुनूनी बनाना होगा और माहौल जंग का बनाना होगा. हर मुकाबले से पहले दोनों पक्षों के खिलाड़ियों, पूर्व खिलाड़ियों से ऐसे बयान दिलाये जाते हैं कि मैच-मैच न रहे, जंग में बदल जाये. इसके उन्हें पैसे भी दिये जाते होंगे. फिर एक आग लगाऊ टीवी प्रोमो तैयार किया जाता है. मैच आते-आते दर्शकों का खून उबाल मारने लगता है, अगर सामने पाकिस्तान हो तो जाहिर सी बात है, स्थितियां जंग जैसी बहुत आसानी से बन जाती है. और जब जंग लड़ना होता है तो भारत माता को भी बाप बन जाना पड़ता है!

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देश में खेल से संबंधित दो बड़ी खबरें आईं, जिस पर बड़े स्तर पर लोगों का ध्यान गया. एक तो शायद आप सिनेमा हाल में जा कर देख भी चुके होंगे, जो बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहे जाने वाले आमिर खान की दंगल है. वहीं, दूसरी खबर आई है ‘डॉ. मशहूर गुलाटी’ की तरह मशहूर सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला को भारतीय ओलंपिक संघ का आजीवन अध्यक्ष नामित करने की! आप कहेंगे कि दोनों खबरें एक सी कैसी हैं, तो मैं बताता दूं कि तालमेल है और यह अद्भुत तालमेल कुछ ऐसा है कि हमें पूछना पड़ रहा है कि ऐसा ‘खेल’ कौन खेलता है भाई? फिल्म ‘दंगल’ में यह बात साफ तौर पर दर्शाई गई है कि खिलाड़ियों के साथ और तमाम खेल संस्थानों में राजनीति होती ही है, जो अंततः हमारे पदकों की संख्या को कम कर देती है. दंगल में हालाँकि, कोच के ट्रेनिंग देने के लहजे और उसकी बेपरवाही पर सवाल उठा कर ही आमिर बच निकले हैं, पर हम सब जानते हैं कि देश भर में तमाम खेल संघ किस तरह से राजनीतिज्ञों के अखाड़े बने हुए हैं! आखिर, किस तरह से खिलाड़ियों को राजनीति की बिसात पर मोहरे की तरह चला जाता है और ऐसे में अच्छी से अच्छी प्रतिभा दम तोड़ देती है. खेल संघों में राजनेताओं के कब्ज़े की बात पर थोड़ा और व्यापकता से देखा जाए तो, भारत में सर्वाधिक लोकप्रिय क्रिकेट की संस्था बीसीसीआई में लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की खूब जद्दोजहद चली है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद बीसीसीआई के अनुराग ठाकुर और दूसरे पदाधिकारी टस-से-मस तक नहीं हो रहे हैं. यहां तक कि अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई चीफ से हटाने तक की बात भी कई खबरों में सामने आ रही है, क्योंकि खबरों के ही अनुसार उन्होंने कोर्ट में गलत हलफनामा पेश किया है, पर ‘लोढ़ा कमिटी’ की सिफारिशों को यह धनाढ्य खेल संस्थान लागू ही नहीं कर रहा है और ‘भ्रष्टाचार के साथ अपारदर्शिता’ जस की तस बनी हुई है. यही हाल बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन.श्रीनिवासन को लेकर भी था, जो सुप्रीम कोर्ट के डिसीजन के बाद हटे थे. कुल मिलाकर बात यह है कि तमाम खेल संघों में आख़िर राजनीतिज्ञों का क्या काम, जिस पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय तक आपत्ति जता चुका है? मामला तब और गंभीर हो जाता है जब सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला जैसे लोग भारतीय ओलंपिक संघ के आजीवन अध्यक्ष नामित कर दिए जाते हैं! समझा जा सकता है कि यह दोनों ही भ्रष्टाचार और गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं.

समझना मुश्किल है कि इन दोनों का ओलंपिक जैसे खेल आयोजनों और खिलाड़ियों से क्या संबंध हो सकता है, सिवाय इसके कि वह ‘भ्रष्टाचार’ को बढ़ावा देते हैं? भारतीय ओलंपिक संघ जैसा संस्थान आखिर इन जैसे लोगों के ‘बंधुआ’ की तरह क्यों व्यवहार करता है, यह बात आज-कल और परसों तक राज ही रहने वाला है. हालांकि, खेल मंत्री विजय गोयल ने इस सन्दर्भ में यह जरूर कहा है कि ‘यह नियुक्तियां (कलमाड़ी और चौटाला की) स्वीकार नहीं की जाएंगी, क्योंकि दोनों ही आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं. गंभीर बात यह है कि भ्रष्टाचार पर सरकारें तक बदल गयीं और देश में इसके खिलाफ जबरदस्त माहौल भी चल रहा है, उसके बावजूद भी इस तरह की नियुक्तियां करने का साहस आखिर कहाँ से जुटा लिया जाता है? यह भी दिलचस्प है कि कलमाड़ी और चौटाला से पहले सिर्फ विजय कुमार मल्होत्रा ही थे, जिन्होंने 2011 और 2012 के बीच आईओए के कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था, उन्हें आजीवन अध्यक्ष बनाया गया था. जहां तक बात सुरेश कलमाड़ी की है तो 1996 से 2011 तक आईओए पर उनका एक तरह से कब्ज़ा ही रहा. 2010 के दिल्ली कामनवेल्थ गेम्स घोटाले में उन्हें 10 महीने की जेल हुई और तब वह लाइमलाइट में ज्यादा आए और बदनाम हुआ, अन्यथा देश में ओलंपिक पदक की संख्या न बढ़ने का राज देशवासी कभी जान ही नहीं पाते! बेहद अजीब और हैरान करने वाली बात यह भी है कि अपराधिक और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना करने वाले व्यक्ति को आजीवन अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव सोचा भी कैसे गया? कम से कम इसका इतिहास तो देख लिया जाता, जब चौटाला दिसंबर 2012 से फरवरी 2014 तक आयोग के अध्यक्ष रहे था, तब उस समय अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने चुनाव में आईओए को ही निलंबित कर दिया था. इसके पीछे अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने तर्क दिया था कि इंडियन ओलंपिक असोसिएशन ने चुनाव में ऐसे उम्मीदवार उतारे थे, जिनके खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल थे. देखना दिलचस्प होगा कि खेल मंत्रालय इस मामले में रिपोर्ट मंगाने के बाद क्या कार्रवाई कर पाता है? इस बीच खिलाड़ियों के राजनीति का शिकार होने पर भी ध्यान दिया ही जाना चाहिए, आखिर जो खिलाड़ी अपना पूरा जीवन देश के लिए पदक जीतने में लगा देता है, उसे इन खेल संस्थानों से मदद की बजाय रूकावट ही क्यों मिलती है, इस बाबत जांच अवश्य किया जाना चाहिए.

आईओए जैसे संस्थानों के शीर्ष पर अगर अपराधी और भ्रष्टाचारी लोग बैठेंगे, तो पदक आखिर आएंगे कहां से? आमिर खान अपनी फिल्म दंगल में महावीर फोगाट के किरदार में एक बात बड़े साफ तौर पर कहते हैं, जो सभी खेल-प्रशासकों पर समान रूप से लागू होती है कि जब तक ‘ऐसे पदाधिकारी खेल संघों में कब्जा जमाए रहेंगे’, तब तक भारत में अन्य देशों के मुकाबले पदक लाना मुश्किल और नामुमकिन ही माना जाता रहेगा. आला दर्जे की बदतमीजी यह कि ‘इंडियन ओलिंपिक असोसिएशन (IOA) की चेन्नै में हुई आम सभा बैठक में भ्रष्टाचार के आरोपी आईएनएलडी के नेता अभय सिंह चौटाला लाइफटाइम प्रेजिडेंट चुने जाने को लेकर उठे सवालों के बाद बेशर्मी से कहते हैं कि “उन्हीं की वजह से भारतीय खिलाड़ी मेडल्स जीत रहे हैं.” आखिर सम्पूर्ण विश्व में इस हद तक गिरावट कहीं देखने को मिलेगी क्या? जहाँ तक मेडल्स की बात है तो देश के कुछ खिलाड़ियों का संघर्ष-स्तर इतना ऊंचा होता है कि व्यक्तिगत तौर पर वह तैयारी करके देश को पदक दिला पाने में सफलता हासिल कर पाते हैं, अन्यथा तमाम खेल संघ और पदाधिकारी खिलाड़ियों का हौसला तोड़ने में जरा भी कमी नहीं करते हैं. हालाँकि, जब हम देश में आ रहे ओलंपिक पदकों की संख्या को चीन या दूसरे देशों को प्राप्त पदकों से तुलना करते हैं तो एक भारतीय होने के नाते शायद ही गर्व महसूस करते होंगे! शायद ही कोई ओलंपिक गेम हो, जिसमें हमारे देश के पदकों की संख्या दहाई में पहुंची हो और कई बार तो हमें एक ‘कांस्य’ पदक से ही काम चलाना पड़ता है. ऐसे में चौटाला का बयान आला दर्जे की बेशर्मी कही जा सकती है. जिन्होंने दंगल पिक्चर देखी होगी या देखेगा, वह यह बात बखूबी समझ जाएगा कि कोई खिलाड़ी ओलंपिक के लिए तैयार होने में बचपन से ही जुट जाता है. कई तो 5 साल की उम्र से ही अखाड़े में कुश्ती करने लगते हैं या दूसरे खेलों में अभ्यास करने लगते हैं और यह अभ्यास ताउम्र चलता है. तमाम कठिनाइयों से जूझते हुए, समस्याओं से दो-चार होते हुए उनकी जिंदगी दांव पर लगी होती है, तो अभाव में जूझते-जूझते बाकी दुनिया से वह कट से जाते हैं, पर उनके मुख से उफ़ नहीं निकलती है, क्योंकि देश के लिए उन्हें पदक लाना होता है. पर पदक लाने के लिए बनायी गयी जिम्मेदार संस्था ‘आईओए’ ही अगर सुरेश कलमाड़ी और अभय चौटाला जैसे लोगों के हवाले हो जाए तो फिर भगवान ही मालिक है हमारे देश के खेलों का और उसके भरोसे पदक की आस लगाए सवा सौ करोड़ देशवासियों का!

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हॉकी के सबसे बड़े खिलाडी ध्यांचंद से पहले सचिन को भारत रत्न देने की बेहूदगी तो कोंग्रेस सरकार ने की ही थी अब फिर से उनका अपमान हो रहा हे .कई ओलम्पिक गोल्ड दिलवाने वाले ध्यानचंद की जिस तरह उपेक्षा हो रही हे उससे साफ हे की आने वाले समय में भारत के लिए खेलो में कोई उमीद नहीं हे वरिष्ठ फिल्म लेखक जयप्रकाश चोकसे बताते हे की मुम्बई की आरती और पूजा शेट्टी बहनो ने काफी खर्चा करके ध्यानचंद पर फिल्म के लिए पटकथा लिखवाई हुई हे मगर सालो से उनकी बायोपिक पर फिल्म का काम शुरू नहीं हो पाया हे क्योकि कोई भी सितारा ध्यानचंद बनने को इसलिए राजी नहीं हे क्योकि परदे पर ही सही मगर हॉकी जैसे ताकत के खिलाडी वो भी ध्यानचंद दिखने में दांतो से पसीना आ जाएगा ये जानते हुए भी की ऐसी फिल्म उनको अनेक देशी विदेशी अवार्ड भी दिलवा सकती हे तब भी नहीं , क्योकि कोई भी सितारा ध्यानचंद बनने दिखने के लिए की जाने वाली कड़ी मेहनत करने को राजी नहीं हे इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता हे की भारत के लोगो ( ऊँचे भी ) में दमखम की कितनी कमी हे आगे भी भला कैसे मैडल आएंगे — ? ये वही सितारे हे जो रोज दावा करते मिलते हे की फला फिल्म के लिए इतना वजन बढ़ाया या घटाया या ऐसी तैयारी की वैसी तैयारी की . अब यही लोग ध्यानचंद वो भी सिर्फ परदे पर भी बनने को तैयार नहीं हे क्योकि हॉकी जैसा दमखम का खेल सिर्फ परदे पर ही खेलने के लिए भी जो तैयारी चाहिए उसके लिए भी इनमे हिम्मत नहीं हे जबकि उधर देखिये की जिस क्रिकेट जैसे फालतू खेल की फ़र्ज़ी उपलब्धियों पर हमसे ज़बरदस्ती गर्व करवाया जाता हे उसके ही एक खिलाडी धोनी पर ही कितने आराम से बायोपिक बन भी गया यही नहीं वो काफी हिट भी हो गया यानी इस खेल का खिलाडी बनना ( परदे पर ) इतना आसान हे वही ध्यानचंद बनने से कितने ही नौजवान सितारे साफ़ इनकार कर चुके हे क्योकि कोई परदे पर भी हॉकी या फुटबॉल का खिलाडी दिखने के लिए भी होने वाली मेहनत पसीने और चोटो को तैयार नहीं हे ले देकर आमिर खान से ही कुछ उमीद की जा सकती हे मगर एक अकेला भला क्या क्या कर सकता हे हाल ही में वो अपनी कुछ जान तक जोखिम में डाल कर 25 25 किलो वेट बढ़ घटाकर दंगल फिल्म के लिए पहलवान महावीर सिंह की जवानी और अधेड़ावस्था फिल्मा चुके हे .

धोनी पर बनी बायोपिक का हिट होना भी दुखी करने वाली बात हे धोनी एक अच्छे खिलाडी हे मगर कोई ऐसे महानतम भी नहीं हे की जिन पर पिक्चर बनाई जाती मगर क्रिकेट फिल्म और धर्म क्योकि भारतीय जनता की अफीम हे सो एक क्रिकेट खिलाडी धोनी पर उनके के रिटायर होने से भी पहले ही उन पर फिल्म तक बन कर तैयार हो गयी जबकि धोनी की खेल में सारी की सारी उपलब्धिया भी उस दौर की हे जब ये खेल ही सारा भारत बेस्ड हो चुका हे ऐसे में धोनी की उपलब्धियां कितनी असली हे कितनी फ़र्ज़ी हे कुछ कहा नहीं जा सकता हे भारत की 2007 वर्ल्ड कप हार के बाद जब क्रिकेट को भारी घाटा हो रहा था भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता हल्की से उतार पर थी तभी पहला टी २० आता हे जिसमे भारत की जीत के बाद क्रिकेट का ये नया फॉर्मेट सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बन जाता हे आई पि एल आता हे उसमे क्या क्या गड़बड़िया होती हे कैसे धोनी की टीम चेन्नई के मालिक श्रीनिवासन बी सी सी आई के अध्यक्ष भी होते हे कैसे फिर धोनी का एकछत्र राज़ हो ता हे आई पि एल में सट्टेबाज़िया होती हे खिलाड़ियों का नाम आता हे दबाया जाता हे सब जानते हे धोनी ने जो क्रिकेट वर्ल्ड कप 2011 जिताया उसके फाइनल से पहले एक पत्रकार साफ़ लिखते हे की भारत की जीत तो ”तय” हे फाइनल में श्रीलंका के खिलाड़ियों की बॉडी लेंग्वेज कही से भी वर्ल्ड कप फाइनल वाली नहीं थी वेस्टइंडीज जैसी टीम का तो पिछले सालो में ये हाल हुआ की उसके खिलाडी टीम से ज़्यादा बहुत ज़्यादा भारत और आई पि एल को महत्व देने लगे क्रिकेट में पूरी तरह ही ये हाल हे की ऑस्ट्रेलिया को छोड़ कर लगभग सभी देश सिर्फ भारत के साथ और भारत में खेल को उत्सुक रहते हे हार पर भी खुश होते हे पुराने खिलाडी बी सी सी आई से पैसा लेते हे और बदले में बी सी सी आई के फर्ज़ीवाड़े के खिलाफ कुछ नहीं बोलते हे भारत को छोड़ कर सभी देशो में मैदान खाली रहने लगे हे!

क्रिकेट अब सिर्फ भारत के दम पर ज़िंदा हे अब इस खेल के सभी नियम कायदे सब कुछ भारत के हिसाब से ही बनते हे यानी इन्ही सब हालातो के बीच में ही धोनी ने अपनी कामयाबियां हासिल की ? जिन्हें कोई भी सच्चा खेल प्रेमी कभी कोई खास महत्व दे ही नहीं सकता हे जो ध्यानचंद की उपलब्धियों के सामने कुछ भी महत्व नहीं रखती हे मगर उसी ध्यांचंद का पिछले सालो में लगातार दूसरी बार अपमान हुआ हे जब उनसे पहले ही धोनी की बायोपिक फिल्म भी आ चुकी हे और हिट भी हो चुकी हे साफ़ हे की तमाम लफ्फाजियों दावो के बाद भी आने वाले समय में भी भारत के लिए खेलो में कोई उमीद नहीं दिखाई देती हे देश में भयंकर गेर बराबरी आम आदमी को जहा रोजी रोटी से ही फुर्सत नहीं हे वही ऊँचा अमीर सम्पन्न वर्ग यहाँ इतना अधिक आराम उठा रहा हे की वो बिलकुल पिलपिला और गिलगिला हो चुका हे उच्च वर्ग यही पिलपिला और गिलगिलापन फिल्म सितारों ने दर्शाया जब उन्होंने ध्यानचंद पर बनने वाली फिल्म से साफ़ पीठ दिखा दी . जिस देश में ध्यानचंद जैसे महान खिलाडी का अपमान और सचिन जेसो को भारत रत्न और धोनी जेसो पर फिल्म बनती हो वो भला खाक खेलो में कुछ कर सकता हे आगे भी खेलो में भारत के लिए कोई भी उमीद नहीं हे!

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ओलम्पिक दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन होता हे फुटबॉल जैसे खेल को छोड़ दे तो बाकी सभी खेलो में वर्ल्ड कप चेम्पियन होने से भी अधिक सम्मान और गौरव की बात ओलम्पिक चेम्पियन होना या ओलम्पिक में कोई भी पदक जीतना माना जाता हे सभी खिलाड़ियों के लिए कहा जाता हे की वो अपना बेस्ट ओलम्पिक के लिए बचा कर रखते हे ओलम्पिक में जीत क्या मायने रखती हे इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाइये की ओलम्पिक चेम्पियन खिलाडी फिर ताउम्र ओलम्पिक चेम्पियन ही कहलाता हे उसे पूर्व चेम्पियन नहीं कहा जाता हे रियो ओलम्पिक में उमीद तो थी की भारत पहली बार दो अंको में मैडल जीतेगा ( वैसे जीत तो सिर्फ गोल्ड ही होती हे इसलिए टेली सिर्फ गोल्ड से ही बनती हे लेकिन ओलम्पिक भावना की वजह से बाकी दो ओलम्पिक पदको का भी भारी सम्मान होता हे ) हर बात की तरह ही हमारे पी एम् की भारत को पदक जिताने के विषय में कुछ भी लफ़्फ़ाज़िया सामने आयी थी लेकिन नतीजा पिछले तीन ओलंपिक में सबसे ख़राब प्रदर्शन के रूप में सामने आया सवा अरब के देश की ओलम्पिक या कहे की खेलो में ही असफलता कितनी जबरदस्त हे इसका अंदाज़ा इस बात से लगाइये की दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश हॉकी टीम से इतर सिर्फ एक गोल्ड मैडल सौ सालो के इतिहास में ले पाया हे वो भी पसीने के कम और एकाग्रता के खेल में ( अभिनव बिंद्रा शूटिंग ) इससे भी ज़्यादा शर्मनाक बात की भारत से दस नहीं बीस गुना अधिक मैडल और गोल्ड मैडल सिर्फ कुछ देशो ने भी नहीं बल्कि सिर्फ कुछ खिलाड़ियों ने अकेले ही जीत रखे हे जेसे की माइकल फेल्प्स बोल्ट कार्ल लुइस नुरमी आदि पदको की लिस्ट पर गौर करे तो कई कठमुल्लावादी हास्यपद पाबंदियों वाले बिहार से भी छोटे देश ईरान तक ने तीन गोल्ड और टोटल 8 मैडल जीते पूर्व युगोस्लाविया के कई टुकड़े हुए थे उसके टुकड़े के भी टुकड़े से बना शायद हमारी किसी बड़ी विधानसभा सीट से भी छोटा देश कोसोवो तक एक गोल्ड जित लेता हे इसके अलावा भारत से भी अधिक भ्र्ष्टाचार और गृहयुद्ध , छोटे छोटे और अराजकता गरीबी भुखमरी बेहद कम आबादी के देश जैसे जॉर्जिया अल्जीरिया उज्बेकिस्तान इथोपिया अजरबेजान कोलोम्बिया मिस्र ट्यूनेशिया जोर्डन जैसे देशो ने भी ओलम्पिक में भारत से तो बहुत बेहतर किया हे!

अब आप देखे की हमेशा की तरह इस भयंकर हार के बाद चारो तरफ हज़ारो लेख छप रहे हे जिसमे हार की चीर फाड़ हो रही हे और वो ही कारण बताय जा रहे हे जो की उन छोटे छोटे देशो में भी हे ही जिनका पर्दशन भारत से तो बहुत बेहतर रहा ही जैसे क्रिकेट जैसे आरामतलब फालतू खेल के लिए दीवानगी सुविधाओ की कमी भ्र्ष्टाचार नेताओ की मनमानी आदि आदि ये सब भी सही हे और ये भी सच हे की पिछले सालो में फिर भी क्रिकेट से इतर खेलो के लिए फिर भी हालात बनिस्पत बेहतर ही हुए हे पहले तो ये हाल था की जीत पर भी कुछ नहीं मिलता था जबकि अब खिलाड़ियों को कम से कम इतना तो पता हे की एक जीत उन्हें करोड़ो में लाद देगी दूसरे खेलो को अब स्पांसर भी मिलने लगे ही हे वो भी अब ठीक ठाक कमा रहे ही हे वार्ना भारत के कितने ही पुराने ओलम्पिक एशियाड होकि फुटबॉल के खिलाड़ियों की दुदर्शा की खबरे आती रही हे वास्तव में अगर भारत जैसे की आस लगाई गयी थी दस बीस ओलम्पिक मैडल जीत लेता तो भी वो चीन जैसे देश से सात गुना कम ही होते वो भी बड़ी विफलता ही होती तब ये जो कारण विभिन्न लेखों में आजकल चारो तरफ पेले जा रहे हे जिनमे हालात को सुविधाओ को फण्ड की कमी नेताओ आदि को कोसा जा रहा हे तब तो वो सही होते और हे भी . और चलिए मान लिया की चारो तरफ छप रहे लेखों की बात मान भी ली गयी जैसे ये बता रहे हे वैसे हो भी गया और भारत ने अगली बार दो की जगह दस भी मैडल जीत भी लिए ( गोल्ड की तो बात ही ना करे ) तो भी तो हम चीन जैसे देशो से बहुत बहुत बहुत पीछे होंगे ही ——– ? भारत की ओलम्पिक में विफलता तो शायद मानव इतिहास की ही खेलो में सबसे बड़ी विफलता कही जा सकती हे आखिर क्यों इतना बड़ा देश जहां अब अरबपतियों करोड़पतियों लखपतियों की कतार लगी हे ( अभिनव बिंद्रा ने भी शायद खुद की ही वेल्थ के दम पर सुविधाय जुटा कर भारत का एकलौता नॉन हॉकी गोल्ड जीता था ) वो इथोपिया जैसे अकालग्रस्त भुखमरे जैसे देश से भी पिछड़ा हुआ हे मेरा अन्दाज़ा हे की भारत की खेलो में इस अदभुत विफलता का सबसे बड़ा राज़ हे ”हिन्दू कठमुल्लावाद ” !

भारत में सबसे अधिक पैसा और संसाधन इसी हिन्दू कठमुल्लावादी सोच और वर्ग के पास ही हे और साफ़ हे की ये वर्ग ना तो खुद खेलो में कुछ करता हे ( हिंदुत्व की प्रयोगशाला पेसो में सबसे आगे पर खेलो में फिसड्डी ) ना ही किसी और को ही कोई प्रोत्साहन देता हे जैसे की चीनी मिडिया ने साफ़ साफ़ लिखा हे की भारत की खेलो में इतनी बेमिसाल विफलता का एक बड़ा राज़ हे शाकाहार . और शाकाहार पर सबसे अधिक जोर भारत में हिन्दू कठमुल्लावादी वर्ग ही देता हे अगर में गलत नहीं हु तो इस वर्ग की हरकत देखिये की इसने शाकाहार के नाम पर शायद मध्यप्रदेश में गरीब आदिवासी दलित बच्चो से अंडा तक बन्द करवाने की कोशिश की थी इसका मतलब ये नहीं हे की में शाकाहार के खिलाफ हु नहीं शाकाहारी होना भी बहुत अच्छी और सेहतमंद बात हे मगर क्या करे की अधिकतर खेलो में जीतने के लिए आपको सिर्फ सेहतमंद और रोगों से दूर ही नहीं रहना होता हे बल्कि बहुत ही ज़बरदस्त दमखम भी चाहिए होता हे ( इस दमखम की हमारे देश में कितनी कमी हे की अंदाज़ा लगाइये जिस क्रिकेट के लिए भारत में इतनी दीवानगी हे इतनी सुविधाय हे उस तक में भारत आज तक एक भी शुद्ध खूंखार फास्ट बोलर देने में विफल रहा हे इस विफलता को इस तरह से ढंका गया की भारत के बनियो ने क्रिकेट को अपने पेसो और आबादी के दम पर अपने कब्ज़े में लेकर फ़ास्ट बोलिंग को ही बधिया करवा दिया उसका रूप ऐसा बदलाhttp://khabarkikhabar.com/arch ives/1770 की पिछले दिनों महान फ़ास्ट बोलर ग्लेन मैक्ग्रा ने भी शिकायत की की अब फ़ास्ट बोलिंग बर्बाद हो रही हे लेकिन ये सब मक्कारियां चालाकियां और पेसो का रुतबा क्रिकेट जैसे दुनिया के लिए बेमतलब बेमकसद फालतू और आलसियों के खेल में तो चल सकता हे बाकी खेलो ओलम्पिक एशियाड कॉमनवेल्थ और फुटबॉल आदि में नहीं ) इस दमखम के लिए जो खाना जरुरी होता हे वो खाया जाता ही हे साइना नेहवाल की ही बात करे तो वो शुद्ध शाकाहारी थी मगर कोच पुलेला गोपीचंद की सलाह मानकर उन्होंने चिकन खाना शुरू किया और मैडल जीते अब चाहे तो वो और मैडल जीत जीत कर अपना कॅरियर खत्म कर फिर से वेजेटेरियन हो जाए तो कोई हर्ज़ नहीं हे .

अब अंदाज़ा लगाइये देश की सबसे अधिक वेल्थ को अपने कब्ज़े में लिए बैठा हिन्दू कठमूल्लवादी कट्टरपन्ति वर्ग ने शुद्ध शाकाहार के प्रति कट्टरपंथ दिखाकर भारत को खेलो में कितना नुक्सान पहुचाया होगा इसी कारण ये वर्ग खुद भी खेलो में कुछ भी तो ना कर सका हे —- ? ऊपर से कोढ़ में खाज ये भी की इस वर्ग ने खेलो में खुद तो कभी कुछ किया ही नहीं देश का भारी आर्थिक शोषण करके देश में भारी असमानता फैलाकर इसने दुसरो को भी खेलो में कुछ नहीं करने दिया करे कैसे भला जब आर्थिक शोषण लूट और असामनता की वजहों से देश के एक बड़े हिस्से को तो रोटी कपड़ा मकान की समस्याओ से ही कोई निजात नहीं हे खेलो के लिए ऊर्जा कहा से लाये ज़ाहिर हे शाकाहार के प्रति इस वर्ग की सनक को सम्मान ही दिया जा सकता था की भाई जब आपको जानवरो से इतना प्रेम हे तो इंसानो से दस गुना अधिक होना चाहिए था मगर ये वर्ग कभी भी इंसानो के शोषण से बाज़ नहीं आया शोषण लूट भी ऐसी जो शायद ही दुनिया में कही और भी होती हो प्रेमचंद की ” सवा सेर गेंहू ” जैसी शोषण की कहानिया शायद ही किसी और देश में लिखी गयी हो यानी बात बिलकुल साफ हे यानी जब तक देश के सबसे अधिक संसाधन और पैसा हिन्दू कट्टरपन्ति कठमुल्लावादी वर्ग के कब्ज़े में रहेंगे तब तक भारत की खेलो में इसी तरह से दुदर्शा होती रहेगी और हमें क्रिकेट की फ़र्ज़ी खरीदी हुई फालतू उपलब्धियों पर बाकी खेलो में इक्कादुक्का व्यक्तिगत उपलब्धियों से ही सन्तोष करना पड़ेगा और दुनिया हम पर हँसती रहेगी

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दीपा करमाकर और साक्षी मलिक के परिवारों ने अपनी बेटियों की तैयारी के लिए ख़ुद अपना घर-बार सब कुछ दाँव पर न लगा दिया होता, तो उनकी कहानियाँ आज किसी के सामने न होती. इनके और गोपीचन्द जैसों के लिए ‘ईज़ ऑफ़ प्लेयिंग’ जैसी कोई योजना बननी चाहिए न! ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ के लिए तो हम बहुत काम कर रहे हैं, कुछ थोड़ा-सा काम ‘ईज़ ऑफ़ प्लेयिंग’ के लिए भी हो जाये!

नाचो, गाओ, ढोल बजाओ, जश्न मनाओ! बैडमिंटन में पी वी सिन्धु का शानदार कमाल! बेमिसाल. सोना नहीं जीत पायीं, लेकिन चाँदी भी कम नहीं. सिन्धु हारीं, तो अपने से कहीं बेहतर और दुनिया की नम्बर एक खिलाड़ी कैरोलिना मरीन से. और कुश्ती में साक्षी मलिक की दमदार जीत. हार से लौट कर भी जीत की कहानी लिख देना, मामूली बात नहीं और किसी गोल्ड मेडल से कम नहीं! और त्रिपुरा की जिमनास्ट दीपा करमाकर के बिना तो रियो की कहानी कभी पूरी ही नहीं हो सकती. वह मेडल नहीं जीत पायीं, लेकिन देश का दिल उन्होंने ज़रूर जीता. ऐसा अदम्य हौसला, ऐसी लगन, ऐसी मेहनत, ऐसा समर्पण अद्भुत है.

Olympics 2016 : PV Sindhu, Sakshi Malik & Deepa Karmakar – 3 stories of National Pride
रियो से ये विश्वविजय की, गौरव की, प्रेरणा की तीन लाजवाब कहानियाँ हैं, जिनकी चर्चा बहुत दिनों तक होती रहेगी. होनी भी चाहिए. इन पर सारे देश में ख़ूब धूमधाम हो, इतनी कि देश के बच्चे-बच्चे में ललक उठे कि एक दिन उसे भी ओलिम्पिक जीत कर दिखाना है, उसे भी विश्वविजयी बनना है, उसे भी राष्ट्रीय गौरव की कोई बेमिसाल कहानी लिखनी है, ऐसी कोई छाप छोड़नी है कि सदियों तक पीढ़ियाँ उसके नाम पर गर्व से इतराती रहें. लेकिन रियो से इसके अलावा भी कुछ अच्छी और कुछ बुरी कहानियाँ हैं, जिन्हें हम भारतीय अपनी सुविधा से भूल जायेंगे! और बस हमसे सारी गड़बड़ यहीं होती है. और इसीलिए हम सिर्फ़ कभी-कभार ही गिनती की कुछ बड़ी कहानियाँ लिख पाते हैं.

56 Years Long Journey between 2 Bronze Medals
कुश्ती : एक पदक के बाद दूसरा दाँव छप्पन साल बाद!
1952 के हेलसिंकी ओलिम्पिक में खशाबा दादासाहेब जाधव ने पुरुष कुश्ती में कांस्य पदक जीता था. वह हमारी पैदाइश के पहले की बात है. शायद तब भी बड़ी ख़ुशी मनी होगी. मननी भी चाहिए. लेकिन कुश्ती में अगला पदक जीतने के लिए हमको 56 साल का लम्बा इन्तज़ार करना पड़ा. हाँ, यह ज़रूर है कि 2008 में सुशील कुमार के कुश्ती कांस्य पदक के बाद से हम हर ओलिम्पिक में इस स्पर्धा में कुछ न कुछ जीत रहे हैं. लेकिन दूसरे खेलों में ऐसा नहीं है. 1996 में लिएंडर पेस ने टेनिस में कांस्य पदक जीता, तब भी बड़ी ख़ुशी मनी थी, लेकिन टेनिस में वह हमारा पहला और आख़िरी पदक है! निशानेबाज़ी (शूटिंग) में ज़रूर 2004 में राज्यवर्द्धन राठौर ने रजत पदक जीत कर जो सिलसिला शुरू किया था, उसे 2008 में अभिनव बिन्द्रा (स्वर्ण) और 2012 में गगन नारंग (कांस्य) ने जारी रखा. लेकिन इस साल हम वहाँ खाता नहीं खोल पाये. ऐसा ही कुछ बाक्सिंग में भी हुआ. बैडमिंटन में 2012 में सायना नेहवाल के कांस्य पदक के सिलसिले को सिन्धु ने इस साल ज़रूर बेहद शानदार तरीक़े से आगे बढ़ाया है.

Olympics 2016 : जश्न भी, तो कुछ सवाल भी!
तो कुल मिला कर अभी हम कुश्ती, निशानेबाज़ी और बैडमिंटन से ही अगले ओलिम्पिक में सफलता की कुछ कहानियों की उम्मीद कर सकते हैं. इतने बड़े देश में हम सफलता की बड़ी कहानियाँ लगातार क्यों नहीं लिख पाते, क्या यह सोचने की ज़रूरत नहीं? क्या इस पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए? वैसे सवाल उठाना आजकल बड़े जोखिम का काम हो चुका है. ऊपर से नीचे तक लोग हाथ धो कर पिल पड़ते हैं. फिर भी यह जोखिम मैं उठा रहा हूँ!

Pullela Gopichand : Amazing story of Committment and Dedication
तो बड़ी कहानियों को तो हर कोई लपकता है, उन पर गर्वित होता है, श्रेय लूटता है, उसमें कोई हर्ज नहीं. लेकिन इसमें चार चाँद लग जायें, जब हम साथ में बहुत-सी दूसरी कहानियों को भी देखने, जानने, समझने का वक़्त निकालें. सिन्धु की कहानी चमाचम चमकदार है, लेकिन उससे भी कहीं ज़्यादा शानदार है उसके कोच पुलेला गोपीचन्द की कहानी, जिसने अथक मेहनत कर और ज़रूरत पड़ने पर अपना घर तक गिरवी रख कर अपनी बैडमिंटन अकादमी के लिए पैसा जुटाया और बैडमिंटन खिलाड़ियों की ऐसी नयी पीढ़ी तैयार की जो शायद अगले कुछ बरसों तक दुनिया पर राज करे. सायना नेहवाल और सिन्धु के अलावा किदम्बी श्रीकान्त से भी बड़ी उम्मीदें की जा सकती हैं. श्रीकान्त दुनिया के नम्बर तीन शटलर और पिछले दो बार के ओलिम्पिक चैम्पियन लिन डैन से क्वार्टरफ़ाइनल बस जीतते-जीतते ही रह गये. मेरे ख़याल से उस मैच में श्रीकान्त का खेल बड़ा अच्छा था, लेकिन ‘माइंड गेम’ में वह कमज़ोर पड़ गये.

‘चलता है’ सो ‘माइंड गेम’ नहीं चलता!
यह ‘माइंड गेम’ भारतीय खिलाड़ियों की सबसे बड़ी कमज़ोरी है. वरना शायद हमारे कुछ और खिलाड़ी यक़ीनन कुछ और पदक जीत सकते थे. वे वाक़ई पदक जीतने की योग्यता रखते थे, फिर भी नहीं जीत पाये. पिछले कुछ सालों से खिलाड़ियों में ‘किलर इंस्टिक्ट’ के लिए मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण दिये जाने की शुरुआत हुई है, लेकिन इसके लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है. कई बार हम भारतीय अपनी नैसर्गिक ‘चलता है’ की प्रवृत्ति के चलते छोटे-छोटे अनुशासनों की परवाह नहीं करते, जिसकी बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ती है. इसका इलाज कहीं और नहीं, ख़ुद हमारे ही पास है. कैसे?

क्रिकेट में कैसे बदल गया ‘एटीट्यूड?’
क्रिकेट को लीजिए. कुछ साल पहले तक हम क्रिकेट में भी ‘ढुलमुल यक़ीन’ ही दिखते थे. कब हार जायें, कब जीत जायें, कुछ पता नहीं. अस्सी के दशक में जब केरी पैकर ने रंगीन कपड़ों में दिन-रात के क्रिकेट की शुरुआत की, तो उसकी बड़ी आलोचना हुई. लेकिन उस क्रिकेट ने आगे चल कर न सिर्फ़ समूचे क्रिकेट को बदला, बल्कि कुछ बरस बाद भारतीय क्रिकेट को भी बदल दिया. क्रिकेट में अथाह पैसा आने से खिलाड़ियों को ख़ुद-ब-ख़ुद समझ में आ गया कि ‘हार्डकोर प्रोफ़ेशनल’ नहीं बनोगे, तो पैसा नहीं बना पाओगे. पैसा खोना किसे अच्छा लगता है? नतीजा? इस पैसे ने हमारे सारे के सारे क्रिकेटरों की बैटिंग, बॉलिंग, फ़ील्डिंग, थ्रो से लेकर अनुशासन, प्रैक्टिस, रुझान और पूरा का पूरा ‘एटीट्यूड’ ही बदल दिया. मतलब यह कि ठान लिया जाये कि ‘एटीट्यूड’ बदलना है, तो वह चुटकी बजाते बदल जायेगा. क्रिकेट में तो पैसे ने यह काम कर दिया, लेकिन बाक़ी खेलों में यह काम कैसे हो? इस सवाल का जवाब आये बिना हम ग़ैर-क्रिकेट खेलों में बड़े करिश्मे लगातार नहीं कर पायेंगे.

संयोग से नहीं होता करिश्मा!
करिश्मा संयोग से नहीं होता. किया जाता है. इसी ओलिम्पिक में इस बार पुरुष हॉकी के फ़ाइनल में दो ऐसी टीमें खेलीं, जिन्हें कोई किसी गिनती में नहीं रखता था. लेकिन बेल्जियम और अर्जेंटीना ने बड़े-बड़े दिग्गजों की मिट्टी पलीद कर दी. यह क्या संयोग से हो गया?

चीन ने कहा था 60, ले गये इकसठ!
बरसों पहले की बात है. बड़े लम्बे अन्तरराष्ट्रीय प्रतिबन्ध के बाद 1982 के एशियाई खेलों में पहली बार चीन के लिए दरवाज़े खोले गये थे. चीनी खिलाड़ी कई बरसों से दुनिया की हर प्रतियोगिता से बाहर थे. वे कहीं खेल नहीं सकते थे, लेकिन वे सुस्त नहीं पड़े, आराम से नहीं बैठे, अभ्यास में कोई कोताही नहीं की. और जब चीनी दल एशियाड के लिए दिल्ली आया तो इस दावे के साथ कि वह कम से कम साठ स्वर्ण पदक जीतेगा. और वे इकसठ स्वर्ण पदक जीत कर लौटे! दावे से एक गोल्ड मेडल ज़्यादा! इसे कहते हैं तैयारी और अनुशासन, जो किसी देश को खेलों का सुपरपॉवर बनाता है. क्या हम करते हैं ऐसी तैयारी? करना चाहते हैं ऐसा? बनना चाहते हैं खेलों के सुपर पॉवर?

The queer case of wrestler Narsingh Yadav in Olympics 2016
यह ‘एटीट्यूड’ हर जगह चाहिए. नरसिंह यादव का मामला लीजिए. ‘नाडा’ ने उन्हें ‘क्लीयरेन्स’ दे दी. उसके बाद सब हाथ पर हाथ धर कर बैठ गये. पहले से यह क्यों नहीं सोचा गया कि ओलिम्पिक में मामला न बिगड़े, इसके लिए कुछ करके चलना चाहिए. शुरू से कहा जा रहा है कि नरसिंह के ख़िलाफ़ साज़िश हुई. किसी ने उसके खाने की चीज़ों में स्टेरायड मिला दिये. यह कोई मामूली आरोप है? यह देश के विरुद्ध सीधी साज़िश है. सीधे-सीधे देशद्रोह का मामला है. लेकिन तब कुछ नहीं किया गया. अब माँग की जा रही है कि सीबीआइ जाँच हो. अरे अगर तभी देशद्रोह का मामला दर्ज हो गया होता, सीबीआइ जाँच शुरू हो गयी होती तो कम से कम ‘वाडा’ और ‘कैस’ (कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन फ़ॉर स्पोर्ट्स) के सामने आपकी इस बात का कुछ वज़न होता कि नरसिंह साज़िश के शिकार हुए हैं. लेकिन आपने तथाकथित साज़िश के ख़िलाफ़ कुछ किया ही नहीं, तो दुनिया साज़िश की थ्योरी कैसे मान ले? पूरा मामला दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इस दुर्भाग्य का दोषी कौन है? भाग्य या हम ख़ुद?

तो अब ‘ईज़ ऑफ़ प्लेयिंग’ की बात करें?
दीपा करमाकर और साक्षी मलिक के परिवारों ने अपनी बेटियों की तैयारी के लिए ख़ुद अपना घर-बार सब कुछ दाँव पर न लगा दिया होता, तो उनकी कहानियाँ आज किसी के सामने न होती. इनके और गोपीचन्द जैसों के लिए ‘ईज़ ऑफ़ प्लेयिंग’ जैसी कोई योजना बननी चाहिए न! ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ के लिए तो हम बहुत काम कर रहे हैं, कुछ थोड़ा-सा काम ‘ईज़ ऑफ़ प्लेयिंग’ के लिए भी हो जाये! आज की दुनिया में ओलिम्पिक मेडल भी सुपरपॉवर होने की निशानी हैं. तो ‘सिन्धु-साक्षी’ पॉवर से बनिए न सुपरपॉवर! कौन रोकता है?

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वीकेंड के वार में सभी घरवालों की सलमान जमकर क्लास लगाते हैं। साथ ही कुछ कंटेस्टेंट की पोल भी खोलते हैं। लेकिन इस बार सलमान ने घरवालों की पोल तो खोली इसके साथ ही अपना भी एक सीक्रेट शेयर किया। सलमान ने ये राज तब खोला जब ‌बिग बॉस 10 के एक्स कंटेस्टेंट मनु पंजाबी और लोपामुद्रा सेट पर मौजूद थे। सलमान ने बताया कि उन्होंने एक बच्चे को गोद लिया है। ये सुनते ही सेट पर सन्नाटा छा गया। ये बात तब शुरू हुई जब महजबीं ने सलमान के सामने शिल्पा पर आरोप लगाते हुए कहा 'मैंने सुना है शिल्पा ने कहा कि महजबीं अपने छोटे बच्चे को छोड़कर कैसे शो में आ गईं।

वो होती तो कभी ना आतीं। कैसी मां है ये।' महजबीं ने सलमान ने पूछा कि आपको क्या लगता है कि मैं कैसी मां हूं। सलमान ने महजबीं से कहा कि आप बहुत अच्छी मां हैं। हर मां अपने बच्चे को छोड़कर काम पर जाती है। मेरी दो बहने हैं वो भी अपने बच्चे को छोड़कर काम पर जाती हैं। फिर सलमान ने कहा कि उनका भी एक बच्चा है। जिसे उन्होंने अडॉप्ट किया है। वह भी उसे छोड़कर काम पर आए हैॆं। इतना कहकर वह कुछ पल के लिए शांत हो गए और कहा, 'इस बच्चे का नाम सलमान खान है।' बता दें कि कुछ दिनों पहले सलमान ने सरोगेसी से एक बच्चे को एडॉप्ट करने की इच्छा जाहिर की थी।

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फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच एक एेसा शब्द है जिस पर कई बार बात हो चुकी है। काम दिलाने के नाम पर कई सेलिब्रेटीज ने खुलकर अपना कड़वा अनुभव रखा है। हाल ही में मराठी फिल्मों की अदाकारा हर्षली जाइन ने भी कास्टिंग काउच को लेकर अपनी कहानी बताई। हर्षाली ने बताया मैं जब भी किसी ऑडिशन देने के लिए या किसी मीटिंग के लिए जाती तो अक्सर मेरे साथ ऐसा होता. लेकिन उस दिन तो हद ही हो गई थी। उस आदमी ने मुझे व्हाट्सऐप पर मैसेज किया और कहा कि मैं तुम्हारे साथ यह करना चाहता हूं। मैं ये मैसेज पढ़कर हैरान थी। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं। क्या जवाब दूं।

मैं बहुत डर गई थी। उस शख्स से राजनीति तार भी जुड़े थे। मैं समझ गई थी अगर मैंने इस आदमी के बारे में एक शब्द भी कहा तो अच्छा नहीं होगा। मेरे साथ कुछ भी हो सकता है। मैं उनसे बोल दिया, ‘ठीक है मैं मिलूंगी’। वो अक्सर मुझे आधी रात को ही फोन करता था। कहता था, मुझसे मिलने आना तो इस रंग के कपड़े पहनकर आना। एक दिन मैंने हिम्मत करके पूछ लिया आप चाहते क्या हैं। तो उन्होंने कहा, वो एक नाटक प्रोडयूस कर रहे हैं उसमें मुझे लेना चाहते हैं। लेकिन उस रोल के लिए तुम्हें कॉम्प्रोमाइज करना होगा, खुलकर सामने आना होगा। मैं समझ गई और फिर उनसे कभी न मिलने का फैसला किया।

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इंडिया बीच फैशन वीक 2017 में डिजाइनर केन फर्न्स के सहयोग से निर्मित टीवी चैनल रोमेडी नाओ के संग्रह ‘लव.लाइफ.लिव’ के लिए रैंप वॉक कर चुकीं अभिनेत्री गौहर खान अपना फैशन संग्रह पेश करेंगी। गौहर ने कहा, ‘‘भारत में फैशन की मांग और फैशनेबल बनने की इच्छा रखने वाले लोग बहुत अधिक हैं।

अगर कोई टीवी चैनल एक फैशन लाइन के साथ आता है तो यह न केवल अच्छा है बल्कि वह मेरा प्रतियोगी भी होगा क्योंकि मैं भी अपना संग्रह ला रही हूं।’’ हालांकि, उन्होंने अपने संग्रह पर और कोई टिप्पणी करने से साफ इंकार कर दिया। गौहर इससे पहले विद्या बालन अभिनीत फिल्म ‘बेगम जान’ में दिखाई दी थीं।

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अभिनेत्री कैटरीना कैफ फिटनेस को लेकर काफी सजग रहती हैं और वह आजकल जिम ट्रेनर की भूमिका में नजर आ रही हैं और अलिया भट्ट को प्रशिक्षण दे रही हैं। कैटरीना ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया है जिसमें वह आलिया भट्ट को उसके प्रशिक्षक की अनुपस्थिति में प्रशिक्षण देती हुई नजर आ रही हैं। वीडियो के साथ कैटरीना ने लिखा है कि जब प्रशिक्षक नजर नहीं आए तो क्या होता है।

तुम अच्छा कर रही हो आलिया। घबराओ मत... बस अभ्यास करो। इस वीडियो क्लिप में कैटरीना आलिया को प्रेरित करती हुई नजर आ रही हैं। अभिनेत्री आलिया ने हाल ही में अपनी राजी फिल्म की शूटिंग समाप्त की है। इस फिल्म का निर्देशन मेघना गुलजार ने किया है। इस बीच, अभिनेत्री कैटरीना कैफ अभिनेता सलमान खान के साथ आ रही अपनी फिल्म टाइगर जिंदा है को प्रदर्शित करने की तैयारी में लगी हुई हैं।

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इन दिनों अक्षय कुमार टेलीविजन शो 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' को में दिखाई दे रहे हैं। लेकिन इस शो की जज रह चुकी मल्लिका दुआ पर एक टिप्पणी के चलते विवादों पड़ गए हैं। एेसे में अक्षय को मिला है उनकी पत्नी ट्विंकल खन्ना का साथ। ट्विंकल खन्ना ने सोशल मीडिया पर एक ट्वीट करते हुए लिखा है कि, 'मैं द लाफ्ट चैलेंज के सेट पर शुरू हुए विवाद में अपनी राय रखना चाहूंगी। इस शो में एक बैल है जिसे शो के जज को प्रतिभागी के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद बजाना होता है।

इसी के चलते जब मल्लकि दुआ इस बैल को बजाने के लिए आगे बढ़ी तो अक्षय कुमार ने कहा, "मल्लिका जी आप बैल बजाओ मैं आपको बजाता हूं।" ये एक ऐसी कहावत है जिसे पुरुष और महिलाएं सभी इस्तेमाल करते हैं। जैसे- "मैं उसे बजाने जा रहा हूं/ मैं उसे बजाने जा रही हूं" या "आज तो मेरी बज गई।" यहां तक की रेड एफएम की भी टैग्लाइन हैं 'बजाते रहो'। मलिलका दुआ के पिता श्री विनोद दुआ ने भी एक पोस्ट लिखा जिसमें उन्होंने कहा था कि 'मैं इस बेफकूफ अक्षय कुमार को पेंच कर दूंगा।'

क्या उनके इस वाक्य को भी सीधे सीधे लेना चाहिए या घुमा फिरा कर? ट्विंकल खन्ना ने कहा, उनके इस वाक्य को भी सीधे सीधे लेना चाहिए या घुमा फिरा कर? आगे ट्विंकल कहती हैं कि शब्द, और खासकर उनके मतलब को सही तरीके से समझा जाना चाहिए।

 

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बॉलीवुड में अपने संजीदा अभिनय के लिये मशहूर राजकुमार राव का कहना है कि वह खास तरह की फिल्म को लोगों के सामने लाना चाहते हैं। राजकुमार राव को फिल्म इंडस्ट्री में आये हुए सात साल हो गये हैं। उन्होंने इस साल पांच फिल्मों में काम किया है। इन फिल्मों को न केवल समीक्षकों ने सराहा है बल्कि दर्शकों ने भी उनके काम को पसंद किया है। राजकुमार की छठी फिल्म ‘शादी में जरुर आना’ रिलीज के लिए तैयार है। इस बार राजकुमार राव रोमांटिक ड्रामा फिल्म कर रहे हैं, जोकि उनके लिए एक नया जॉनर है।

उन्होंने कहा, 'मैं एक खास तरह की फिल्मों को लोगों तक लाना चाहता हूं और इसके लिए खुद में भरोसा बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी। कई बार ऐसा भी हुआ जब फिल्में नहीं चलीं या पैसे नहीं कमा पाईं लेकिन आज जो इज्जत मिल रही है, उससे ये चीजें छिप जाती हैं। मेरा मानना है कि कुछ फिल्मों को बॉक्स आॅफिस परफॉर्मेंस के आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए। ट्रैप्ड, बरेली की बर्फी और न्यूटन जैसी फिल्मों ने बॉक्स आॅफिस पर अच्छा कलेक्शन किया है। पहले भी कई लोग मेरे साथ काम करना चाहते थे लेकिन पैसा लगाने के मामले में वे मुझ पर भरोसा नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें भरोसा रहता है कि अगर मुझ पर निवेश करेंगे तो उन्होंने फायदा ही होगा नुकसान नहीं।'

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भारत हमेशा से अपनी संस्कृति और रहस्यों को लेकर चर्चित रहने वाला देश है। इसी तरह हम आज भारत की एक रहस्यमयी गुफा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका संबंध महाभारत के काल से रहा है। भारत के मध्यप्रदेश प्रांत के रायसेन जिले में ये गुफाएं स्थित हैं। गुफा के चारो तरफ विंध्य पर्वतमालाएं हैं, इनका संबंध नव-पाषाण काल से है। मध्य भारत के पाठार के दक्षिणी किनारे स्थित विध्याचल की पहाड़ियों के निचले छोर पर स्थित भीमबेटका गुफाएं महाभारत काल में निर्मित हुई थी, इस प्रकार की मान्यता है। इन गुफाओं के दक्षिण से सतपुड़ा की पहाड़ियां शुरु हो जाती हैं। भीमबेटका गुफाओं में बनी चित्रकारियां यहां रहने वाले पाषाणकालीन मनुष्यों के जीवन को दर्शाती हैं।

इन गुफाओं को भीम का निवास स्थान भी माना जाता है। हिंदू ग्रंथ महाभारत के अनुसार भीम पांच पांडवों में से द्वितीय थे। भीम के निवास स्थान के कारण ही इनका नाम भीमबैठका पड़ा। भीमबेटका गुफ़ाओं में प्राकृतिक लाल और सफ़ेद रंगों से वन्यप्राणियों के शिकार दृश्यों के अलावा घोड़े, हाथी, बाघ आदि के चित्र उकेरे गए हैं। इन चित्र में से यह दर्शाए गए चित्र मुख्‍यत है; नृत्‍य, संगीत बजाने, शिकार करने, घोड़ों और हाथियों की सवारी, शरीर पर आभूषणों को सजाने और शहद जमा करने के बारे में हैं। घरेलू दृश्‍यों में भी एक आकस्मिक विषय वस्‍तु बनती है।

टीक और साक के पेड़ों से घिरी भीमबेटका गुफाओं को यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत के रुप में मान्यता दी गई है। मध्य प्रदेश के भीमबेटका क्षेत्र को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किया गया है। इस गुफा को भारत के मानव जीवन का प्राचीनतम चिन्ह माना गया है। ये गुफा आदि-मानवों द्वारा बनाए गए शैलचित्रों और शैलाश्रयों के लिए प्रसिद्ध है।

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कार्तिक माह में तुलसी का पूजन बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर आपके घर में तुलसी का पौधा नहीं है या कुछ खराब हो गया है तो इस माह में तुलसी का पौधा लगाना बहुत शुभ माना जाता है। भगवान श्री हरि ने तुलसी के ह्रदय में शालिग्राम रुप में निवास करते हैं, इसी कारण से तुलसी बहुत ही फलदायी होती है। तुलसी का पूजन हमेशा करना तो फलदायी होता ही है लेकिन कार्तिक माह में पूजा करने से फल कई गुना तक बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि तुलसी पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा है और साथ ही सभी देवी-देवताओं की तुलसी प्रिय होती है। घर में तुलसी का पौधा का पौधा होना सिर्फ धार्मिक रुप से ही महत्वपूर्ण नहीं होता है बल्कि स्वास्थय के लिए भी लाभदायक होता है।

तुलसी का पौधा आज के दिन लगाना शुभ माना जाता है अगर आपके घर का पौधा सूख गया है तो इस विधि से तुलसी विवाह के दिन नया पौधा लगाएंगे तो वो कभी नहीं सूखेगा। तुलसी का पौधा ना ही अधिक ठंड में लगाना चाहिए और ना ही अधिक गर्मी के मौसम में, नंवबर का माह सबसे उचित माह माना जाता है। किसी से अगर तुलसी का पौधा लाए तो वो बिल्कुल नया होना चाहिए क्योंकि पुराने पौधे के जड़े विकसित कर जाती हैं। तुलसी का पौधा लगाने के लिए हमेशा मिट्टी का ही गमला लेना चाहिए। पौधा लगाने के लिए काली मिट्टी सबसे उचित मानी जाती है, अगर ये उपलब्ध ना हो तो सामान्य मिट्टी लें, लेकिन पीली मिट्टी बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए।

तुलसी का पौधा रोपण करते समय मिट्टी को अच्छे से दबा दें और उसे ऊपर तक भर दें, इससे पौधा गिरेगा नहीं। इसके बाद बीच में गहरा छेद बनाएं और उसमें पौधे को लगा दें। पौधे की जड़ों को मिट्टी से ढ़क दें। इसके बाद गमले में पानी भर दें। पौधे को रोजाना पानी दें और उसे 3 महीनों तक छाएं में रखें। इसके बाद जहां हल्की धूप आती हो, वहीं इस पौधे को रखें।

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शास्त्रों में कहा है देवताओं के दिन-रात धरती के छह महीने के बराबर होते हैं। इसी आधार पर जब वर्षाकाल प्रारंभ होता है, तो देवशयनी एकादशी को देवताओं की रात्रि प्रारंभ होकर शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी तक छह माह तक देवताओं की रात रहती है। कहा जाता है कि इस दौरान तुलसी की पूजा से ही देवपूजा का फल मिलता है।

देवउठनी से छह महीने तक देवताओं का दिन प्रारंभ हो जाता है। अतः तुलसी का भगवान श्री हरि विष्णु की शालीग्राम स्वरूप के साथ प्रतीकात्मक विवाह कर श्रद्धालु उन्हें वैकुंठ को विदा करते हैं। इस तिथि को तुलसी बैकुंठ लोक में चली जाती हैं और देवताओं की जागृति होकर उनकी समस्त शक्तियों पृथ्वी लोक में आकर लोक कल्याणकारी बन जाती हैं।

तुलसी पूजा का मंत्र

वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नन्दनीच तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतभामांष्टक चैव स्रोतं नामर्थं संयुक्तम। य: पठेत तां च सम्पूज् सौऽश्रमेघ फललंमेता।।

तुलसी के आठ नाम – वृंदा, वृंदावनी, विश्वपूजिता, विश्वपावनी, पुष्पसारा, नन्दिनी, तुलसी और कृष्ण जीवनी। इस मंत्र का जाप करें या नहीं हो सके, तो तुलसी के इन आठ नामों को स्मरण करने से ही अक्षय फल मिलते हैं।

इन चीजों से करें तुलसी पूजन

तुलसी पूजा के लिए घी का दीपक और धूप लगाएं। सिंदूर, चंदन, नैवद्य और पुष्प अर्पित करें। रोजाना तुलसी का पूजन करने से घर का वातावरण पवित्र रहता है। इस पौधे में कर्इ ऐसे तत्व भी होते हैं, जिनसे रोग प्रतिरोधक क्षमता मिलती है। इसे प्राणदायनी कहा जाता है और जल या दूध में तुलसीदल डालने से वह पंचामृत हो जाता है।

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देवउठनी एकादशी या देवप्रबोधिनी एकादशी का बहुत धार्मिक महत्व है। दीपावली के ग्यारहवें दिन इसे मनाया जाता है। कई जगहों पर इसे छोटी दीपावली भी कहा जाता है। इस दिन तुलसी-विवाह का आयोजन भी किया जाता है।

माना जाता है कि आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है, उस दिन विष्णु सहित सारे देवता क्षीरसागर में विश्राम करने चले जाते हैं। अत: इन चार माह में किसी भी तरह के शुभ कार्यों का आयोजन नहीं किया जाता है। देव प्रबोधिनी एकादशी पर देवों का विश्राम पूरा होता है शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देव प्रबोधिनी एकादशी का त्योहार मनाया जाता है।

माना जाता है कि इस दिन सूर्य और दूसरे सभी ग्रह अपनी स्थिति में परिवर्तन करते हैं, जिसका प्रबाव मनुष्य की इंद्रियों पर पड़ता है। इससे बचने के लिए व्रत, ध्यान और आराधना की जाती है। इसी कड़ी में देव प्रबोधिनी एकादशी इसलिए भी महत्वपूर्ण हो उठती है कि इस दिन चार माह पश्चात देव उठते हैं।

महत्व

देव उठनी या देव प्रबोधिनी एकादशी का बहुत पौराणिक महत्व है।

  • इसे पाप विनाशिनी और मुक्ति देने वाली एकादशी कहा जाता है, पुराणों में लिखा है कि इस दिन के आने से पहले तक गंगा दान का महत्व होता है, इस दिन उपवास रखने का पुण्य कई तीर्थ दर्शन, हजार अश्वमेध यज्ञ और सौ राजसूय यज्ञ के तुल्य माना गया है।
  • इस दिन का महत्व स्वयं ब्रह्मा ने नारद को बताते हुए कहा था कि इस दिन एक समय खाना खाने से एक जन्म, रात को भोजन करने से दो जन्म और पूरा दिन व्रत रखने से कई जन्मों के पापों का नाश होता है।
  • इस दिन व्रत करने से कई जन्मों का उद्धार होता है और बड़ी-से-बड़ी मनोकामना पूरी होती हैं।
  • माना जाता है कि इस एकादशी पर व्रत करने का पुण्य राजसूय यज्ञ करने से कहीं ज्यादा है। वेदों में कहा गया है कि इस एकादशी का व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है जो कई तीर्थ दर्शन, अश्वमेघ यज्ञ, सौ राजसूय यज्ञ के तुल्य माना गया है।

व्रत विधि

देवउठनी एकादशी को व्रत के दिन सूर्योदय से पूर्व नित्य कार्य करके व्रत का संकल्प लें और सूर्य भगवान को अर्घ्य दें। पुराणों में कहा गया है कि यदि आप दान नदी के तट या कुएं पर करें तो बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन निराहार उपवास किया जाता है। दूसरे दिन द्वादशी को पूजा करके व्रत का उद्यापन कर भोजन किया जाना चाहिए। इस दिन बैल पत्र, शमी पत्र और तुलसी चढ़ाने का और तुलसी विवाह का बहुत महत्व है। तुलसी विवाह से संबंधित कथा भी इस व्रत के साथ जुड़ती है।

धार्मिक कारणों से इत्तर व्यावहारिक रूप से बारिश के चार माह में कृषि संबंधी गतिविधियों और दूसरी व्यावहारिक मुश्किलों के चलते कोई शुभ और मंगल कार्य किए जाने संभव नहीं होते हैं, इसलिए भी इन चार महीनों में इन्हें वर्जित किया गया है। याद रहें कि पारंपरिक रूप से भारत की अर्थव्यवस्था कृषि-प्रधान है बारिश के महीनों में खेतों में काम ज्यादा हुआ करता है। दूसरा शादी-ब्याह या दूसरे मांगलिक आयोजनों में बारिश की वजह से व्यवस्था में मुश्किल होती है, इसलिए भी बारिश के चार महीनों में मांगलिक कार्य वर्जित बताए गए हैं।

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मां को आरती के साथ ही चालीसा का पाठ भी बहुत प्रिय है। इसके लिए मां के पूजन के बाद कमलगट्टे की माला से मां के 108 नामों का जान करना आपके सारे दुखों को दूर कर सकता है।

शास्‍त्रों के अनुसार अगर शुक्रवार दिन मां लक्ष्मी की पूजा को पूरे विधि-विधान से किया जाए तो मनुष्‍य को सौभाग्‍य की प्राप्ति होती है । मां लक्ष्मी के पूजन का शुभ दिन शुक्रवार को माना गया है और इस मां की पूजा में कई मंत्रों का जाप होता है। मां को आरती के साथ ही चालीसा का पाठ भी बहुत प्रिय है। इसके लिए मां के पूजन के बाद कमलगट्टे की माला से मां के 108 नामों का जान करना आपके सारे दुखों को दूर कर सकता है।

1. प्रकृति- प्रकृति 2. विकृति- दोरूपी प्रकृति 3. विद्या- बुद्धिमत्ता 4. सर्वभूतहितप्रदा- ऐसा व्यक्ति, जो संसार के सारे सुख दे सके 5. श्रद्धा- जिसकी पूजा होती है 6. विभूति- धन की देवी 7. सुरभि स्वर्गीय- देवी, 8. परमात्मिका- सर्वव्यापी देवी 9. वाची- जिसके पास अमृत भाषण की तरह हो 10. पद्मालया- जो कमल पर रहती है 11. पद्मा- कमल 12. शुचि- पवित्रता की देवी 13. स्वाहा- शुभ 14. स्वधा- ऐसी अव्यक्ति जो अशुभता को दूर करे 15. सुधा- अमृत की देवी, धन्या- आभार का अवतार, हिरण्मयीं- जिसकी दिखावट गोल्डन है 18. लक्ष्मी- धन और समृद्धि की देवी 19. नित्यपुष्ट- जिससे दिन पर दिन शक्ति मिलती है 20. विभा- जिसका चेहरा दीप्तिमान है 21. अदिति- जिसकी चमक सूरज की तरह है 22. दीत्य- जो प्रार्थना का जवाब देता है 23. दीप्ता- लौ की तरह 24. वसुधा- पृथ्वी की देवी 25. वसुधारिणी- पृथ्वी की रक्षक 27. कांता- भगवान विष्णु की पत्नी 28. कामाक्षी- आकर्षक आंख वाली देवी 29. कमलसंभवा- जो कमल में से उपस्थित होती है 30. अनुग्रहप्रदा- जो शुभकामनाओं का आशीर्वाद देती है,

31. बुद्धि- बुद्धि की देवी 32. अनघा- निष्पाप या शुद्ध की देवी 33. हरिवल्लभी- भगवान विष्णु की पत्नी 34. अशोक- दु:ख को दूर करने वाली 35. अमृता- अमृत की देवी 36. दीपा- दितिमान दिखने वाली 37. लोक शोक विनाशिनी- सांसारिक मुसीबतों को निगलने वाली, 38. धर्मनिलया- अनंत कानून स्थापित करने वाली 39. करुणा- अनुकंपा देवी 40. लोकमट्री- ब्रह्माण्ड की देवी 41. पद्मप्रिया- कमल की प्रेमी 42. पद्महस्ता- जिसके हाथ कमल की तरह हैं 43. पद्माक्ष्य- जिसकी आंख कमल के जैसी है 44. पद्मसुंदरी- कमल की तरह सुंदर 45. पद्मोद्भवा- कमल से उपस्थित होने वाली 46. पद्ममुखी- कमल के दीप्तिमान जैसी देवी 47. पद्मनाभप्रिया- पद्मनाभ की प्रेमिका- भगवान विष्णु 48. रमा- भगवान विष्णु को खुश करने वाले 49. पद्ममालाधरा- कमल की माला पहनने वाली 50. देवी- देवी, 51. पद्मिनी- कमल की तरह 52. पद्मगंधिनी- कमल की तरह खुशबू है जिसकी 53. पुण्यगंधा- दिव्य सुगंधित देवी 54. सुप्रसन्ना- अनुकंपा देवी 55. प्रसादाभिमुखी- वरदान और इच्छाओं का अनुदान देने वाली 56. प्रभा- देवी जिसका दीप्तिमान सूरज की तरह हो 57. चन्द्र वंदना- जिसका दीप्तिमान चन्द्र की तरह हो, 58. चंदा- चन्द्र की तरह शांत 59. चन्द्र सहोदरी- चन्द्रमा की बहन 60. चतुर्भुजा- चार सशस्त्र देवी 61, चन्द्ररूपा- चन्द्रमा की तरह सुंदर 62. इंदिरा- सूर्य की तरह चमक 63. इंदुशीतला- चांद की तरह शुद्ध 64. अह्लाद जननी- खुशी देने वाली 65. पुष्टि- स्वास्थ्य की देवी, 

66. शिव- शुभ देवी 67. शिवाकारी- शुभ का अवतार 68. सत्या- सच्चाई 69. विमला- शुद्ध 70. विश्वजननी- ब्रह्माण्ड की देवी 71. पुष्टि- धन का स्वामी, 72. दरिद्रियनशिनी- गरीबी को निकालने वाली 73. प्रीता पुष्करिणी- देवी जिसकी आंखें सुखदायक है 74. शांता- शांतिपूर्ण देवी 75. शुक्लमालबारा- सफेद वस्त्र पहनने वाली 77. बिल्वनिलया- जो बिल्व पेड़ के नीचे रहता है 78. वरारोहा- देवी, जो इच्छाओं का दान देने वाली है 79. यशस्विनी- प्रसिद्धि और भाग्य की देवी, 80. वसुंधरा- धरती माता की बेटी 81. उदरंगा- जिसका शरीर सुंदर है 82. हरिनी- हिरण की तरह है जो 83. हेमा मालिनी- जिसके पास स्वर्ण हार है 84. धनधान्यकी- स्वास्थ्य प्रदान करने वाली 85. सिद्धि- रक्षक 86. स्टरीनासौम्य- महिलाओं पर अच्छाई बरसाने वाली 87. शुभप्रभा- जो शुभता प्रदान करे, 88. नृपवेशवगाथानंदा- महलों में रहता है जो 89. वरलक्ष्मी- समृद्धि की दाता 90. वसुप्रदा- धन को प्रदान करने वाली 91. शुभा- शुभ देवी 92. हिरण्यप्राका- सोने में 93. समुद्रतनया- महासागर की बेटी 94. जया- विजय की देवी 95. मंगला- सबसे शुभ, 96. देवी- देवता या देवी97. विष्णुवक्षः- जिसके सीने में भगवान विष्णु रहते हैं 98. विष्णुपत्नी- भगवान विष्णु की पत्नी 99. प्रसन्नाक्षी- जीवंत आंख वाले 100. नारायण समाश्रिता- जो भगवान नारायण के चरण में जाना चाहता है 101. दरिद्रिया ध्वंसिनी- गरीबी समाप्त करने वाली 102. डेवलष्मी- देवी, 103. सर्वपद्रवनिवर्णिनी- दु:ख दूर करने वाली 104. नवदुर्गा- दुर्गा के सभी नौ रूप 105. महाकाली- काली देवी का एक रूप 106. ब्रह्मा-विष्णु-शिवात्मिका- ब्रह्मा-विष्णु-शिव के रूप में देवी 107. त्रिकालज्ञानसंपन्ना- जिससे अतीत, वर्तमान और भविष्य के बारे में पता है 108. भुवनेश्वराय- ब्रह्माण्ड की देवी या देवता।

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ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में प्रसिद्ध राजारानी मंदिर काफी लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यहां हजारों की संख्या में लोग हर साल घूमने के लिए आते हैं। 11वीं शताब्दी में बने इस मंदिर को स्थानीय लोग 'लव टैंपल' के रूप में जानते हैं। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां किसी भगवान की पूजा नहीं की जाती है क्योंकि मंदिर के गर्भ-गृह में कोई प्रतिमा नहीं है।

यह मंदिर प्रचीन समय की उत्कृष्ट वास्तुशिल्प का बेहतरीन उदाहरण है, जहां दीवारों पर स्त्री और पुरुषों की कुछ कामोत्तेजक मूर्तियों की सुंदर नक्काशी की गई है। इसके अलावा मंदिर में शेर, हाथी, बैल की मूर्तियां हैं। ये कलाकृतियां मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर की कलाकृतियों की याद दिलाती हैं।

मंदिर के निर्माण के लिए लाल और पीले रंग के बलुआ पत्थर के इस्तेमाल किया गया है। इन्हें स्थानीय भाषा में राजारानी कहा जाता है, इसलिए इस मंदिर का नाम राजारानी टैंपल पड़ा। इस मंदिर की देख-रेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण करता है और यहां जाने के लिए टिकट लेना पड़ता है।

हालांकि, मंदिर की दीवारों पर भगवान शिव और देवी पार्वती के चित्र बने होने के कारण शैव धर्म के साथ इसकी मजबूत संबंध लगता है। यह भी माना जाता है कि पूर्व में यह इंद्रेश्वर के रूप में जाना जाता था, भगवान शिव का एक रूप है। विभिन्न इतिहासकारों ने यह पाया है कि 11 वीं और 12 वीं शताब्दी के बीच बना है, यानी लगभग उसी समय में जब पुरी के जगन्नाथ मंदिर बना था।

मंदिर में महिलाओं के लुभावने जटिल और विस्तृत नक्काशी वाली मूर्तियां बनाई गई हैं। जैसे एक बच्चे को प्रेम करती महिला, दर्पण देखती महिला, पायल निकालती हुई महिला, म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट बजाती और नाचती हुई महिलाओं की मूर्तियां यहां बनी हैं। इसके अलावा नटराज की मूर्ति, शिव के विवाह की मूर्ति भी यहां बनी हुई है।

राजारानी मंदिर का निर्माण पंचराठ शैली में किया गया है। हर साल 18 से 20 जनवरी तक ओडिशा सरकार का पर्यटन विभाग मंदिर में राजारानी संगीत समारोह का आयोजन करती है। देश के विभिन्न हिस्सों के संगीत कलाकार तीन दिवसीय महोत्सव में शामिल होते हैं, जिसमें शास्त्रीय संगीत का आयोजन होता है।

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आषाढ़ माह की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। एक साल में 24 एकादशी होती हैं। एक महीने में दो एकादशी आती हैं। सभी एकादशी में कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी, देवउठनी ग्यारस, प्रबोधिनी एकादशी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन के धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्री हरि राजा बलि के राज्य से चातुर्मास का विश्राम पूरा करके बैकुंठ लौटे थे। इसके साथ इस दिन तुलसी विवाह भी किया जाता है।

देव उठनी एकादशी जिसे प्रबोधनी एकादशी भी कहा जाता है। इसे पापमुक्त करने वाली एकादशी भी माना जाता है। वैसे तो सभी एकादशी पापमुक्त करने वाली मानी जाती हैं, लेकिन इसका महत्व अधिक है। इसके लिए मान्यता है कि जितना पुण्य राजसूय यज्ञ करने से होता है उससे अधिक देवउठनी एकादशी के दिन होता है। इस दिन से चार माह पूर्व देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। इसके लिए माना जाता है कि भगवान विष्णु समेत सभी देवता क्षीर सागर में जाकर सो जाते हैं। इसलिए इन दिनों पूजा-पाठ और दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं। किसी तरह का शुभ कार्य जैसे शादी, मुंडन, नामकरण संस्कार आदि नहीं किए जाते हैं।

शुभ कार्य इस दिन से किए जाने शुरु कर दिए जाते हैं। इस दिन माता तुलसी का विवाह किया जाता है। इसके बाद से शादी जैसे कार्य शुरु कर दिए जाते हैं। इस वर्ष ये शुभ दिन 31 अक्टूबर 2017 यानि मंगलवार को है। इस दिन दिवाली की तरह लोग दीपक जलाते हैं और सभी देवी-देवताओं को प्रसन्न करते हैं। जिससे उनके घर में हमेशा कृपा बनी रहे और उनके घर इसी तरह दीए की रौशनी से रौनक रहें।

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सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में गिरावट नजर आई है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 53 अंक की कमजोरी के साथ 33213 के स्तर पर और निफ्टी 28 अंक की कमजोरी के साथ 10335 के स्तर पर बंद हुआ है।

वैश्विक बाजार में गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिररावट के चलते तमाम एशियाई बाजार में कमजोरी देखने को मिल रही है। जापान का निक्केई 0.36 फीसद की कमजोरी के साथ 21933 के स्तर पर, चीन का शांघाई 0.28 फीसद की कमजोरी के साथ 3380 के स्तर पर, हैंगसैंग 0.12 फीसद की कमजोरी के साथ 28302 के स्तर पर और कोरिया का कोस्पी 0.51 फीसद की बढ़त के साथ 2514 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

वहीं, बीते सत्र अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ कारोबार कर बंद हुआ है। प्रमुख सूचकांक डाओ जोंस 0.36 फीसद की कमजोरी के साथ 23348 के स्तर पर, एसएंडपी500 0.32 फीसद की कमोजरी के साथ 2572 के स्तर पर और नैस्डैक 0.03 फीसद की कमजोरी के साथ 6698 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ है।

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नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर रही गिरावट के बीच स्थानीय बाजार में जेवराती मांग आने से आज दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 105 रुपये चमककर 30,380 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। सिक्का निर्माताओं की मांग आने से चांदी भी 250 रुपये सुधरकर 40,250 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव बिकी।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लंदन का सोना हाजिर 0.05 डॉलर की गिरावट में 1,276.80 डॉलर प्रति औंस पर रहा। दिसंबर का अमेरिकी सोना वायदा भी 1.4 डॉलर की सुस्ती में 1,270.4 डॉलर प्रति औंस बोला गया। चांदी में हालांकि 0.02 डॉलर की तेजी रही और यह 16.86 डॉलर प्रति औंस रही।

विश्लेषकों का कहना है कि बैंक आॅफ जापान के मौद्रिक नीति में कोई बदलाव नहीं करने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों को राहत मिली है। दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर के कमजोर होने से भी पीली धातु मजबूत हुई है, लेकिन अन्य सेंट्रल बैंकों की बैठक के परिणाम आने तक निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं।

अमेरिका के फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय बैठक भी आज से शुरु हो रही है और संभवत: गुरुवार को नए अध्यक्ष की घोषणा की जाएगी। नए फेड अध्यक्ष की घोषणा से पहले निवेशक सुरक्षित निवेश से कतरा रहे हैं। 

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किसी लोन के साथ दी जाने वाली बीमा पॉलिसी को बंद करने से पहले बैंकों की ओर से संबंधित ग्राहक को इसकी व्यक्तिगत सूचना देना जरूरी है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग (एनसीडीआरसी) ने अपने ताजा आदेश में यह बात कही है।

यह है मामला - 

एनसीडीआरसी ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के खिलाफ एक उपभोक्ता की शिकायत पर सुनवाई करते हुए निचली फोरम के आदेश को बरकरार रखा। मामला आंध्र प्रदेश निवासी सुरीसेट्टी लक्ष्मी साई से जुड़ा है।

उनके पति वेंकट राव ने 2009 में एसबीआई से आठ लाख और 5.80 लाख रुपए के दो होम लोन लिए थे। उस समय बैंक ने लोन के साथ उन्हें निशुल्क व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी भी दी थी। इसके अंतर्गत कर्ज लेने वाले की मौत होने की स्थिति में बैंक ने बीमा की राशि को कर्ज की राशि में समाहित करने की बात कही थी।

26 अक्टूबर, 2013 को एक दुर्घटना में वेंकट राव की मृत्यु हो गई। उनकी मौत के बाद बैंक ने यह कहते हुए बीमा राशि को लोन में समाहित करने से इन्कार कर दिया कि बीमा पॉलिसी एक जुलाई, 2013 को बंद कर दी गई थी। इस संबंध में अखबार में सूचना दी गई थी और इसे बैंक की वेबसाइट पर भी डाल दिया गया था।

उपभोक्ता फोरम ने बैंक की दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि ऐसे मामले में व्यक्तिगत रूप से बीमाधारक को सूचित किया जाना चाहिए। एसबीआई को बीमा की राशि कर्ज में समाहित करने और कानूनी खर्च के तौर पर 15,000 रुपए अतिरिक्त देने का फैसला सुनाया गया है।

एटीएम फ्रॉड की राशि देनी होगी आईसीआईसीआई बैंक को - 

एनसीडीआरसी ने आईसीआईसीआई बैंक को 2006-07 में एटीएम धोखाधड़ी का शिकार हुए ग्राहक के नुकसान की भरपाई का आदेश दिया है।

हरियाणा निवासी करम सिंह को 21 नवंबर, 2006 से दो फरवरी, 2007 के दौरान एटीएम धोखाधड़ी से 207,368 रुपए की चपत लगी थी। इस अवधि के दौरान उसके पास बैंक की ओर से निकासी का कोई एसएमएस नहीं आया। उपभोक्ता आयोग ने कहा कि यह समझ से परे है कि बैंक ने लेनदेन से जुड़ी एसएमएस सेवा बंद क्यों कर दी।

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सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने एक और नए रिकॉर्ड स्तर को छुआ है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स तेजी के साथ खुला और दिन के अंत में 108 अंक चढ़कर 33266 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 40 अंक बढ़कर 10363 के स्तर पर बंद हुआ है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप में 0.65 फीसद और स्मॉलकैप में 0.75 फीसद की बढ़त देखने को मिल रही है।

वैश्विक बाजार में मिले जुले संकेत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिले जुले संकेत देखने को मिल रहे हैं। जापान का निक्केई 0.08 फीसद की बढ़त के साथ 22021 के स्तर पर, चीन का शांघाई 0.73 फीसद की कमजोरी के साथ 3392 के स्तर पर, हैंगसैंग 0.07 फीसद की बढ़त के साथ 28460 के स्तर पर और कोरिया का कोस्पी 0.25 फीसद की बढ़त के साथ 2502 के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं।

वहीं बीते सत्र में अमेरिकी बाजार के एसएंडपी500 और नैस्डैक की रिकॉर्ड क्लोजिंग देखने को मिली है। प्रमुख सूचकांक डाओ जोंस 0.14 फीसद की बढ़त के साथ 23434 के स्तर पर, एसएंडपी500 0.81 फीसद की बढ़त के साथ 2581 के स्तर पर और नैस्डैक 2.20 फीसद की बढ़त के साथ 6701 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ है।

रियल्टी शेयर्स में खरीदारी

सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो आईटी और फार्मा को छोड़ सभी सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। बैंक (0.41 फीसद), ऑटो (0.83 फीसद), फाइनेंशियल सर्विस (0.21 फीसद), एफएमसीजी (0.12 फीसद), मेटल (0.80 फीसद) और रियल्टी (0.95 फीसद) की बढ़त देखने को मिल रही है।

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नई दिल्ली। टीवी पर इन दिनों कई रियलिटी शो चल रहे हैं। इनमें कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी), बिग बॉस, डांस इंडिया डांस, इंडियन आइडल आदि शामिल है। ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि विजेताओं को जीतने पर मिलने वाली राशि टैक्सेबल होती है या टैक्स छूट के दायरे में आती है? साथ ही अगर टैक्सेबल होती है तो उसपर कितना टैक्स लगाया जाता है। हम अपनी इस खबर में यही बताने जा रहे हैं कि टीवी रियल्टी शो और गेम शो में जीतने पर मिलने वाली राशि पर आयकर कानून का क्या नियम है। 

रियलिटी शो की इनामी राशि पर भी टैक्स

रियलिटी शो में जीती गई राशि पर इनकम टैक्स के सेक्शन 56(2)(ib) के तहत टैक्स देनदारी बनती है। यह इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग के दौरान इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज के अंतर्गत घोषित की जाती है। इनकम टैक्स के सेक्शन 56(2)(ib) के तहत नीचे दिए गए तरीकों से हुई कमाई इसके दायरे में आएगी

  • लॉटरी
  • क्रॉसवर्ड पजल
  • रेस (घोड़ों की रेस भी शामिल)
  • ताश या इससे संबंधित खेल
  • जुआ या सट्टेबाजी जैसे किसी काम से हुई कमाई

फाइनेंस एक्ट 2001 स्पष्ट करता है कि कार्ड गेम, कोई गेम शो या मनोरंजन प्रोग्राम जिसमें लोग इनाम जीतने के लिए हिस्सा लेते हैं इसमें शामिल माने जाते हैं। यानी इसमें टीवी या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में प्रसारित किए जाने वाले प्रोग्रामों में मिलने वाली इनामी राशि पर टैक्स लगता है।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

ई-मुंशी के टैक्स एक्सपर्ट अंकित गुप्ता ने बताया कि किसी भी टेलिविजन गेम शो में जीती गई इनामी राशि पर 30 फीसद टैक्स लगता है। इस पर आप किसी भी प्रकार का डिडक्शन क्लेम नहीं कर सकते हैं। यानी आप अगर कौन बनेगा करोड़पति में कोई राशि जीतते हैं तो आपको उसमें टीडीएस काटकर ही पैसा दिया जाता है। इसमें एजुकेशन सेस और सेकेंडरी एंड हायर एजुकेशन सेस भी शामिल होता है। इस हिसाब से कुल टैक्स 30.9 फीसद होता है। ऐसे में आपको इस तरह से मिली राशि पर इतना तो टैक्स देना ही होगा हां आप अपने टैक्स स्लैब रेट के हिसाब से थोड़ी राहत जरूर पा सकते हैं।

किस हिसाब से लगता है टैक्स:

टीवी शो या ऑनलाइन माध्यम से जीती गई राशि पर 30.9 फीसद की दर से इनकम टैक्स लगाया जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि कौन बनेगा कोरड़पति, नच बलिए, इंडिया गॉट टैलेंट, फियर फैक्टर और अन्य गेम शो से जीती गई राशि पर फ्लैट 30 फीसद का टैक्स लगाया जाता है। साथ ही इसमें इस तीस फीसद का दो फीसद एजुकेशन सेस और एक फीसद एसएचईसी (सेकेंडरी एंड हायर एजुकेशन सेस) भी शामिल होता है। इस तरह गेम शो पर जीती गई राशि पर कुल टैक्स 30.9 फीसद होता है।

ध्यान रखें कि इस मामले में इनकम टैक्स स्लैब रेट का लाभ नहीं उठाया जा सकता। पूरी राशि पर फ्लैट 30.9 फीसद की टैक्स वसूला जाता है।

इसमें सबसे अहम बात यह है कि अगर किसी संस्था की ओर से दी गई राशि एक वर्ष में 10,000 रुपये से ज्यादा है तो इस स्थिति में सेक्शन 194(बी) के तहत 30.9 फीसद की दर से टीडीएस लगाया जाएगा। किसी भी खिलाड़ी को जो प्राइस मनी दी जाएगी वो 30.9 फीसद टीडीएस काटने के बाद ही दी जाएगी।

इस तरह की इनामी राशि पर आयकर कटौती की शर्त लागू होती है-

सेक्शन 58(4) के तहत लॉटरी, क्रॉसवर्ड पजल, रेस (घोड़ों की रेस भी शामिल), ताश या इससे संबंधित खेल,जुआ या सट्टेबाजी जैसे किसी कामों से हासिल की गई राशि पर कोई टैक्स बेनिफिट प्राप्त नहीं होगा। मसलन, इन माध्यमों से जीती गई रकम पूरी तरह टैक्सेबल होगी। वास्तव में चैप्टर VI-A यानी कि सेक्शन 80 सी से 80 यू तक मिलने वाली कटौती को क्लेम नहीं किया जा सकता।

इनकम टैक्स स्लैब के मुताबिक किसी गेम शो में जीती गई राशि को व्यक्ति की अन्य तरीकों से हुई आय माना जाएगा, जिसपर टैक्स लगेगा। उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति टीवी शो से एक करोड़ कमाता है और अपने व्यवसाय से 15 लाख कमाता है उस स्थिति में

उसे नीचे बताये गये तरीके से टैक्स देना होगा-

  • एक करोड़ रुपये की राशि पर 30.9 फीसद यानी कि 30,90,000 रुपये
  • 15 लाख रुपये की कमाई पर इनकम टैक्स स्लैब रेट पर कटौती के बाद का टैक्स

चूंकि इस तरह के गेम शो पर मिलने वाली राशि पर इनकम टैक्स कटौती नहीं मिलती इसलिए 15 लाख वाली आय पर कटौती आयकर कानून के हिसाब से मिलेगी।

गेम शो जीतने पर लगने वाले टैक्स से जुड़ी कुछ अहम बातें-

  • अगर विजेता को जीती गई राशि कैश, चेक, डिमांड ड्राफ्ट या ऑनलाइन ट्रांस्फर के माध्यम से दी गई है तो इस राशि का भुगतान 30.9 फीसदी की दर से टीडीएस काटने के बाद किया जाएगा।
  • अगर विजेता को प्राइज उपहार के रुप में मिली कोई चीज है तो उसे उसकी मूल कीमत कैल्कूलेट करके राशि पर अपनी जेब से 30.9 फीसद से दर से टीडीएस का भुगतान करना होगा।
  • अगर विजेता जीती गई राशि का कुछ हिस्सा सरकार या लॉटरी आयोजित करने वाली किसी संस्था को दे देता है तो शेष राशि पर विजेता को टैक्स नहीं देना होता।
  • इस सेक्शन के तहत निर्धारित की गई विजेता राशि के अलावा व्यक्ति की ओर से कमाई की गई अन्य आय पर टैक्स लगेगा। यह आयकर अधिनियम के सामान्य धाराओं के अनुरूप होगा।
  • टीवी शो, ऑनालइन गेम आदि से जीते गए कोई इनाम की कुल राशि या नकद पुरुस्कार पर टैक्स देनदारी बनेगी। इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है।

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू होने के बाद पिछले दो महीनों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए राज्यों को 8,698 करोड़ रुपये दिये हैं। राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश को छोड़कर बाकी सभी राज्यों को इसका मुआवजा मिलेगा।

जीएसटीएन की देखरेख के लिए बने मंत्रिसमूह के प्रमुख एवं बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने बताया कि जुलाई और अगस्त में सेस से मिले कुल राजस्व का 58 फीसद मुआवजे के रूप में राज्यों को जारी किया गया है। सेस से जुलाई-अगस्त में 15,060 करोड़ रुपये मिले। जीएसटी के तहत लक्जरी कारों और तंबाकू जैसी चीजों पर 28 फीसदी टैक्स लगाया गया है।

जीएसटी से राज्यों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए टैक्स के अतिरिक्त इन उत्पादों पर सेस लगाया गया है। अरुणाचल प्रदेश को क्षतिपूर्ति इसलिए नहीं दिया गया है क्योंकि राज्य कुछ तकनीकी कारणों से इस संबंध में कोई दावा पेश नहीं कर सका। राजस्थान को भी किन्हीं तकनीकी कारणों से इस क्षतिपूर्ति फंड का लाभ अभी नहीं मिलेगा।

GST और PMLA के बावजूद, सितंबर तिमाही में दोगुना हुआ सोने का आयात

दिसंबर तिमाही में देश में सोने का आयात दोगुना रहा है। दिलचस्प बात यह है कि सोने का इतना आयात जीएसटी लागू होने, धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की अधिसूचना जारी होने, निर्यातक कंपनियों पर प्रतिबंधों और कम मौसमी मांग के सीजन के कारण पैदा हुई दिक्कतों के बावजूद रहा है।

जीएफएमएस थॉम्पसन रायटर्स के गोल्ड सर्वे जिसे गुरूवार को जारी किया गया में कहा गया है, “सितंबर तिमाही में आधिकारिक सोने का आयात 132.7 टन रहा, जो कि 66 फीसद की बढ़ोतरी का प्रतिनिधित्व करता है।” जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद आयात नीति में खामियों के कारण, मुक्त व्यापार समझौते के तहत जुलाई और अगस्त के दौरान दक्षिण कोरिया से 33 टन सोने का आयात किया जाने का अनुमान है।

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व्हाट्सएप ने बहुप्रतीक्षित "अनसेंड" सुविधा को पेश किया है, लेकिन यह अभी तक सभी यूजर्स के लिए सही से काम नहीं करता है। मगर, ऐप अब आपको यह सुविधा दे रहा है कि आप मैसेज को डिलीट कर सकते हैं। ऐसा होने से हर किसी के लिए वह संदेश गायब हो जाएगा। हालांकि, इसके काम करने की रफ्तार काफी धीमी है।

जैसा कि WABetaInfo ने बताया है कि 'डिलीट फॉर एवरीवन' फीचर काफी धीमा काम कर रहा है। इसका मतलब है कि इस अपडेट को व्हाट्सएप के सभी यूजर्स तक पहुंचने में समय लगेगा।

WABetaInfo ने कहा कि यदि 'डिलीट फॉर एवरीवन' फीचर अभी आप तक नहीं पहुंचा है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगले हफ्ते तक यह सुविधा आप तक पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि आप व्हाट्सएप का लेटेस्ट वर्जन इस्तेमाल कर रहे हैं, तो भी हो सकता है कि आप 'डिलीट फॉर एवरीवन' फीचर का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हों।

व्हाट्सएप ने अपने एफएक्यू पेज पर कहा कि 'डिलीट फॉर एवरीवन' को काम करने के लिए आपके और जिस व्यक्ति के साथ आप चैटिंग कर रहे हैं, दोनों के पास लेटेस्ट वर्जन होने चाहिए। इतना ही नहीं, इस फीचर के जरिये आप उन ही मैसेज को डिलीट कर पाएंगे, जो सात मिनट पुराने हों। यदि किसी संदेश को भेजे हुए आठ मिनट हो चुके हैं, तो आप उस मैसेज को डिलीट नहीं कर पाएंगे।

व्हाट्सएप ने यह भी कहा कि हो सकता है कि आप जिस व्यक्ति को चैट कर रहे हैं, वो आपके मैसेज को डिलीट करने से पहले इसे देख भी सकता है। यदि मैसेज को डिलीट करने का आपकी कोई कोशिश असफल हो जाती है, तो इसके लिए आपको सूचित नहीं किया जाएगा।

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नई दिल्ली। फोटोब्लॉगिंग वेबसाइट और एप इंस्टाग्राम ने कई नई फीचर्स जारी किए हैं। कंपनी ने सुपरजूम और हैलोवीन बेस्ड फेस फिल्टर्स समेत स्टिकर्स को एप में जोड़ा है। हैलोवीन बेस्ड फेस फिल्टर्स फीचर को Halloween 2017 को देखते हुए पेश किया गया है। आपको बता दें कि Halloween 2017 31 अक्टूबर को मनाया जाता है। वहीं, पिछले दिनों स्नैपचैट ने भी एक नया फीचर पेश किया था। जानें सभी फीचर्स की डिटेल्स:

जानें नए फीचर्स के बारे में:

सुपरजूम फीचर की मदद से यूजर्स ज्यादा क्लोज-अप शॉट ले पाएंगे। इसमें साउंड इफेक्ट्स भी दिए गए हैं। इसकी मदद से यूजर्स अपने या किसी और के फनी वीडियोज बना पाएंगे। इसे आप अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कर पाएंगे। यह नया फीचर इंस्टाग्राम कैमरा में बूमरैंग बटन के पास ही मौजूद है। इस पर टैप कर यूजर्स सुपरजूम और अलग-अलग म्यूजिक के साथ रिकॉर्डिंग कर पाएंगे।

हैलोवीन बेस्ड फेस फिल्टर्स का इस्तेमाल कर यूजर्स अपनी डरवनी या फनी फोटोज और वीडियोज बना सकते हैं। इसमें जॉम्बी, वैम्पायर, उड़ता हुआ चमगादड़ और डरावनी धुंध आदि जैसे ऑप्शन दिए गए हैं। इसके लिए यूजर्स को इंस्टाग्राम कैमरा पर जाकर दायीं तरफ दिए गए स्माईली विकल्प पर टैप करना होगा। यहां आपको नीचे की तरफ अलग-अलग विकल्प दिखाई देंगे। इससे आप अपनी फोटो और वीडियो बना सकते हैं। इसके अलावा हैलोवीन फेस स्टिकर्स 1 नवंबर से उपलब्ध कराए जाएंगे।

वहीं, इससे पहले पिक्चर और वीडियो शेयरिंग एप स्नैपचैट ने एक नया फीचर 'मल्टी-स्नैप' जारी किया था। इसके तहत यूजर्स 60 सेकेंड की स्नैप वीडियो बना सकते हैं। इस फीचर को सबसे पहले जुलाई में आईफोन में पेश किया गया था। अब इसे एंड्रॉयड यूजर्स के लिए जारी किया गया है। इससे पहले तक यूजर्स केवल 10 सेकेंड की ही वीडियो बना सकते थे।

कैसे इस्तेमाल करें मल्टी-स्नैप फीचर?

  • स्नैपचैट वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए यूजर्स को इंस्टाग्राम पर रिकॉर्ड बटन को टैप कर 60 सेकेंड तक होल्ड करना होगा।
  • इसके बाद आपने जो भी रिकॉर्ड किया है, इसे आप अपनी स्नैपचैट स्टोरी में एड कर सकते हैं। साथ ही अपने दोस्तों को भी सेंड कर सकते हैं।
  • स्नैपचैट इस वीडियो को 10 सेकेंड के कई सेगमेंट में अलग-अलग दिखाएगा। इसे आप एडिट भी कर सकते हैं। साथ ही इनमें से कुछ को डिलीट भी कर सकते हैं।

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रिलायंस जियो के 4जी फीचर फोन को लेकर खबरें आ रही थीं कि कंपनी ने इस फोन का प्रॉडक्शन बंद कर दिया है, लेकिन कंपनी ने अब इस खबर को लेकर साफ कर दिया है कि कंपनी जियो के 4जी फीचर फोन का प्रॉडक्शन बंद नहीं कर रही है। कंपनी अपने 4जी फीचर फोन देने के वादे पर कायम है। करीब 60 लाख लोगों ने जियो 4जी फीचर फोन की प्री बुकिंग की थी। जिन लोगों ने फोन बुक किया था उन सभी को फोन मिलेगा। साथ ही कंपनी की तरफ से यह भी कहा गया है कि जियो के 4जी फीचर फोन की प्री बुकिंग की अगली तारीख की घोषणा भी जल्द की जाएगी।

गौरतलब है कि 30 अक्टूबर को ऐसी खबरें आई थीं कि कंपनी ने एयरटेल और वोडाफोन को टक्कर देने के लिए जियो के 4जी फीचर फोन का प्रॉडक्शन बंद कर दिया है। कंपनी एंड्रॉयड स्मार्टफोन लाने की तैयारी कर रही है। आपको बता दें कि वोडाफोन ने हाल ही में  Micromax Bharat 2 Ultra स्मार्टफोन लॉन्च किया था। वोडाफोन ने इसकी प्रभावी कीमत को 999 रुपए रखा है। इस फोन को लेने के लिए 2,899 रुपए देने होंगे। इसके बाद कंपनी इस स्मार्टफोन पर 1,900 रुपए का कैशबैक देगी। मतलब कैशबैक मिलने के बाद फोन की कीमत 999 रुपए रह जाएगी।

वहीं एयरटेल ने भी कार्बन के साथ मिलकर Karbonn A40 स्मार्टफोन लॉन्च किया था। इस फोन की प्रभावी कीमत 1,399 रुपए है। एयरटेल का यह स्मार्टफोन लेने के लिए 2,899 रुपए देने होंगे। इसके साथ ऑफर मिल रहा है कि यूजर अगर तीन साल तक 169 रुपए का रिचार्ज कराता है, तो पहले 18 महीने में उसे 500 रुपए का कैशबैक दिया जाएगा। वहीं 36 महीने पूरे होने पर उसे 1,000 रुपए का कैशबैक दिया जाएगा। इस तरह यूजर को 3 साल में 1,500 रुपए का कैशबैक मिलेगा।

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पिछले साल कई वीडियो-केंद्रित फीचर्स लांच करने के बाद फेसबुक अब 4के गुणवत्ता की वीडियो का परीक्षण कर रही है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही आप भी फेसबुक पर अपने 4K वीडियोज डाउनलोड कर सकेंगे और दूसरों के वीडियो के देख सकेंगे।

फेसबुक अल्ट्रा-हाई-रेजोल्यूशन वीडियो अपलोड का परीक्षण कर रही है, जिसमें अपलोड करने वाले और देखने वाले दोनों के लिए 2160पी यूएचडी-1 स्टैंडर्ड का प्रयोग किया जाता है। टेकक्रंच की एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी गई है।

वेबसाइट ने यह भी कहा कि कुछ फेसबुक पेजों और प्रोफाइलों पर 4के वीडियो को साझा किया जा सकता है और देखा जा सकता है। वीडियो होस्टिंग प्लेटफार्म यूट्यूब साल 2010 से 4के वीडियो अपलोड करने और देखने की सुविधा दे रही है। पिछले साल कंपनी ने 4के लाइव स्ट्रीमिंग शुरू की थी। फेसबुक अपने लाइव 360 वीडियोज में पहले से ही 4के रेजोल्यूशन की सुविधा दे रही है।

इस बात का रखें ध्यान

हालांकि, फेसबुक पर 4K वीडियो को अपलोड करना मुख्य रूप से इंटरनेट की स्पीड पर निर्भर करेगा। मोबाइल डेटा पर और खराब नेटवर्क कवरेज वाले क्षेत्रों में उपयोगकर्ता निश्चित रूप से 4K वीडियो को अपलोड करने या उन्हें देखने में परेशानी होगी। यदि आप फेसबुक वीडियो पर 2160p यानी 4K वीडियो देखते हैं, तो तय कर लें कि आप सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क पर हों, नहीं तो आपका डेटा जल्दी खत्म हो जाएगा।

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आजकल बहुत सी कपनियां नए नए ऑफर लॉंन्च कर रही है। आज सैमसंग गैलेक्सी ने नया ऑफर लांच किया है।  कंपनी ने सैमसंग गैलेक्सी j 7 प्रो लांच किया है। इस स्मार्टफोन की कीमत 20890  रुपये रखी गई है।   

 सैमसंग गैलेक्सी J7 प्रो 
5.5 इंच एफएचडी सुपर AMOLED डिस्प्ले
1.6GHz Exynos 7870 Octa-Core प्रोसेसर
ड्यूल नैनो 
सिम एलईडी फ्लैश के साथ 13MP कैमरा 
एलईडी फ्लैश के साथ 13MP फ्रंट कैमरा
 4G LTE/WiFi 
सैमसंग पे ब्लूटूथ 
4.1 3600mAh बैटरी

आज ही सैमसंग गैलेक्सी नोट 8  स्मार्टफोन भी बहुत ही बेहतरीन फीचर्स और कीमत के साथ लांच हुआ है। इसकी कीमत 67,900 रुपये है। 

सैमसंग गैलेक्सी नोट 8 
कीमत 67,900 रुपये 

6.3 इंच के क्वाड एचडी + (2960 × 1440 पिक्सल) सुपर AMOLED इन्फिनिटी डिस्प्ले के साथ 522ppi, 18.5: 9 रेश्यो
 Octa-Core Qualcomm Snapdragon 835 के साथ एड्रेनो 540 GPU 
Octa-Core Samsung Exynos 9 सीरीज 8895 प्रोसीसर माली-G71 MP20 GPU
 6GB LPDDR4 रैम 64GB / 128GB / 256GB स्टोरेज 
माइक्रो एसडी के साथ 256GB एक्सपेंडेबल मेमोरी 
एंड्रॉइड 7.1.1 (Nougat) 
हाइब्रिड ड्यूल सिम (नैनो + नैनो / माइक्रोएसडी) 
12MP ड्यूल पिक्सेल रियर कैमरा के साथ एलईडी फ्लैश सेकेंडरी 
12MP कैमरा टेलीफोटो लेंस के साथ
 8MP ऑटो फोकस फ्रंट-फेसिंग कैमरा 
4G VoLTE
 वायर्ड और वायरलेस (WPC and PMA) दोनों 3300mAh बैटरी

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जियो, एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया अपने यूजर्स के लिए सस्ते-सस्ते प्लान निकाल रहे हैं। इन सभी कंपनियों के कुछ प्लान तो बिल्कुल एक जैसे हैं। उनकी कीमत और उनमें मिलने वाली सुविधाओं में खास फर्क नहीं है। कंपनियां अपने यूजर्स को बनाए रखने के लिए नए नए ऑफर्स और प्लान्स लेकर आ रही हैं। आइये जानते हैं किस कंपनी का कौन सा प्लान आपके लिए अच्छा है।

Jio: रिलायंस जियो के सभी प्लान्स में अनलिमिटेड डेटा और वायस कॉलिंग की सुविधा दी जा रही है। जियो का सबसे सस्ता प्लान 19 रुपए का है। इसमें 1 दिन की वेलिडिटी मिल रही है। इसमें 0.15GB हाई स्पीड डेटा मिलेगा। इसके बाद स्पीड कम हो जाएगी। 52 रुपए के रिचार्ज में यूजर को रोजाना 0.15GB हाई स्पीड डेटा मिलेगा। इसकी वेलिडिटी 7 दिन की है। जियो के 399 रुपए के रिचार्ज में 70 दिन की वैधता के साथ रोजाना 1GB हाई स्पीड डेटा मिलेगा और 70 दिन तक ही अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा मिलेगी।

Airtel: एयरटेल के  199 रुपए के रिचार्ज मे ं1GB डेटा दिया जा रहा है। इसके अलावा किसी भी नेटवर्क पर अनलिमटेड कॉलिंग की सुविधा मिल रही है। इस प्लान की वैधता 28 दिन की है। कंपनी के 399 रुपए के रिचार्ज में रोजाना 1GB डेटा दिया जा रहा है। इसके अलावा अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा भी दी जा रही है। इसकी वैधता 70 दिन की है। वहीं 499 रुपए के रिचार्ज में 28 दिन की वैधता के साथ रोजाना 1.5GB हाई स्पीड डेटा दिया जा रहा है।

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स्मार्टफोन बाजार में हर महीने किसी न किसी कंपनी का नया फोन लॉन्च हो रहा है। ऐपल आईफोन 8 के बाद अब अगले महीने प्रीमियम स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी एचटीसी अपना नया स्मार्टफोन ला रही है। इसकी लॉन्चिंग दो नवंबर को होने की उम्मीद है।

HTC U11 Plus नाम से लॉन्च होने वाले फोन की तस्वीर कंपनी ने टि्वटर पर शेयर की है। हालांकि इसमें फोन के मॉडल और नाम का जिक्र तो नहीं है, मगर ये माना जा रहा है कि ये फोन HTC U11 Plus का अपग्रेडेड वेरिएंट होगा। इस स्मार्टफोन को जो तस्वीर सामने आई है, उसमें फिंगरप्रिंट स्कैनर नजर आ रहा है। ऐसे में ये फोन इस फीचर से लैस होगा।

हालांकि इससे पहले इस स्मार्टफोन के कुछ और फीचर लीक हो चुके हैं। जानकारों की मानें तो एचटीसी के इस नए स्मार्टफोन को ओशन मास्टर नाम दिया जा सकता है।

ऐसे होंगे इस स्मार्टफोन के फीचर्स-

- HTC U11 Plus में 6 इंच का एलसीडी डिस्प्ले होगा, जोकि WQHD सपोर्ट करेगा। वहीं इस फोन की पिक्चर क्वालिटी काफी बेहतर होने की उम्मीद है, क्योंकि इसकी पिक्सल डेनसिटी 1440x2880 होगी।

- इस फोन के दो वेरिएंट में आने की उम्मीद है। एक वेरिएंट चार जीबी रैम और 64 जीबी के इंटरनल स्टोरेज के साथ आएगा, वहीं दूसरे में 128 जीबी इंटरनल स्टोरेज होगी।

- दोनों ही वेरिएंट में स्नैपड्रैगन 835 चिपसेट होगा। वहीं फोन की बैटरी 3930 mAh की होगी। साथ में तेजी से चार्ज करने के लिए क्विक चार्ज 3.0 होगा।

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रिलायंस जियो ने अपने प्लान्स में बदलाव कर दिया है। JIO ने अब एक नया प्लान अपने यूजर्स के लिए पेश किया है। कंपनी ने रोजाना 3GB डेटा का प्लान पेश किया है। इस प्लान में यूजर को रोजाना 3GB हाई स्पीड डेटा मिलेगा। इसके साथ ही इसमें अनलिमिटेड कॉलिंग और मैसेज की सुविधा भी मिलेगी। इस प्लान की वैधता 28 दिन की है। मतलब इसमें कुल मिलाकर 84GB हाई स्पीड डेटा मिलेगा। रोजाना की 3GB डेटा की लिमिट खत्म होने के बाद इंटरनेट तो अनलिमिटेड चलता रहेगा लेकिन स्पीड कम होकर 64kbps की रह जाएगी। इस प्लान में जियो ऐप्स का सब्सक्रिप्शन भी फ्री मिलेगा। यह प्लान 799 रुपए का है।

इसके अलावा भी जियो ने अपना सबसे पुराना 309 रुपए का रिचार्ज भी लॉन्च कर दिया है। इस रिचार्ज में भी जियो ने काफी बदलाव कर दिया है। अब यूजर को इस रिचार्ज में केवल 49 दिन की वैधता मिलेगी। इसमें यूजर को हाई स्पीड का 49GB डेटा भी मिलेगा। यह डेटा यूजर को रोजाना 1GB मिलेगा। हालांकि 1GB की लिमिट खत्म होने के बाद स्पीड कम हो जाएगी, स्पीड कम होकर 64kbps की रह जाएगी, लेकिन इंटरनेट अनलिमिटेड चलता रहेगा। इसके अलावा इसमें यूजर को अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा भी मिलेगी।

रिलायंस जियो ने 52 रुपए का रिचार्ज भी लॉन्च किया है। इस रिचार्ज में 7 दिन की वैधता मिलेगी। इसमें यूजर को 7 दिन तक अनलिमिटेड कॉलिंग और इंटरनेट की सुविधा मिल रही है। इसके लिए कंपनी की एक शर्त है, इसमें यूजर को हाई स्पीड का केवल 0.15GB डेटा ही रोजाना मिलेगा। रोजाना की लिमिट खत्म होने के बाद इंटरनेट तो अनलिमिटेड चलता रहेगा, लेकिन स्पीड कम हो जाएगी। स्पीड कम होकर 64kbps की रह जाएगी। वहीं अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा भी मिलेगी।

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कैब एग्रीगेट उबर ने अपने ग्राहकों की यात्रा अनुभव बेहतर बनाने के लिए एक नया फीचर पेश किया है। इसके जरिए यूजर्स अपने दोस्तों के साथ कैब शेयर कर सकते हैं। ऐसा वो अपनी यात्रा के दौरान तीन स्टॉप्स को जोड़कर कर सकते हैं।

ऐसे इस्तेमाल करें नया फीचर -

इसके लिए आपको उबर ऐप में जाना होगा। यहां आपको मल्टीपल स्टॉप फीचर को + आइकन पर टैप करके एक्टिव करना होगा। इसके बाद आपको where to? सेक्शन में अपनी यात्रा का लास्ट स्टॉप बताना होगा। अब यात्रा के दौरान आप जिन जगहों पर रुकना चाहते हैं, इसकी लोकेशन फीड करनी होगी।

इससे आप अपने दोस्तों या परिवार वालों के साथ एक ही कैब शेयर कर पाएंगे। वहीं, उबर कैब चालक को उनकी ड्राइवर ऐप के जरिए रियल टाइम अपडेट मिलता रहेगा। सबसे अहम बात की यात्रा के दौरान जितने किलोमीटर सफर किया है, उसके हिसाब से किराया यूजर को देना होगा।

आपको बता दें कि फिलहाल उबर ने यह साफ नहीं किया है यह फीचर एप अपडेट करने के बाद मिलेगा या फिर इसके लिए उबर के सर्वर में बदलाव किया जाएगा।

पेमेंट का नया विकल्प किया था पेश -

इससे पहले अगस्त में उबर इंडिया ने एक नई घोषणा की है। इसके तहत यात्री भीम एप के जरिए भी पेमेंट कर पाएंगे। उबर ने UPI इंटीग्रेशन लॉन्च करने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और एक्सिस बैंक के साथ करार किया है।

वहीं, उसने ड्राइवर पार्टनर्स को भीम एप की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए HDFC बैंक के साथ साझेदारी की है। उबर ने यह कदम कैशलेस इंडिया मुहिम को बढ़ावा देने के लिए उठाया है। आपको बता दें कि भीम ऐप यूपीआई पेमेंट सिस्टम पर काम करता है।

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1- क्रिमची

क्रिमची जम्‍मू कश्‍मीर के ऊधमपुर का छोटा सा गांव है। यहां भारत का सबसे पुराना मंदिर है। इसे पांडव मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां पंचेरी में हिल रिसॉर्ट है जहां आप जा सकते हैं। 

 

2-  कांगड़ा

कांगड़ा हिमचाल प्रदेश की एक खूबसूरत घाटी है। कांगड़ा में आप हिमालयन पिरामिड, मैसूर रॉक कट टेंपल घूम सकते हैं। यहां कांगड़ा फोर्ट, तारागढ़ फोर्ट के साथ करेरी लेक भी है। 

 

3- खजुराहो

मध्‍यपद्रेश के छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो का मंदिर अपनी मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां हिन्‍दू और जैन मंदिर सैकड़ों की संख्‍या में हैं। ये मंदिर अपने अनोखे स्‍थापत्‍य कला के लिए जाने जाते हैं। 

 

4- जागेश्‍वर

अल्‍मोड़ जिले के जागेश्‍वर में सैकड़ों मंदिर बने हुए हैं। यहां कुछ 124 मंदिर हैं। छोटे-छोटे सैकड़ों की संख्‍या में मंदिर एक साथ बहुत खूबसूरत नजर आते हैं। 

 

5- अयोध्‍या

उत्‍तर प्रदेश में अयोध्‍या भगवान राम की जन्‍म भूमि हैं। अयोध्‍या सरयू नदी के क‍िनारे बसी है। ये मंदिरों का शहर है। यहां का अपना एक पौराणिक इतिहास है।

 

6-  वाराणसी

वाराणसी को काशी भी कहा जाता है। गंगा के किनारे बसा हुआ ये शहर उत्‍तर प्रदेश में है। ये विश्‍व के सबसे पुराने शहरों में से एक है। ये शहर अपने अनेकों रंगो के कारण प्रसिद्ध है। 

 

7- भीमाटेक रॉक शेल्‍टर्स

भीमबेटका रॉक शेल्‍टर्स एक आर्कीयोलॉजिकल साइट है। ये जगह मध्‍यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है। इस जगह पर लाखों साल पुराने मानव इतिहास के च‍िह्न मिले हैं। यह गुफाएं पाषाण काल की है। उस समय यहां रहने वालों ने पत्‍थर की दीवारों पर जानवरों के चित्र उकेरे थे।

 

8- कुरुक्षेत्र

कुरुक्षेत्र हरियाणा जिले में स्थित है। कुरुक्षेत्र का एक अनोखा इतिहास है। यहां पर भगवान कृष्‍ण ने अर्जुन को भगवद् गीता के संदेश दिए थे। यहां पर प्रसिद्ध ब्रम्‍हा सरोवर है। श्री कृष्‍ण म्‍यूजियम के साथ भीष्‍मा कुंड है। 

 

9- पानीपत

पानीपत हरियाणा राज्‍य का हिस्‍सा है। इसकी खोज पांडवों ने महाभारत काल के दौरान की थी। पानीपत की लड़ाई भी बहुत प्रसिद्ध है। यहां पानीपत म्‍यूजियम, इब्राहीम लोधी की कब्रगाह भी है। 

 

10- ग्‍वालियर

ग्‍वालियर मध्‍यप्रदेश का एतिहासिक शहर है। भारत के इतिहास में ग्‍वालियर का खास योगदान है। ग्‍वालियर फोर्ट, राजा मान सिंह तोमर का भवन, सिंधिया म्‍यूजियम और गोपाचल पर्वत यहां की प्रसिद्ध जगहें हैं।

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केरल

इको-फ्रेंडली टूरिस्ट डेस्टिनेशंस में केरल बहुत ही खूबसूरत जगह है। यहां क‍िसी भी मौसम में घूमा जा सकता है। केरल में प्रकृति‍ का एक अनोखा रूप देखने को म‍िलता है। इको-फ्रेंडली टूर‍िस्‍ट प्‍लेस पसंद करने पयर्टकों के ल‍िए यहां खूबसूरत रेतीले समुद्र तट, ताड़ के पेड़ और बैकवॉटर जैसी चीजे हैं। ज‍िनका अच्‍छे से मजा ल‍िया जा सकता है। यहां की संस्कृति और परंपराएं भी पयर्टकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। 

कुर्ग

कुर्ग भी इको-फ्रेंडली टूरिस्ट डेस्टिनेशंस में से एक है। यह भारत के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में भी ग‍िना जाता है। यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। मिस्टी पहाड़ियों, घने जंगल और कोहरे वाली शाम पयर्टकों को बहुत पसंद आती हैं। इतना ही नहीं यहां बहने वाली कावेरी नदी इस स्थान को और ज्‍यादा खूबसूरत बनाती है। इसके अलावा वन्य जीव स्‍थल पुष्‍पागिरि वन्‍यजीव अभयारण्‍य भी घूमा जा सकता है। 

गोवा 

इको-फ्रेंडली टूरिस्ट डेस्टिनेशंस में गोवा का नाम न हो, ऐसा शायद ही हो। यह भी भारत के खूबसूरत पयर्टन स्‍थलों में से एक है। गोवा की प्राकृतिक सुंदरता की भी ज‍ितनी तारीफ की जाए कम है। समुद्र तट के अलावा यहां बोंडला या कोटीगाओ वन्यजीव अभयारण्य जैसे स्‍थानों पर पयर्टकों को बहुत अच्‍छा लगता है। गोवा की यात्रा में सुंदर मंदिरों, चर्चों, किले और ऐत‍िहास‍िक स्मारकों को घूमा जा सकता है। 

स‍िक्‍क‍िम 

हिमालय में एक छोटा सा पहाड़ी राज्य सिक्किम अपनी हरी-भरी वनस्पति, घने जंगलों और असख्‍ंय क‍िस्‍मों के फूलों से पयर्टकों को आकर्षित करता है। इसके अलावा यहां पयर्टकों को गहरी घाटियों, खूबसूरत झरनों और लहराती नदियों के क‍िनारे शाम के समय वक्‍त ब‍िताना अच्‍छा लगता है। एक खूबसूरत पयर्टन स्‍थल के रूप में स‍िक्‍कम के पास सबकुछ है। यहां पर व‍िदेशी पयर्टकों की भी भीड़ रहती है। 

उत्तराखंड

इको-फ्रेंडली टूरिस्ट डेस्टिनेशंस में उत्तराखंड भी है। उत्तराखंड को देवताओं का धाम भी कहा जाता है। हकीकत में देखा जाए तो यह धरती का स्वर्ग है। यह राज्‍य पूरे पहाड़ी इलाकों और खूबसूरत परिदृश्यों के लिए लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। गंगा और यमुना दो सबसे सम्मानित नदियां हैं जो उत्तराखंड में हिमालयी ग्लेशियरों से शुरू होती हैं। उत्तराखंड बहुत समृद्ध वनस्पतियों और जीवों का घर है।

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1- संत केथेड्रल चर्च

यह भारत के सबसे बड़े चर्चो में से एक है। ये गोवा में स्थित है। ये केथेड्रल चर्च कैथरीन आफ अलेक्जेंड्रिया को समर्पित है। ये चर्च पुर्तगाली सेना द्वारा मुस्लिम सेना के ऊपर विजय के सम्‍मान में बनवाया गया था। इस चर्च का निर्माण 1562 में शुरु हुआ था और 1619 में ये बनकर तैयार हुआ। 

 

2- परुमाला चर्च

केरल में स्थित परुमाला चर्च महान संत ग्रिगोरिएस जीर्वाघीस की स्‍मृति में बनाया गया था। इसे परुमाला चर्च के नाम से भी जाना जाता है। ये चर्च केरल के मनार में स्थित है। यह मल्लंकरा रूढ़िवादी सीरियन चर्च का एक पारिश चर्च है। 1947 में ग्रिगोरियस को कैथोलिकोस आफ द चर्च ने संत की उपाधि दी थी। 

 

3- बेसिलिका आफ बोम जीसस

बेसिलिका आफ बोम जीसस भारत के सबसे पुराने चर्चो में से एक है। ये बीव सिटी गोवा में स्थित है। इसे वर्ल्‍ड हैरिटेज साइट घोषित किया जा चुका है। यह चर्च 300 साल से भी अधिक पुराना है। बोम जीसस का अर्थ होता है गॉड जीसस। इस चर्च में संत फ्रांसिस जेवियर का शरीर साल में एक बार चर्च के अनुयायियों के लिए रखा जाता है। इस दौरान देश विदेश से हजारों की संख्‍या में फॉलोअर्स आते हैं। 

 

4- मलयतूर चर्च

ईसाई धर्म की आस्‍था का ये तीर्थ केरल में स्थित है। माना जाता है कि यह सेंट थॉमस दक्षिण भारत में ईसाई धर्म की शिक्षाओं का प्रचार प्रसार करते थे। ये भारत के सबसे पुराने चर्चो में से एक है। इस चर्च को संत थॉमसे ने बनवाया था। यह एक पहाड़ की चोटी पर स्थित है। इस चर्च को वेटिकन से जोड़ा जाता है। पहाड़ चढ़ कर चर्च तक पहुंचना फॉलोअर्स के लिए एक रोमांचकारी अनुभव होता है।

 

5- कदमट्टम चर्च

कदमट्टम चर्च मालंकरा जेकोबेट ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च का अभिन्‍न अंग है। ऐसी मान्‍यता है कि इस चर्च को 9 वीं शताब्‍दी में बनाया गया था। इस चर्च का आर्कीटेक्‍चर इंडो-पर्शियन है। चर्च में पुराने फारसी क्रास के चिह्न हैं। यह चर्च प्रीस्‍ट कदमट्टुतु कत्तानार के नाम से पूरे विश्‍व में प्रसिद्ध है। इन्‍हें सुपरनेचुरल पावर्स के लिए जाना जाता था। चैपल और पोयाडेम वेल शानदार दर्शनीय स्‍थल है।

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1. किसी मीनार या इमारत को झुकाते हुए फोटो खिंचाना अब पुराना हो चुका है। आपने भले ही पहली बार किया हो ऐसा लेकिन देखने वाले इरीटेट हो चुके हैं। कभी ताजमहल की चोटी पकड़े हुए फोटो, तो कभी कुतुबमीनार को धक्‍का लगाने वाली तस्‍वीरों का जमाना चला गया। इसीलिए आप कहीं ऐसी जगह जाते हैं तो इन तस्‍वीरों को खिंचवाने से बचें।

2. समुद्र किनारे मस्‍ती करने का अपना ही मजा है। ऐसे में बीच पर लेटे हुए सिर्फ पैरों की तस्‍वीर डालना आपको भले ही कूल लगता हो, लेकिन देखने वालों को मजा नहीं आता। किसी को कोई इंट्रेस्‍ट नहीं है कि वह आपके पैरों की चप्‍पलों को देखे।

3. आज मैं ऊपर, आसमां नीचे इस लाइन को कैप्‍शन में लिखकर उड़ते हुए फोटो खिंचवाना बहुत पुराना ट्रेंड है। डूबते सूरज के सामने या इमारत के आगे हवा में उड़कर फोटो खिंचवाते हैं तो इस आदत को बदल लीजिए कुछ नया ट्राई करें तो ज्‍यादा वाहवाही मिलेगी।

4. सेल्‍फी स्‍टिक हाथ में लेकर 'कूल' स्‍टाईल में फोटो खिंचवाना थोड़ा पुराना हो चुका। इसकी जगह आप किसी दूसरे व्‍यक्‍ित से कह कर बेहतर एंगल से तस्‍वीर खिंचा लीजिए, तो ज्‍यादा बेहतर होगा।

5. एक समय था जब हाथ से हार्ट का शेप बनाकर उसके बीच में डूबते सूरज को रखकर फोटो खिंचवाते थे। प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स के लिए यह चलन से बाहर हो चुका है। 

6. खाने से पहले उसकी फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर डालना, हमेशा समझ से परे रहा। क्‍यों भाई लोगों को दिखा-दिखाकर क्‍या खाना।

7. हाथ में आइसक्रीम कोन लिए कई तस्‍वीरें सोशल मीडिया पर मिल जाएंगी। ऐसी फोटोज को शायद ही कोई पसंद करता हो। इसलिए आपको सलाह दी जाती है आइसक्रीम जल्‍दी खा लें, नहीं तो फोटो खिंचाने के चक्‍कर में कहीं पिघल न जाए।

8. खाली पड़े खंडहर और इमारतों को फोटो खींचना, तब बेहतर होता है जब कोई इतिहास में रूचि रखता हो। आमतौर पर लोगों को ऐसी तस्‍वीरों से कुछ खास लगाव नहीं होता। इसकी जगह आप हरियाली की तस्‍वीर खींच लें, तो लोग आकर्षित जरूर होंगे।

9. रेल की पटरी, खाली सड़क इनकी तस्‍वीरें लेना आपको अच्‍छा लगता होगा लेकिन यह भी पुराना ट्रेंड है।

10. कुछ तस्‍वीरें फिजूल की होती है, इनका कोई मतलब नहीं होता। एक साधारण तस्‍वीर को बेहतर बनाती है टाइमिंग..यानी कि परफेक्‍ट एंगल और परफेक्‍ट टाइमिंग पर खींची गई तस्‍वीर हमेशा नंबर वन रहती है।

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1- छोटे पर आप ने पिंक कलर का बबल गम तो जरूर खाया होगा और टोमेटो सॉस भी खाया होगा पर हम आपको एक नदी के बारे में बताने जा रहे हैं जो सच में लाल रंग की है। इस नदी का रंग भारी बरसात में बदल जाता है। जब नदी बरसात में रंग बदलती है तो ऐसा लगता है जैसे कोई जादूई घटना घटित हो रही है। कनाडा के कैमेरोन जल प्रपात से निकलने वाली धारा के कई रंग हैं। बाकी दिनों में नदी बिलकुल साफ होती है। जब बरसात शुरु होती है तो ये अपना रंग बदलती है। 

 

2- हल्‍की बरसात में ये पिंक कलर की हो जाती है। बरसात अगर बहुत तेज हो रही है तो इस नदी का रंग टमाटर की तरह लाल भी हो सकता है। ये कोई जादूई चीज नहीं है। ना ही यह कोई फोटोशॉप ट्रिक है। जब पानी तेजी के साथ बरसता है तो इसमें एग्रोलाइट नाम का पदार्थ मिलता है जो इसके रंग में परिवर्तन लाता है। नदी के रंग में आने वाला ये परिवर्तन कुछ मिनटों के लिए ही होता है। कुछ देर बाद नदी फिर से अपने पहले रूप में आ जाती है। किसी परी कथा की तरह नदी धीरे-धीरे अपना रंग बदलना शुरु करती है। 

 

3- रौशेल ने बताया कि जब यहां बारिश होना आम बात है पर नदी बारिश के हिसाब से ही अपना रंग बदलती है। कैमेरोन फाल कनाडा में अल्‍बर्टा वेस्‍टर्न लेक नेशनल पार्क में है। अपनी रंग बदलने की खासियत के चलते ये सैलानियों और फोटोग्राफर्स की पहली पसंद होता है। फोटोग्रार्फस की माने में स्प्रिंग सीजन और समर सीजन में नदी का रंग बदलना सबसे सुखद अनुभव देता है। इस दौरान यहां भारी बारिश भी होती है। अगर आप साइंस और नेचर लवर हैं तो कैमेरोन फाल आप की घूमने की लिस्‍ट में जरूर होना चाहिए।

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बैंकाक

बैंकाक दक्षिण पूर्वी एशियाई देश थाईलैंड की राजधानी है। बैंकाक थाइलैंड की राजधानी है। यहां ऐसी अनेक चीजें जो पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध हैं मरीन पार्क और सफारी। एक सर्वेक्षण में बताया गया है कि 2017 में एक अनुमान के अनुसार यहां एक रात में करीब 20.19 मिलियन पर्यटकों की उपस्‍थिती दर्ज की गई। 

लंदन

2017 के सर्वेक्षण के अनुसार एक रात में करीब 20.01 मिलियन अनुमानित पर्यटकों का स्‍वागत करने वाला शहर लंदन संयुक्त राजशाही और इंग्लैंड की राजधानी है। साथ ही ये यूनाइटेड किंगडम का सबसे अधिक आबादी वाला शहर भी है। ग्रेट ब्रिटेन द्वीप के दक्षिण पूर्व में थेम्स नदी के किनारे स्थित, लंदन पिछली दो सदियों से राजनीति, शिक्षा, मनोरंजन, मीडिया, फ़ैशन और शिल्पी के क्षेत्र में वैश्विक शहर की स्थिति रखता है और इनका एक बड़ा केंद्र रहा है। इसे रोमनों ने लोंड़िनियम के नाम से बसाया था।

पेरिस

पेरिस, फ़्रांस का सबसे बड़ा नगर और राजधानी है। यह 105 वर्ग किलोमीटर यानि 41 वर्ग मील में फैला हुआ है। 17वीं शताब्दी में पेरिस, यूरोप में वित्त, वाणिज्य, फैशन, विज्ञान और कला के प्रमुख केंद्रों में से एक बना, और यह स्थिति आज भी कायम है। यहां पर 2017 में अतिथितियों की अनुमातित संख्‍या 16.13 मिलियन दर्ज की गई है। 

दुबई

दुबई, संयुक्त अरब अमीरात की सात अमीरातों में से एक है। यह फारस की खाड़ी के दक्षिण में अरब प्रायद्वीप पर स्थित है। दुबई नगर पालिका को अमीरात से अलग बताने के लिए कभी कभी दुबई राज्य भी कहा जाता है। दुबई, मध्य पूर्व की एक ग्‍लोबल सिटी और व्यापार केन्द्र के रूप में उभर कर सामने आया है। कुछ लिखित दस्तावेजों में इस शहर को संयुक्त अरब अमीरात के गठन से 150 साल पहले से मौजूद होने की बात कही गयी है। 2017 के एक सर्वेक्षण में बताया गया है कि यहां इस वर्ष एक रात में अनुमानित 16.01 मिलियन पर्यटक आये हैं। 

सिंगापुर

सिंगापुर विश्व के प्रमुख बंदरगाहों और व्यापारिक केंद्रों में से एक है। यह दक्षिण एशिया में मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच में स्थित है। सिंगापुर यानी सिंहों का पुर, इसीलिए इसे सिंहों का शहर कहा जाता है। यहां पर कई धर्मों में विश्वास रखने वाले, विभिन्न देशों की संस्कृति, इतिहास और भाषा के लोग रहते हैं। यहां 2017 में एक रात में अनुमानित 13.45 मिलियन पर्यटक आये हैं। 

टोक्‍यो

टोक्यो जापान की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। यह जापान के होन्शू द्वीप पर बसा हुआ है और इसकी जनसंख्या लगभग 86 लाख है। ये दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला महानगरीय क्षेत्र भी कहलाता है। टोक्यो लगभग 80 किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है इसीलिए यह क्षेत्रफल की दृष्टि से भी विश्व का सबसे बड़ा नगरीय क्षेत्र है। एक अनुमान के अनुसार इस साल यहां करीब 12.51 मिलियन पर्यटक एक रात में आये हैं। 

सियोल

सियोल दक्षिण कोरिया की राजधानी है। यह शहर हान नदी के किनारे बसा है। सियोल दक्षिण कोरिया का सबसे बड़ा शहर है। यहां एक रात में 12.44 मिलियन  पर्यटको के आने का अनुमान 2017 के सर्वेक्षण में लगाया गया। 

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1- मैसूर शहर में दशहरे का उत्सव देवी की पूजा के साथ भजन गा कर मनाया जाता है। यहां पर ये त्यौहार नदहब्बा के नाम से भी प्रसिद्ध है। कहते हैं यहां पर ये त्यौहार चार सौ साल पुराने रीति-रिवाजो के साथ मनाया जाता है। मैसूर शहर में दशहरे का आयोजन, महिषासुर पर चामुंडेश्वरी देवी की जीत के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर लगभग 100,000 बल्बों से मैसूर पैलेस यानि अम्बा विलास महल को सजाया जाता है। इसे जरूर देखें ये एक अदभुद नजारा होता है। 

2- मैसूर में दशहरे उत्‍सव का आयोजन दस दिनों तक होता है। इस समय खूब रौनक लगती है। पूरे 10 दिनों तक बहुत से सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। साथ ही फूड मेला, वुमेन दशहरा जैसे खास कार्यक्रम भी होते हैं। दसवें और आखिरी दिन मनाए जाने वाले उत्सव को जम्बू सवारी के नाम से जाना जाता है। दशहरे के दसों दिन का उत्‍सव देखने लायक होता है। 

3- अंतिम दिन यानि विजयदशमी को मैसूर की सड़कों पर जुलूस निकलता है। इस जुलूस की खासियत यह होती है कि इसमें सजे-धजे हाथी के ऊपर एक हौदे में चामुंडेश्वरी माता की मूर्ति रख कर यात्रा निकाली जाती है। यह विशेष परंपरा साल 1880 से शुरू हुई। इसमें पूजी गई देवी की मूर्तियां भव्य जुलूस के साथ सजे हुए हाथियों पर ले जाई जाती हैं। यह हाथी जुलूस, मैसूर पैलेस से होकर दशहरा मैदान तक जाता है। सबसे पहले मूर्ति की पूजा मैसूर के शाही दंपत्‍ति करते हैं उसके बाद जुलूस निकाला जाता है। यह मूर्ति सोने की बनी होती है साथ ही हौदा भी सोने का ही होता है। यह खूबसूरत सुनहरी हौदा मैसूर के वैभवशाली अतीत की सुंदर कहानी कहता है। यह हौदा कब और कैसे बना और इसे किसने बनवाया, इस बारे में सही जानकारी नहीं मिलती है, लेकिन 750 किलो वजन के इस हौदे में एक अनुमान के अनुसार 80 किलो सोना लगा है। हौदे पर की गई नक्काशी मैसूर के कारीगरों की कुशलता का प्रमाण है। इस हौदे के बाहर की ओर फूल-पत्तियों की सुंदर नक्काशी है। पहले इस हौदे का उपयोग मैसूर के राजा अपनी शाही हाथी की सवारी के लिए किया करते थे। अब इसे साल में केवल एक बार विजयादशमी के जुलूस में माता की सवारी के लिए लाया जाता है।

4- मैसूर महल से शुरू होकर बनीमन्टप तक जाने वाला ये जुलूस म्यूजिक बैंड, डांस ग्रुप, मैसूर की शाही सेना, हाथी, घोड़े और ऊंट के साथ चलता है। यहां पहुंच कर लोग बनी के एक पेड़ की पूजा करते हैं। ऐसी मान्‍यता है कि पांडवों ने अपने एक साल के गुप्तवास के दौरान अपने हथियार इसी पेड़ के पीछे ही छुपाये थे। साथ ही वे कोई भी युद्ध करने जाने से पहले इस पेड़ की पूजा करते थे।

5- इस अवसर पर अम्बा विलास महल के सामने एक प्रदर्शनी भी लगती है। जो दशहरे के दिन शुरू होकर दिसंबर तक चलती रहती है। इस प्रदर्शनी में कपड़े, श्रंगार सामग्री, रसोई का सामान, घरेलू इस्‍तेमाल की चीजे, हैंडीक्राफ्ट का सामान और खाने-पीने की चीजें मिलती हैं। यहां पर तरह-तरह के खेल खेलने के लिए एक खास क्षेत्र होता है।

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कहते है प्यार अंधा होता है। जब किसी को किसी से प्यार होता है तो उसे अपने प्यार के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं देता है। अपने प्यार को पाने के लिए लोग किसी भी हद तक जा सकते है। प्यार एक ऐसी चीज है कि जिसे हो जाए वो उसे पाने के लिए कुछ भी कर सकता है। इसके बाद इंसान को सिर्फ उसे पाने की धुन ही सवार रहती है। लेकिन आज आपको एक ऐसी खबर बताने जा रहे है उसकी कहानी थोड़ी हटकर है। 

अब तक आपने सुना होगा कि लडक़े को लडक़ी से और लडक़ी को लडक़े से प्यार हो गया। मगर फ्रांस की रहने वाली लिली अपने रोबोट से ही प्यार कर बैठीं। ये दोनों अभी रिलेशनशिप में हैं। लिली को 3डी प्रिंटेड रोबॉट से इस कदर प्यार हो गया है कि वो अब उससे शादी करना चाहती हैं। लिली के साथ रहने वाले रोबोट का नाम ‘इनमूवेटर’ है, जिसे 3डी प्रिटिंग टेक्नॉलजी से बनाया गया है।

फिलहाल लिली रोबोटिसिस्ट बनने की ट्रेनिंग ले रही हैं। उन्हें लगता है कि टेक्नॉलजी बढऩे के साथ उनका प्यार और भी मजबूत हो जाएगा। लिली का कहना है कि वो रोबोसेक्शुअल हैं और उन्हें इस पर गर्व है। लिली अपने रोबोट के साथ एक साल से रह रही हैं। उन्होंने अपने ट्विटर पेज पर लिखा कि मुझे गर्व है रोबोसेक्शुअल होने पर, हम किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

French woman falls in love with her robot, wants to marry him - Weird Stories in Hindi

मैं खुश हूं कि मैं अब लिली इनमूवेटर होने जा रही हूं। कई लोगों ने इसे लेकर उनकी खूब आलोचना की, जिसके बाद उन्होंने अपना ट्विटर अकाउंट बंद कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक लिली ने रोबोट के साथ अभी सगाई की है और जब फ्रांस में मानव और रोबोट की शादी मान्य हो जाएगी तब वे शादी करेंगे।

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एक अंग्रेजी वेबसाइट के अनुसार लिली का कहना है कि उन्हें 19 साल की उम्र में महसूस हुआ कि उन्हें लोगों का फीजिकल कॉन्टैक्ट बिल्कुल पसंद नहीं है। वे रोबॉट की ओर सेक्शुअली अट्रैक्ट होती हैं।

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भूत-प्रेत और आत्माओं से लोगों के परेशान होने के कई किस्से हमने आपने खूब पढ़े और सुने हैं,लेकिन इस कहानी पर जरा गौर करें। यहां कहानी बिल्कुल अलग है। साल 1948 के आसपास की बात है। एक बच्चा बहुत बीमार रहा करता था। उसकी जांच में ब्रोन्किइक्टेसिस नामक जानलेवा बीमारी का खुलासा हुआ और डॉक्टरों ने हाथ खड़े करते हुए साफ कह दिया कि वह चंद सालों का ही मेहमान है। तब उसकी मां ने अस्पताल के गेट पर उसकी ये एक तस्वीर ली थी।

ऐसा दावा है कि तब वहां एक आत्मा आई थी,जिसने मासूम को पूरी तरह ठीक कर दिया। उस बच्चे को नई जिंदगी मिल गई। उन्होंने सोशल साइट्स पर अपनी मां के हाथों कैमरे में कैद हुई इस तस्वीर को जारी किया है और दुनिया को बताने की कोशिश की है कि तब एक आत्मा ने उन्हें जानलेवा बीमारी से निजात दिलाई थी। उनका दावा है कि उन्होंने 1999 में यह फोटो कोडक कैमरा कंपनी को भेजा था। कंपनी ने फोटो की जांच करने के बाद साफ किया है कि उसके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है।

यानी फोटो में जो भूत जैसी आकृति नजर आ रही है, वह सही है। आप भी जरा गौर से देखेंं इस फोटो को इस ब्लैक एंड व्हाइट फोटो में मेरे सिर के पास किसी का चेहरा नजर आ रहा है। मैं गलियारे में खड़ा हूं। यहां एक छत है, लेकिन मेरे सामने कोई ग्लास नहीं है। 

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आपने कई बॉडीबिल्डर्स की फोटो आपने खूब देखी होगी लेकिन आज हम आपको महिला बॉडीबिल्डर की फोटो दिखाने जा रहे है जिसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे। और शायद आप दातों तले उंगलियां दबा लें।आज ये फोटो सोशल साइट्स पर लगातार वायरल हो रही है। इनकी बॉडी ऐसी है कि अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाएंगे। कई महिलाएं हैं जो घंटों जिम में बिताने के बाद ऐसी बॉडी बना रही हैं, जिससे आदमियों को भी शर्म आ जाए। इनकी बॉडी पर यकीन कर पाना काफी मुश्किल है। अब इस महिला को ही देख लीजिए। इनकी शक्ल देखकर कोई भी इनपर मर-मिटेगा। लेकिन इनकी बॉडी पर नजर पड़ते ही कोई इन्हें कुछ कह पाने की हिम्मत नहीं कर पाएगा।

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लंदन। हर महिला की ख्वाहिश रहती है उसके लम्बे और घने बाल हो। इसके लिए के लिए महिलाएं कई प्रकार के जतन करते है। लेकिन आज आपको एक ऐसी महिला के बारे में बता रहे है जिसके बहुत ही लम्बे और घने बाल है। 32 वर्षीय महिला हैं लंदन की मैलगोरजाता कुलजाइक। 

उन्होंने अपने बाल लंबे करने के लिए दो साल पहले उन्हें काटना छोड दिया था। तब उनके बाल घुटने तक आते थे, लेकिन अब एडी तक लंबे हो चुके हैं। उनके बालों की खासियत सिर्फ इतनी ही नहीं है।

Rapunzel  hair long she can wear them as a GOWN - Weird Stories in Hindi

वह अपने बालों को कमर के चारों ओर लपेटकर गाउन का रूप भी दे देती हैं। देखकर ऐसा लगता है कि वह कोई महंगा परिधान पहने हैं।

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साथ ही तरह-तरह की डिजाइनों में चोटी बनाकर उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालती हैं। इससे उनके हजारों प्रशंसक बन गए हैं। उनके अनुसार वह रोज शैंपू से बाल धोती हैं और नारियल तेल लगाती हैं। यही उनके अच्छे बालों का राज है।

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बीजिंग। स्मार्टफोन और दूसरे गैजेट्स के अधिक इस्तेमाल से टीनेजर्स में मेंटल हेल्थ से जुड़े खतरों का जोखिम बढ़ जाता है। इससे अटेंशन, बिहेवियर और सेल्फ रेगुलेशन पर इफेक्ट पड़ता है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल करने से एक लडकी की आंखों की रोशनी चली गई। जी हां, यह घटना चीन की है। 

सोशल मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार 21 साल की पीडि़त महिला अपने स्मार्टफोन पर दिन भर गेम खेलती रही और अचानक उसे एक आंख से दिखना बंद हो गया। महिला को मोबाइल गेम किंग ग्लोरी खेलना बहुत पसंद था। आपको बता दें कि चीन में यह बहुत ही पॉपुलर गेम है। यही नहीं इसे खेलने वाले मानते हैं कि उन्हें गेम की लत लग चुकी है। महिला को भी गेम की ऐसी लत थी कि वह बिना खाए-पिए पूरे आठ घंटों तक गेम खेलती रही। यही नहीं इस दौरान वो टॉयलेट तक जाने के लिए नहीं उठी।

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वियतनाम। पैदा होने पर बच्चे का वजन अगर ज्यादा हो तो आमतौर पर इसे अच्छा स्वास्थ्य की निशानी माना जाता है। लेकिन वियतनाम में एक महिला एक बच्चे को जन्म दिया है जिसका वजन जानकर डॉक्टर सहित हर कोई हैरान है। इस बच्चे को वजन 7.1 किलोग्राम (15.7 पौंड) है, जो इस दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश में अब तक जन्मे सबसे भारी बच्चों में से एक है। उत्तरी विन फुक प्रांत में अपने माता-पिता को खुश के साथ-साथ भौंचक्का कर देने वाले इस बालक का जन्म शनिवार को हुआ। 

बच्चे के पिता ट्रान वान कुआन ने बताया, जब डॉक्टर ने कहा कि मेरा बच्चा 7.1 किलोग्राम का है, हममें से किसी को भी यकीन नहीं हुआ... वैसे, डॉक्टरों ने बच्चे के जन्म से पहले ही उसकी मां गुयेन किम लीन को बता दिया था कि बच्चे का वजऩ लगभग पांच किलोग्राम रहेगा, लेकिन उन्होंने भी सात किलोग्राम के बच्चे की कल्पना नहीं की थी। बच्चे के वजऩ की पुष्टि करने के लिए जब डॉक्टर इस बच्चे को मां के पास उसके कमरे में लेकर आए, उसका वजऩ दोबारा तोला गया, और पुष्टि हो गई। ट्रान वान कुआन ने कहा, वह कुछ कपड़े पहने हुए था, और उसका वजऩ 7.2 किलोग्राम आया, सो, हमारा मानना है कि जब उसका जन्म हुआ, वह कुछ हल्का रहा होगा...।

Vietnam woman gives birth to 7 kg baby - Weird Stories in Hindi

अस्पताल के स्टाफ ने समाचार एजेंसी एएफपी से बच्चे के वजऩ की पुष्टि की, लेकिन कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। बच्चे के परिवार ने उसका नाम ट्रान टिएन कुओक रखा है, और उसके पिता ट्रान वान कुआन ने कहा कि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ तथा सानन्द हैं। वियतनाम में इससे पहले सबसे ज़्यादा वजनी बच्चे का जन्म वर्ष 2008 में हुआ था, जब मध्य गिया लाई प्रांत में एक महिला ने लगभग सात किलोग्राम की बच्ची को जन्म दिया था। वैसे, गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के मुताबिक दुनिया में सबसे ज़्यादा वजऩ वाले बच्चे का जन्म वर्ष 1955 में इटली के एवर्सा में हुआ था, जिसका वजऩ 10.2 किलोग्राम था।

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इन दिनों सोशल मीडिया पर 16 वर्षिय एक स्कूल की लडकी काफी सुर्खियाँ बटौर रही है। जानकारी के मुताबिक मीडिया पर घूम मचाने वाली इस लडकी का नाम चाउ जू यू है। चाउ जू यू दक्षिण कोरिया के ताइनान शहर में रहती हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि किसी अन्य कारण से नहीं बल्कि अपनी कोयल जैसी सुरीली और खूबसूरती के चलते इतनी फेमस हो गई है। इसने अपनी  जादुई आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बना लिया है।

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हम आपको बता दें कि स्कूल में पढ़ने वाली चाउ एक बहुत अच्छी सिंगर भी हैं। साथ ही इनकी वीडियो सोशल साइट पर लोगों द्वारा काफी पसंद की जा रही है। सोशल मीडिया की दुनिया में चाउ को ‘के-पॉप गर्ल’ के नाम से जाना जाता है।

 एक साक्षात्कार में चाउ ने कहा, “आज जहा पर भी मैं हूं उसके लिए मैने काफी मेहनत किया है। फिर चाउ लडकियों के लिए बैंक ‘ट्वाइस’ का एक हिस्सा बनी और फिर अपने प्रदर्शन से उसने लोगों का दिल जीत लिया।

Ajab Gazab

गौरतलब है कि इससे पहले चाउ को उनके प्रदर्शन के लिए वर्ष 2015 में बेस्ट न्यू फीमेल आर्टीस्ट के एमनेट एशियन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। हालांकि उस समय चाउ को पॉलिटिक्स की अधिक समझ नहीं थी। ऐसे में जब चाउ ने चीनी मीडिया के समक्ष ताइवान का झंडा लहरा तो वह विवादों में फंस गयी। जिसके बाद उसे माफी भी मांगनी पड़ी थी।

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आज के समय में तनाव और मानसिक अस्थिरता के कारण व्यक्ति कई सारे रोगों का शिकार बन जाता है। ऐसी स्थिति में न तो ठीक से नींद नहीं आती है और न ही ठीक से भोजन कर पाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा सुना है कि तनाव के कारण किसी के सर के सारे बाल झड़ गए हों और वापस खुशी आने पर नए बाल उग आए हों? नहीं न । हैरान मत होइए ये बिल्कुल सच है।

Hair Fall

दरअसल, एक महिला का दावा है कि, ” ब्रेकअप के तनाव के चलते उसके सिर से सारे बाल झड गए। साथ ही जैसे ही उसे अपना नया प्यार मिला कुछ ही महीनों में उसके सारे बाल वापस आ गए। इतना ही नहीं बल्कि अब उसके बाल पहले से काफी अच्छे हैं। सुपरमार्केट एसिस्टेंट एशलीग अलौतेबी की माने तो दो साल पहले महिला के बाल टूटने शुरू हुए थे। तब डॉक्टर ने उन्हें बताया कि, “वह एलोपेशिया से पीड़ित हैं। डॉक्टर ने संभावना जताते हुए कहा कि यह समस्या तनाव के कारण हुई है।

शेफिल्ड निवासी अलौतेबी का कहना है कि साल 2015 के फरवरी माह तक उनके सर के 95 प्रतिशत बाल झड़ चुके थे। उस दौरान वह एक रिलेशनसिप में थीं, जिसमें काफी तनाव था। तनाव के चलते उनके मन में आत्महत्या तक का ख्याल आ गया था।” उन्होंने आगे कहा कि जैसे जैसे बाल झड़ते जा रहे थे उनका आत्मविश्वास कम होता जा रहा था।

अपने पुराने साथी को छोड़ने के बाद वह जॉन रॉबिन्सन, डिलीवरी ड्राइवर से मिलीं। लेकिन जॉन से जो उन्हें प्यार और आत्मविश्वास मिला उसके चलते चार महीनों के अंदर ही फिर से उनके बाल निकलने लगे। फिलहाल, अब उनके बाल पहले से बहतर हैं। जिसका श्रेय पूरी तरह जॉन के प्यार और उनसे हुई मुलाकातों को दे रही हैं।

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सीएसआईआर के सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट संस्थान , चंडीगढ़ , नई दिल्ली और चेन्नई ने तकनीशियन के 31 पदों पर रिक्तियां घोषित की हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए तीन दिन शेष हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 03 नवंबर 2017 है। पद और योग्यता की जानकारी इस प्रकार है। 
तकनीशियन(1), कुल पद : 31(अनारक्षित : 24)
ट्रेड के अनुसार रिक्तियां का विवरण 
- प्लंबर, पद : 02 (अनारक्षित : 02)
- कारपेंटर , पद : 03(अनारक्षित : 02)
- रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडिश्नर , पद : 02  (अनारक्षित : 02)
- कंप्यूटर ऑपरेशन एंड प्रोग्रामिंग, पद : 03, (अनारक्षित : 02)
- इलेक्ट्रिशियन (दिल्ली), पद : 03 (अनारक्षित : 01)
- इलेक्ट्रिशियन (चेन्नई), पद : 01 (अनारक्षित )
- वेल्ड मैकेनिकल , पद : 01, (अनारक्षित)
- मशीनिस्ट (मैकेनिकल), पद : 02 (अनारक्षित )
- फिट मैकेनिकल , पद : 01,अनारक्षित
- मशीनिस्ट (मैकेनिकल), पद : 07, (अनारक्षित : 04)
- डिस्पेंसरी (फिजीयोथेरेपी) , पद : 01, (अनारक्षित)
- लाइब्रेरियन , पद : 01, (अनारक्षित)
योग्यता : न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों और विज्ञान विषय के साथ दसवीं पास हो। साथ ही संबधित ट्रेड में आईटीआई सर्टिफिकेट प्राप्त हो। या ट्रेड में नेशनल/ स्टेट सर्टिफिकेट प्राप्त हो। या 
- मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित ट्रेड में दो साल की अप्रेंटिस ट्रेनिंग की हो। 
अधिकतम आयु : 28 वर्ष। 
वेतनमान : 27,114 रुपये (चंडीगढ़) और 29,651 रुपये (नई दिल्ली , चेन्नई)। 

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इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल) ने 310 तकनीशियन अप्रेंटिस पद के लिए आवेदन निकाले हैं। यह ट्रेनिंग केवल एक साल के लिए होगी। राज्य के विभिन्न हिस्सो से ट्रेड के अनुसार यह पद निकाले गए हैं। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि छह नवंबर है। 
योग्यता : 

  • तकनीशियन अप्रेंटिस मेकेनिकल - मान्यता प्राप्त संस्थान से तीन साल का मेकेनिकल ट्रेड में डिप्लोमा। 
  •  तकनीशियन अप्रेंटिस इलेक्ट्रीकल - मान्यता प्राप्त संस्थान से तीन साल का इलेक्ट्रीकल में डिप्लोमा। 
  •  तकनीशियन अप्रेंटिस टेलीकम्यूनिकेशन एंड इंस्ट्रूमेंटेशन -  इलेक्टॉनिक्स एंड कंम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग , इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड रेडियो कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग। इंस्ट्रूमेंटेशन एंड कंट्रोल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में तीन साल का डिप्लोमा। 

आयुसीमा : 16 अक्तूबर 2017 तक 18 से 24 वर्ष हो। ओबीसी उम्मीदवार को तीन साल की छूट, वहीं एससी और एसटी उम्मीदवार को पांच साल की छूट मिलेगी।
स्टाइपेंड : 7530 रुपये प्रति माह। 
चयन प्रक्रिया : 

  • उम्मीदवार के चयन के लिए दो स्तरीय परीक्षा होगी। इसमें लिखित परीक्षा और इंटरव्यू शामिल होगा। 
  •  लिखित परीक्षा बहुविकल्पीय होगी। परीक्षा 85 अंक की होगी। 
  •  इंटरव्यू के समय उम्मीदवार को अपने सभी जरूरी दस्तावेजों को साथ लाना होगा। 

आवेदन प्रक्रिया : 

  • उम्मीदवार को आईओसीएल की वेबसाइट वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन को भरना होगा। आवेदन की अंतिम तिथि छह नवंबर है। 
  • ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए उम्मीदवार के पास वैध ई-मेल आईडी के साथ फोन नंबर होना अनिवार्य है। 
  • सबसे पहले उम्मीदवार अपना फोटो और हस्ताक्षर स्कैंड करा लें। हस्ताक्षर का साइज 10-30 केबी में जेपीजी फॉर्मेट में हो। वहीं फोटो का साइज 20- 50 किलोबाइट  में जेपीजी फॉर्मेट में हो। 
  •  ऑनलाइन आवेदन भरने के बाद इसका प्रिंटआउट निकाल लें। 

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नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में योगी सरकार लगातार बड़े फैसले ले रही है. ऐसा ही एक और फैसला शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने को लेकर हो सकता है. चर्चा है कि यूपी के मदरसों को शिक्षा के स्तर पर हाईटेक बनाने पर काम चल रहा है. अब यूपी के मदरसों में NCERT की किताबों को शामिल किया जाएगा. इसे लागू करने पर तैयारियां चल रही हैं. इसमें गणित, साइंस की पढ़ाई को 10वीं से ऊपर की कक्षाओं में अनिवार्य करना भी शामिल है. मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार राहुल गुप्ता के मुताबिक प्रदेश में इस वक्त 19 हजार से ज्यादा मदरसे रजिस्टर्ड हैं. इनमें कक्षा-1 से कक्षा-12 तक एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई की तैयारी चल रही है. एक ट्वीट में यूपी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहा राज्य सरकार की अनुमति के बाद मदरसा बोर्ड इसे लागू कर देगा.

हिंदी और अंग्रेजी को छोड़ सभी विषय उर्दू में होंगे
मदरसों में शामिल की जाने वाली एनसीईआरटी की किताबें में हिंदी और अंग्रेजी को छोड़कर बाकी सभी विषय उर्दू में होंगे. इसके साथ ही गणित, विज्ञान विषयों की किताबें उर्दू में बच्चों को पढ़ाई जाएंगीं. शुरुआत में गणित और साइंस की पढ़ाई अनिवार्य करने का प्रस्ताव है.

अभी तक मनमर्जी से होता था किताबों का इस्तेमाल
राहुल गुप्ता के मुताबिक अभी तक मनमर्जी तरीके से किताबों का इस्तेमाल किया जा रहा था. उन्होंने उम्मीद जताई कि एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने से मदरसों में पढ़ाई का स्तर सुधरेगा. बोर्ड इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जल्द ही इसे मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा जाएगा.

हाईटेक बनाने पर ध्यान
मदरसे को आधुनिक विषयों के साथ अन्य निजी स्कूलों के बराबर लाने की कोशिश की जा रही है. यही नहीं मदरसों को हाईटेक करने के लिए बोर्ड लगातार कोशिश कर रहा है. अब तक यूपी के लगभग 20 हजार मदरसों को ऑनलाइन किया जा चुका है.

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जयपुर। राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालय सेवा चयन बोर्ड चयनित सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा 450 छात्रावास अधीक्षकों को शीघ्र ही नियुक्ति दी जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों की 6 व 7 नवंबर 2017 को निदेशालय, सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग, सिविल लाइन जयपुर में पात्रता एवं दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक डॉक्टर समित शर्मा ने बताया कि अस्थाई रूप से चयनित अभ्यर्थियों को निर्धारिती तिथि एवं समय पर रोल नंबर के अनुसार अंबेडकर भवन मैं उपस्थित होने के लिए सूचना प्रेषित की गई है। उन्होंने बताया कि तिथी वार कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी विभाग की वेबसाइटwww.sje.rajasthan.gov.in राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालय सेवा चयन बोर्ड की वेबसाइट www.rsmssb.rajasthan.gob.in पर उपलब्ध है।

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  • 1 कप धुली उड़द दाल
  • 23 हरी मिर्च बारीक कटी
  • आधा छोटा चम्मच हींग पाउडर
  • आधा छोटा चम्मच अदरक कसा हुआ
  • आधा छोटा चम्मच साबुत काली मिर्च दरदरी पिसी हुई
  • आधा किलो ताजा दही अच्छी तरह से फेंटा हुआ
  • स्वाद अनुसार नमक
  • 1 छोटा चम्मच चीनी और
  • तेल तड़का लगाने
  • तड़का लगाने और सजाने के लिए
  • एक छोटा चम्मच सरसों
  • आधा छोटा चम्मच जीरा
  • थोड़े से करी पत्ते
  • थोड़ी सी बेसन की बूंदी
  • कसी गाजर

विधिः

दाल को रात भर भिगोकर रखें थोड़े से पानी के साथ इसे पीस लें इसमें नमक हरी मिर्ची पाउडर अदरक और काली मिर्च मिलाकर फेंटे कटोरी के पीछे की तरफ बड़े का मिश्रण लगाएं इसमें सुराख़ करें कढ़ाई में तेल गरम करें इसे धीरे से तेल में उतार दें यह थोड़ा पकने पर कटोरी छोड़ देगा। अब बड़ों को पलट दें मध्यम आंच पर पकाएं आंच से उतार ले पानी में डालें और हल्के हाथ से निचोड़ कर अलग करें तड़का पैन में सरसों वह जीरा चटकाए करीपत्ता भुने इन्हें फेंटे हुए दही में मिलाएं हरी मिर्च चीनी नमक मिलाएं। तैयार बड़े डालें बूंदी और कसी गाजर से सजाए।

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सामग्री:

  • 1-1 कप चावल और तुअर दाल
  • आधा चम्मच हल्दी पाउडर
  • सवा दो कप पानी
  • नमक स्वादानुसार सारी सामग्री को मिलाकर कुकर में पका लें।

मसाले के लिए

  • 1-1 टमाटर और प्याज कटे हुए
  • 1 टेबलस्पून अचार का मसाला
  • 1/4 कप दही
  • 6 कलियां लहसुन की
  • 1-1 टीस्पून लाल मिर्च पाउडर और तंदुरी मसाला
  • 1 टेबलस्पून धनिया-जीरा पाउडर
  • 1 टुकड़ा अदरक का
  • सारी सामग्री मिलाकर पीस लें।

छौंक के लिए-

  • 3 टेबलस्पून तेल
  • 1/4 टीस्पून हींग
  • 1-1 टीस्पून राई और जीरा
  • 2 हरी मिर्च लम्बाई में कटी हुई
  • थोड़े से करीपत्ते
  • 1 तेजपत्ता।

अन्य सामग्री:

  • आधी कप हरी मटर उबली हुई
  • 1/4 कप हरी धनिया।

बनाने की विधि:
पैन में घी गरम करके छौंक की साम्रगी डालें। पिसा हुआ मसाला डालकर 2-3 मिनट भूनें। पकी हुई दाल-चावल खिचड़ी, उबली हरी मटर और हरी धनिया डालकर अच्छी तरह मिक्स करें और गरमागरम सर्व करें

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सामग्रीः

  • गेहूं का आटा – 200 ग्राम
  • ओट्स का आटा – 60 ग्राम
  • यीस्ट- 2 टेबल स्पून
  • गर्म पानी- 250 मिलीलीटर
  • पाव भाजी – करीब दो कटोरी
  • प्याज – 4
  • मोजरेला चीज – 100 ग्राम

विधिः

  • एक बड़े से कटोरे में गेहूं और ओट्स का आटा, यीस्ट को लेकर इसे गर्म पानी से नर्म व मुलायम गूंथ लीजिए।
  • इसके बाद इसे 1 घंटे के लिए इसे किसी कपड़े से ढककर अलग रख दें।
  • इसके बाद इस गूंथे आटे से एक बड़े से आकार का पेड़ा बनाएं और इसको पिज्जा के बेस की तरह ही बेल लें।
  • अब अवन को 250 डिग्री सेल्सियस या 480 डिग्री फ. पर पहले से ही गर्म कर लें और इसमें बनाए गए पिज्जा बेस को करीब 7 से 10 मिनट तक के लिए बेक करें।
  • जब पिज्जा बेस थोड़ा बेक हो जाए तो इसे बाहर निकालें और पाव भाजी का मिश्रण इसके ऊपर फैला लें।
  • इसके बाद इसके ऊपर कुछ प्याज के टुकड़े व मोजरेला चीज कद्दूकस करके डाल दें।
  • अवन को दोबारा से 250 डिग्री सेल्सियस या 480 डिग्री गर्म करके, इसमें अपने बनाएं पिज्जा को दोबारा से करीब 10 से 12 मिनट तक बेक कर लें।
  • आपका हेल्दी और स्वादिष्ट पाव भाजी पिज्जा बनकर तैयार हैं।

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सामग्रीः

  • हरे मटर-डेढ़ कप,
  • टमाटर-2,
  • प्याज-एक,
  • लहसुन-2 कली,
  • गरम मसाला पाउडर-1/2 छोटा चम्मच,
  • धनिया पाउडर-एक छोटा चम्मच,
  • नमक-1/4 छोटा चम्मच,
  • लाल मिर्च पाउडर-1/2 छोटा चम्मच,
  • मावा-एक कप,
  • हरा धनिया-सजाने के लिए,
  • तेल-2 छोटे चम्मच।

विधिः

  • टमाटर, प्याज, लहसुन को सभी मसालों के साथ मिक्सी में पीस लें।
  • गर्म तले में पिसे मसाले को तेल के ऊपर आने तक भूनें।
  • अब मटर और नमक डालकर 5 मिनट तक ढककर पकाएं।
  • पांच मिनट बाद खोलकर चलाएं और आधा कप पानी डालकर फिर से पांच मिनट तक पकाएं। गैस बंद करें और मावा को किसकर मिला दें। पांच मिनट तक ढककर रखें और हरे धनिया से सजाकर सर्व करें।

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सामग्रीः

  • ½ कटोरी दलिया
  • 2 चम्मच देसी घी
  • 1 गिलास दूध
  • 4 चम्मच पिसी चीनी
  • 2 चम्मच ड्रिंकिंग चॉकलेट पाउडर
  • 2 चम्मच डार्क कुकिंग चॉकलेट
  • 1 चम्मच बादाम बारीक कटा हुआ
  • 1 चम्मच काजू बारीक कटा हुआ
  • 1 चम्मच पिस्ता बारीक कटा हुआ
  • 2 चम्मच क्रीम
  • 1 चम्मच चॉकलेट चिप्स

विधिः

चॉकलेटी दलिया बनाने के लिए पैन में सबसे पहले देसी घी डालकर गर्म करें अब इसमें दलिया डालकर सुनहरा होने तक भूनें अब इसमें दूध डालकर, पिसी चिनी, चॉकलेट पाउडर, डार्क कुकिंग चॉकलेट, काजू, बादाम पिस्ता डालकर पकाएं. जब दलिया पूरा दूध सोख ले तो इसे सर्विंग डिश में निकालकर, क्रीम,चॉकलेट चिप्स और ड्रायफ्रूट से सजाकर गर्मागर्म परोसें।

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सामग्रीः

  • नींबू - 8 (250 ग्राम )
  • सरसों का तेल - ¼ कप
  • नमक - 30 ग्राम
  • हल्दी पाउडर - ½ छोटी चम्मच
  • लाल मिर्च पाउडर - ½ छोटी चम्मच
  • काली मिर्च - ½ छोटी चम्मच
  • राई - ½ छोटी चम्मच
  • कलौंजी - ½ छोटी चम्मच
  • हींग - 2-3 पिंच

विधिः
एक बर्तन में 2-3 कप पानी उबालने के लिए रख दीजिए। पानी में उबाल आने पर गैस धीमा कर दीजिए और नींबूओं को पानी में डाल दीजिए। नींबूओं को 10 मिनिट धीमी आंच पर उबलने दीजिए। 10 मिनिट बाद नींबूओं को पानी से निकाल कर प्लेट में रख लीजिए और ठंडा होने दीजिए।

नींबू के ठंडा होने पर इन्हें काट कर प्याले में रखते जाएं, बीज निकाल कर अलग कर दीजिये, अब कटे हुए नींबू के टुकड़ों में नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर डालकर सभी मसालों को अच्छे से मिला दीजिए। साबुत काली मिर्च को दरदरा कूट कर, डाल कर मिला दीजिए।

पैन में तेल डालकर गरम कीजिए। तेल के गरम होने पर गैस धीमा कर दीजिए और गरम तेल में राई डालकर भूनें, राई तड़कने पर कलौंजी, हींग डाल कर गैस बंद कर दीजिए। मसाले को थोडा़-थोडा़ नींबू में डालकर मिला दीजिए।  नींबू का अचार बनकर तैयार है, अचार को 3-4 दिन धूप में या कमरे में ही रहने दीजिए और दिन में 1-2 बार अचार को चलाकर ऊपर नीचे कर दीजिये ताकि मसाले अच्छे से अचार में मिल जाएं। इसे तुरंत खाया जा सकता है।  लेकिन तीन-चार दिन के अन्दर सारा मसाला नींबू के अन्दर अच्छी तरह पहुंच जाता है। अचार को हमेशा सूखे और साफ चमचे से निकालिये, यह अचार 1 साल तक चलता है।

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गोलगप्पा सभी लोगो को बहुत पसंद है। बाजार के बने गोलगप्पे के पानी में वो लोग बहुत सी ऐसी चीजे मिलाकर बना देते है जो आपके लिए हानिकारक हो सकता है। इसे आप घर पर भी आसानी से बना सकते है। तो चलिए जानते है कि गोलगप्पे के पानी को कैसे बनाते हैं।

सामग्रीः

  • हरी पुदीना पत्ती,
  • धनिया पत्ती,
  • हरी मिर्च – 2,
  • जीरा पाउडर – 1 चम्मच,
  • हींग – 1 पिंच,
  • काला नमक,
  • सफ़ेद नमक,
  • सोठ पाउडर,
  • खट्टा करने के लिए – नीबू या अमचूर पाउडर,

बनाने की विधिः

सबसे पहले हरी पुदीना पत्ती और धनिया पत्ती को साफ़ कर धो ले अब मिक्सर में धनिया पत्ती, पुदीना पत्ती, हरी मिर्च, जीरा पाउडर, काला नमक, सफ़ेद नमक, सोठ पाउडर, और थोड़ा सा पानी डालकर मिक्सी चला दे अब इसे मिक्सी में से निकालकर एक गहरे बर्तन में डाल दे अब इसमें 1 गिलास पानी डाल दे और अच्छे से मिक्स कर दे अब इसमें एक नीबू या फिर अमचूर पाउडर मिला दे  अब आपका गोल गप्पे का पानी तैयार हैं।

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सामग्रीः

  • एक पैकेट या 200 ग्राम पनीर
  • एक बड़ा चम्मच तेल
  • एक बड़ा प्याज बारीक कटा
  • एक बड़ा टमाटर बारीक कटा
  • आधा छोटा चम्मच पिसी लाल मिर्च
  • आधा छोटा चम्मच गरम मसाला
  • एक चौथाई चम्मच पिसा हुआ जीरा
  • एक चौथाई चम्मच कसूरी मेथी
  • एक चम्मच सफेद मक्खन
  • एक बड़ा चम्मच ताजी क्रीम
  • नमक स्वादानुसार
  • कटा धनिया
  • कद्दूकस की गई अदरक
  • गोल आकार में बारीक कटे टमाटर

विधि

  • पनीर को गरम पानी में कुछ देर के लिए रखें
  • एक बड़े पैन में तेल गर्म करें और इसमें प्याज हल्के सुनहरे होने तक भून लें
  • अब इसमें कटे टमाटर डाल कर कम आंच पर करीब एक मिनट तक भूनें
  • इसमें जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला और कसूरी मेथी डालकर चलाएं
  • पनीर को छान लें और बराबर आकार के टुकड़ों में काट लें
  • तैयार मसाले में पनीर के टुकड़े डालें और अच्छी तरह मिला लें. नमक डाल कर 5 से 10 मिनट तक कम आंच पर पकने दें
  •  थोड़ा पानी डालें और उबलने दें, ताकि हल्की ग्रेवी तैयार हो सके. फिर आंच से हटा लें.
  •  अब इस पर मक्खन और क्रीम डालें
  •  अदरक, टमाटर और धनिया से गार्निश करें

ध्यान दें

  • इसमें कलर लाना हो तो टमाटर के साथ एक चम्मच टमाटर प्यूरी भी डाल सकते हैं.
  •  अगर ग्रेवी एकदम गाढ़ी चाहिए तो प्याज और टमाटर को भूनने के बाद करीब 5 मिनट तक ठंडा करें और फिर मिक्सर में पीस लें. चाहें तो इसमें एक चम्मच काजू का पेस्ट भी मिला सकते हैं।

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सामग्री :

  • छेना – 1 कप
  • दूध – 1
  • बादाम – 15
  • पिस्ते – 20
  • चीनी – स्वादानुसार
  • साइट्रिक एसिड – 1 चुटकी

विधि:

सबसे पहले एक मोटे तले के बर्तन में दूध गरम करें, इसके बाद इसमें छेना डालकर अच्छी तरह से मिला लें। जब दूध खौलने लगे तब उसमें चीनी मिलाएं, उसके बाद पिस्ते और बादाम को मिक्स करके दूध में मिला दें। इसके बाद इसमें साइट्रिक एसिड मिलाएं, बर्तन को गैस से नीचे उतारकर ठंडा होने के लिए अलग रख दें। फिर फ्रिज में रखें और अच्छी तरह ठंडा करके सर्व करें।

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सामग्रीः

  • 4 ब्रेड स्लाइस (किनारे काट लें)
  • आधा कप सूजी
  • 1 कप कद्दूकस किया हुआ पनीर
  • 1 बारीक़ कटा प्याज़
  • आधा बारीक़ कटा टमाटर
  • 2 कटी हुई हरी मिर्च
  • थोड़ा-सा कटा हुआ हरा धनिया
  • सेंकने के लिए तेल
  • 1/4 टीस्पून राई
  • स्वादानुसार नमक

विधिः

  • सूजी में पनीर, प्याज़, टमाटर, हरी मिर्च, हरा धनिया और नमक मिलाकर मिश्रण तैयार करें।
  • इस मिश्रण को ब्रेड स्लाइस पर फैलाएं
  • तवे पर थोड़ा-सा तेल गरम करके राई का तड़का लगाएं
  • उस पर ब्रेड स्लाइस डालकर सुनहरा होने तक सेंक लें
  • ब्रेड को दोनों तरफ़ से सेंक लें
  • टोमैटो सॉस के साथ गरम-गरम सर्व करें

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अजमेर। अन्तर्राष्ट्रीय पुष्कर मेले में सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग सहित विभिन्न राजकीय विभागों एवं स्वयं सेवी संगठनों द्वारा लगायी गई विकास प्रदर्शनी का शुभारम्भ मंगलवार को संसदीय सचिव एवं पुष्कर विधायक श्री सुरेश सिंह रावत ने किया। इस मौके पर पुष्कर नगर पालिका के अध्यक्ष श्री कमल पाठक एवं मण्डल रेल प्रबंधक श्री पुनीत चावला भी उपस्थित थे।    

सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग की प्रदर्शनी में वर्तमान शासन के 4 वर्ष के दौरान हुए विभिन्न विकास कार्यों एवं कार्यक्रमों के लगभग एक सौ छाया चित्रों के माध्यम से प्रदर्शन किया गया। साथ ही मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा द्वारा अजमेर यात्रा के चित्रों को भी स्थान दिया गया है। विभाग के उप निदेशक श्री महेश चन्द्र शर्मा ने संसदीय सचिव को विभिन्न छाया चित्रों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। इससे पूर्व दीप प्रज्जवलन कर प्रदर्शनी का शुभारम्भ किया गया।

मेला मैदान के सामने आयोजित इस विकास प्रदर्शनी में पशु पालन विभाग, राष्ट्रीय ऊष्ट्र अनुसंधान बीकानेर, जिला परिषद, डाक विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग,स्वयं सहायता समूह-नाबार्ड, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कृषि विभाग, दीनदयाल अन्त्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान एवं रेलवे द्वारा विकास कार्यो का प्रदर्शन किया गया है। प्रदर्शनी में गैर सरकारी संगठनों द्वारा समाज को नई दिशा देने का प्रयास किया गया। इसी प्रकार ज्योर्तिमय सेवा संस्थान, आध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, विश्व मित्र जन सेवा समिति, मीनू स्कूल एवं चाईल्ड लाइन, प्रजापिता ब्रह्म कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय एवं चाईल्ड लाईन द्वारा भी प्रदर्शनी लगायी गई।

इस मौके पर मेला अधिकारी डॉ. श्याम सुन्दर चन्दावत, विकास प्रदर्शनी प्रभारी डॉ. सुधाकर सैनी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। यह प्रदर्शनी आगामी 4 नवम्बर तक चलेगी।

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मलबा, अतिक्रमण, पानी को दूषित करने तथा झील को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर होगी कार्यवाही
झील में हो सकेगी बोटिंग, एडवेंचर वाटर गेम, फिश्ंिाग, बर्ड सेंच्यूरी आदि गतिविधियां
झील के बाहर फिशिंग, बर्ड वाचिंग, हाईकिंग, घुडसवारी सहित अन्य गतिविधियां भी की जा सकेंगी संचालित
अजमेर।  
अजमेर शहर की शान ऐतिहासिक आनासागर झील के संरक्षण और विकास सहित सौंदर्यीकरण के लिए राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। अब झील में मलबा डालने, अतिक्रमण करने, पानी को दूषित कर झील को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां पूर्णत: प्रतिबंधित रहेंगी। ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लायी जाएगी। झील को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने तथा तय मानकों के अनुसार विकास करने के लिए यहां बोटिंग, एडवेंचर वाटर गेम, बर्ड सेंच्यूरी आदि गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी।

जिला कलक्टर श्री गौरव गोयल ने बताया कि आनासागर झील के संरक्षण और विकास के लिए राजस्थान झील संरक्षण एवं विकास प्राधिकरण ने विस्तृत दिशा- निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों की पालना सुनिश्चित कर झील को और अधिक सुन्दर व पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। इस संबंध में सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया जा रहा है।

गोयल ने जानकारी दी कि अब राजस्व ग्राम थोक तैलियान एवं कोटड़ा में फैली झील एवं इसके संरक्षित क्षेत्र में झील संरक्षण कार्यों को छोड़कर किसी तरह का निर्माण हटाना, खुदाई, अतिक्रमण, झील में मिट्टी की गे्रडिंग या डिग्रेडिंग, यहां खनिज उत्खनन से संबंधित किसी भी तरह की कार्यवाही पर प्रतिबंध रहेगा। यहां मलबा डालना, अन्य किसी तरह की तरल या धातु डालना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसी तरह झील के बहाव क्षेत्र, पानी के आवक के रास्तों, पानी बाहर जाने के मार्ग, स्टोरेज एरिया एवं सुरक्षा के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़़ नहीं की जा सकेगी। झील में प्लांटिंग और हार्वेस्टिंग, जानबूझकर कर वस्तुओं को जलाना, पानी के तापमान में बदलाव के लिए शारीरिक, केमिकल या बॉयोलोजिकल छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। प्राधिकरण ने सीवरेज को भी झील में बहाने पर रोक लगा दी है।

उन्होंने बताया कि झील को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए भराव क्षेत्र तथा बाहर विविध गतिविधियां संचालित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि झील में प्राधिकरण की अनुमति से पर्यटन के लिए बोटिंग, एडवेंचर वाटर गेम, फिशिंग, बर्ड सेंच्यूरी, बर्ड वाचिंग, हाईकिंग, बोटिंग, झील के किनारे घुडसवारी, स्वीमिंग, केनोइंग एवं साईकलिंग आदि हो सकेंगे।

गोयल ने बताया कि झील के किनारे ईको टयूरिज्म का विकास, मिट्टी की गुणवत्ता की जांच, वेट लेंड, परकोलेशन, वेजीटेशन, फ्लोरा एण्ड फोना से संबंधित कार्यवाही भी की जाएगी। झील के पानी का पेयजल, सिंचाई एवं अन्य कार्यों में उपयोग हो सकेगा। झील के किनारे सैर के लिए भी चौपाटी का निर्माण करवाया जा रहा है। झील की चारदीवारी चिन्हीकरण के साथ झील की सरुक्षा, मरम्मत एवं सरंक्षण के कार्य करवाए जा सकेंगे।

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अजमेर। बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान ( आरसेटी) के द्वारा 10 दिवसीय डेयरी एवं वर्मी कम्पोस्ट निर्माण का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। बड़ौदा स्वरोजगार संस्थान की निदेशक श्रीमती सीमा खन्ना ने बताया कि 10 दिवसीय डेयरी एवं वर्मी कम्पोस्ट मैंकिग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में पुष्कर, घूघरा,किशनगढ़, रलावता, खूटिया, जालिया, लोडियाना, बिजयनगर के 27 पशुपालको को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया गया।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह आरसेटी में जिला अग्रणी प्रबंधक श्री आर.सी.टेलर, बैंक ऑफ बड़ौदा अजमेर ,के मुख्य अतिथ्य में हुआ। मुख्य अतिथी द्वारा अपने उद्बोधन में प्रशिक्षणार्थियों को कहा कि सफल उद्यमी बनें तथा बैंक की ऋण योजनाओं की जानकारी प्रदान की। अच्छे उद्यमी जो स्वरोजगार करने हेतु बैंक से ऋण लेता है और कार्य के द्वारा आय अर्जित कर बैंक को समय पर ऋण की किश्त अदा करता है। इस प्रकार की उद्यमियों को बैक सदैव सहयोग प्रदान करता है। सफल प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किये गए। तत्पश्चात् संस्थान में संस्थान फैकल्टी रामराज धाकड़ द्वारा आभार प्रकट किया। इस दौरान एफ.एल.सी.सी. श्री एम.एम.शर्मा, बैंक ऑफ बड़ौदा एवं समस्त स्टाफ उपस्थित रहे।

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सिरोही। ब्रह्मांकुमारीज संस्था के शांतिवन में समाजसेवियों के सम्मेलन के समापन की रात्रि सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। जिसके देर रात तक स्थानीय तथा देश के कई हिस्सों से आये नन्हें कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से लोगों को भाव विभोर कर दिया। भांगड़ा से लेकर क्लासिकल और कथ्थक नृत्य ने एक से बढक़र एक प्रस्तुतियां दी। देर रात हुए इस कार्यक्रम में डायमंड हॉल सभागार में देर रात तक लोगों की तालियों से हॉल गूंजता रहा। 

समाज सेवा के सही मायने और मूल्यनिष्ठ जीवन पर नृत्य नाटिका ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। नन्हें बाल कलाकारों की प्रस्तुतियों में लोग डूब गये। साथ ही आला अधिकारी भी दशेन में झूमते दिखे। मुख्यत: पंजाब, उड़ीसा, बिहार, महाराष्ट्र तथा गोवा के आये नहें कलाकारों ने अपनी कलाओं से समा बांध दिया।

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सिरोही। राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत आबूरोड के वार्ड नंबर 3, मानपुरा शहर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में आउटरीच चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया। शिविर में कुल 86 मरीजों का उपचार किया गया और कुल 48 जांचे ली गई.  इसमें मधुमेह रोग की 24 और  हिमोग्लोबिन की 20 जांचे की गई, जिसमें 08 मरीज मधुमेह, 05 मरीज हाईपर टेंशन के, दांत सम्बन्धी 02 और 03 मरीज त्वचा सम्बन्धी बीमारियों के पाए गए। इसी प्रकार 02 मरीजों की मलेरिया स्लाइड्स ली गई और 02 जांचे टी.बी. की ली गई. शिविर में 01 मरीज को उच्च चिकित्सा संस्थान पर ईलाज हेतु रैफर किया गया।

शिविर में आने वाले मरीजो को 104 व 108 एम्बुलेंस, मौसमी बीमारियों से बचाव, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, राजश्री योजना, गर्भवती महिलाओं की जांच एवं बच्चों में टीकाकरण करवाने के महत्व के बारे में जानकारी दी गई और विभिन्न विभागीय कार्यक्रमों से संबंधित आईईसी प्रदर्शित की गई, जिससे आमजन जागरूक होकर योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठा सके।  शिविर में चिकित्सा अधिकारी डॉ. विक्रांत सक्सेना, मेल नर्स-2 राजेश, ए.एन.एम. प्रतीक्षा, ए.एन.एम. देवी बेन, लैब टेक्नीशियन जेराल्ड स्टिफन, एस.टी.एल.एस. निर्मल्य कुमार बनर्जी, एस.टी.एस. बलवीर सिंह, आशा सहयोगिनी कौशल्या और आंगनवाडी कार्यकर्ता डिम्पल ने अपनी सेवाएँ दी. इस मौके पर राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के अर्बन हैल्थ कंसल्टेंट सियाराम पूनिया और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला आई.ई.सी. समन्वयक उपस्थित रहे। 
 

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गोरेपन को खूबसूरती का पैमाना माना जाता है। इसी खूबसूरती को हासिल करने के लिए तरह-तरह के उपाय भी किए जाते हैं। महंगी से महंगी क्रीम, लोशन आदि सबका उपयोग किया जाता है। लेकिन जब आप घर बैठे गोरी त्वचा पा सकती हैं तो इतनी भागदौड़ भला क्यूं। इस लेख को पढ़ें और गोरी त्वचा पाने के घरेलू उपाय जानें।

 गोरा दिखने के लिए घर मे मौजूद चीजों का इस्तेमाल ही काफी होगा, आज हम आपको जो उपाय बता रहे है वो गोरा होने के साथ-साथ लटकती, झुर्रिदार, ढीली त्वचा को कसने में ही कारगर है।  

1 चम्मच मैदा पाउडर ,1 चम्मच शहद , 2 चम्मच दूध इन चीजों के इस्तेमाल से आपका फेस रातों रात चमक जायेगा 

  • सबसे पहले इसके लिए आपको 3 चीजों की जरूरत होगी, सबसे पहले आप एक कटोरे में 1 चम्मच मैदा पाउडर ले लें इसमें आपको 1 चम्मच शहद मिलाना है शहद एक एंटीबैक्टीरियल का काम करता है और आपकी त्वचा को नरम बनाता है।
  • अब आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है दूध जो 2 चम्मच मिलना है, दूध हमेशा से चेहरे का रंग निखारने में सफल रहा है। इसीलिए हम इसका उपयोग करेंगे। परिमाण के हिसाब से दूध मिलाने के बाद इस मिश्रण को अच्छी तरह से मिला लें। 
  • जब मिलाना हो जाए तो इसे अपने पूरे चेहरे पर समान रूप से लगाए। इसे ऐसे ही 1-2 घंटे के लिए छोड़ दें। जब ये अच्छी तरह से सूख जाए तो इसे गुनगुने पानी से साफ कर लें। ऐसा करने से आपको गोरी त्वचा प्राप्त हो जाएगी और आप गोरे दिखने लगोगे। यह आप रात को सोते वक़्त भी कर सकते है और दिन में ही कर सकते है।

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लहुसन खाना हमारी सेहत के लिए बहुत ज्यादा लाभकारी है। लहसुन को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।  सुबह-सवेरे खाली पेट लहसुन खाने से  सबसे ज्‍यादा फायदा होगा। आमतौर पर हम लहसुन का इस्‍तेमाल खाने में तड़का लगाने या ग्रेवी बनाने के लिए करते हैं। लहसुन किसी भी बेजान सब्‍जी के स्‍वाद को जानदार बना देता है लेकिन लहसुन में ऐसे गुणकारी तत्‍व मौजूद होते हैं जो आपको कई बीमारियों से दूर रखते हैं। 

  • लहसुन दिल से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है। लहसुन खाने से खून का जमाव नहीं होता है और हार्ट अटैक होने का खतरा कम हो जाता है। इससे दिल की बीमारियां दूर होती है। 
  • लहसुन खाने से हाई बीपी में आराम मिलता है। दरअसल, लहसुन ब्‍लड सर्कुलेशन को कंट्रोल करने में काफी मददगार है। हाई बीपी की समस्‍या से जूझ रहे लोगों को रोजाना लहसुन खाने की सलाह दी जाती है।  
  • पेट से जुड़ी बीमारियों जैसे डायरिया और कब्‍ज की रोकथाम में लहसुन बेहद उपयोगी है। पानी उबालकर उसमें लहसुन की कलियां डाल लें। खाली पेट इस पानी को पीने से डायरिया और कब्‍ज से आराम मिलेगा।  
  • लहसुन में आपके डाइजेस्टिव सिस्‍टम को ठीक करने की ताकत होती है,खाली पेट लहसुन की कलियां चबाने से आपका डाइजेशन अच्‍छा रहता है और भूख भी खुलती है। 

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सेहत के लिए खाना बहुत ही जरूरी है इसमें बहुत से विटामिन ,प्रोटीन और कई हेल्दी चीजे शामिल है। हेल्दी डाइट सेहत के लिए पहले ज़रूरी है। हेल्दी मील्स कुक करने के लिए किचन में सामग्री भी हेल्दी होनी चाहिए। देखा जाए तो हर प्रोडक्ट का लेबल पढ़ना और उसमें मौजूद न्यूट्रिशनल वेल्यू समझना आसान नहीं है, लेकिन अगर आपकी फूड च्वाइस ठीक हो, तो हेल्दी ग्रोसरी शॉपिंग करने में आपको आसानी होगी। 

ग्रोसरी स्टोर जाने से पहले एक लिस्ट तैयार कर लें, जिसमें सारे हेल्दी फूड प्रोडक्ट्स के नाम हों। लिस्ट तैयार करने में थोड़ा टाइम ज़रूर लगेगा, लेकिन इससे आपकी शॉपिंग आसान हो जाएगी और आप घर पर बैग भरकर हेल्दी फूड आइटम्स ही लाएंगे। आपको बता दें कि स्टोर में शॉपिंग करना बहुत ट्रिकी होता है, क्योंकि वहां आपको अन हेल्दी फूड्स की तरफ आकर्षित करने के लिए कई ऑफर्स होते हैं। इसीलिए लिस्ट बनाने से आपकी शॉपिंग भी फास्ट होगी, पैसा भी बचेगा और आप वही सामान खरीदेंगे, जिनकी आपको ज़रूरत है।

जब भी आप खाली पेट शॉपिंग करने जाएंगे, तो बहुत कुछ ऐसा उठा लेंगे, जिनकी आपको ज़रूरत नहीं है। इनमें पैकेज्ड फूड आइटम्स ज़्यादा होंगी, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अच्छे से खा-पीकर ही स्टोर जाएं, ताकि आप कार्ट में ज़रूरत के प्रोडक्ट्स ही भरें।

न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि लोग सब्ज़ियां कम खरीदते हैं। फिर एक या दो दिन बाद वो स्टॉक खत्म हो जाता है, और आलस के कारण वो अनहेल्दी फूड खा लेते हैं। यह बहुत ज़रूरी है कि आप पैकेज्ड, प्रोसेस्ड और फ्रोज़न फूड्स की जगह फ्रेश वेजिटेबल्स और फ्रूट्स घर पर ज़्यादा से ज़्यादा खरीदकर रखें। इससे आप हेल्दी फूड ज़्यादा खाएंगे और बाद में आपको इस तरह की हेल्दी शॉपिंग करने की आदत भी हो जाएगी।

यही नहीं बाजार से लाए भोजन के सामान की गुणवत्ता और घर में उसके रखरखाव और पकाने के अनुचित तरीके से भी उसकी पौष्टिकता काफी कम हो जाती है, जो अनजाने में ही आपकी सेहत के लिए नुकसानदेह भी साबित होती है। हर कोई ऑर्गेनिक फूड प्रोडक्ट्स नहीं खरीद सकता, क्योंकि ये बहुत महंगे होते हैं। ऑर्गेनिक दाल, फल और सब्ज़ियां सेहत के लिए हेल्दी होती हैं। इसलिए प्रोडक्ट्स और  खाने की चीजें खरीदते समय इन सब बातों  खास ध्यान देना चाहिए। 

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हल्दी का इस्तेमाल हर घर में किया जाता है। हल्दी में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते है। एेसे में इसे गर्म दूध के साथ लेने से दमा, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम मिलता है। हल्दी खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ शरीर को कई बीमारियों से दूर रखती है। इसमें मौजूद तत्व सेहत और त्वचा दोनों के लिए बहुत फायदेमंद है। एेसे में अपनी डाइट में हल्दी को शामिल करें। आज हम आपको रोजाना हल्दी का सेवन करने के फायदे बता रहे है। 

  • हल्दी का इस्तेमाल बहुत से रोगो को ठीक करता है। अब सबसे पहले चम्मच हल्दी को थोड़े से पानी में डालकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को दर्द वाली जगह पर लगाएं। 
  • इसके बाद में पानी से धो लें।मोच आने पर बर्फ से सिकाई करें। अगर दर्द ज्यादा है तो थोड़ी-थोड़ी देर बाद मोच पर बर्फ लगाएंमोच के दर्द से छुटकारा पाने के लिए शहद में चूना मिक्स करके दर्द वाली जगह पर लगाएं। इससे काफी आराम मिलेगा।
  • मोच के दर्द को दूर करने के लिए एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करें। इसे मोच वाली जगह पर लगाएं। इससे काफी आराम मिलेगा।हल्दी में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते है। एेसे में इसे गर्म दूध के साथ लेने से दमा, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम मिलता है। 
  • रोजाना हल्दी का सेवन करने से दिमाग सुरक्षित रहता है। इससे दिमाग के सिकुड़ने जैसी समस्याओं में फायदा होता है। हल्दी में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते है। एेसे में इसे गर्म दूध के साथ लेने से दमा, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम मिलता है। 

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हर कोई इंसान खूबसूरत दिखने के लिए बहुत से टिप्स को रोज फॉलो करता है। कई बार गलत प्रोडक्ट्स चेहरे पर बुरा प्रभाव डालते है। सजाना संवरना कोई बुराई नहीं हैं, अगर सही तरीके से मेकअप किया जाए तो त्वचा  को नुकसान नहीं होता है लेकिन गलत तरीके से मेकअप करने पर स्किन बहुत जल्दी खराब हो जाती है।

रोजाना में बहुत हैवी मेकअप लाउड लगता है, ऐसे में क्यों ना कुुछ ऐसे मेकअप अपनाया जाएं जो सिर्फ कुछ सेकंड्स में आपको दें नया अंदाज और स्वीट इनोसेंट लुक भी । चेहरे की सुंदरता को तार तार कर देता है। फिर आप जितना भी मेकप लगाकर उसे छुपाने की कोशिश करें वह बेकार ही जाता है। त्वचा की खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए और गोरेपन को कायम रखने के लिए बेसन के साथ शहद और हल्दी का उपयोग काफी समय से किया जाता रहा है।इसके लिए जरुरी है क‍ि आप अपने खाने-पीने पर और त्‍वचा की साफ सफाई का पूरा ध्‍यान दें।

फ्रेश लुक के लिए चीक्स के एप्पल और टेंपल पर क्रीम ब्लेंडेड ब्राइट पॉपअप कलर का ब्लश अप्लाई करें और व्हाइट आईलाइनर से लुक को कंप्लीट करें।केला विटामिन एवं आयरन की खान है। यह आपकी त्वचा के साथ ही आपकी सेहत के लिए भी बहुत असरदार है। एक मध्यम अकार का केला लें और उसका पेस्ट बनाएं। 

इस पेस्ट में 2 से 3 बड़े चम्मच दही और एक अंडे के साथ मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इन तीनों को अच्छी तरह मिलाते हुए उंगलियों से सारे चेहरे पर लगाएं। 20 -30 मिनट तक इसे चेहरे पर लगे रहने दें और फिर सादे पानी से धो लें। इस नुस्खे का हफ्ते में दो बार उपयोग करने से आपकी त्वचा में एक नया निखार आएगा।

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शरीर में बहुत सी बीमारियां हड्डियों की कमज़ोरी की वजह से दिखाई  देती है। शरीर के लिए  सही मात्रा  में अच्छा  खान पान  बहुत जरूरी है। हमारा शरीर कई तरह की हड्डियों और मांसपेशियों से बना रहता है। स्वस्थ शरीर के लिए हड्डियों का मजबूत होना भी काफी जरूरी होता है। हम आपको बता दें कि कई बार ऐसा होता है कि हमारे शरीर के किसी हिस्से की नस चढ़ जाती है, जो कि हमें काफी तकलीफ देती है। यह परेशानी ज्यादातर पैरों, बाजुओं और टांगों में देखने को मिलती है। 

शरीर में अगर कहीं किसी हिस्से में नस चढ़ जाए, तो ऐसे में काफी परेशानी होती है। कभी-कभार तो यह आसानी से कुछ ही सैकेंड में ठीक भी हो जाती है, वहीं कभी-कभार यह नस ठीक होने में काफी समय लेती है। हम आपको बता दें कि अगर आपके बाएं पैर की नस चढ़ जाएं, तो ऐसे में आप दाएं हाथ की उंगली से अपने कान के निचले जोड़ को दबाएं। इससे कुछ ही समय में दर्द ठीक हो जाएगा।

इसमें ध्यान ये रखना है कि दिए हुए चित्र के अनुसार आप लंबाई में अपने शरीर को आधा आधा दो भागों में चिन्हित करें, अब जिस भाग में नस चढ़ी है उसके विपरीत भाग के कान के निचले जोड़ पर उंगली से दबाते हुए उंगली को हल्का सा ऊपर और हल्का सा नीचे की तरफ बार बार 10 सेकेंड तक करते रहें | नस उतर जाएगी |जब नस चढ़ जाए तो तुरंत पैरो पर तेल से मालिश करना शुरू कर दें. ऐसा करने से प्रभावित भाग में खून का दौरा बढ़ता है जिस से रोगी को तुरंत आराम मिलता है। 

नस चढ़ने पर हथेली में थोड़ा सा नमक डालकर चाट लें, ऐसा करने से भी दर्द दूर हो जाता है।हम आपको बता दें कि आप केले का सेवन करके भी नस चढ़ने की समस्या से राहत पा सकती हैं। केले से शरीर को पोटेशियम की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं, केले का सेवन करने से हमारे शरीर की सभी कमियां दूर हो जाती है।यह परेशानी अधिकतर रात के समय ही होती है, ऐसे में आप सोते समय अपने पैरों के नीचे तकिया रख लें।

दर्द से छुटकारा पाने के लिए आप इस जगह बर्फ से भी सेक सकती हैं। ठंडी सिकाई से नस उतर जाती है और दर्द दूर हो जाता है।कमजोरी के कारण भी कभी-कभार नस चढ़ जाती है। इसलिए आप रोजाना अपनी डाइट में किशमिश, अखरोट और बादाम का सेवन करें। इस तरह सेहत को ठीक रखने के लिए अच्छा खानपान और सुबह की सैर करना शरीर  के लिए बहुत ज्यादा लाभ कारी  है।

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अपना घर अपना होता है। यह जुमला हम जब भी सुनते हैं, एक अपनेपन का अहसास जरूर होता है। लेकिन जब हम अपना घर या कार्यालय बनवाएं तो भूमि चयन करते समय वास्तु शास्त्र को जरूर आधार बनाएं। साथ में ये उपाय जरूर आजमाएं...

  • भूमि ऐसी जगह न हो जहां गली या रास्ते का अंत होता हो।
  • जहां तीन रास्ते एक साथ मिलते हों, वहां भूमि न लें। यह अशुभ होती है।
  • यदि भूमि खोदने पर हड्डी या फटा कपड़ा मिले तो भूमि अशुभ होती है।
  • यदि भूमि खोदते समय खप्पर मिले तो भूमि पर बनने वाला घर कलहकारी होता है।
  • भूमि खरीदते समय ध्यान रखें भूमि का रंग कैसा भी हो लेकिन वह चिकनी होनी चाहिए।
  • जिस भूमि पर पहले कभी श्मशान रहा हो वह भूमि अपशकुनी होती है।
  • भूमि का चयन करते समय यह जरूर देखें की भूमि बंजर न हो, उसमें कुछ न कुछ उत्पन्न होता हो।
  • भूमि में एक गड्डा खोदें, उसमें पानी भर दें। वहां से पूर्व दिशा की और 100 कदम चलें। और लौट आएं। यदि उस गड्डे में पानी पूरा फुल है। यदि पानी पूरा भरा है तो अत्यंत श्रेष्ठ है। आधा खाली है तो भूमि मध्यम फल देने वाली है। यदि पूरा पानी सूख जाए तो भूमि व्यक्ति के लिए भाग्यशाली नहीं होती।
  • अपना मकान या कार्यस्थल ऐसी जगह बिल्कुल भी न बनाएं जिसके उत्तर-पूर्व दिशा में ऊंचे भवन, पर्वत या पीपल का पेड़ हो।
  • भूमि की मिट्टी पीली या सफेद है तो वह श्रेष्ठ है यदि लाल है तो मध्यम और काले वर्ण की मिट्टी है तो ठीक नहीं मानी जाती है।
  • भवन के लिए भूमि खरीदते समय यह ध्यान रखें कि उसके उत्तर-दक्षिण में तालाब या नदी न हो ऐसी जगह धन का नाश करती है।

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फेंगशुई में रंगों का बहुत महत्व होता है। जैसा की चित्र में दिखाया गया है कि बगुआ के अनुसार अलग- अलग क्षेत्रों में दिशा के अनुसार अलग-अलग रंग होते हैं।

'बागुआ', फेंगशुई का प्रयोग करने वालों के लिए दिशा सूचक का काम करता है। वह बताता है कि किस दिशा में किस रंग का प्रयोग करके उस दिशा की उपयोगिता को बढ़ाया जा सकता है, जिससे कि 'चि' की प्रवाह संतुलित रहे।

रंग सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने और नकारात्मक ऊर्जा को घटाने के लिए उपर्युक्त होते हैं। रंग प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग भावनात्मक अर्थ रखते हैं। जैसे लाल रंग रक्तचाप को बढ़ाता है। पीला रंग मस्तिष्क की कई बीमारियों को ठीक करता है। गुलाबी रंग गुस्से को कम करता है।

रंगों का उपयोग घर के वातावरण को संतुलित करने के लिए भी किया जाता है। फेंगशुई में मुख्य द्वार पर लाल रंग 'चि' को उत्तेजित करता है। बीम के नीचे लाल रिबन या झंडा बीम की नकारात्मक 'चि' को संतुलित करता है।

  • घर में पौधे रखने से परिवार के लोगों में स्नेह बढ़ता है।
  • हमारे जो सलाहकार जैसे अकाउंटेंट, वकील आदि का कमरा भूरे रंग का होना उचित रहता है।
  • उत्साह यानी गुलाबी रंग। विवाह भी एक प्रकार से उत्साह है इसलिए वैवाहिक जोड़े गुलाबी रंग का प्रयोग करते हैं।
  • बच्चों के कमरे में सफेद धातु की वस्तु बच्चों में पढ़ाई की ओर ध्यान व अन्य कार्यों को बढ़ावा देती है।
  • धन का मुख्य रंग बैंगनी है। इसलिए धन को बढ़ावा देने के लिए बैंगनी रंग या इसके अलावा लाल, हरा और नीले रंग का उपयोग करना चाहिए।
  • घर में कमरे अलग अलग रंगों के होना चाहिए जैसे सफेद, सुनहला, हल्का पीला ज्ञान का सूचक है इसलिए ये रंग बच्चों के रूम के लिए बेहतर होते हैं।

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विंड चाइम एक पॉपुलर फेंगशुई यंत्र है। यह देखने में जितनी खूबसूरत होता है, जीवन में इसका असर भी उतना ही खूबसूरत हो सकता है। लेकिन विंड चाइम लगाने का हमें अपने जीवन में सही परिणाम मिले, इसके लिए जरूरी है कि हम सही विंड चाइम को सही दिशा में लगाएं।

इसे उपयोग में लाने के कई तरीके हैं। विंड चाइम के द्वारा हम अपने घर में से नकरात्मक ऊर्जा कोह टाकर अपने घर में पॉजिटिव माहौल बना सकते हैं। इसके लिए हमें विंड चाइम में लगी हुई रॉड की संख्या पर ध्यान देना होता है।

यहां लगाएं विंड चाइम

ऐसा नहीं है कि इसे घर के किसी भी हिस्से में लगा देना चाहिए। घर के उत्तर-पश्चिमी या पश्चिमी दिशा में ही इसे लगाना चाहिए, ताकि इसका संपूर्ण लाभ मिल सके।

  • विंड चाइम धातु, लक ड़ी या सिरेमिक पाइप से बनी होती है। इसमें छोटे-बड़े आकार की घंटियों को इस प्रकार समायोजित किया जाता है कि हवा के झोंके से वह बजने लगती है। ध्यान रहे की इसमें लगे पाइप खोखले होने चाहिए जिससे इसमें से निगेटिव ऊर्जा निकल कर पॉजिटिव हो जाएं।
  • फेंगशुई में ऐसा माना जाता है कि पांच या सात पाइप वाली विंड चाइम नेगेटिव एनर्जी दूर करती है। छह या आठ पाइप वाली विंड चाइम ड्रॉइंग रूम के उत्तर-पश्चिम में लगाने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।
  • फेंगशुई और वास्तु में विंड चाइम को खुशहाली लाने वाली ध्वनि तरंगों का साधन माना गया है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला खूबसूरत शो पीस है। इसकी ध्वनि से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
  • जो लोग समाज में अपनी लोक प्रियता और सम्मान चाहते हैं वह सेरेमिक सेब ने 2 या 9 रॉड के विंड चाइम को लिविंग रूम के दक्षिण-पश्चिम कोने में लगाएं।
  • गार्डन में पेड़-पौधों के बीच विंड चाइम की मधुर आवाज कानों को सुकून देती है। आप चाहें तो गार्डन एंट्रेंस पर भी विंड चाइम लगा सकती हैं।
  • लकड़ी और बांस से बने विंड चाइम घर को बहुत ही सौम्य लुक देते हैं। इन्हें पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व दिशा में लटकाना चाहिए। यह घर-गृहस्थी केलिए अच्छे माने जाते हैं।
  • अगर पीतल या स्टील की बनी विंड चाइम खरीद रहे हैं, तो इसमें रॉड की संख्या 6 या 7 होनी चाहिए, यह घर में संपन्नता लाती है।
  • अगर विंड चाइम बांस की बनी हो, तो इसमें रॉड की संख्या 3 या 4 होनी चाहिए। इससे उसका अधिकतम लाभ प्राह्रश्वत होता है।

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ज्योतिष विद्या के अनुसार लौंग से कई प्रकार के टोटके किए जाते हैं। छोटी और सामान्य दिखने वाली लौंग भोजन में प्रयोग की जाए तो हमारे शरीर को स्वस्थय रखती है इसके साथ ही इसके ऐसे उपाय हैं जिससे घर में उपस्थित किसी भी तरह की नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं और साथ ही सकारात्मक ऊर्जा का घर में निवास होने लगता है। लौंग के ये उपाय आपके जीवन और भाग्य को बदलने में सहायता कर सकते हैं। हम कई बार मेहनत करते हैं लेकिन उसके बाद भी मेहनत का फल नहीं मिलता है। इसलिए कई लोग टोटकों को अपनाते हैं। आज हम आपको लौंग के टोटके बताने जा रहे हैं कि किस तरह लौंग आपको धन की प्राप्ति करवा सकती है और आपका काम बना सकती है।

  • अगर मेहनत करने के बाद भी किसी भी तरह से धन की प्राप्ति नहीं हो रही है तो एक नींबू के ऊपर 4 लौंग लगा दें और ऊं श्री हनुमते नमः मंत्र का जाप करें। इस जाप को 21 बार करके उस नींबू को अपने पास रख लें।
  • यदि आपका ध्यान किसी काम में नहीं लगता है और हमेशा व्यथित रहता है तो एक कपूर और एक फूल वाली लौंग जलाकर दो-तीन दिन में एक बार खाते रहें। इससे मन शांत रहेगा और साथ ही काम में भी मन लगने लगेगा।
  • लौंग के 7-8 दाने लेकर उसे घर के किसी कोने में दिए में रखकर जला दें। इसके अलावा आप यह भी कर सकते हैं कि 5 ग्राम हींग और 5 ग्राम कपूर के साथ 5 ग्राम काली मिर्च को मिलाकर मिश्रण बना लें। फिर इसकी राई के बराबर गोलियां बना लें। जितनी भी गोलियां बनी हो उसको दो भागों में बराबर बांट लें और फिर इसे सुबह और शाम को चलाएं। यह प्रयोग तीन दिन तक करेंगे तो घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाएगी।
  • घर से किसी जरुरी काम के लिए निकलते समय मुख्य दरवाजे पर लौंग रखें और फिर उस लौंग पर पैर रखकर घर से बाहर कदम रखें। इसके साथ ही इसके बाद घर में दौबारा ना लौटें इससे टोटके का प्रभाव खत्म हो जाता है।

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घर के प्रवेश द्वार के सामने यदि कोई रोड, गली या टी जक्शन हो, तो ये गंभीर वास्तुदोष माने जाते हैं। खासकर उन घरों या इमारतों में जो दक्षिण व पश्चिम मुखी होते हैं। ऐसे घर में निवास करने वाले लोगों को लगभग हर काम में असफलता ही मिलती है।

  • किसी कमरे में सोने पर तरह-तरह के भयावह सपने आते हैं और इस वजह से आपको रात में नींद नहीं आती हो, ऐसी समस्या से छुटकारा पाने के लिए कमरे में एक जीरो वॉट का पीले रंग का नाइट लैम्प या बल्ब जलाए रखें।
  • घर या ऑफिस के किसी भी कमरे की खिड़की, दरवाजा या गैलरी ऐसी दिशा में खुले, जिस ओर कोई खंडहरनुमा पुराना मकान या ऐतिहासिक इमारत स्थित हो या फिर श्मशान, कब्रिस्तान स्थित हो, तो यह अत्यंत अशुभ है।ऐसे मकान में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए किसी शीशे की प्लेट में कुछ छोटे-छोटे फिटकरी के टुकड़े आदि खिड़की या दरवाजे या गैलरी के पास रख दें और उन्हें हर महीने नियम से बदलते रहें, तो वास्तुदोष से मुक्ति मिलती है।
  • घर के बाहर अगर टी स्टॉल है तो उसकी तरफ 6 इंच का एक अष्टकोण आईने पर लटका दें। ऐसा करने से दक्षिण एवं पश्चिम दिशाओं की टी स्टॉल का सम्पूर्ण वास्तुदोष ठीक हो जाता है।
  • कभी-कभी बच्चों को मकान के किसी कमरे में अकेले जाने से डर लगता है, ऐसे में बेड या पलंग के सिरहाने के पास वाले दोनों किनारों में तांबे के तार से बने स्प्रिंगनुमा छल्ले डाल दें।
  • किसी मकान की छत पर पूर्व, उत्तर या पूर्वोत्तर दिशाओं में कमरा, स्टोर आदि बने हों तो ऐसा मकान गृह स्वामी को कभी सुख नहीं देता। गृह स्वामी हमेशा परेशान व दुखी रहता है। ऐसा गृह स्वामी अपने जीवन में नौकरियां बदलते रहता है अथवा व्यापार में भाग्य आजमाते रहता है।

इस वास्तुदोष से छुटकारा पाने के लिए मकान के दक्षिण-पश्चिम कोने में छत पर एक पतला-सा लोहे का पाइप एवं उस पर पीली या लाल रंग की झंडी लटका दें। इस तरह के छोटे-मोटे कई उपाय करके नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में तब्दील किया जा सकता है।

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रात को अच्छी नींद हम सभी की सेहत के लिए बहुत जरूरी होती है। जब तक हम पूरी नींद नहीं लेंगे, तब तक कोई भी काम अच्छी तरह से पूरा नहीं कर पाएंगे। फेंगशुई में बेहतर नींद पाने के लिए कुछ टिप्स बताए गए हैं जो इस प्रकार हैं।

बेडरूम वह जगह है, जहां आप अपना अधिकतर समय बिताते हैं, आराम करते हैं, सपने देखते हैं, सोते हैं, खेलते हैं आदि तो आप यह अच्छी तरह से परख लीजिए कि आपके पास वे सब चीजें हैं जो आपको पूरा आराम लेने में सहायक होती है। क्या आपके तकिए और गद्दे साफ और आरामदायक हैं? क्या आप अपने बिस्तर की चादर रोज बदलते हैं?

क्या आप रोजाना बेड के गद्दे भी बदलते हैं? क्या आपके बिस्तर के नीचे कूड़ा करकट है? यदि आपके बेड में सामान रखने के बॉक्स बने हुए हैं, तो उन्हें साफ-सुथरा रखें और जहां तक हो सके उनमें केवल चादर या तौलिये ही रखें।

बेडरूम में इलेक्ट्रॉनिक सामान बेडरूम में कभी भी इलेक्ट्रॉनिक सामान बिल्कुल न रखें, क्योंकि इनको रखने से आप सही ढंग से नींद नहीं ले पाते। उदाहरण के लिए बहुत से लोग टेलीवीजिन और कम्प्यूटर को बेडरूम में रखते हैं, लेकिन वे इस बात से अंजान होते हैं कि टीवी अत्याधिक यांग ऊर्जा को उत्पन्न करता है जो नींद के लिए समस्या बनती है।

अपने बेडरूम में एक लॉफिंग बुद्धा रखें। इससे कमरे में सकारात्मक ऊर्जा के साथ ही आपकी नींद को सहारा मिलेगा। यह धन और स्वास्थ्य का प्रतीक होता है। इसके इस्तेमाल सेघर में धन-धान्य में कमी नहीं रहेगी। आपके घर का माहौल भीसदा हल्का रहेगा। हल्के माहौल के चलते परेशानियां कम होंगी और नींद अच्छी आएगी।

बेडरूम को कैसे सजाएं: क्या आपके बेडरूम की दीवारों कारंग आंखों को चुभता हुआ है, तो यह येंग ऊर्जा को प्रदर्शित करता है। कमरे में हमेशा हल्के रंगों का इस्तेमाल करें। इसके अलावा बिस्तर की चादर भी हल्के रंग की होनी चाहिए अन्यथा आप अपने में आलस महसूस करेंगे। चादर में लाल रंग का इस्तेमाल करना अच्छा होता है।

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त्रेतायुग की बात है। राजा जनक के दरबार में आध्यात्मिक वाद-विवाद चल रहा था। इस मौके पर भारतवर्ष से संत-महात्मा जनक नगरी आए हुए थे। हुआ यूं कि जैसे-जैसे वाद-विवाद बढ़ता गया, वैसे-वैसे कई विद्वान तर्क-वितर्क के जरिए अपनी बात कह रहे थे। इस तरह समय बीतता गया।

और आखिर में सिर्फ दो ही लोग वाद-विवाद के लिए बचे हुए थे। और वह थे ऋषि याज्ञवल्क्य और साध्वी मैत्रेयी। इस तरह दोनों के बीच वाद-विवाद शुरु हुआ। यह काफी समय तक चलता रहा। लेकिन स्थिति वहां आ थमी जब याज्ञवल्क्य मैत्रेयी के प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सके।

याज्ञवल्क्य आध्यात्मिक तेज और तीक्ष्ण बुद्धि के धनी थे लेकिन एक स्त्री मैत्रेयी से पराजित हो गए। जिसके चलते उन्हें क्रोध आ गया और वह मैत्रेयी से बोले, 'यदि एक भी प्रश्न और पूछा, तो उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए जाएंगे। इस पर जनक बीच में आ गए।'

जनक ने याज्ञवल्क्य से कहा, 'हालांकि आप सब कुछ जानते हैं, फिर भी आपको भीतर इस ज्ञान का जीवंत अनुभव नहीं हुआ है और यही वजह है कि आप मैत्रेयी के प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पाए।' इसके बाद जनक ने भरे दरबार में मैत्रेयी को सम्मानित किया।

याज्ञवल्क्य को अपनी मर्यादाओं का बोध हुआ। वह मैत्रेयी के चरणों में जा गिरे और आग्रह किया कि मैत्रेयी उन्हें अपना शिष्य बना लें। मैत्रेयी ने उन्हें अपने पति के रूप में स्वीकार किया।

उन्होंने कहा, 'आप मेरे पति बन सकते हैं, शिष्य नहीं।' दरअसल, मैत्रेयी यह देख चुकी थीं कि कोई और आदमी इतना ऊंचा नहीं पहुंच पाया था।

याज्ञवल्क्य ने अभी भी वह नहीं पाया था, जो मैत्रेयी पा चुकी थीं, लेकिन उस समय मैत्रेयी को इतना पहुंचा हुआ दूसरा कोई और आदमी नहीं दिखा, इसलिए उन्होंने याज्ञवल्क्य को पति रूप में स्वीकार करने का फैसला किया। दोनों ने परिवार बसाया और कई सालों तक साथ रहे।

इस तरह समय बीतता गया। कुछ समय बाद एक दिन याज्ञवल्क्य ने मैत्रेयी से कहा, 'इस संसार में मैं बहुत रह चुका। अब मैंने तय किया है कि मेरे पास जो भी है, उसे मैं तुम्हें दे दूंगा और अपने आप को पाने के लिए वन चला जाऊंगा।'

मैत्रेयी ने कहा, 'आपने यह कैसे सोच लिया कि मैं इन सांसारिक चीजों में रम जाऊंगी? जब आप सच्चे खजाने की खोज में जा रहे हैं, तो भला मैं इन तुच्छ चीजों के साथ क्यों रहूं? क्या मैं कौड़ियों से संतुष्ट हो जाऊंगी?' फिर वे दोनों वन चले गए और सिद्ध प्राणियों की तरह अपना बाकी जीवन व्यतीत किया।

पौराणिक कथा का आशय

वैदिक काल वो समय था जब अध्यात्म के मामले में स्त्रियां पुरुषों के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर चलती थीं। वह समाज पूरी तरह से व्यवस्थित था। जिस समाज में चीजें अच्छी तरह से व्यवस्थित होंगी, उसमें स्वाभाविक रूप से स्त्री का वर्चस्व रहा होगा।

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जर्मन ऑटोमेकर मर्सिडीज-बेंज नए एमजी सीएलए 45 और जीएलए 45 के शुभारंभ के साथ भारतीय बाजार में एएमजी लाइनअप का विस्तार करने के लिए तैयार है। मर्सिडीज-बेंज ने घोषणा किया है कि एएमजी सीएलए 45 और जीएलए 45 को 6 नवंबर, 2017 को भारत में लॉन्च किया जाएगा।

दो नए मॉडल की लॉन्चिंग के साथ, अकेले 2017 में एएमजी मॉडल की कुल संख्या सात तक बढ़ गई है। एएमजी सीएलए 45 और जीएलए 45 कंपनी के प्रवेश स्तर के मॉडल हैं। दोनों मॉडल मौजूदा 2-लीटर इन-लाइन चार-सिलेंडर, टर्बोचार्ज्ड इंजन से 375 बीएचपी पर 475 एनएम के टॉर्क का उत्पादन कर रहे हैं। इंजन को एएमजी स्पीडिशफ्ट डीसीटी 7-स्पीड स्पोर्ट्स गियरबॉक्स के साथ लैस किया गया है। एएमजी सीएलए 45 और जीएलए 45 एएमजी प्रदर्शन 4 एमएटीआईसी सभी व्हील ड्राइव सिस्टम से लैस है। इसके अलावा, दोनों नए मॉडल AMG गतिशील प्लस पैकेज प्राप्त करते हैं जिसमें चार मोड शामिल हैं। डिजाइन मोर्चे पर, नई एएमजी सीएलए 45 और एएमजी जीएलए 45 बाहरी डिजाइन में छोटे परिवर्तन दिखते हैं। कारों में पीले विवरण के साथ एक नई चमकदार ब्लैक कलर की योजना है।

नए मॉडल में एएमजी स्टाइल किट भी शामिल है जिसमें ब्लैक ग्रिल, एएमजी बैडिंग ऑन स्लेट और आक्रामक रूप से डिज़ाइन बम्पर शामिल हैं। एएमजी सीएलए 45 और जीएलए 45 के साइड प्रोफाइल में एएमजी ग्राफ़िक्स और फ्रंट बम्पर, ओआरवीएम, टायर की दीवार और रियर बम्पर पर पीले विवरण शामिल हैं। जीएलए 45 एक रियर स्पेलर के साथ आता है। दोनों कारें 1 9-इंच अलाय व्हील से सुसज्जित हैं। नई एएमजी मॉडल की अन्य प्रमुख विशेषताओं में प्रोजेक्टर हेडलैम्प्स, एलईडी, क्वाड एक्जिस्ट, रियर डिफ्यूज़र और एलईडी टेल लाइट शामिल हैं। एएमजी सीएलए 45 और जीएलए 45 के इंटीरियर में एप्पल कार्प्ले, एंड्रॉइड ऑटो और मिरर लिंक के साथ एक इंफोटेनमेंट सिस्टम है।

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फोर्ड ने भारत में साल 2013 में ईकोस्पोर्ट को पहली बार लॉन्च किया था और अब लगभग चार सालों बाद इस अमेरिकी कार निर्माता ने इकोस्पोर्ट को एक बार फिर से नए कलेवर में लॉन्च करने जा रही है। जहां कम्पनी ने नई इकोस्पोर्ट में कई फीचर्स व स्पेशिफिकेशन को जोड़े हैं।

बावजूद इसके अब भी आपके दिमाग में यही चल रहा होगा कि आखिर कम्पनी इस नई इकोस्पोर्ट में कॉस्मेटिक परिवर्तनों के अलावा इंटीरियर जोड़े हैं जो इसे मारुति ब्रेज़्ज़ा और टाटा नेक्सन को टक्कर देने के लिए भारत में उतारेगा तो आपके परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि हम आपको इस बारे में पूरी जानकारी देने जा रहे हैं। नया पेट्रोल इंजन नई फोर्ड इकोस्पोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण अपडेट इसका आल न्यू पेट्रोल इंजन हैं। इसका पिछला मॉडल तीन अलग-अलग इंजनों के साथ उपलब्ध था।

जिनमें 1.0-लीटर इकोबोस्ट पेट्रोल, 1.5 लीटर प्राकृतिक रूप से एस्पिरेटेड पेट्रोल और 1.5 लीटर डीजल इंजन है। अब, पुराने 1.5-लीटर पेट्रोल इकाई को नई ड्रैगन सीरीज के 1.5 लीटर इंजन से बदल दिया जाएगा। पुराने 1.5 लीटर पेट्रोल इंजन में 110 बीएचपी पर 140 एनएम टॉर्क उत्पादित होता था जबकि नया 1.5 लीटर यूनिट123bhp पर 150Nm का उत्पादन करती है। नई ईकोस्पोर्ट पर 13bhp पर 10Nm टॉर्क की छलांग इस कॉम्पैक्ट एसयूवी को अधिक शक्तिशाली बना देगा, जबकि पुराने इंजन की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक ईंधन दक्षता प्रदान की जाएगी। नया ऑटोमैटिक गियरबॉक्स नए फोर्ड इकोस्पोर्ट पेट्रोल इंजन को पिछले मॉडल की तरह मैनुअल और ऑटो गियरबॉक्स दोनों में पेश किया जाता है, लेकिन यहां अब एक बदलाव आया है।

पिछला ऑटो गियरबॉक्स एक हाई-तकनीक, ड्यूल क्लच 6-स्पीड गियरबॉक्स से लैस है जबकि नई इकोस्पोर्ट ऑटो गियरबॉक्स पैडल के माध्यम से स्थानांतरित 6-स्पीड टॉर्क कनवर्टर के साथ अधिक शानदार है। नया अलाय व्हील पिछली इकोस्पोर्ट को 16 इंच के अलाय व्हील के साथ पेश किया गया था, जबकि नया मॉडल 17 इंच के अलाय व्हील के साथ आएगा। इकोस्पोर्ट पर नए 17 इंच के पहिए एसयूवी को एक नया लुक देते नजर आएगें। ट्राई प्रेशर मॉनिटर फोर्ड ने नई ईकोस्पोर्ट पर टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (टीपीएमएस) को जोड़ा है।

इससे आपको हर समय टायर के दबाव की निगरानी में मदद मिलेगी। टीपीएमएस शीर्ष-संस्करण टाइटेनियम + पर उपलब्ध होगा। इनहेंस केबिन स्पेस फोर्ड ने नई ईकोस्पोर्ट के यात्रियों के लिए बैठने की स्थिति और अधिक स्थान की पेशकश करने के लिए पीछे की सीट पर फिर से काम कर रहा है। मारुति ब्रेज़्ज़ा और टाटा नेक्सन ने पीछे यात्रियों के लिए केबिन स्पेस के साथ खरीदारों को प्रभावित किया है। फोर्ड को इकोस्पोर्ट के साथ इस मुद्दे को संबोधित करना पड़ रहा है और संभव है नए बदलावों के साथ एक विशाल ईकोस्पोर्ट की पेशकश की जाएगी।
 

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जापानी दोपहिया निर्माता सुज़ुकी, भारतीय बाजार में एक नया क्रूजर मोटरसाइकिल पेश करने के लिए तैयार है, जो कि बजाज एवेंजर से टक्कर लेती नजर आएगी। कम्पनी ने इस बाइक को सुजुकी इंट्रूडर150 नाम दिया है। दरअसल हाल ही में नई सुजुकी इंट्रूडर150 की कुछ इमेज लीक हुई हैं और माना जा रहा है कि इस क्रूजर बाइक को भारत में 5 नवंबर से 7 नवंबर, 2017 के बीच लॉन्च कर दिया जाएगा। इस नई बाइक में हमें कई खासियतें देखने को मिल सकती हैं।

इन तस्वीरों के माध्यम से पता चल रहा है कि सुजुकी इंट्रूडर150 ने अपने से बड़े मॉडल से कई डिजाइन्स को उधार लिया है। इसका समग्र स्टाइल वर्सटाइल है व ईंधन टैंक डिजाइन और सिग्नेचर हेडलैंप के साथ लॉन्च किया जाएगा। सुजुकी इंट्रूडर150 में एक प्रोजेक्टर एलईडी हेडलैम्प, स्पोर्टी दिखाने के लिए एलईडी टेल लैम्प और ईंधन टैंक है।

क्रूजर मोटरसाइकिल भी दोहरे बंदरगाह निकलता है जो कि गिक्सर सीरीज के समान है। सुजुकी इनट्रूडर 150 की मौजूदा 155 सीसी एयर कूल्ड, सिंगल-सिलेंडर इंजन से 14.5 बीएचपी पर 14 एनएम के टॉर्क को प्रोड्यूज करेगा। ब्रेकिंग सिस्टम को दोनों छोरों पर डिस्क ब्रेक द्वारा नियंत्रित किया जाता है और मोटरसाइकिल को भी एक एकल चैनल एबीएस को गिक्स एसएफ़ के समान मिल जाता है।

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अगर आप प्रीमियम और आकर्षक डिजायन के साथ-साथ दूसरों से अलग दिखने वाली एसयूवी खरीदने का विचार बना रहे हैं तो ये आपके लिए काम की खबर साबित हो सकती है। दरअसल रेनो ने अपनी लोकप्रिय प्रीमियम एसयूवी कैप्चर को भारत में उतारने की घोषणा कर दी है, कंपनी के अनुसार रेनो कैप्चर को 6 नवंबर को लॉन्च किया जाएगा। इसका मुकाबला हुंदई क्रेटा से होगा।

रेनो कैप्चर को डस्टर वाले बी0 प्लेटफार्म पर तैयार किया गया है, रेनो कारों की रेंज में इसे डस्टर के ऊपर पोजिशन किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कैप्चर एसयूवी कई वेरिएंट में मिलेगी, भारत में इसका टॉप वेरिएंट प्लेटिन उतारा जा सकता है। इस में लैदरेट अपहोल्स्ट्री, फुल एलईडी हैडलैंप्स, डायनामिक टर्न इंडिकेटर्स, एलईडी फॉग लैंप्स, कॉर्नरिंग लैंप्स, एलईडी टेललैंप्स और चार एयरबैग समेत कई फीचर मिलेंगे।

भारत आने वाली रेनो कैप्चर में डस्टर वाले पेट्रोल और डीज़ल इंजन मिलेंगे। पेट्रोल वेरिएंट में 1.5 लीटर का एच4के इंजन मिलेगा, जो 106 पीएस की पावर और 142 एनएम का टॉर्क देगा। यह इंजन 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स से जुड़ा होगा। डीज़ल वेरिएंट में 1.5 लीटर का डीसीआई के9के इंजन मिलेगा, जो 110 पीएस की पावर और 240 एनएम का टॉर्क देगा। यह इंजन 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स से जुड़ा होगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि रेनो कैप्चर की कीमत 13 लाख रूपए के आसपास हो सकती है।

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जापान मशहूर ऑटोमेकर कंपनी टोयोटा ने सुजुकी की तारीफ की है और उसे भारतीय बाजार का मास्टर कहा है। टोयोटा ने आगे कहा कि सुजुकी भारत की 'मास्टर' कंपनी है और टोयोटा को उसका 'स्टूडेंट' बनकर सीखने की जरूरत है। बता दें कि साल की शुरुआत में इन दोनों दिग्गज कंपनियों ने प्रोडक्ट व कॉम्पोनेंट की सप्लाई के अलावा पर्यावरण, सुरक्षा व सूचना प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में साथ मिलकर काम करने की योजना बनाई थी। मारूति की सहायक कम्पनी सुजुकी देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है।

जानकारी के मुताबिक भारत के पैसेंजर व्हीकल सेग्मेंट में इसका 50 फीसदी कब्जा है। कंपनी ने 2020 तक 2 मिलियन यूनिट बेचने का टारगेट रखा है। पिछले वित्त वर्ष मारुति सुजुकी ने 1.5 लाख यूनिट का आंकड़ा पार कर लिया था। इस बारे में टोयोटा मोटर कॉर्पोरेशन के सीईओ (एशिया, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका) हिरोयुकी फुकुई ने कहा, "इस तरह सुजुकी भारत की मास्टर है और टोयोटा उनसे बहुत कुछ सीख सकती है। वो टीचर हैं और हम स्टूडेंट है। फुकुई ने कहा की भारत में काफी उग्र प्रतिस्पर्धा है।

सुजुकी भारत में लंबे समय से है और वो यहां के बाजार व ग्राहकों को अच्छी तरह समझ चुके हैं। हमने सिर्फ सहयोग की घोषणा की है, लेकिन हम एक निष्कर्ष बनाने में जल्दबाजी नहीं करेंगे। ताकि हम एक दूसरे को जान सकें कि टोयोटा क्या करना चाहती है, सुजुकी क्या करना चाहेगी।

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एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स की बीएमडब्ल्यू स्पोटर्स कार नीलाम होने जा रही है। खबरों के मुताबिक उनकी कार 400,000 डॉलर तक में नीलाम होने की उम्मीद है। सोथबाई ऑक्शन हाउस ने कहा कि ओरेकल के सीईओ लैरी एलीसन ने जॉब्स को यह कार खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया था।

हालांकि यहां पर स्पष्ट कर देते हैं कि कारों को लेकर उनके शौक के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन जर्मन ऑटो मोबाइल्स और उनके डिजाइनों के प्रति जॉब्स की विशेष रुचि थी। स्टीव के पास बीएमडब्ल्यू की मोटरसाइकिलें और मर्सिडीज-बेंज की एसएलएस भी थीं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक जॉब्स ने अक्टूबर 2000 में यह कार खरीदी थी और 2003 तक यह कार उन्हीं के पास थी। अब 6 दिसंबर को उनकी कार की नीलामी होगी। एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स का 2011 में निधन हो गया था। स्टीव ने 1976 में अपने घर के गैराज में स्टीव वोज्नियाक के साथ एप्पल की शुरूआत की थी और एप्पल दो तथा मैसिनटोश कंप्यूटर्स का विकास किया। कंपनी डायरेक्टर्स के साथ विवाद के चलते 1985 में उन्होंने कंपनी छोड़ दी। उन्होंने नैक्स्ट कंप्यूटर की स्थापना भी की थी।

1986 में उन्होंने लुकासफिल्म के कंप्यूटर ग्राफिक्स डिवीजन को खरीद लिया और इसे एक स्वतंत्र एनीमेशन स्टूडियो पिक्सर के तौर पर फिर से बनाया। करीब एक दशक बाद 1996 में एप्पल ने नैक्स्ट को खरीद लिया और जॉब्स को एप्पल में वापिस लाया गया। 1997 से जॉब्स ने कंपनी के सीईओ के तौर पर काम शुरू किया।

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जापानी ऑटोमेकर निसान ने पुष्टि किया है कि किक्स कॉम्पैक्ट एसयूवी को साल 2018 में भारतीय बाजार में लॉन्च किया जाएगा। ऑटोकार के माध्यम से निसान इंडिय़ा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, पेमेन कार्गर ने कहा कि हमारा भारत में अगला उत्पाद किक एसयूवी होगा जो 2018 में लॉन्च होगी।

आपको बता दें कि साल 2013 के बाद से, निसान ने भारतीय बाजार में कोई नया उत्पाद लॉन्च नहीं किया है। किक्स के साथ, निसान के लिए कई नए मॉडल पेश करना है, उन्होंने कहा है कि निसान भविष्य में कई नए उत्पाद भारत में पेश करेगा। इससे मॉडल लाइन अप वैश्विक हो जाएगा, लेकिन भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप होगा।

जानकारी के मुताबिक निसान किक्स रेनो के एम 0 प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी जो डस्टर और कैप्चर को भी स्थापित करेगा। निसान एक लाभ के रूप में एम 0 प्लेटफॉर्म को उजागर कर रहा है क्योंकि किक की गुणवत्ता बहुत अधिक होगी और कीमतें रेंज में होगी। किक्स का समग्र डिजाइन रेनो मॉडल के समान है। इसका स्टाइल ग्रिल इस एसयूवी को एक आक्रामक रूप देता है। इंटीरियर की बात करें तो किक्स में कनेक्टिविटी ऑप्शंस के साथ 7 इंच इंफोटेनमेंट सिस्टम होगा।

निसान किक्स 1.5 लीटर या 1.6 लीटर डीजल इंजन से लैस होने की संभावना है। इधर 1.5 लीटर डीजल इंजन जल्द ही कैप्चर लॉन्च करने के लिए सुसज्जित है, जो कि 108 बीएचपी बिजली का उत्पादन करता है। रेनो भी डस्टर में तैनात 1.5 लीटर पेट्रोल इंजन की पेशकश कर सकता है।

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भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजूकी ने शुद्ध मुनाफे में मामूली वृद्धि के बाद तिमाही आय की घोषणा की और बाजार की उम्मीदों को एक बार फिर से मात दे दिया है। जिसके बाद इस इंडो-जापानी कंपनी ने कहा कि वह इलेक्ट्रिक कारों का निर्माण शुरू करेगा। कम्पनी की इस योजना के पीछे भारत सरकार द्वारा साल 2030 तक पेट्रोल और डीजल वाहनों को खत्म कर पर्यावरण के अनुकूल विकल्प देने का है। कंपनी ने यह भी जोर दिया कि यह इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट में भी बाजार का लीडर होगा। कम्पनी ने कहा कि हम इलेक्ट्रिक कारों का निर्माण करेंगे।

हम भी इस क्षेत्र में लीडर बनने का इरादा रखते हैं। उक्त बाते हैं अध्यक्ष आर.सी. भार्गव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही जहां कंपनी ने अपनी त्रैमासिक कमाई की घोषणा की थी। हालांकि, भार्गव ने भारत में इलेक्ट्रिक कारों के निर्माण की कोई समयसीमा का खुलासा नहीं किया है और मारुति सुजुकी की मूल कंपनी सुजुकी अभी तक इलेक्ट्रिक कारों के विकास को लेकर कोई आक्रामक कदम नहीं उठाया है। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि मारुति सुजुकी मोटर कॉर्प और टोयोटा मोटर कॉर्प के बीच साझेदारी से इस क्षेत्र को एक नई गति मिल सकेगी।

दोनों जापानी कंपनियां ऑटोमोबाइल उद्योग में उभरती रुझानों जैसे हरित प्रौद्योगिकियों और स्वायत्त ड्राइविंग की ओर बढ़ने का लाभ ले रही हैं। इसके अलावा ऑल-इलेक्ट्रिक बेड़े के लिए कदम मौजूदा उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र को निश्चित रूप से बाधित करेगा। सरकार ने पर्यावरण में देश के कार्बन को कम करने के प्रयास में पेट्रोलियम और डीजल कारों के प्रदूषण को रोकने के लिए ऑटोमोबाइल उद्योग को सूचित किया है।

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अमेरिकी कार निर्माता जीप ने हाल ही में अपनी नई लॉन्च हुई कम्पास के बाद कम्पास के ट्रेलहाक एडिशन के प्रोडक्शन की घोषणा की है लेकिन इसके अलावा जीप से एक और नई और सस्ती एसयूवी लाई जाने की बातें कही जा रही हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक जीप ने घोषणा किया है कि वह साल 2020 तक अपने 5 नए SUV मॉडल्स बाज़ार में लाएगी जिसमें अगर सबसे सस्ती कोई एसयूवी होगी उसका नाम रेनीगेट होगी। रेनीगेट भी एक कॉम्पैक एसयूवी होगी।

आपको बता दें कि रेनीगेट कॉम्पेक्ट सेडान क्रेटा, और डस्टर को टक्कर देने के लिए उतारी जाएगी और इसकी कीमत का भी निर्धारण इन्ही वाहनों के आधार पर होगा। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि रेनीगेट की कीमत हुंडई क्रेता से 1 लाख ज्यादा होगी। नई रेनीगेट को लम्बाई 4.2 मीटर, ऊंचाई 1.7 मीटर और चौड़ाई 1.9 मीटर. जबकि क्रेटा की लंबाई 4.2 मीटर, ऊंचाई 1.6 मीटर और चौड़ाई 1.8 मीटर के साइज में उतारा जाएगा। जबकि इसके निपरीत रेनो डस्टर की बात करें तो इसकी लंबाई 4.3 मीटर, ऊंचाई 1.69 मीटर और चौड़ाई 1.8 मीटर है।

इस लम्बाई को देखते हुए यह तो स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है कि रेनीगेट अन्य कॉम्पेक्ट कारों की तुलना में सबसे ऊँची और चौड़ी कार होगी। रेनीगेट में लोअर पावर वाला आउटपुट इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा। और अनुमान है कि इसमें 2.0 लीटर वाला इंजन लगाया जायेगा हालांकि संभावना यह भी है कि कम्पनी इसमें मल्टीजेट इंजन का भी उपयोग कर सकती है। अगर इसमें 2.0 लीटर वाला ही इंजन लगाया जाता है तो इस इंजन से 140 HP का पावर जनरेट होगा। लॉन्चिंग की बात करें तो रेनीगेट को साल 2018 के अंत तक लॉन्च की जा सकती है। रेनीगेट को भी रजगांव स्थित जीप के प्लांट में ही असेम्बल किया जाएगा। यहीं से कम्पास को भी किया गया था।

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