Updated -

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चार जजों द्वारा की गई प्रेस कांफ्रेंस ने न सिर्फ देश को हिला दिया बल्कि मोदी सरकार में भी इसको लेकर हड़कंप मच गया। जजों के मीडिया के सामने आने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को तलब किया। आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब देश की शीर्ष अदालत के वरिष्ठ जज ऐसे मीडिया के सामने आए हैं और कोर्ट प्रशासन के कामकाज पर आरोप लगाया है। इन जजों ने न्यायपालिका में जारी भ्रष्टाचार पर अपनी बात रखी और देश के प्रति अपने फर्ज के लिए भी अपनी निष्ठा जाहिर की।

जस्ती चेलमेश्वर
प्रेस कॉन्फ्रेंस जस्टिस जस्ती चेलामेश्वर के घर में हुई, बाकि के तीनों जज इनके ही घर पर इकट्ठे हुए। आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में जन्मे जस्टिस चेलमेश्वर केरल और गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। वकालत उनको विरासत में मिली है। 1976 में उन्होंने आंध्र यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की। अक्तूबर, 2011 में वे सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे। चेलमेश्वर और रोहिंगटन फली नरीमन की 2 सदस्यीय बेंच ने उस विवादित कानून को खारिज किया जिसमें पुलिस के पास किसी के खिलाफ आपत्तिजनक मेल करने या इलेक्ट्रॉनिक मैसेज करने के आरोप में गिरफ्तार करने का अधिकार था। उनके इस फैसले की देशभर में जमकर तारीफ हुई और बोलने की आजादी को कायम रखा। जजों की नियुक्ति को लेकर नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइन्ट्मन्ट्स कमीशन (NJAC) का समर्थन भी इन्होंने किया था। इतना ही नहीं वे पहले से चली आ रही कोलेजियम व्यवस्था की आलोचना भी कर चुके हैं।

Searching Keywords:

Whats App

Comments

Leave a comment

Your email address will not be published.

Similar News