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नई दिल्ली (एजेंसी)। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने और डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार कमजोर होती स्थिति से आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम में तेजी आएगी। पिछले एक महीने में देश में पेट्रोल-डीजल के दाम में कुछ कमी आई है। लेकिन, पिछले 6 दिन से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन, सोमवार 2 जुलाई को पेट्रोल 31 पैसे और डीजल 17 पैसे तक सस्ता हुआ है। 
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। फिर भी सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतें नहीं बढ़ा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक हफ्ते में कच्चे तेल की कीमतों में 3 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा हुआ है।
क्या है आज का भाव : पेट्रोल-डीजल में आज 6 दिन बाद कटौती की गई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 14 पैसे सस्ता हुआ है। वहीं, डीजल पर 10 पैसे की कटौती की गई है। दिल्ली में पेट्रोल 75.55 रुपए प्रति लीटर और डीजल 67.38 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है। वहीं, मुंबई में पेट्रोल पर 31 पैसे और डीजल पर 17 पैसे की कटौती की गई है। मुंबई में पेट्रोल 82.99 रुपए प्रति लीटर, डीजल 71.48 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
कोलकाता और चेन्नई में भी घटे दाम : कोलकाता में पेट्रोल पर 14 पैसे की कटौती की गई है। वहीं, डीजल पर 10 पैसे कम हुए हैं। यहां पेट्रोल 78.23 रुपए प्रति लीटर, जबकि डीजल 69.92 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है। चेन्नई में भी पेट्रोल की कीमतों में 15 पैसे और डीजल पर 10 पैसे की कटौती हुई है। यहां पेट्रोल 77.80 रुपए प्रति लीटर और डीजल 71.27 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। 
10 दिन में 6 डॉलर महंगा हुआ क्रूड : ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जाने से ट्रेडर्स को मार्केट में ऑयल सप्लाई में कमी आने का अंदेशा है। यही वजह है कि 21 जून से अभी तक क्रूड की कीमतें 6 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर 79।5 डॉलर पर पहुंच गई हैं। हालांकि, ओपेक देशों ने हाल ही में रोजाना 10 लाख बैरल ज्यादा तेल सप्लाई का ऐलान किया है, लेकिन इतने से तेल की मांग पूरी नहीं हो पाएगी। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम में बढ़ोतरी हो रही है।
क्यों महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल : पिछले कुछ दिनों में कच्चे तेल की मांग में तेजी से इजाफा हुआ है। सऊदी अरब और रूस ने सप्लाई पर प्रतिबंध लगाया है। वहीं, वेनेजुएला के आउटपुट में गिरावट के चलते इस साल तेल के दाम में तेजी बनी हुई है। उधर, भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। इससे आम आदमी को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ज्यादा पैसे चुकाने पड़े हैं। बीते कारोबारी हफ्ते में रुपया 69 के स्तर से नीचे पहुंच गया था। यह रुपये का अब तक का सबसे निचला स्तर है। रुपए में गिरावट से देश का इम्पोर्ट बिल बढऩे का अनुमान है। दरअसल, भारत अपनी जरूरत का करीब 83 पर्सेंट कच्चा तेल इंपोर्ट करता है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल के महंगा होने के आसार हैं।
पिछले 6 दिन में नहीं बढ़ी कीमतें : 26 जून के बाद से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कीमतों में स्थिरता से कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ता है। यह एक तरह का अंदेशा होता है कि जल्द ही कीमतों में उछाल देखने को मिलेगा। दिल्ली में पेट्रोल 75.55 रुपए प्रति लीटर और डीजल 67.38 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है। सरकारी तेल कंपनियां कच्चे तेल के दाम के आधार पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें तय करती हैं। साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल पर भी कीमतें तय होती हैं।
ईरान ने दी चेतावनी : ईरान ने ओपेक के सदस्य देशों से कहा है कि वह 10 लाख बैरल प्रतिदिन के अतिरिक्त तेल उत्पादन से आगे और तेल उत्पादन बढ़ाने का कोई भी एकतरफा फैसला करने से दूर रहें। इसे ईरान की ओर से सऊदी अरब को दी गई चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले दिनों कहा था कि सऊदी अरब अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने को सहमत हुआ है। ईरान की यह चेतावनी संयुक्त अरब अमीरात के ऊर्जा मंत्री को भेजे गए एक पत्र में दी गई है। यह पत्र ऐसे समय भेजा गया है जब ईरान के खिलाफ अमेरिका ने अपने मित्र देशों से कहा है कि वह ईरान से तेल खरीदना बंद करें।

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