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आज के समय में जहां महिलाएं हर क्षेत्र में आगे है। वहीं आज भी महिलाओं को कुछ काम करने के राइट्स नहीं है। शास्त्रों के अनुसार महिलाएं कुछ काम नहीं कर सकती, जिनमें से अंतिम संस्कार न करना भी एक है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार महिलाओं को अंतिम संस्कार करने का राइट्स नहीं है। महिलाओं को इसका हक देने के कारण सिर्फ तथ्यों पर ही आधारित हैं। सदियों से इन परंपरा का पालन कर रहें लोग आज के समय में भी महिलाओं को अंतिम संस्कार करने के राइट्स नहीं देते। आइए जानते है किन कारण से महिलाओं का अंतिम संस्कार करना वर्जित माना जाता है।
 

महिलाओं के श्मशान न जाने की वजहें
1. रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार से पहले परिवार के सदस्यों को अपना मुंडन करवाना पड़ता है। इसलिए महिलाओं को इसका नहीं दिया गया।

2. कहते है कि श्मशान घाट पर रोने से मरने वाने की आत्मा को शांति नहीं महिलाओं। महिलाएं का दिल कोमल होने के कारण वो रो पड़ती है। इसलिए उन्हें वहां जाने नहीं दिया जाता।

3. श्मशान घाट में चिता को जलते देख महिलाएं डर ना जाएं, यही सोचकर उन्हें श्मशान घाट में जाने नहीं दिया जाता।

4. मान्यताओं के अनुसार संस्कार से लोटने के बाद पुरुषों के पैर धुलवाने और स्नान करवाने के लिए महिलाओं का घर पर रहना बहुत जरूरी होता है। जिसके लिए उन्हें घर पर ही छोड़ कर जाया जाता है।

5. ऐसा माना जाता है कि श्मशान में हर समय आत्माओं का वास होता है, जिनसे महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा होता है। इसलिए उन्हें हमेशा श्मशान से दूर रहने को कहा जाता है।

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