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नई दिल्ली: एक समय स्वयंभू बाबा आसाराम लाखों लोगों द्वारा पूजा जाता था और लोगों की इन्हीं भावनाओं का दोहन कर उसने अपना करोड़ों रुपए का भक्ति साम्राज्य खड़ा किया था लेकिन एक नाबालिग से बलात्कार का मामला सामने आने के बाद उसकी प्रतिष्ठा धूल में मिल गई और उसकी साम्राज्य ढहनी शुरू हो गई । अदालत ने उसे बलात्कार के इसी मामले में आज दोषी करार दिया।  अगर आकंड़ों की बात करें तो 1970 के दशक में साबरमती नदी के किनारे एक झोंपड़ी से शुरुआत करने से लेकर देश और दुनियाभर में 400 से अधिक आश्रम बनाने वाले आसाराम ने चार दशक में 10,000 करोड़ रुपए का साम्राज्य खड़ा कर लिया।  यह जानना काफी दिलचस्प है कि आखिर पुलिस के शिकंजे में आसाराम कैसे आया। आईपीएस अधिकारी अजय पाल लांबा ही वो पुलिस अधिकारी हैं, जिन्होंने बेहद सावधानीपूर्वक यौन उत्पीडऩ के आरोपी आसाराम को जेल के सींखचों के पीछे धकेला। यह काफी कठिन टास्क था, लेकिन अनुसंधान में आरोप साबित होने के बाद सटीक रणनीति बनाकर लांबा ने आसाराम को मध्यप्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया था। 

बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था आसाराम को गिरफ्तार करना
लांबा बताते हैं, 'हमें आसाराम का कुछ पता नहीं था। फिर भी पांच पुलिस अफसरों और 6 कमांडो की एक टीम को इंदौर स्थित आश्रम भेजा गया। लांबा कहते हैं चुनौतिया अनेक थी जिस तरह का आसाराम के देशभर में उसके लाखों अंधभक्त थे। उस स्थिति में दूसरे प्रदेश में जाकर उसे गिरफ्तार करना राजस्थान पुलिस के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन इस केस में नाबालिग पीड़िता का बयान हमारा सबसे बड़ा हथियार था। पीड़िता के बयान को साबित करने वाले सभी तथ्यों व सबूतों को सतर्कता के साथ जुटाया गया। बाद में उसे विधिवत रूप से कानूनी दायरे में पिरोया गया। यही आसाराम की गिरफ्तारी का आधार और पुलिस की सबसे बड़ी सफलता थी। उन्हीं के आधार पर पुलिस आसाराम को जेल के पीछे धकेल पाई। उन्होंने बताया कि आसाराम और उनके अनुयायियों ने पुलिसवालों को लालच देने की कोशिश की। लांबा बताते हैं कि उन्हें बड़ी रकम की पेशकश से लेकर जान की धमकी दी गई। वह कहते हैं कि इस सबके बीच लोगों के विश्वास ने उन्हें आगे बढऩे को प्रेरित किया। लांबा बताते हैं कि उन्हें कम से कम 1,600 ऐसे खत मिले जिनमें लोगों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी।

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